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खंडेलवाल ने पटवारी के 'खसरों' पर बार-बार चलाई कलम और हर बार किया चारों खाने चित्त पर्दे के पीछे से लोकसभा और पर्दे के सामने से राज्यसभा चुनाव में दी सिकस्त

लोकसभा चुनाव प्रबंधन समिति के सदस्य रहे कार्यकर्ताओं को अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से बढ़ी उम्मीद अब निराशा में हो रही तब्दील

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की सदन में गूंजी आवाज,सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण 2.0 अभियान को लेकर लोकसभा में पूछा सवाल

पांच झंडे और 14 स्टीकर वाले विधायक जी को कराना है नगर निगम से गाड़ी की सर्विसिंग

भोपाल लोकसभा सीट पर तीन चुनाव से लगातार बढ़ा भाजपा का वोटबैंक,कांग्रेस का घटा
मोदी की गारंटी हो या फिर भाजपा की सरकार द्वारा किए गए काम हों लेकिन भोपाल की लोकसभा सीट (bhopal lok sabha) पर भारतीय जनता पार्टी का वोटबैंक लगातार बढ़ा है। पिछले तीन चुनाव की बात करें तो भाजपा ने हर बार एअ नए कैंडीडेट को मौका दिया है और हर बार भाजपा के उम्मीदवार भोपाल में रिकार्ड मतों से जीत दर्ज करने में कामयाब हुए हैं। वहीं प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस का वोटबैंक लगातार खिसकता चला गया है। तीसरे मोर्चों में शामिल बसपा,सपा और जदयू के वोटिंग शेयर भी लगातार कम हो रहे हैं। पिछले तीन चुनावों पर नजर डालें तो इन चुनावों में प्रदेश के मतदाताओं का भरोसा भी भारतीय जनता पार्टी पर बढ़ा है। वर्ष 2009 के चुनाव में भाजपा को कुल मतदाताओं में से 43.45 प्रतिशत यानि 84 लाख 65 हजार 532 मतदाताओं ने भाजपा को वोट दिया। इसके अगले साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ कर 54.02 प्रतिशत हो गया। और एक करोड़ 60 लाख मतदाताओं ने भाजपा उम्मीदवारों को जिता कर संसद भेजा। इसके बाद अगले पांच साल में भाजपा की रीति-नीति ने मतदाताओं को फिर प्रभावित किया और 2019 में भाजपा वोटिंग शेयर बढ़ कर 58 प्रतिशत हो गया। कुल दो करोड़ 14 लाख 6 हजार 887 मतदाताओं ने भाजपा उम्मीदवारों को जिताने में सार्थक भूमिका का निर्वहन किया। इस मामले में बीजेपी प्रदेश मीडिया विभाग के प्रभारी आशीष अग्रवाल का कहना है कि भाजपा की सेवा और सुशासन की नीतियों ने भाजपा के प्रति मतदाताओं का रुझान बढ़ाया है। जनता अब मेनिफेस्टो को मानने लगी है। पिछले तीन चुनाव में जिस तरह से भाजपा को बढ़त मिली है यही वो कारण हैं कि लगातार जनता का रुझान भाजपा की तरफ हो रहा है।

