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ईवीएम को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन,दिग्विजय सिंह का आरोप,ईवीएम बनाने वाली कंपनी के चार सदस्य भाजपा के
लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी ने ईवीएम के खिलाफ एकबार फिर हल्लाबोल शुरु कर दिया है (congress on evm)। कांग्रेस ने पहले दिल्ली के जंतर मंतर में प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। अनुमति नहीं मिली तब भी कांग्रेस के लोगों ने जंतर-मंतर में प्रदर्शन शुरु कर दिया जिसके बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया। आखिरकार कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय में प्रदर्शन शुरु कर दिया जहां दिग्विजय सिंह सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (digvijaya singh) ने कहा कि ईवीएम को अब खत्म कर बैलेट पेपर पर चुनाव कराना शुरु कर देना चाहिए क्योंकि ईवीएम की निष्पक्षता पर सभी को संदेह है। पूर्व मुख्यमंत्री ने एक बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि ईवीएम बनाने वाली कंपनी के चार सदस्य बीजेपी के हैं ऐसी स्थिति में ईवीएम पर किस प्रकार से विश्वास किया जा सकता है। गौरतलब है कि ईवीएम की निष्पक्षता को लेकर दिग्विजय सिंह लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं। लेकिन उनकी बात को आज तक किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। अब इस बार दिग्विजय सिंह ने दिल्ली में प्रदर्शन कर ईवीएम के खिलाफ बड़े स्तर पर मोर्चेबंदी करने की कोशिश की है।

19 फरवरी को बीजेपी की सदस्यता ले सकते हैं कमलनाथ के साथ सात कांग्रेस विधायक
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (kamal nath) को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इस बीच कमलनाथ के करीबी विधायक ने बड़ा दावा किया है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस के एक विधायक ने दावा किया कि कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ 19 फरवरी को बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक बीजेपी और कमलनाथ की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं सामने आई है। बीजेपी का अभी राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली में दो दिवसीय अधिवेशन चल रहा है और यह माना जा रहा है कि अधिवेशन समाप्त होने के बाद कमलनाथ अपने बेटे नकुकलनाथ के साथ बीजेपी ज्वाइन करेंगे। कमलनाथ के साथ 10 से 12 विधायक और एक मेयर भी कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। हांलाकि कमलनाथ को लेकर कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके बीजेपी में शामिल होने की उम्मीद नहीं लगाई जा सकती। उन्होंने गांधी-नेहरू परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि कमलनाथ हमेशा साथ खड़े रहे है, ऐसा व्यक्ति बीजेपी के साथ कैसे जा सकता है। गौरतलब है कि कमलनाथ के बारे में कहा जाता है कि वो राज्यसभा जाना चाहते थे. लेकिन कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया. कांग्रेस ने अशोक सिंह को राज्यसभा का उम्मीदवार बना दिया. कमलनाथ की 'नाराजगी' तब भी देखने को मिली जब वो अशोक सिंह के नामांकन में शामिल नहीं हुए थे. हालांकि, जब पार्टी ने अशोक सिंह को उम्मीदवार बनाया था तो कमलनाथ ने अशोक सिंह को शुभकामनाएं दी थीं। यहां ये भी जानना जरूरी है कि मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में कमलनाथ ही कांग्रेस का सीएम चेहरा था। लेकिन पार्टी को विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।

कांग्रेस पार्टी ने भी राज्यसभा उम्मीदवार का किया ऐलान
कांग्रेस पार्टी ने राज्सभा उम्मीदवार का ऐलान करते हुए अशोक सिंह (ashok singh) के नाम पर मुहर लगा दी हो। अशोक सिंह यादव समाज से आते हैं। मतलब साफ है कि भारतीय जनता पार्टी नै मप्र में यादव को मुख्यमंत्री बनाया है तो उसका जवाब देने के लिए कांग्रेस पार्टी ने भी यादव को राज्यसभा भेजने का ऐलान किया है। नामांकन की आखिरी तारीख 15 फरवरी है यही कारण है कि कांग्रेस ने भी अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। इससे पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने चारों उम्मीदवारों का सुबह ही ऐलान कर दिया था। गौरतलब है कि एमपी से राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं जिसमें चार सीट भाजपा के खाते की हैं और एक सीट कांग्रेस की राजमणि पटेल से खाली हुई है।

