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भाजपा की जीत का नया फॉर्मूला,शक्ति केन्द्रों पर भाजपा करेगी पथ सभाओं का आयोजन
भोपाल

भाजपा की जीत का नया फॉर्मूला,शक्ति केन्द्रों पर भाजपा करेगी पथ सभाओं का आयोजन

भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीतने और कार्यकर्ताओं को ब्यस्त रखने के लिए कोई न कोई नया फॉर्मूला इजात करती रहती है। लिहाजा अब भाजपा ने कार्यकर्ताओं को नया काम देने की रणनीति तैयार कर ली है। जिसके तहत भारतीय जनता पार्टी के नेता शक्ति केन्द्रों (shakti kendra) पर पथ सभाएं (bjp path sammelan) आयोजित कर केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा किए गए जन हितैषी कार्यों की जानकारी शक्ति केन्द्रों तक पहुंचाएंगे। मतलब साफ है कि भारतीय जनता पार्टी अपने हर कार्यकर्ता के लिए काम का निर्धारण करना चाहती है साथ ही भाजपा का यह मक्शद भी है कि भाजपा के कार्यकर्ता जिस प्रकार से मोदी के नाम पर जीत के लिए आश्वस्त हैं उस मुगालते को भी भाजपा खत्म करना चाहती है। वोटिंग से पहले भाजपा का लक्ष्य हर शक्ति केन्द्र में पथ सभा आयोजित करना है। इस अभियान को अमली जामा पहनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के क्लस्टर प्रभारी जुट गए हैं। क्लस्टर प्रभारियों की मॉनीटरिंग में ही शक्ति केन्द्रों में पथ सभाएं आयोजित की जाएंगी। गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने हर बूथ पर 370 से अधिक वोट पाने का लक्ष्य रखा है लिहाजा उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी अब शक्ति केन्द्रों के माध्यम से जनता तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। और इस अभियान के माध्यम से भाजपा के नेताओं का जक बार फिर जनता से सीधा संवाद स्थापित हो जाएगा।

23/3/2024177
अबकी बार 'गणेश' विसर्जन पर ध्यान,फंसी सतना और अब रीवा की बारी
भोपाल

अबकी बार 'गणेश' विसर्जन पर ध्यान,फंसी सतना और अब रीवा की बारी

लोकसभा का चुनाव जितना आसान दिख रहा है उतना है नहीं। एमपी में करीब दस ऐसी लोकसभा सीटें हैं जहां पर जीत किसी की भी हो लेकिन भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। विंध्य की बात करें तो यहां पर बीजेपी के लिए विधानसभा से ज्यादा कठिन लोकसभा का चुनाव होता चला जा रहा है। सतना से चार बार के सांसद गणेश सिंह (ganesh singh) पर बीजेपी ने एक बार फिर दांव लगाया है और उनके खिलाफ कांग्रेस के सिद्धार्थ कुशवाहा को चुनाव मैदान में उतार दिया गया है। ये वही सिद्धार्थ कुशवाहा (siddharth kushwaha) है जिन्होने विधानसभा चुनाव में गणेश सिंह को करारी पटखनी दी थी। और अब वही दोनों प्रतिद्वंदी एक बार फिर चुनाव मैदान में दो हाथ करने के लाए तैयार हैं। लेकिन इसके ठीक उलट मैहर से चार बार विधायक रह चुके नारायण त्रिपाठी (narayan tripathi) ने बीएसपी से टिकट लेकर चुनाव में उतने का ऐलान कर दिया है। मतलब साफ है ब्राम्हण बाहुल सीट में दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों ने ओबीसी उम्मीदवार पर दांव लगाया है। ऐसा माना जा रहा है कि सतना के ब्राम्हणों का पूरा वोट नारायण त्रिपाठी के पक्ष में जाएगा। उसके अलावा एससी वर्ग का वोट बीएसपी के नाते नारायण त्रिपाठी के खाते में जाएगा। और अगर ऐसा होता है तो अबकी बार गणेश विसर्जन तय है। गणेश सिंह से स्थानीय जनता काफी नाराज भी है। गणेश सिंह को कट्टर कुर्मी नेता माना जाता है। हांलाकि भारतीय जनता पार्टी के अन्य नेता संभावित हार को मानने के लिए तैयार नहीं हैं बल्कि उनका यह मानना है कि नारायण त्रिपाठी का चुनाव मैदान में उतरने का मतलब है कि गणेश सिंह एक बार फिर सतना से भाजपा का पर्चम लहराने वाले हैं।