विंध्य में 'नड्डा' बजाएंगे बीजेपी का डंका,12 अप्रैल को सीधी का करेंगे दौरा
विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने लगातार विंध्य क्षेत्र की कमान अपने हाथ में थाम रखी है। यही कारण है कि विंध्य में बीजेपी काफी कमजोर लग रही थी तो केन्द्रीय नेत्रृत्व पर विंध्य की जनता ने विश्वास दिखाया और 30 में 25 सीटें बीजेपी की झोली में डाल दी। इस बात में कोई शक नहीं कि राजनीतिक जानकारों के लिए विंध्य हमेशा अबूझ पहेली रहा है। इतिहास गवाह है विंध्य ने हमेशा चौकाने वाले नतीजे दिए हैं और यही कारण है कि बीजेपी का केन्द्रीय नेत्रृत्व लगातार विंध्य में नजरें गड़ाए बैठा है। अब लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (jp nadda) 12 अप्रैल को पहले सीधी में चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे फिर रीवा का दौरा करेंगे। विंध्य में रीवा की बात करें तो यहां पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है ठीक इसी प्रकार सतना में भी त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। वहीं सीधी की बात करें तो यहां पर बीजेपी उम्मीदवार राजेश मिश्रा से ज्यादा मजबूत उम्मीदवार कमलेश्वर पटेल दिख रहे हैं जिसके चलते बीजेपी के केन्द्रीय नेत्रृत्व को विंध्य में आगे आना पड़ रहा है। विंध्य में दो चरणों में चुनाव होने वाला है। सीधी और शहडोल में 19 अप्रैल को वोटिंग होगी तो वहीं सतना और रीवा में 26 अप्रैल को वोटिंग होनी है।

पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल की हार तय,बीजेपी ने बूथ स्तर पर कसा सिकंजा
सीधी लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार कमलेश्वर पटेल (kamleshwar patel) की हार लगभग तय हो चुकी है। अभी तक कमलेश्वर पटेल के सघन जनसंपर्क कभियान को देख कर लोग कयास लगा रहे थे कि कांग्रेस उम्मीदवार सीधी से जीत दर्ज कर सकते हैं लेकिन भाजपा की रणनीति जिस प्रकार की है उसके आगे कमलेश्वर पटेल बौने साबित होने लगे हैं। ऐसा भी माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने कमलेश्वर पटेल को अभी तक मौका दिया था जिससे उनकी क्षमता का बीजेपी के नेता पता लगा सकें। और अब मतदान को महज 18 दिन बचे हैं ऐसी स्थिति में भारतीय जनता पार्टी ने अपने पासे फेंकने शुरु कर दिए हैं। भाजपा का संगठन शक्ति केन्द्र,मंडल और बूथ स्तर से लेकर पन्ना और अर्ध पन्ना प्रभारियों तक फैला है। जिसमें भाजपा ने कसावट लाना शुरु कर दिया है। भाजपा की तरफ से स्टार प्रचारकों को भी प्रचार के लिए जल्द भेजा जाने वाला है। जिसकी शुरुआत राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शहडोल से कर दी है। अब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की नजर सीधी,सतना और रीवा में है। क्योंकि भाजपा के लिए सतना और रीवा की सीट भी इस बार बेहद कठिन मानी जा रही है यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी का केन्द्रीय नेत्रृत्व खुद विंध्य में फोकस कर रहा है। ठीक इसी प्रकार से भाजपा के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने विधानसभा चुनाव में भी कसावट करने का काम किया था जिसका परिणाम भाजपा के पक्ष में रहा और अब एक बार फिर विंध्य में भाजपा के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने मोर्चा थाम लिया है। मतलब साफ है कि अब भारतीय जनता पार्टी का पूरा फोकस विंध्य में होने वाला है। विंध्य की दो सीट सीधी और शहडोल में प्रथम चरण 19 अप्रैल को वोटिंग होने वाली है तो वहीं 26 अप्रैल यानि दूसरे चरण में सतना और रीवा में वोटिंग होनी है।

नामांकन से पहले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने अपनी मां से लिया आशीर्वाद
रविवार को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ग्वालियर दौरे पर पहुंचे जहां उन्होने अपनी मां से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। गौरतलब है कि हिंदू धर्म में मां को ईश्वर का दर्जा दिया गया है। और बेटे के लिए मां के दिल से निकली हर दुआ अपना काम भी करती है। तीन अप्रैल को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा खजुराहो लोकसभा सीट (khajuraho constituency) से अपना नामांकन भर रहे हैं इस लिए वो अपनी मां का आशीर्वाद लेने के लिए घर पहुंचे। लेकिन इस दौरान जिस प्रकार से एक मां और बेटे का मिलाप देखने को मिला वो भाव विभोर करने लायक था। इंसान कितना भी बड़ा हो जाए मां की नजर में वो हमेशा ही छोटा रहता है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की मां काफी देर तक उनको दुलारती रहीं फिर माथे पर तिरक लगा कर उन्हे चुनाव में जीत का आशीर्वाद दिया।