बीजेपी ने निकाली बंपर भर्तियां,कांग्रेस से आने वालों को भर्ती में मिलेगी विशेष छूट
मिशन 2024 फतह करने में जुटी भारतीय जनता पार्टी ने बंपर भर्तियां निकाल दी हैं (mp bjp)। बीजेपी की निकली भर्ती की विशेश बात यह है कि कांग्रेस से आने वाले नेताओं को विशेश छूट का लाभ मिलेगा (congress mp)। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया है और उस नारे को सत्य साबित करने के लिए बीजेपी ने भर्ती अभियान शुरु कर दिया हैं। गांव-गांव चलो अभियान के अंतर्गत भारतीय जनता पार्टी टोला और मोहल्ला में विशेश पहचान और वर्चश्व रखने वालों को पार्टी में शामिल करने का अभियान चलाया है तो वहीं शहरी क्षेत्रों में बड़े नेताओं को भाजपा में शामिल किया जा रहा है। दरअसल 22 जनवरी को अयोध्या के राम मंदिर में हुई भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण कांग्रेस हाई कमान को भी दिया गया था जिस कांग्रेस की तरब से अस्वीकार कर दिया गया था। तभी से कांग्रेस पार्टी में भगवान राम पर आस्था रखने वाले नेताओं ने पार्टी से किनारा करना शुरु कर दिया। कांग्रेस के कुछ नेताओं का तो यहां तक कहना है कि उनका कांग्रेस पार्टी में दम घुट रहा था क्योंकि वो कांग्रेस में रह कर भगवान राम का खुल कर नाम भी नहीं ले पा रहे थे। यही कारण है कि अब वो भाजपा में शामिल हो रहे हैं। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस की तरफ से आने वाले नेताओं की संख्या दिनों दिन बढ़ती चली जा रही है। पता चला है कि जबलपुर से भी कांग्रेस के एक दिग्गज नेता भाजपा में शामिल होने वाले हैं और उनको भाजपा जबलपुर लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार भी बना सकती है। भाजपा का भर्ती अभियान सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। भाजपा की तरफ से कांग्रेस के ऐसे नेताओं की सूची तैयार की जा रही है जो ब्यक्तिगत तौर पर अपने क्षेत्रों में दमखम रखते हों और उनसे भाजपा को नुकसान हो। ऐसे कांग्रेस नेताओं को भाजपा में शामिल कराने के लिए अलग से रणनीति तैयार की जा रही है। हालाकि भाजपा ज्वाइनिंग कमेटी का संयोजक पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को बनाया गया है जो तोड़ फोड़ के मामले में काफी माहिर माने जाते हैं। भाजपा ने जब भी डॉ. नरोत्तम मिश्रा को किसी अभियान का जिम्मा सौंपा है तो वो पार्टी को निराश नहीं करते हैं। साल 2020 में जब आपरेशन लोटस हुआ और कांग्रेस की सरकार धराशाही हो गई थी तब भी उस पूरे अभियान के प्रमुख कर्ता धरता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ही थे। यानि यह स्पष्ट हो गया है कि लोकसभा चुनाव के पहले ही भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस की ऐसी घेराबंदी कर देना चाहती है जिससे उन्हे मजबूत उम्मीदवार न मिल पाएं।

कांग्रेस में फिर बीजेपी ने लगाई सेंध,लीगल सेल के अध्यक्ष शशांक शेखर बीजेपी में हुए शामिल
कांग्रेस पार्टी में पलायन का दौर लगातार जारी है। अब कांग्रेस के एक और महत्वपूर्ण नेता कांग्रेस लीगल सेल के अध्यक्ष और पूर्व महाअधिवक्ता शशांक शेखर (shashank shekhar)ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) और ज्वाइनिंग टोली के प्रमुख डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra),उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला (rajendra shukla) और विधायक संजय पाठक (sanjay pathak) की मौजूदगी में थामा उन्होने बीजेपी की सदस्यता ली। पता चला है कि लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता बीजेपी नेताओं के संपर्क में हैं। कई नेता बीजेपी का दामन थामना चाहते हैं। इसी लिए भारतीय जनता पार्टी की ओर से पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के नेतृत्व में ज्वाइनिंग कमेटी बनाई गई है जो अच्छे लोगों को बीजेपी में लाने का काम करती है। पीएम मोदी ने भी कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देखा है और उसी सपने को सार्थक करते हुए भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेताओं को भाजपा में लगातार शामिल करवा रही है।

