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सुरेश पचौरी के बीजेपी में शामिल होते ही एमपी कांग्रेस में 'दिग्विजय' बाद हावी
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि कांग्रेस नेता आधारित पार्टी है। जहां नेताओं के जयकारे लगाए जाते हैं न कि पार्टी के समर्थन में जयकारे लगाए जाते हैं। पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी (suresh pachouri) ने अपने कई समर्थकों के साथ बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। सुरेश पचौरी के कांग्रेस छोड़ने पर पार्टी के नेताओं को पछतावा तो दूर की बात है बल्कि कांग्रेस पार्टी में जश्न का माहौल है। क्योंकि सुरेश पचौरी के पार्टी छोड़ने के बाद कांग्रेस में मैदान खाली हो गया। एक के बाद एक कांटे कांग्रेस के खुद निकलते चले गए ऐसे में मैदान खाली देख कांग्रेस पार्टी में दिग्विजय सिंह (digvijaya singh) के समर्थकों ने अपना आधिपत्य स्थापित करना शुरु कर दिया। इन दिनों एमपी कांग्रेस में पूर्व सीएम दिग्विजय खेमे का बोलबाला देखने को मिल रहा है। ऐसे में जो दिग्विजय समर्थक नहीं हैं अथवा उनके खेमे के नहीं हैं वो अपनी ही पार्टी में बेगाना सा महसूस करने लगे हैं। पार्टी में अब भी ऐसे कई प्रतिभाशाली और मेहनती वर्कर हैं जो पार्टी के लिए काम तो करना चाहते हैं लेकिन दिग्विजय वाद हावी होने के कारण वो पार्टी में काम नहीं कर पा रहे हैं। कार्यालय में पार्टी के कार्यकर्ता आते हैं तो उन्हे बैठने के लिए स्थान भी नहीं मिलता जिसके कारण वो पार्टी कार्यालय के बाहर चाय की दुकान में भटकते हुए अक्शर देखे जाते हैं। जीतू पटवारी को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया लेकिन वो अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहे हैं। जिस दिन से जीतू पटवारी को पार्टी की कमान मिली है उस दिन से कांग्रेस में लगातार पलायन का दौर जारी है। एक के बाद एक बड़े नेता कांग्रेस का हाथ छोड़ कर फूल का दामन थामते चले जा रहे हैं। कुल मिला कर कांग्रेस पार्टी इस समय अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है। पार्टी की स्थिति सुधरना तो दूर लगातार नए-नए खेमे पनपते चले जा रहे हैं और जो नेता खेमेबाजी करने में सक्षम नहीं हैं वो दिग्विजय सिंह के सामने माथा टेकने के लिए मजबूर हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरु हो चुकी है और कांग्रेस कार्यालय में किसी प्रकार की चुनावी रौनक देखने को अब तक नहीं मिल रही है। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि टीवी डिवेट में बैठने के लिए कांग्रेस में प्रवक्ता तक उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। ऐसे में बीजेपी प्रवक्ताओं को भी डिबेट करने में मजा नहीं आ रहा है।

पूरी कांग्रेस खाली हुई जा रही है और राहुल गांधी चने के झाड़ में बैठ कर गिनती कर रहे हैं
कांग्रेस मुक्त अभियान के तहत भारतीय जनता पार्टी में लगातार ज्वाइनिंग का कारवां बढ़ता चला जा रहा है। बुधवार को मुरैना जिले के करीब 500 और छिंदवाड़ा के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की सदस्यता ले ली (bjp membership)। इन सभी कार्यकर्ताओं को ज्वाइनिंग कमेंटी (bjp joining committee) के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने पार्टी का अंग वस्त्र पहना कर बीजेपी की सदस्यता दिलाई है। विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक के सफर में कांग्रेस के 15 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं बीजेपी का दामन थाम लिया है। मजे की बात ये है कि रोजाना सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता बीजेपी की सदस्यता ले रहे हैं यहां तक की कांग्रेस के पास इस वक्त मजबूत उम्मीदवार तक नहीं हैं इसके वाबजूद कांग्रेस के नेता पार्टी में चल रहे पलायन को रोकने का कोई उपाय नहीं कर रहे हैं। राहुल गांधी (rahul gandhi) भारत न्याय यात्र निकाल कर चने के झाड़ में चढ़े बैठे हैं उन्हे लग रहा है कि जनता कांग्रेस को जिताएगी और भारतीय जनता पार्टी है कि कांग्रेस के हर कार्यकर्ता को भाजपा की सदस्यता दिलाती चली जा रही है।