छिंदवाड़ा-राजगढ़ का दुर्ग जीतने में जुटी बीजेपी,रीवा-सतना में BSP कर रही सेंधमारी
मिशन 2024 फतह करने में जुटी भारतीय जनता पार्टी ने अपना सारा फोकस छिंदवाड़ा (chhindwara) और राजगढ़ (rajgarh)में कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस बार के लोकसभा चुनाव (lok sabha ekections) में प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटें जीतने का संकल्प लिया है। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी का हर छोटा बड़ा नेता पहले छिंदवाड़ा फिर राजगढ़ की बात करता नजर आ रहा है। भाजपा के नेताओं का मानना है कि छिंदवाड़ा को जीत लिया तो प्रदेश की अन्य 28 सीटें मोदी और उनकी गारंटी के बल पर ही जीत जाएंगे। जबकि हकीकत इससे कोसों दूर है। जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी छिंदवाड़ा और राजगढ़ को जीतने के लिए ब्यूह रचना करने में जुटी है उससे यह स्पष्ट है कि भाजपा नेताओं ने खुद को दो संसदीय क्षेत्रों में ही सीमित कर लिया है। भाजपा ने जिस प्रकार रणनीति अपनाई है उससे एक कहावत याद आती है। 'आधी छोड़ पूरी को धावै-पूरी मिलै न आधी पावै' मतलब साफ है कि भाजपा ने छिंदवाड़ा और राजगढ़ जीतने की रणनीति तो बना ली लेकिन सतना,रीवा और सीधी बीजेपी के हाथ से फिसलती नजर आ रही है। भाजपा ने रीवा और सतना में अपने थके हुए प्रत्याशियों को वहां की स्थानीय जनता के ऊपर थोपने का काम किया है। सतना से चार बार के सांसद गणेश सिंह को पांचवीं बार मौका दिया है तो वहीं रीवा से दो बार के सांसद जनार्दन मिश्रा को तीसरी बार चुनाव मैदान में उतारा है जो निस्क्रिय नेता माने जाते हैं। सतना में गणेश सिंह के लिए कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा चुनौती दे ही रहे हैं लेकिन बीएसपी ने नारायण त्रिपाठी को चुनाव में उतार कर मोदी की गारंटी को संशय में डाल दिया है। ठीक उसी प्रकार रीवा में भाजपा ने जनार्दन मिश्रा और कांग्रेस ने नीलम मिश्रा को चुनाव मैदान में उतारा है। दोनों पार्टियों में ब्राम्हण उम्मीदवार होते ही बीएसपी ने कुर्मी को अपना प्रत्याशी बना दिया है जिससे बीएसपी की संभावनाएं मजबूत हो गई है। सीधी की बात करें तो कमलेश्वर पटेल भीजेपी उम्मीदवार पर भारी पड़ते दिख रहे हैं पैसों की भी उनके पास कमी नहीं है जिसे पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह मंच पर भी स्वीकार कर चुके हैं। मतलब साफ है कि भाजपा छिंदवाड़ा और राजगढ़ का दुर्ग जीतने में लगी है और विंध्य में बीएसपी सेंधमारी कर रही है।