22/3/2024226
रीवा,सतना,अनूपपुर,जबलपुर और छिंदवाड़ा के हजारों कांग्रेसियों ने थामा बीजेपी का दामन
भोपाल

रीवा,सतना,अनूपपुर,जबलपुर और छिंदवाड़ा के हजारों कांग्रेसियों ने थामा बीजेपी का दामन

लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) से पहले कांग्रेस पार्टी में पलायन का दौर लगातार जारी है। गुरुवार को हजारों की संख्या में रीवा,सतना,अनूपपुर जबलपुर और छिंदवाड़ा के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का हाथ छोड़ कर बीजेपी का दामन थाम लिया है। भाजपा में ज्वाइन करने वाले नेताओं में पूर्व विधायक और जिला पंचायत अध्यक्षों सहित अलग- अलग तरह के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की सदस्यता ली है। ज्वाइनिंग कमेटी के प्रदेश संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) ने जानकारी देते हुए बताया कि अब तक करीब 15 हजार कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। और यह आंकड़ा ठीक इसके डबल होने की उम्मीद जताई जा रही है। होली के बाद एक बार फिर ज्वाइनिंग का दौर शुरु होगा जिसमें हजारों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल होने वाले हैं। Mukhabirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार जीतू पटवारी (jitu patwari) के पीसीसी चीफ बनने के बाद ऐसा पहला मौका है जब कांग्रेस के कार्यकर्ता इतनी बड़ी संख्या में बीजेपी का रुख कर रहे हैं। इस पलायन का कारण भी जीतू पटवारी ही बताए जा रहे हैं क्योंकि उनके पीसीसी चीफ बनने के बाद कार्यकर्ताओं में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है इसके अलावा पार्टी का सत्ता में नहीं आना भी कांग्रेस से पलायन बड़ा कारण बताया जा रहा है।

21/3/2024327
विंध्य में भाजपा का इतना फोकस क्यों,क्या कुछ दाल में काला है या फिर पूरी दाल ही काली है...
भोपाल

विंध्य में भाजपा का इतना फोकस क्यों,क्या कुछ दाल में काला है या फिर पूरी दाल ही काली है...

विधानसभा चुनाव हो या फिर लोकसभा चुनाव विंध्य (vindhya) हमेशा से राजनीतिक दलों के लिए अबूझ पहेली रहा है। अब बात लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) की करते हैं बीजेपी ने अपने सभी 29 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। जिसमें संसदीय सीट और जातिगत आधार को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने अपने उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतार दिया है। बुधवार को सीधी में बीजेपी उम्मीदवार डॉ. राजेश मिश्रा को पार्टी ने चुनाव मैदान पर उतार दिया है। लेकिन राजेश मिश्रा को भाजपा के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता पसंद नहीं कर रहे हैं यही कारण है कि बुधवार को उनके नामांकन के लिए सीएम मोहन यादव और डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला खुद पहुंचे। इस दौरान रोड शो और एक बड़ी जनसभा का आयोजन कर पार्टी ने अपनी ताकत दिखाने का जमकर प्रयास किया है। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में भी भाजपा हाई कमान ने विंध्य में अपनी पूरी ताकत झोंकी थी। पीएम मोदी की जनसभाएं हों अथवा केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विंध्य में दौरे हों। भाजपा के इन दोनों बड़े नेताओं ने विंध्य की कमान खुद अपने हाथ में ली जिसका परिणाम ये निकला की विंध्य की जनता ने बीजेपी के खाते में 30 में से 25 सीटें देकर बीजेपी को मालामाल कर दिया। और अब लोकसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरु होते ही बीजेपी के नेताओं के केन्द्रबिंदु में एक बार फिर विंध्य और वहां की जनता है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए भाजपा ने अंदर खाने से कई तरह की रणनीति तैयार कर रखी है। इस बात में कोई शक नहीं है कि विंध्य की राजनीति हमेशा कठिन मानी जाती रही है क्योंकि देश की सबसे बड़ी सवर्णों की आवादी विंध्य में ही निवास करती है और भारतीय जनता पार्टी जो ब्राम्हण,बनिया की पार्टी जानी जाती थी वही पार्टी आज पिछड़ा वर्ग समर्थित पार्टी मानी जाने लगी है जिसके कारण सवर्ण वर्ग अब भाजपा से दूर होने लगा है लिहाजा विंध्य में बीजेपी को सीटें जीतने के लिए अपने सभी प्रकार के अस्त्र और शस्त्र इस्तेमाल करने कड़ेंगे।