डॉ. नरोत्तम मिश्रा से मिले कांग्रेस नेता गोविंद सिंह,भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज
पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह (govind singh) पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) से मिलने उनके निवास पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने करीब बीस मिनट तक बंद कमरे में बात की जिसके बाद डॉ. गोविंद सिंह की भाजपा में शामिल होने की अटकलें लगाई जाने लगी हैं। हांलाकि पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने इस मुलाकात को सौजन्य मुलाकात बताते हुए भाजपा में शामिल होने की अटकलों को विराम लगाने का प्रयास किया है। लेकिन जिस वक्त कांग्रेस में भगदड़ मची हुई है उस वक्त डॉ. गोविंद सिंह का पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा से मिलना कई तरह के राजनीतिक कयासों को हवा दे रहा है। डॉ. गोविंद सिंह ने ये भी कहा कि जो नेता कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में जा रहे हैं उन्हे उनके कद के हिसाब से पार्टी में सम्मान नहीं मिल पाया जिसके कारण उन्होने भाजपा की सदस्यता ली है। लोकसभा चुनाव लड़ने के विषय पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुरैना लोकसभा सीट से वो चुनाव लड़ना चाहते थे और पार्टी भी तैयार थी लेकिन आखिरी वक्त पर उन्होने अपना मन बदल लिया और अब वो लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। साथ ही डॉ. गोविंद सिंह ने भाजपा की ज्वाइनिंग को लेकर कहा है कि अभी वो भाजपा ज्वाइन नहीं कर रहे हैं लेकिन जब भी भाजपा ज्वाइन करेंगे मीडिया को सबसे पहले बुला कर जरुर बताएंगे। गौरतलब है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा भाजपा ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक हैं और जिस प्रकार से डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने अपने काम को अंजाम दिया है उससे पूरी कांग्रेस में उथल पुथल सी स्थिति बन गई है। और ऐसी स्थिति में दोनों बड़े नेताओं की मुलाकात ने कांग्रेसी खेमे में हलचल बढ़ा दी है।

सुरेश पचौरी की चार साल पहले भाजपा ज्वाइन करने की लिखी गई पटकथा,बहुत देर कर दी सनम आते-आते
राजधानी की नगर निगम में एल्डरमैन से राजनीति की शुरुआत करने वाले सुरेश पचौरी (suresh pachouri) केंद्र में दो बार राज्य मंत्री और 24 साल तक राज्यसभा के सदस्य रहे हैं। सुरेश पचौरी गांधी नेहरू परिवार से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष के सलाहकार रहे अहमद पटेल के मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा करीबी रहे हैं। उन्होंने शनिवार सुबह कांग्रेस को बाय-बाय कह दिया। हालांकि पचौरी और इंदौर के पूर्व विधायक संजय शुक्ला मार्च 2020 में ऑपरेशन लोटस के वक्त भी कुछ शर्तों के कारण भाजपा में जाते-जाते रह गए थे। उनके भाजपा में जाने की पटकथा 4 साल पहले लिखी गई थी। बात मार्च 2020 की है।तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ से अनबन होने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्य प्रदेश के 22 कांग्रेस विधायकों ने कांग्रेस छोड़ दी थी। उस वक्त कांग्रेस के 22 विधायकों को पहले हरियाणा के मानेसर और उसके बाद भाजपा शासित कर्नाटक के बेंगलुरु ले जाया गया था। कांग्रेस सरकार के दौरान कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जोड़ी से सिर्फ ज्योतिरादित्य सिंधिया ही नहीं पचोरी भी परेशान थे और वह कांग्रेस में असहज महसूस कर रहे थे। सिंधिया की बगावत के बाद प्रदेश की कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई थी और कमलनाथ ने इस्तीफा दे दिया था। भाजपा में मौजूद Mukhbir बताते हैं कि उस वक्त सिंधिया और पचौरी की आपस में बात नहीं हो पाई थी। कांग्रेस के महाकौशल के एक नेता के जरिए सुरेश पचौरी की भाजपा में बात हुई लेकिन महाकौशल के नेता वही पद चाहते थे जिस पद पर वह कांग्रेस सरकार में थे। उस वक्त सुरेश पचौरी खेमे की तरफ से उन्हें राज्यसभा में भेजने की भी शर्त रखी गई थी। तब बात नहीं बन पाई और सुरेश पचौरी कांग्रेस में ही रह गए।

कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका,सुरेश पचौरी सहित आधा दर्जन नेता बीजेपी में हुए शामिल
मप्र में राहुल गांधी के जाते ही कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। कांग्रेस नेताओं में चार बार राज्यसभा सांसद रहे और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी (suresh pachouri) ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। सुरेश पचौरी के साथ, विशाल पटेल,गजेंद्र सिंह राजू खेड़ी,संजय शुक्ला,अर्जुन पलिया,आलोक चंसोरिया,कैलाश मिश्रा,योगेश शर्मा,अतुल शर्मा,सुभाष यादव,दिनेश ढिमोले ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इन सभी नेताओं को जॉइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) भाजपा में लेकर आए हैं। ज्वानिंग के दौरान प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा,सीएम मोहन यादव,पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान,मंत्री कैलाश विजय वर्गीय मौजूद रहे। भाजपा की सदस्यता लेने के बाद सुरेश पचौरी ने कहा कि जिस प्रकार से भगवान राम के स्थापना दिवस के निमंत्रण को कांग्रेस ने अस्वीकार कर दिया था उसके बाद से ही वो आहत चल रहे थे। साथ में सुरेश पचौरी ने ये भी कहा कि पहले वाली कांग्रेस अब नहीं रही। और यही कारण है कि उन्होने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। सुरेश पचौरी ने कहा कि यूं ही कोई वेबफा नहीं होता। कुछ तो कारण रहे होंगे वेवफा होने के।

भक्ति,मुदित और हर्षवर्धन के नेत्रृत्व में भाजपा ने बनाई पांच सदस्यीय डिजिटल टीम
मिशन 2024 फतह करने में जुटी भारतीय जनता पार्टी (mp bjp) ने पांच सदस्यीय डिजिटल टीम का गठन कर दिया है। भाजपा की इस डिजिटल टीम का नेत्रृत्व युवा नेत्री भक्ति शर्मा (bhakti sharm), मुदित शेजवार (mudit shejwar) और हर्षवर्धन जोशी (harshavardhan joshi) करेंगे। इनके सहयोग के लिए दो अन्य सदस्य भी दिए गए हैं। यह डिजिटल टीम डिजिटल ऐड के बारे में डिकसन कर पार्टी नेत्रृत्व को देगी और जब वो फायनल होगा तो फिर उसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म में प्रसारित किया जाएगा। गौरतलब है कि भक्ति और मुदित शेजवार को लेकर लंबे समय से भाजपा में कोई जिम्मेदारी देने की योजना चल रही थी लेकिन पार्टी नेत्रृत्व तय नहीं कर पा रहा था कि इन युवा नेताओं को उनकी क्षमता के हिसाब से कौन सी जिम्मेदारी दी जाए। आखिरकार चुनाव करीब आया तो पार्टी नेत्रृत्व ने इन युवा नेताओं को गंभीर जिम्मेदारी देकर यह बता दिया है कि पार्टी में चेहरों के हिसाब से उन्हे कार्य वितरित किए जाते हैं। भाजपा की यह युवा डिजिटल टीम सोशल मीडिया में प्रसारित होने वाली सभी प्रकार की सामग्री पर नजर रखने के अलावा कांग्रेस के कार्यकर्ता अथवा आईटी सेल के लोग किस प्रकार मोदी विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं उस पर भी नजर रखेंगे। साथ में यह प्लान भी तैयार करेंगे कि कांग्रेस के आरोपों का काउंटर कैसे करना है। भक्ति और मुदित के नेत्रृत्व में बनाई गई टीम को बारीकी से कांग्रेस के भ्रामक प्रचार पर नजर रखने के लिए भी कहा गया है।