मुरैना,ग्वालियर और गुना के प्रत्याशी आज तय करेगी कांग्रेस,पचौरी बने स्टार प्रचारक
भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों ने नामांकन भरना शुरु कर दिया है तो वहीं दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी अब तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा ही नहीं कर पाई है। प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में कांग्रेस 22 सीटों पर ही अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर पाई है (congress lok sabha list)। खजुराहो सीट समाजवादी पार्टी के लिए कांग्रेस ने छोड़ दिया है। बताया जा रहा है कि आज होने वाली कांग्रेस केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक में मुरैना,ग्वालियर,गुना समेत छह सीटों के नाम को आज तय कर लिया जाएगा। बैठक में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी,और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार शामिल होंगे। बालाघाट सीट से प्रत्याशी बनाए गए सरस्वार को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच विरोध शुरु हो गया है जिससे पार्टी की टेंशन बढ़ गई है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार गुना लोकसभा सीट से जातीय समीकरण को देखते हुए कांग्रेस उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। पहले अरुण यादव ने भी गुना से चुनाव लड़ने के लिए दावेदारी की थी लेकिन पार्टी वहां से स्थानीय उम्मीदवार को ही टिकट देना चाहती है। इधर मजे की बात यह है कि अब तक कांग्रेस के मजबूत नेता कहे जाने वाले सुरेश पचौरी ने जिस दिन से बीजेपी का दामन थामा है उस दिन से उन्होने कांग्रेस में लगातार तोड़-फोड़ मचा रखी है। वो हर दूसरे-तीसरे दिन कांग्रेस के नेताओं को बीजेपी की सदस्यता दिला रहे हैं। जिसके फलस्वरुप सुरेश पचौरी को भारतीय जनता पार्टी ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची में उन्हे स्थान दिया है। अब सुरेश पचौरी भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कांग्रेस पर हमला बैलते नजर आएंगे।

अबकी बार 'गणेश' विसर्जन पर ध्यान,फंसी सतना और अब रीवा की बारी
लोकसभा का चुनाव जितना आसान दिख रहा है उतना है नहीं। एमपी में करीब दस ऐसी लोकसभा सीटें हैं जहां पर जीत किसी की भी हो लेकिन भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। विंध्य की बात करें तो यहां पर बीजेपी के लिए विधानसभा से ज्यादा कठिन लोकसभा का चुनाव होता चला जा रहा है। सतना से चार बार के सांसद गणेश सिंह (ganesh singh) पर बीजेपी ने एक बार फिर दांव लगाया है और उनके खिलाफ कांग्रेस के सिद्धार्थ कुशवाहा को चुनाव मैदान में उतार दिया गया है। ये वही सिद्धार्थ कुशवाहा (siddharth kushwaha) है जिन्होने विधानसभा चुनाव में गणेश सिंह को करारी पटखनी दी थी। और अब वही दोनों प्रतिद्वंदी एक बार फिर चुनाव मैदान में दो हाथ करने के लाए तैयार हैं। लेकिन इसके ठीक उलट मैहर से चार बार विधायक रह चुके नारायण त्रिपाठी (narayan tripathi) ने बीएसपी से टिकट लेकर चुनाव में उतने का ऐलान कर दिया है। मतलब साफ है ब्राम्हण बाहुल सीट में दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों ने ओबीसी उम्मीदवार पर दांव लगाया है। ऐसा माना जा रहा है कि सतना के ब्राम्हणों का पूरा वोट नारायण त्रिपाठी के पक्ष में जाएगा। उसके अलावा एससी वर्ग का वोट बीएसपी के नाते नारायण त्रिपाठी के खाते में जाएगा। और अगर ऐसा होता है तो अबकी बार गणेश विसर्जन तय है। गणेश सिंह से स्थानीय जनता काफी नाराज भी है। गणेश सिंह को कट्टर कुर्मी नेता माना जाता है। हांलाकि भारतीय जनता पार्टी के अन्य नेता संभावित हार को मानने के लिए तैयार नहीं हैं बल्कि उनका यह मानना है कि नारायण त्रिपाठी का चुनाव मैदान में उतरने का मतलब है कि गणेश सिंह एक बार फिर सतना से भाजपा का पर्चम लहराने वाले हैं।