20/3/2024167
छिंदवाड़ा में बीजेपी का 'शंखनाद' अभियान,जीत का तैयार हुआ ब्ल्यू प्रिंट
भोपाल

छिंदवाड़ा में बीजेपी का 'शंखनाद' अभियान,जीत का तैयार हुआ ब्ल्यू प्रिंट

बीजेपी सोशल मीडिया विभाग ने छिंदवाड़ा में 'शंखनाद' (shankhanad) अभियान का आगाज कर दिया है। इस अभियान के अंतर्गत 33 मंडलों के आईटी और सोशल मीडिया संयोजक,सह संयोजक और प्रभारी जुटे। कार्यक्रम में बीजेपी सोशल मीडिया के प्रदेश संयोजक अभिषेक शर्मा (Abhishekh Sharma) ने मौजूद पदाधिकारियों को बताया कि छिंदवाड़ा की जीत भाजपा के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। अभिषेक शर्मा ने कहा कि इस सीट पर ना सिर्फ बीजेपी के संगठन की नजर है बल्कि पूरे प्रदेश और देश की भी नजर टिकी है इसलिए यह सीट बीजेपी के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शंखनाद अभियान के माध्यम से बीजेपी सोशल मीडिया विभाग प्रदेश के हर युवा वोटर को जोड़ने का प्रयास कर रहा है। इसी प्रकार का कार्यक्रम बीजेपी सोशल मीडिया विभाग जबलपुर में भी आयोजित कर चुका है और आने वाले समय में प्रदेश के अलग-अलग संसदीय क्षेत्रों में भी भीजेपी सोशल मीडिया विभाग की टीम करने जा रही है। बीजेपी सोशल मीडिया टीम के प्रदेश संयोजक अभिषेक शर्मा ने विधानसभा चचुनाव में भी इसी प्रकार से कई अभियान संचालित किया था जिसके तहत महिलाओं तक लाड़ली बहना योजना सहित महिलाओं के लिए किए जा रहे कामों को पहुंचाने का काम किया था और उसका नतीजा यह निकला कि जिस चुनाव में बीजेपी की सरकार जाने का दावा किया जा रहा था उसी चुनाव में बीजेपी ने 163 सीट जीत कर प्रचंड बहुमत हासिल किया था। और अब एक बार फिर बीजेपी का सोशल मीडिया विभाग ऐक्शन में आ गया है। युवाओं को लगातार जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

19/3/202481
विंध्य में बीजेपी को बड़ा झटका,ठाकुरों ने किया किनारा,भेदभाव के चलते सांसद अजय प्रताप ने छोड़ी पार्टी
भोपाल

विंध्य में बीजेपी को बड़ा झटका,ठाकुरों ने किया किनारा,भेदभाव के चलते सांसद अजय प्रताप ने छोड़ी पार्टी