बीजेपी में पांच सीटों पर अब तक नहीं हुआ फैसला,चार में महिला उम्मीदवार की उम्मीद,कांग्रेस की बैठक आज
भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए एमपी की 29 लोकसभा सीटों में 24 की घोषणा कर दी है (bjp lok sabha candidate list) । अब पांच सीटों पर संशय की स्थिति बन गई है। केन्द्रीय हाई कमान का मानना है कि कमजोर सीटों पर महिला उम्मीदवारों को मौका दिया जाना चाहिए। माना जा रहा है कि इसी लिए भाजपा में बची हुई पांच सीटों के लिए फैसला नहीं हो पार रहा है। Mukhabirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार छिंदवाड़ा छोड़ कर बांकी की चार सीटों पर बीजेपी महिला उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतार सकती है (mo bjp)। अभी तक 24 सीटों में चार महिला उम्मीदवारों को भाजपा ने मौका दिया है। पार्टी के केन्द्रीय नेत्रृत्व का मानना है कि महिलाओं की भागीदारी और बढ़नी चाहिए इसलिए पांच में चार सीटें महिलाओं के खाते में जाने की संभावना बढ़ गई है। उधर कांग्रेस की बात करें तो अभी तक एक भी प्रत्याशी की घोषणा कांग्रेस पार्टी नहीं कर पाई है। आज दिल्ली में कांग्रेस ने केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक आयोजित की है। जिसमें स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा प्रस्तावित नामों पर विचार कर उसे अंतिम रुप दिया जाएगा। बैठक में प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी जितेन्द्र सिंह, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी,विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पूर्व मंत्री ओमकार सिंह मरकाम भाग लेंगे। गौरतलब है कि कांग्रेस ने प्रत्याशी चयन के लिए सभी 29 लोकसभा क्षेत्रों में रायशुमारी कराई थी। समन्वयकों ने जिला,ब्लाक इकाइयों के पदाधिकारी,विधायक,विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी,पार्टी के सभी संगठनों के पदाधिकारियों से संभावित दावेदारों से जानकारी ली है।

विधायकी और प्रदेश महामंत्री पद के बीच संतुलन नहीं बना पा रहे भगवानदास सबनानी
भारतीय जनता पार्टी के निष्ठावान पदाधिकारी कहे जाने वाले भाजपा नेता भगवानदास सबनानी (bhagwandas sabnani) अब भोपाल की दक्षिण-पश्चिम विधानसभा से विधायक बन गए हैं। यहां तो ठीक है लेकिन उनके पास पार्टी का प्रदेश महामंत्री का पद पहले से है जिसको वो पूरी निष्ठा से निभा रहे थे। लेकिन पार्टी ने उन्हे विधायक बनने का भी मौका दिया जिसमें वो फतह हासिल करने में कामयाब रहे। लेकिन अब भगवानदास सबनानी प्रदेश महामंत्री और विधायक पद के बीच संतुलन बनाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। दक्षिण-पश्चिम का विधायक होने के नाते भगवानदास सबनानी के पास रोजाना सैकड़ों कार्यकर्ता अपना काम लेकर आते हैं लेकिन भगवानदास सबनानी पहले ही पार्टी के कामों में इतना ब्यस्त रहते हैं कि वो कार्यकर्ताओं को समय नहीं दे पाते हैं जिसके कारण दक्षिण-पश्चिम विधानसभा के पार्टी कार्यकर्ता और आम नागरिक खुद को ठगा सा महसूस करने लगे हैं। हमेशा शांत और मुस्कुराते रहने वाले भगवानदास सबनानी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के काफी करीबी माने जाते हैं जिसके कारण कार्यकर्ता उनसे कुछ कहने का साहस भी नहीं जुटा पाते हैं। भगवानदास सबनानी इन दिनों चिड़चिड़े भी होने लगे हैं। पार्टी का काम और फिर विधायकी का काम दोनों एक ब्यक्ति पर आने के कारण ब्यस्तताएं बढ़ गई हैं। और यही उनके चिड़चिड़े होने का कारण भी बताया जा रहा है। इस बात में कोई सक नहीं कि भगवानदास सबनानी एक मेहनती वर्कर हैं लेकिन दूसरा पहलू ये भी है कि अब वो सिर्फ प्रदेश महामंत्री नहीं बल्कि दक्षिण-पश्चिम विधानसभा के जनप्रतिनिधि भी हैं और उस क्षेत्र की जनता के साथ कार्यकर्ताओं की कुछ जरुरतें होती हैं जिनको पूरा करना जनप्रतिनिधि का ही काम होता है। कई कार्यकर्ता तो बीजेपी कार्यालय में सबनानी से मिलने के दिन भर खड़े रहते हैं लेकिन उनकी मुलाकात सबनानी से नहीं हो पाती। और यही करण है कि भगवानदास सबनानी के दोनों पदों से संतुलन नहीं बना पाने के कारण स्थानीय जनता और कार्यकर्ताओं में निराशा और नाराजगी का माहौल बनने लगा है।

