#Ashish Agarwal
Total published stories tagged under #Ashish Agarwal: 5

विवेक को 'आशीष' मिलते ही उसने परदे के पीछे रह कर भी भाजपा की रीति-नीति को पर्दे के सामने जीवंत करने का काम किया

बीजेपी मीडिया विभाग की धार होगी तेज फ्री-हैंड होकर विपक्ष के हर आरोप का करारा जवाब देगी आशीष अग्रवाल की टीम

मीडिया को 'परिवार' और उनकी समस्या को अपनी समस्या समझने वाले आशीष अग्रवाल को दूसरी पारी की सौगात

नाम आशीष अग्रवाल,काम पार्टी की आवाज को बुलंद करना और टीम का मनोबल बढ़ाना
सियासत की चौसर में पार्टियों का सबसे बड़ा चेहरा उसका मीडिया विभाग होता है (bjp media department)। पार्टी की सूचनाओं का प्रजेंटेशन किस प्रकार होना चाहिए इसका निर्धारण भी मीडिया विभाग के हाथ में ही होता है। बीजेपी ने जिस प्रकार से प्रदेश में प्रचंड जीत दर्ज की है उसमें मीडिया विभाग की भूमिका और उस मीडिया विभाग के कप्तान का बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है। भारतीय जनता पार्टी ने ऐन चुनाव के मौके पर अपने मीडिया प्रभारी का जिम्मा युवा चेहरा आशीष अग्रवाल (ashish agarwal) के कंधों पर डाल दिया था। आशीष अग्रवाल का युवा चेहरा होने के नाते पत्रकारों के बीच यही कानाफूसी हुआ करती थी कि क्या आशीष अग्रवाल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी ठीक तरीके से निभा पाएंगे। इन कश्मकश के बीच आशीष अग्रवाल ने बगैर किसी कंट्रोवर्शी में फंसे किस प्रकार पार्टी की आवाज को बुलंद करना है उसको लेकर लगातार मेहनत की। उनमें उम्र के हिसाब से अनुभव जरुर कम था लेकिन जिस प्रकार से टीम को सजाया और संवारा जाता है और उसका विश्वास किस प्रकार जीता जाता है इस बात को भी आशीष अग्रवाल ने बखूबी बेहतरीन तरीके से दिखाया। युवा और अनुभवी चेहरों के मिश्रण से लैस बीजेपी मीडिया विभाग की टीम का आशीष अग्रवाल ने कभी मनोबल ढीला नहीं पड़ने दिया। जब लोग भाजपा के मीडिया सेंटर (bjp media centre) में भाजपा विरोधी लहर की बात करते थे तो आशीष अग्रवाल बड़े ही विनम्र भाव से कहते थे कि आप देखते रहिए भाजपा की सरकार और संगठन ने जिस प्रकार से काम किया है उसका नतीजा वोट के रुप में सामने आएगा। और तीन दिसंबर का वो दिन भी आया जब प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल की कही हर बात सच साबित हुई और भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश में प्रचंड जीत दर्ज की (madhya pradesh election result)। अब सवाल इस बात का उठता है कि भाजपा की जीत में बीजेपी मीडिया विभाग की क्या भूमिका थी। दरअसल किसी भी पार्टी का मीडिया विभाग चेहरा होता है और पार्टी की सूचनाओं को जनता तक पहुंचाने का काम मीडिया विभाग की टीम का ही होता है। जिस प्रकार एक अखबर में पत्रकारों के साथ संपादक मीटिंग कर रोजाना प्रमुख खबरों पर बात करता है और किस खबर को अखबार में कहां स्थान देना है ठीक उसी प्रकार एक मीडिया प्रभारी की भी जिम्मेदारी होती है कि पार्टी की हर बात को किस बेहतर तरीके से मीडिया के माध्यम से जनता के पास पहुंचाना है। इस मामले में बीजेपी के युवा मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने बेहतर तरीके से साबित किया कि उम्र और अनुभव कभी आड़े नहीं आते बस मन में विश्वास और निष्ठा होना जरुरी है। एक प्रदेश प्रवक्ता से प्रदेश मीडिया प्रभारी का सफर तय करने वाले आशीष अग्रवाल ने कामयाबी की एक ऐसी मिशाल कायम की है जो भविष्य में भाजपा के अन्य मीडिया प्रभारियों के लिए एक नजीर के रुप में देखी जाएगी।