राज्यसभा सांसद अजय प्रताप सिंह (ajay pratap singh) ने पार्टी की प्रथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे की एक प्रति अजय प्रताप ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और दूसरी प्रति प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भेजा है। अजय प्रताप सिंह सीधी लोकसभा सीट से लोकसभा चुनाव की दावेदारी कर रहे थे लेकिन पार्टी ने यहां से उनको अनदेखा कर राजेश मिश्रा को टिकट दे दिया है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार अजय प्रताप का पार्टी के एक वरिष्ठ और जिम्मेदार नेता से काफी विवाद हुआ था। अजय प्रताप ने अपनी तरफ से कई तरह की दलीलें दी लेकिन उनकी दलीलों को शिरे से खारिज कर दिया गया। अजय सिंह का ऐसे समय पर पार्टी छोड़ने का सीधा मतलब है कि भाजपा के अंदर ही अंदर बहुत द्वंद चल रहा है। पार्टी में अन्य दलों से नेताओं को ज्वाइन कराया जा रहा है लेकिन बढ़ती भीड़ के कारण पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं वो खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। अजय प्रताप सिंह के मामले में भी ऐसा ही सुनने में आया है। उन्होने पार्टी नेत्रृत्व के सामने अपनी बातें रखने का प्रयास किया लेकिन पार्टी के हमत्वपूर्ण पद पर बैठे नेता ने अजय प्रताप की एक नहीं सुनी। उल्टे जब अजय प्रताप के इस्तीफे की खबर आग की तरह फैली तो भाजपा के नेता यही कहते नजर आए की महत्वकांक्षाएं इतनी भी नहीं होनी चाहिए कि पार्टी छोड़ने की नौवत आ जाए। भाजपा की तरफ से अब ये भी कहा जा रहा है कि पार्टी ने एक ऐसे नेता को राज्यसभा भेजा जो विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज नहीं कर पाया। इस मामले में पूर्व सांसद रीति पाठक ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन अजय प्रताप के करीबियों को खुला आरोप है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता से उन्हे अपमानित होना पड़ा है और मजबूर होकर ही अजय प्रताप ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दिया है। विंध्य में ठाकुर वर्ग का बड़ा वोटबैंक है और माना जा रहा है कि अजय प्रताप सिंह के अपमान का बदला ठाकुर वर्ग के लोग लोकसभा चुनाव में जरुर लेंगे।

17/3/2024300
धर्म से बात न बने तो जातियों को अलग कर सत्ता तक पहुंचा जा सकता है,ऐसा सोचते हैं कांग्रेस के कार्यकर्ता
भोपाल

धर्म से बात न बने तो जातियों को अलग कर सत्ता तक पहुंचा जा सकता है,ऐसा सोचते हैं कांग्रेस के कार्यकर्ता

मिशन 2024 की तैयारियों में जुटी भाजपा और कांग्रेस में इन दिनों जनता के दिल तक उतरने के लिए मुद्दों की तलाश है। भाजपा का स्टैंड तो क्लियर है राम मंदिर और हिंदुत्व लेकिन कांग्रेस अब तक अपना चुनावी एजेंडा तय नहीं कर पाई कि चुनाव में जाकर वो भाजपा का काउंटर कैसे करेगी। ऐसे में शुक्रवार को कांग्रेस का एक कार्यकर्ता पीसीसी चीफ जीतू पटवारी (jitu patwari) के पास टिकट की चाहत लिए पहुंचता है। जीतू पटवारी कहते हैं कि युवा वर्ग चुनाव लड़ने का इच्छुक है अच्छी बात है लेकिन चुनावी समर में जब उतरोगे तो भाजपा के बड़े मुद्दों का काउंटर कैसे करोगे। ऐसे में कांग्रेस के कार्यकर्ता का जवाब आता है कि भाजपा धर्म की और भगवा की बात करती है जो जनता को पसंद आती है। इसकी काट यही है कि हम लगातार जातियों की बात करें। जाति आधारित जनगणना की बात करे। अलग-अलग वर्गों के पास जाएं बार-बार उनके पिछड़े होने का अहसास दिलाएं और बताएं की जातियों की जनगणना होने से सभी जातियों की संख्या क्लियर हो जाएगी और उससे विकास के नए दरवाजे खुलेंगे। मतलब साफ है कि कांग्रेस के पास भाजपा का काउंटर करने के लिए कुछ नहीं बचा तो डिवाइड एंड रुल की पॉलिसी पर कांग्रेस काम करने लगी मतलब फूट डालो और शासन करो की रणनीति पर कगंग्रेस पार्टी आगे बढ़ रही है। राहुल गांधी भी भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान हर जगह अपने संबोधन में जाति आधारित जनगणना कराने की बात करते हैं। सत्ता पाने के लिए जब धर्म का मुद्दा काम नहीं आया तो कांग्रेस ने जातियों का सहारा लेना शुरु कर दिया है।