कमलेश्वर पटेल का बड़ा कारनामा,पत्नी,बेटे और भाई के नाम पर बनवाया छह करोड़ का मुआबजा
सीधी लोकसभा (sidhi lok sabha) से कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी एवं कमलनाथ (kamal nath) की 15 महीने की सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री रहे सिहावल के पूर्व विधायक कमलेश्वर पटेल (kamleshwar patel) के ऊपर करोड़ों के भू-अर्जन भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। सिंगरौली कलेक्टर की आधिकारिक वेबसाइट पर धिरौली कोल ब्लॉक परियोजना हेतु किए गए भू- अर्जन का अपलोड किया गया अवार्ड एवं गणना पत्रक पूरे विंध्य में चर्चा का केन्द्र बना हुआ है। मुखबिर को मिले दस्तावेजों की सूची में धिरौली कोल ब्लॉक में प्रभावित विभिन्न ग्रामों में कमलेश्वर पटेल की पत्नी प्रीति पटेल उनके सुपुत्र ईशान पटेल सुपुत्री ईशा पटेल एवं भाई अजीत पटेल के नाम करीबन 6 करोड रुपए का मुआबजा तैयार किया गया है। उक्त ग्रामों में कोल उत्खनन हेतु अधिग्रहण की सूचना लगते ही कमलेश्वर पटेल एवं उनके परिजनों के द्वारा गरीब किसानों से बेहद ही मामूली कीमत पर जमीन क्रय कर ली गई और अपने राजनीतिक रसूल का उपयोग कर उन जमीनों पर फर्जी मकान एवं पर संपत्तियां दर्शाकर करोड़ों का मुआबजे का खेल खेलने की एक पूरी साजिश रची गई है। जाहिर है कांग्रेस सरकार में मिले मंत्री पद का रसूक बड़ी मुआबजे प्रतिकार की राशि में कमलेश्वर पटेल के काम आया ऐसे में अब बड़ा सवाल यह उठत है की क्या प्रदेश की भाजपा सरकार मामला प्रकाश में आ जाने के बावजूद संपूर्ण मुआबजा कमलेश्वर पटेल को प्रदान करेगी अथवा मामले की गंभीरता से जांच करवाएगी। सिंगरौली में कमलेश्वर पटेल की ही तरह विभिन्न रसूखदारों ने मुआबजे का अरबों में गबन किया है। मुआबजा प्रभावित ग्रामों में ना तो कमलेश्वर पटेल कभी गए ना ही उनके परिजन नहीं उनके पास बिजली पानी राशन कार्ड जैसी कोई चीज का मुआबजा प्रभावित गांव की है फिर भी स्थानीय लोगों से ज्यादा मुआबजा उनके नाम कैसे तैयार हो गया यह गंभीर प्रश्न है। अन्य नेताओं अधिकारियों मीडिया कर्मियों और पुलिस के लोगों के मुआवजे के बंदर पाट की जानकारी mukhbirmp.com आपके साथ शेयर करता रहेगा। पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने जिस प्रकार से भाजपा की सरकार में अवैध तरीके से वैध राशि को निकालने का एक बड़ा शड़यंत्र रचा है उससे स्पष्ट है की इस पूरे मामले में भाजपा के नेताओं का भी हाथ है। इसी लिए अभी तक बीजेपी के किसी भी नेता ने इस मामले में किसी प्रकार का संज्ञान नहीं लिया। अब इस पूरे मामले में ईडी की क्या भूमिका रहेगी यह तो वक्त बताएगा। कमलेश्वर पटेल के द्वारा फर्जी तरीके से निकाली जा रही मुआबजे की राशि की लिष्ट यहीं खत्म नहीं होती है। उनके कारनामें और हैं जिन्हे Mukhbir में आगे प्रकाशित किया जाएगा।