कांग्रेस मुक्त भारत,कांग्रेस युक्त भाजपा,कांग्रेस के सैकड़ों लोग एकसाथ भाजपा में हुए शामिल
कांग्रेस पार्टी से पलायल का दौर लगातार जारी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (pm modi) ने जिस प्रकार से कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया है उसी को चरितार्थ करने के लिए भाजपा ने कांग्रेस नेताओं को भाजपा में शामिल करने का सिलसिला शुरु कर दिया है। इसी कड़ी में कांग्रेस के जबलपुर महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू (jagat bahadur singh), डिण्डौरी जिला पंचायत अध्यक्ष रूदेश परस्ते, उपाध्यक्ष अंजू जितेन्द्र ब्यौहार, सिंगरौली जिला पंचायत उपाध्यक्ष अर्चना सिंह, डिण्डौरी के पूर्व जिला अध्यक्ष बीरेन्द्र बिहारी शुक्ला, जिला पंचायत सदस्य, पार्षद, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष, जनपद सदस्य, पूर्व जनपद सदस्य, यूथ कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष, ब्लॉक प्रभारी सहित समाज सेवियों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इन सभी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव,प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा,मंत्री कैलाश विजयवर्गीय,प्रहलाद पटेल और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा का अंगवस्त्र पहना कर ज्वाइनिंग कराई (mp bjp)। गौरतलब है कि जीतू पटवारी के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में कांग्रेस के नेताओं ने बीजेपी की सदस्यता ली है।

असम में राहुल गांधी पर हुए हमले के विरोध में भोपाल में मौन धरना
जहां एक ओर पूरा देश राम मय है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी ने विरोध प्रदर्शन (mp congress protest) का रास्ता अपना रखा है। दरअसल राहुल गांधी (rahul gandhi) की भारत जोड़ो न्याय यात्रा (bharat jodo nyay yatra) पर असम में हमला होने का आरोप लगाया जा रहा है। लिहाजा कांग्रेस के नेताओं ने राहुल गांधी के समर्थन में भोपाल में मौन प्रदर्शन किया है। कार्यक्रम में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता हाथ में काली पट्टी बांधकर बैठे। कांग्रेस का यह धरना भोपाल के रोशनपुरा में आयोजित किया गया था जिसमें कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

'बड़ी अभागी है कांग्रेस' मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस को क्यों बताया अभागा
भगवान राम 22 जनवरी को राम मंदिर के गर्भगृह (ram mandir pran pratishtha) में स्थापित होने जा रहे हैं। उससे पहले भक्ति के रस में देश सराबोर है तो सियासत भी पूरे शबाब पर है। राम मंदिर के लिए देश भर में निमंत्रण भेजे जा रहे हैं और उसी कड़ी में कांग्रेस पार्टी को भी निमंत्रण भेजा गया था। लेकिन कांग्रेस ने इस कार्यक्रम में जाने के न्योते को ये कह कर अस्विकार कर दिया कि भाजपा ने इस पूरे कार्यक्रम को राजनीतिक बना दिया है। हांलाकि कांग्रेस आलाकमान के इस फैसले पर कांग्रेस कई अलग-अलग धड़ों में बंट गई है। कांग्रेस आला कमान ने एक वर्ग विशेष को खुश करने के लिए ऐसा किया है। लेकिन कांग्रेस पार्टी के इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी का कोई भी नेता तंज कसने से पीछे नहीं हो रहा है। इस मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) ने भी जमकर चुटकी ली है। मोहन यादव ने कहा कि 'कांग्रेस बड़ी अभागी है' क्योंकि भगवान राम के मंदिर और भगवान राम का सभी को इंतजार था और अब जब राम मंदिर बन रहा है और भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है तो उसमें करीब- करीब सभी शामिल हो रहे हैं लेकिन कांग्रेस आला कमान की तरफ से न्योता अस्विकार होने के बाद कांग्रेस के नेता खुद को तो ठगा सा महसूस कर ही रहे हैं लेकिन भाजपा के नेताओं को तंज कसने का अच्छा मौका भी मिल गया है।