16/3/2024115
सुरेश पचौरी के बीजेपी में शामिल होते ही एमपी कांग्रेस में 'दिग्विजय' बाद हावी
भोपाल

सुरेश पचौरी के बीजेपी में शामिल होते ही एमपी कांग्रेस में 'दिग्विजय' बाद हावी

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि कांग्रेस नेता आधारित पार्टी है। जहां नेताओं के जयकारे लगाए जाते हैं न कि पार्टी के समर्थन में जयकारे लगाए जाते हैं। पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी (suresh pachouri) ने अपने कई समर्थकों के साथ बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। सुरेश पचौरी के कांग्रेस छोड़ने पर पार्टी के नेताओं को पछतावा तो दूर की बात है बल्कि कांग्रेस पार्टी में जश्न का माहौल है। क्योंकि सुरेश पचौरी के पार्टी छोड़ने के बाद कांग्रेस में मैदान खाली हो गया। एक के बाद एक कांटे कांग्रेस के खुद निकलते चले गए ऐसे में मैदान खाली देख कांग्रेस पार्टी में दिग्विजय सिंह (digvijaya singh) के समर्थकों ने अपना आधिपत्य स्थापित करना शुरु कर दिया। इन दिनों एमपी कांग्रेस में पूर्व सीएम दिग्विजय खेमे का बोलबाला देखने को मिल रहा है। ऐसे में जो दिग्विजय समर्थक नहीं हैं अथवा उनके खेमे के नहीं हैं वो अपनी ही पार्टी में बेगाना सा महसूस करने लगे हैं। पार्टी में अब भी ऐसे कई प्रतिभाशाली और मेहनती वर्कर हैं जो पार्टी के लिए काम तो करना चाहते हैं लेकिन दिग्विजय वाद हावी होने के कारण वो पार्टी में काम नहीं कर पा रहे हैं। कार्यालय में पार्टी के कार्यकर्ता आते हैं तो उन्हे बैठने के लिए स्थान भी नहीं मिलता जिसके कारण वो पार्टी कार्यालय के बाहर चाय की दुकान में भटकते हुए अक्शर देखे जाते हैं। जीतू पटवारी को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया लेकिन वो अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहे हैं। जिस दिन से जीतू पटवारी को पार्टी की कमान मिली है उस दिन से कांग्रेस में लगातार पलायन का दौर जारी है। एक के बाद एक बड़े नेता कांग्रेस का हाथ छोड़ कर फूल का दामन थामते चले जा रहे हैं। कुल मिला कर कांग्रेस पार्टी इस समय अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है। पार्टी की स्थिति सुधरना तो दूर लगातार नए-नए खेमे पनपते चले जा रहे हैं और जो नेता खेमेबाजी करने में सक्षम नहीं हैं वो दिग्विजय सिंह के सामने माथा टेकने के लिए मजबूर हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरु हो चुकी है और कांग्रेस कार्यालय में किसी प्रकार की चुनावी रौनक देखने को अब तक नहीं मिल रही है। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि टीवी डिवेट में बैठने के लिए कांग्रेस में प्रवक्ता तक उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। ऐसे में बीजेपी प्रवक्ताओं को भी डिबेट करने में मजा नहीं आ रहा है।

15/3/2024186
पूरी कांग्रेस खाली हुई जा रही है और राहुल गांधी चने के झाड़ में बैठ कर गिनती कर रहे हैं
भोपाल

पूरी कांग्रेस खाली हुई जा रही है और राहुल गांधी चने के झाड़ में बैठ कर गिनती कर रहे हैं