आशीष अग्रवाल ने बदली बीजेपी मीडिया विभाग की तस्वीर,नई प्रतिभाओं को दिया मंच
किसी भी पार्टी का चेहरा उसका अध्यक्ष होता है,और पार्टी का अहम हिस्सा उसका मीडिया विभाग होता है जो पार्टी की आवाज को हर फोरम में रखता है। पार्टी की बात सभी अपने-अपने तरीके से रखते हैं लेकिन उनका प्रजेंटेशन किस प्रकार का है वो मायने रखता है। बीजेपी मीडिया विभाग की बात करें तो उसमें अलग-अलग समय पर मीडिया प्रभारी बनाए गए (bjp media department)। सभी ने अपनी काबिलियत और क्षमता के मुताबिक बीजेपी के मीडिया विभाग को संचालित किया। लेकिन जिस दिन से भाजपा की ओर से युवा प्रवक्ता आशीष अग्रवाल (ashish agarwal) को बीजेपी प्रदेश मीडिया प्रभारी बनाया गया उस दिन से बीजेपी मीडिया विभाग की तस्वीर बदल गई। आशीष अग्रवाल की उम्र कम है लेकिन अनुभव उससे ज्यादा है। उन्हे ऐसे समय पर बीजेपी के प्रदेश मीडिया विभाग की कमान सौंपी गई जब प्रदेश में भाजपा के खिलाफ एंटीइकबेंसी की बात की जा रही थी। इतना ही नहीं टिकट की दौड़ में शामिल कई प्रवक्ताओं ने बीजेपी प्रदेश कार्यालय आना बंद कर दिया था। हर न्यूज चैनल से बीजेपी प्रदेश मीडिया विभाग की शिकायतें आ रही थी। ऐसी स्थिति में भाजपा के नेतृत्व ने युवा प्रवक्ता आशीष अग्रवाल को प्रदेश मीडिया विभाग का प्रभारी बना कर यह बता दिया कि वो युवाओं को पीछे नहीं आगे रखकर पार्टी की आवाज को बुलंद करना चाहती है। आशीष अग्रवाल को जब प्रदेश मीडिया विभाग का प्रभारी बनाया गया उस वक्त लोगों को लग रहा था कि उनमें अनुभव की कमी है और चुनाव के समय वो दबाव नहीं झेल पाएंगे। लेकिन आशीष अग्रवाल ने इस पद को ना सिर्फ अवसर मान कर स्वीकार किया बल्कि एक चुनौती के रुप में उन्होने मीडिया प्रभारी के पद को स्वीकार किया। यह चुनौती उनके लिए आसान भी नहीं थी क्योंकि जिम्मेदारी मिलने के महज कुछ दिनों के पहले ही आशीष अग्रवाल की मां का लंबी बीमारी के बाद स्वर्गवास हो गया था और वो अपनी मां के काफी करीब थे। मां के स्वर्गवासी होने का दुख उनके दिल और दिमांग में काफी दिनों तक रहा,आज भी वो अपनी मां की तस्वीर अपने साथ लेकर चलते हैं कार्यालय में अपनी कुर्सी में बैठने से पहले वो अपनी मां की पूजा करते हैं और फिर उसके बाद ही वो पार्टी के काम में लगते हैं। मां की पूजा से उनको शक्ति मिलती है और यही कारण है कि भाजपा के बहुत ऐसे युवा पैनलिष्ट थे जिन्हे घर बैठा दिया गया था उन्हे कोई पूछने वाला नहीं था। आशीष अग्रवाल ने पद सभांलते ही सभी प्रतिभाशाली युवाओं को बुलाया और काम पर लगा दिया। इतना ही नहीं समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले प्रतिभाशाली लोगों की भी आशीष अग्रवाल ने खोज की और उन्हे भी मंच देकर पार्टी की बात जनता के सामने रखने की आजादी दी। इस वक्त चुनाव पूरे शबाब पर है प्रदेश में राष्ट्रीय स्तर के नेता लगातार आ रहे हैं सभी को प्रजेंटेशन देना प्रदेश की भौगोलिक स्थिति की जानकारी देना और विपक्ष की रणनीति और आरोपों को बताने का काम वो बखूबी रखते हैं। चुनाव के चलते बीजेपी प्रदेश कार्यालय में वरिष्ठ प्रवक्ताओं का जमावड़ा लगा रहता है। सभी को सम्मान देना और सभी को खबर देना एक बड़ी चुनौती है लेकिन आशीष अग्रवाल किसी को मायूस नहीं करते। पार्टी की गाइडलाइन के मुताबिक वो खबर देते हैं और सम्मान का वो विशेष ध्यान देते हैं। अग्रवाल समाज से आने के नाते आशीष अग्रवाल को लोगों को मैनेज करने की खूबी जन्म से मिली है। जब कोई भी प्रवक्ता कांग्रेस से भाजपा के मीडिया सेंटर आता है तो वो बीजेपी मीडिया सेंटर की तारीफ किए बगैर नहीं रह पाता।