बीजेपी करेगी डबल अटैक,कांग्रेस को चारों खाने चित्त करने के लिए बीजेपी का मास्टर प्लान तैयार
जहां एक ओर भारतीय जनता पार्टी ने देश की जनता को भगवान राम की भक्ति में लीन कर रखा (ram mandir ayodhya) है वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने डबल अटैक की रणनीति तैयार कर कांग्रेस सहित उसके सहयोगी दलों को चारों खाने चित्त करने की रणनीति को भी अमली जामा पहनाने का काम तेज कर दिया है। दरअसल जिस दिन कांग्रेस पार्टी ने अयोध्या के श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने के लिए इंकार कर दिया उसी दिन भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस सहित उसके सहयोगी दलों को चारों खाने चित्त करने की रणनीति पर काम करना शुरु कर दिया था। कांग्रेस के नेता मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा (ram mandir pran pratishtha) में शामिल नहीं होने के अलग-अलग कारण बता रहे हैं लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पार्टी को धर्म विरोधी साबित कर दिया है। देश की जनता भगवान राम के प्रति काफी भावुक है और इसमें भी कोई शक नहीं है कि भगवान राम के मंदिर को लेकर देश की कई पीढ़ियां गुजर गई लेकिन उनको भगवान राम का मंदिर नसीब नहीं हुआ और अब मोदी के राज में जब राम मंदिर बन रहा है तो उसका लाभ भारतीय जनता पार्टी जरुर उठाएगी। और यही कारण है कि ठीक चुनाव के पहले भगवान राम को गर्भगृह में स्थापित कर भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर भाजपा की सरकार बनाने का ऐलान करने जा रही है। माना यह भी जा रहा है कि आयोध्या में भगवान राम की स्थापना होते ही भारतीय जनता पार्टी चुनावी बिगुल भी बजाने जा रही है। मतलब साफ है कि कांग्रेस पार्टी (congress on ram mandir) को राम से दूरी बनाने काफी मुस्किल बनने वाला है तो वहीं भारतीय जनता पार्टी अपने इस डबल अटैक रणनीति से एकबार फिर अपनी सरकार का रास्ता प्रशस्त करने की ओर तेजी से बढ़ रही है। कांग्रेस ने अन्य राजनीतिक दलों के साथ इंडी गठबंधन बनाया है जिसको अकेले भगवान राम के नाम पर भारतीय जनता पार्टी खत्म करने के फॉर्मूले की ओर बढ़ चुकी है।

बेमन ही सही आखिर कमलनाथ और जीतू पटवारी ने एक दूसरे से की मुलाकात
विधासभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (kamal nath) को पीसीसी चीफ पद से बड़ी बेरहमी के साथ हटा कर पूर्व मंत्री जीतू पटवारी (jitu patwari) को प्रदेश अध्यक्ष पद की कमान थमा दी ग ई। और कांग्रेस ने कमलनाथ को यह सीधे तौर पर बता दिया कि 'तुमसे ने हो पाएगा' कमलनाथ लिधानसभा के सत्र में भी उपस्थित नहीं हुए थे,विधायक पद की शपथ भी उन्होने नहीं ली थी। भाजपा के नेता आरोप लगा रहे थे कि कमलनाथ को पार्टी ने जिस प्रकार अध्यक्ष पद से निकाला है उसी से वो नाराज हैं। बहरहाल देर आए दुरुस्त आए। कमलनाथ अब भोपाल आ चुके हैं। और उनके आने की खबर मिलते ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी कमलनाथ के निवास पहुंचे और उनसे काफी देर तक बंद कमरे में बात की। इन सब बातों के बीच यह स्पष्ट नजर आ रहा था कि कमलनाथ जीतू पटवारी से खुश नहीं हैं। माना यह भी जा रहा है कि जीतू पटवारी के अध्यक्ष बनने के बाद अब कमलनाथ का एमपी कांग्रेस में किसी प्रकार का हस्तक्षेप भी नहीं रहेगा। फिलहाल चुनाव में करारी हार के चलते अब कमलनाथ को जीवन के आखिरी दौर में फिर से अपनी जमीन तैयार करने के लिए काफी मसक्कत करनी पड़ रही है।