अबकी बार 'गणेश विसर्जन' पर ध्यान,सतना रीवा की जनता भाजपा के 'थोपे' उम्मीदवारों से नाराज
लोकसभा चुनाव को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने देश के 16 राज्यों की 195वे लोकसभा सीटों के प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। इसमें एमपी की 29 सीटों के 24 उम्मीदवार भी शामिल हैं। भाजपा ने इस बार कोई भी चौकाने वाला निर्णय नहीं लिया जो जनता के गले से नहीं उतर रहा है। विंध्य की बात करें तो सतना लोकसभा सीट से सांसद गणेश सिंह (ganesh singh) पर भाजपा ने एक बार फिर भरोसा कर स्थानीय जनता को नाराज कर दिया है। सतना एक ब्राम्हण बाहुल सीट मानी जाती है और गणेश सिंह कुर्मी समाज से आते हैं। और गणेश सिंह एक कट्टर जातिवादी नेता माने जाते हैं जिसके चलते अन्य वर्ग के लोग उनसे नाराज रहते हैं। दो बार सतना की जनता ने मोदी के नाम पर सांसद बना दिया लेकिन इस बार सतना की जनता गणेश सिंह को फिर सांसद नहीं बनाना चाहती है। जनता मोदी को तो चाहती है लेकिन गणेश सिंह को नहीं चाहती जिसका उदाहरण विधानसभा चुनाव में देखने को मिल चुका है। सतना की जनता गणेश सिंह को विधानसभा चुनाव में हरा चुकी है। कुछ ऐसा ही हाल रीवा का भी देखने को मिल रहा है जहां भाजपा ने दो बार के सांसद जनार्दन मिश्रा को तीसरी बार चुनाव मैदान में उतारा है। जनार्दन मिश्रा को राजेन्द्र शुक्ला का डमी कैंडीडेट के रुप में माना जाता है। जनार्दन मिश्रा एक सरल और सौम्य सांसद की छवि रखते हैं लेकिन उनकी समस्या ये है कि वो क्षेत्र में सक्रिय नहीं रहते हैं। दस साल तक सांसद रहने के बाद भी जनार्दन मिश्रा आज तक पूरे रीवा का भ्रमण नहीं कर पाए हैं। रीवा की जनता बहुत जागरुक मानी जाती है। थोपे गए नेताओं को रीवा की जनता ज्यादा बर्दास्त नहीं करती है। लिहाजा इस बार के लोकसभा चुनाव में रीवा और सतना की लोकसभा सीटें भाजपा के लाए कठिनाई पैदा कर सकती हैं। देखना दिलचश्प यही होगा कि जनता की नाराजगी जीतती है अथवा मोदी की गारंटी के आगे जनता नतमस्तक होती है।