कांग्रेस मुक्त अभियान के तहत भारतीय जनता पार्टी में लगातार ज्वाइनिंग का कारवां बढ़ता चला जा रहा है। बुधवार को मुरैना जिले के करीब 500 और छिंदवाड़ा के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की सदस्यता ले ली (bjp membership)। इन सभी कार्यकर्ताओं को ज्वाइनिंग कमेंटी (bjp joining committee) के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने पार्टी का अंग वस्त्र पहना कर बीजेपी की सदस्यता दिलाई है। विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक के सफर में कांग्रेस के 15 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं बीजेपी का दामन थाम लिया है। मजे की बात ये है कि रोजाना सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता बीजेपी की सदस्यता ले रहे हैं यहां तक की कांग्रेस के पास इस वक्त मजबूत उम्मीदवार तक नहीं हैं इसके वाबजूद कांग्रेस के नेता पार्टी में चल रहे पलायन को रोकने का कोई उपाय नहीं कर रहे हैं। राहुल गांधी (rahul gandhi) भारत न्याय यात्र निकाल कर चने के झाड़ में चढ़े बैठे हैं उन्हे लग रहा है कि जनता कांग्रेस को जिताएगी और भारतीय जनता पार्टी है कि कांग्रेस के हर कार्यकर्ता को भाजपा की सदस्यता दिलाती चली जा रही है।

13/3/2024224
चयनित शिक्षकों ने बीजेपी कार्यालय के बाहर किया प्रदर्शन,सुंदरकांड का किया पाठ
भोपाल

चयनित शिक्षकों ने बीजेपी कार्यालय के बाहर किया प्रदर्शन,सुंदरकांड का किया पाठ

मध्यप्रदेश प्राथमिक शिक्षक चयन पात्रता परीक्षा 2020 वर्ग 3 के हजारों चयनित शिक्षक-शिक्षिकाओं ने राज्य सरकार के खिलाफ फिर आंदोलन छेड़ दिया है (madhya pradesh teachers protest)।मंगलवार को पदों में वृद्धि की मांग को लेकर चयनित शिक्षकों ने अपनी अपनी मांगों को लेकर बीजेपी कार्यालय (bjp office) का घेराव किया। इस दौरान चयनित शिक्षकों ने बीजेपी और सरकार को उनके वादे याद दिलाए। इनका कहना है कि अगर मांग पूरी नहीं की गई तो आंदोलन और तीव्र किया जाएगा। सरकार को अपना वादा पूरा करना ही होगा। चयनित शिक्षकों ने सरकार को बुद्धि देने के लिए भगवान राम से प्रार्थना की। हाथों में रामायण लिए शिक्षक सड़क पर ही सुंदरकांड करने लगे। बीजेपी कार्यालय का घेराव करते हुए धरना देना शुरू कर दिया। इनका कहना है की पदवृद्धि की मांग को लेकर वो बीजेपी कार्यालय में गुहार लगाने आए हैं। प्रदर्शन में कई जिलों के बड़ी संख्या में अभ्यर्थी भाजपा कार्यालय में जमा हुए। इसे देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर बैरिकेडिंग कर दी गई। चयनित शक्षकों को बीजेपी कार्यालय के बाहर ही रोक दिया गया। चयनित शक्षकों की मांग है कि उच्च माध्यमिक शिक्षक वर्ग-1 चयन परीक्षा 2023 में पद वृद्धि की जाए. शिक्षा विभाग ने परीक्षा ली और नौकरी के नाम पर छलावा किया है। शिक्षकों ने जय श्री राम के जयकारे लगाकर सरकार को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की। गौरतलब है कि ये शिक्षक अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इन्होंने लोक शिक्षण संचालनालय के बाहर भी धरना-प्रदर्शन भी किया था। इनकी अहम है कि मांग है कि प्राथमिक शिक्षक भर्ती वर्ग तीन में 51 हजार पदों की वृद्धि सरकार करे। शिक्षक भर्ती 2018 में प्रथम द्वितीय काउंसलिंग के रिक्त पदों पर नियोजन प्रक्रिया जल्द की जाए।

12/3/2024115
डॉ. नरोत्तम मिश्रा से मिले कांग्रेस नेता गोविंद सिंह,भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज
भोपाल

डॉ. नरोत्तम मिश्रा से मिले कांग्रेस नेता गोविंद सिंह,भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज

पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह (govind singh) पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) से मिलने उनके निवास पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने करीब बीस मिनट तक बंद कमरे में बात की जिसके बाद डॉ. गोविंद सिंह की भाजपा में शामिल होने की अटकलें लगाई जाने लगी हैं। हांलाकि पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने इस मुलाकात को सौजन्य मुलाकात बताते हुए भाजपा में शामिल होने की अटकलों को विराम लगाने का प्रयास किया है। लेकिन जिस वक्त कांग्रेस में भगदड़ मची हुई है उस वक्त डॉ. गोविंद सिंह का पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा से मिलना कई तरह के राजनीतिक कयासों को हवा दे रहा है। डॉ. गोविंद सिंह ने ये भी कहा कि जो नेता कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में जा रहे हैं उन्हे उनके कद के हिसाब से पार्टी में सम्मान नहीं मिल पाया जिसके कारण उन्होने भाजपा की सदस्यता ली है। लोकसभा चुनाव लड़ने के विषय पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुरैना लोकसभा सीट से वो चुनाव लड़ना चाहते थे और पार्टी भी तैयार थी लेकिन आखिरी वक्त पर उन्होने अपना मन बदल लिया और अब वो लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। साथ ही डॉ. गोविंद सिंह ने भाजपा की ज्वाइनिंग को लेकर कहा है कि अभी वो भाजपा ज्वाइन नहीं कर रहे हैं लेकिन जब भी भाजपा ज्वाइन करेंगे मीडिया को सबसे पहले बुला कर जरुर बताएंगे। गौरतलब है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा भाजपा ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक हैं और जिस प्रकार से डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने अपने काम को अंजाम दिया है उससे पूरी कांग्रेस में उथल पुथल सी स्थिति बन गई है। और ऐसी स्थिति में दोनों बड़े नेताओं की मुलाकात ने कांग्रेसी खेमे में हलचल बढ़ा दी है।

12/3/2024216
सुरेश पचौरी की चार साल पहले भाजपा ज्वाइन करने की लिखी गई पटकथा,बहुत देर कर दी सनम आते-आते
भोपाल

सुरेश पचौरी की चार साल पहले भाजपा ज्वाइन करने की लिखी गई पटकथा,बहुत देर कर दी सनम आते-आते

राजधानी की नगर निगम में एल्डरमैन से राजनीति की शुरुआत करने वाले सुरेश पचौरी (suresh pachouri) केंद्र में दो बार राज्य मंत्री और 24 साल तक राज्यसभा के सदस्य रहे हैं। सुरेश पचौरी गांधी नेहरू परिवार से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष के सलाहकार रहे अहमद पटेल के मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा करीबी रहे हैं। उन्होंने शनिवार सुबह कांग्रेस को बाय-बाय कह दिया। हालांकि पचौरी और इंदौर के पूर्व विधायक संजय शुक्ला मार्च 2020 में ऑपरेशन लोटस के वक्त भी कुछ शर्तों के कारण भाजपा में जाते-जाते रह गए थे। उनके भाजपा में जाने की पटकथा 4 साल पहले लिखी गई थी। बात मार्च 2020 की है।तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ से अनबन होने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्य प्रदेश के 22 कांग्रेस विधायकों ने कांग्रेस छोड़ दी थी। उस वक्त कांग्रेस के 22 विधायकों को पहले हरियाणा के मानेसर और उसके बाद भाजपा शासित कर्नाटक के बेंगलुरु ले जाया गया था। कांग्रेस सरकार के दौरान कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जोड़ी से सिर्फ ज्योतिरादित्य सिंधिया ही नहीं पचोरी भी परेशान थे और वह कांग्रेस में असहज महसूस कर रहे थे। सिंधिया की बगावत के बाद प्रदेश की कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई थी और कमलनाथ ने इस्तीफा दे दिया था। भाजपा में मौजूद Mukhbir बताते हैं कि उस वक्त सिंधिया और पचौरी की आपस में बात नहीं हो पाई थी। कांग्रेस के महाकौशल के एक नेता के जरिए सुरेश पचौरी की भाजपा में बात हुई लेकिन महाकौशल के नेता वही पद चाहते थे जिस पद पर वह कांग्रेस सरकार में थे। उस वक्त सुरेश पचौरी खेमे की तरफ से उन्हें राज्यसभा में भेजने की भी शर्त रखी गई थी। तब बात नहीं बन पाई और सुरेश पचौरी कांग्रेस में ही रह गए।

10/3/2024203
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