कांग्रेस प्रदेश कार्यकारिणी भंग होने के बाद भी कुछ लतमार कार्यालय छोड़ने के लिए नहीं हो रहे तैयार
मप्र प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी को भंग हुए कई दिन बीच चुके हैं लेकिन कांग्रेस के कुछ ऐसे पदाधिकारी हैं तो अपना अधिकार जमाते हुए अब भी प्रदेश कार्यालय में आ जाते हैं (congress working committee)। ऐसे पदाधिकारियों में एक तथाकथित पत्रकार और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष का समन्वयक भी शामिल है। जिसके नेम प्लेट को भी तोड़ कर फेंक दिया गया लेकिन वो हैं कि अब भी कांग्रेस कार्यालय में अपना अधिकार जमाने के लिए आ जाते हैं। पूर्व अध्यक्ष की तरफ से इन्हे तीन लाख की सैलिरी पर रखा गया था और इनका काम था प्रवक्ताओं की जासूसी करना। इतने तक तो ठीक था लेकिन इन्होने पार्टी के सभी प्रवक्ताओं को अपना गुलाम समझ लिया था। अपनी धुन पर ये प्रवक्ताओं को नचाने का काम करने लगे थे। एक प्रवक्ता ने तो इनका ऐसे दामन थामा था कि वो उनका पल्लू ही नहीं छोड़ते थे। जो प्रवक्ता इनकी बात नहीं मानता था उसको स्क्रीन से बाहर कर दिया जाता था यानि कि उसको डिवेट नहीं दी जाती थी। दिल्ली से आए इन महाशय को बड़ा पत्रकार भी कहा जाता है मतगणना से पहले तक तो ये इतने आत्मविश्वास से भरे थे कि फोन लगा कर लोगों को धमकियां देने का काम करने लगे थे कि हमारी सरकार आ रही है हमारे हिसाब से ही काम करो नहीं तो ठिकाने लगा दिया जाएगा। इनका रुतवा इतना ज्यादा था कि कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष भी इनकी जी हुजूरी करने के लिए मजबूर थे। मतगणना के पहले तक ये कमलनाथ को कहते थे कि हुजूर हमारी सरकार प्रचंड बहुमत के साथ बन रही है और करीब 180 सीटें लेकर कांग्रेस आ रही है। सुनने में आया है कि जब प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी भंग हुई तो इनके कक्ष में रखे नेम प्लेट को किसी कार्यकर्ता ने तोड़ कर फेंक दिया लेकिन ये इतने बेशर्म हैं कि जब तक नई कार्यकारिणी नहीं आ जाती तब तक तो वो कार्यालय आ ही सकते हैं।

कांग्रेस की हार का बड़ा कारण,सर्वे एजेंसियों ने दावेदारों से डील कर कमलनाथ को दी गलत रिपोर्ट
मप्र विधानसभा चुनाव (madhya pradesh elections) में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला है। और कांग्रेस पार्टी (mp congress) को इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस हार में सबसे बड़ा हाथ कमलनाथ (kamal nath) द्वारा कराए गए उम्मीदवारों के लिए सर्वे रहा है। एक गुप्त रिपोर्ट के मुताबिक कमलनाथ ने मप्र से बाहर अलग-अलग स्टेट की सर्वे एजेंसियों को प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों में मजबूत दावेदारों का सर्वे करने का ठेका दिया था। इन सर्वे एजेंशियों ने कमलनाथ के साथ डबल क्रास किया। इन सर्वे एजेंसियों ने ना सिर्फ कमलनाथ से सर्वे के नाम पर पैसे लिया बल्किन इन एजेंसियों ने अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के संभावित दावेदारों की लिष्ट तैयार कर उनसे संपर्क किया और उनके पक्ष में रिपोर्ट तैयार करने के लिए उनसे मोटी रकम वसूल की। कमलनाथ ने उन्ही को टिकट दिया जिन्हे सर्वे एजेंसियों ने मजबूत कैंडिडेट बताया। यही कारण है कि कमलनाथ को पूरा विश्वास था कि उन्होने मजबूत उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा है और वो चुनाव में जीत दर्ज करेंगे। नतीजा ये निकला कि भाजपा के अभेद्य किले को भेदने निकले कांग्रेस के कमजोर उम्मीदवारों ने कमलनाथ और कांग्रेस की लुटिया डुबो कर रख दी। इस बात में कोई सक नहीं कि भाजपा ने जोरदार तरीके से किलेबंदी की थी जिसमें मोदी की गारंटी और लाड़ली बहनों का विश्वास शामिल था। ऐसे में उनका सामना करने के लिए कांग्रेस के कमजोर उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे और भाजपा ने उन्हे चारों खाने चित्त कर दिया।