बीजेपी का अभियान 'मोदी का परिवार' प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने X पर बदली प्रोफाइल
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने एक्स पर अपनी प्रोफाइल बदल दी है। इसके साथ ही बीजेपी ने 'मोदी का परिवार' नाम को अभियान भी बना लिया है (modi ka parivar)। सबसे पहले प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा अपनी प्रोफाइल में लिखा है 'मोदी का परिवार' गौरतलब है कि पीएम मोदी ने पूरे देश की जनता को अपना परिवार बताया था। जिसके बाद राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव ने मोदी के परिवार पर निशाना साधा था। लालू के तंज कसने के बाद ही प्रदेश अध्यक्ष ने अपनी प्रोफाइल को बदला है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को युवाओं का प्रेरणाश्रोत माना जाता हैं और जिस प्रकार से उन्होने अपनी प्रोफाइल बदली है उससे यह साफ है कि अब बीजेपी के अन्य नेता भी अपनी प्रोफाइल बदलेंगे। मुख्यमंत्री मोहन यादव और अन्य मंत्रियों ने भी प्रदेश अध्यक्ष के बाद अपनी प्रोफाइल को बदल दिया है। माना जा रहा है कि अब बीजेपी का हर कार्यकर्ता अपनी प्रोफाइल बदलने वाला है।

टिकट वितरण में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का रहा जलवा,जो नाम दिये वो हुए कुबूल
लोकसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने एमपी की 29 सीटों में 24 सीटों की घोषणा कर दी है (mp lok sabha candidate list)। हालाकि इस सूची की बात करें तो भाजपा ने एक बार फिर चौका दिया है। जिस प्रकार से लोगों ने सूची में बदलाव की उम्मीद की थी वैसा कुछ भी देखने को नहीं मिला। जिन 24 सीटों की घोषणा हुई है उसमें सिर्फ छह सांसदों के टिकट काटे गए हैं। मतलब साफ है कि भाजपा ने सुरक्षात्मक रवैया अपनाते हुए किसी प्रकार का जोखिम नहीं उठाया है। पार्टी के कार्यकर्ताओं और प्रदेश की आम जनता को उम्मीद थी कि भाजपा इस चुनाव में काफी कुछ चौकाएगी। लेकिन सभी की उम्मीदों पर भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने पानी फेर दिया। जिन सांसदों के टिकट कटने का लोग इंतजार कर रहे थे उन सांसदों का टिकट नहीं कटा। हांलाकि एमपी बीजेपी (mp bjp) इस सूची को सर्वश्रेष्ठ बताने में जुट गई है। बताया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने जिस प्रकार से सीटों का आंकलन किया और अपनी अंतिम सहमति दी उसे केन्द्रीय नेतृत्व ने सहर्स स्वीकार किया। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भोपाल से जरुर उम्मीद की जा रही थी लेकिन उन्हे खजुराहो से ही रिपीट किया गया है। एक बड़ा नाम है जिसकी सभी उम्मीद लगा रहे थे कि उनको भाजपा लोकसभा चुनाव में मौका देगी डॉ. नरोत्तम मिश्रा लेकिन अभी तक घोषित 24 नामों की सूची में डॉ. नरोत्तम मिश्रा के नाम पर भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने किसी प्रकार से दिलचश्पी नहीं दिखाई है। अभी पांच सीटों पर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा होनी बांकी है अब सभी की नजरें पांच सीटों पर टिकी हैं कि किसका भाग्य उन सीटों पर पलटने वाला है।

बीजेपी ने पहली सूची में किये 195 नाम घोषित,विदिशा से मैदान में होंगे शिवराज
मप्र की 29 में से 24 लोकसभा सीटों पर नामों की घोषणा मुरैना - शिवमंगल सिंह तोमर भिंड - संध्या राय ग्वालियर - भारत सिंह कुशवाहा गुना - ज्योतिरादित्य सिंधिया सागर - लता वानखेड़े टीकमगढ़ - वीरेंद्र खटीक दमोह राहुल लोधी खजुराहो - वीडी शर्मा सतना - गणेश सिंह रीवा - जनार्दन मिश्रा सीधी - डॉक्टर राजेश मिश्रा शहडोल - हिमाद्री सिंह जबलपुर - आशीष दुबे मंडला - फगन सिंह कुलस्ते होशंगाबाद - दर्शन सिंह चौधरी विदिशा - शिवराज सिंह चौहान भोपाल - आलोक शर्मा राजगढ़ - रोडमल नागर देवास - महेंद्र सिंह सोलंकी मंदसौर - सुधीर गुप्ता रतलाम - अनीता नगर सिंह चौहान खरगोन - गजेंद्र पटेल खंडवा - ज्ञानेश्वर पाटिल बैतूल - दुर्गादास उईके