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मुरैना,ग्वालियर और गुना के प्रत्याशी आज तय करेगी कांग्रेस,पचौरी बने स्टार प्रचारक
भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों ने नामांकन भरना शुरु कर दिया है तो वहीं दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी अब तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा ही नहीं कर पाई है। प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में कांग्रेस 22 सीटों पर ही अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर पाई है (congress lok sabha list)। खजुराहो सीट समाजवादी पार्टी के लिए कांग्रेस ने छोड़ दिया है। बताया जा रहा है कि आज होने वाली कांग्रेस केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक में मुरैना,ग्वालियर,गुना समेत छह सीटों के नाम को आज तय कर लिया जाएगा। बैठक में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी,और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार शामिल होंगे। बालाघाट सीट से प्रत्याशी बनाए गए सरस्वार को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच विरोध शुरु हो गया है जिससे पार्टी की टेंशन बढ़ गई है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार गुना लोकसभा सीट से जातीय समीकरण को देखते हुए कांग्रेस उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। पहले अरुण यादव ने भी गुना से चुनाव लड़ने के लिए दावेदारी की थी लेकिन पार्टी वहां से स्थानीय उम्मीदवार को ही टिकट देना चाहती है। इधर मजे की बात यह है कि अब तक कांग्रेस के मजबूत नेता कहे जाने वाले सुरेश पचौरी ने जिस दिन से बीजेपी का दामन थामा है उस दिन से उन्होने कांग्रेस में लगातार तोड़-फोड़ मचा रखी है। वो हर दूसरे-तीसरे दिन कांग्रेस के नेताओं को बीजेपी की सदस्यता दिला रहे हैं। जिसके फलस्वरुप सुरेश पचौरी को भारतीय जनता पार्टी ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची में उन्हे स्थान दिया है। अब सुरेश पचौरी भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कांग्रेस पर हमला बैलते नजर आएंगे।

कांग्रेस की जीत में रोड़ा बने 'जीतू पटवारी' पर्दे के पीछे से चार पत्रकार चला रहे कांग्रेस
देश भर की राजनीतिक पार्टिया लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) जीतने की रणनीति बनाने में जुटी हैं। लेकिन एमपी कांग्रेस (mp congress) के अध्यक्ष जीतू पटवारी (jitu patwari) कांग्रेस को खाली करने में लगे हैं। जिस दिन से कांग्रेस के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी है उसी दिन से कांग्रेस में पलायन का दौर शुरु हुआ जो अब तक निरंतर जारी है। जीतू पटवारी के पीसीसी चीफ बनने के बाद से अब तक करीब 16 हजार से ज्यादा कार्यकर्ता पार्टी छोड़ भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं। इन दिनों एक और बात भी निकल कर सामने आ रही है कि एमपी कांग्रेस को पर्दे के पीछे से चार पत्रकार चला रहे हैं। वो पत्रकार अक्सर जीतू पटवारी के निवास पर पाए जाते हैं। इनके अलावा जो भी पत्रकार जीतू पटवारी से मिलने जाता है कुछ देर बैठ कर बात करना चाहता है उसको जीतू पटवारी बड़े ही आदर भाव से चलता करते हैं। जीतू पटवारी पहले पत्रकार के कंधे पर हाथ रखते हैं कुछ देर इधर-उधर घुमा कर कुछ बातें करते हुए कहते हैं कि तू तो मेरा भाई है और फिर बड़े प्यार से गेट के बाहर का रास्ता दिखा देते हैं। जीतू पटवारी के अध्यक्ष बनने पर लोगों को लगा था कि युवा चेहरे को मौका मिला है कुछ नया और अच्छा बदलाव देखने को मिलेगा। लेकिन जीतू पटवारी की अकड़ ने कुछ नया करने की बजाय पार्टी को और गर्त में डालने का काम किया है। पार्टी के कितने कार्यकर्ता छोड़ कर भाजपा में जा चुके हैं उन्हे तो ये भी नहीं मालूम मीडिया कर्मियों से जीतू पटवारी पूछते नजर आते हैं कौन छोड़ कर चला गया।

चुनाव में संभावित हार देखकर भी सियासी जमीन बचाने के लिए चुनाव लड़ रहे कई कांग्रेस नेता
भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव (vidhansabha elections) खत्म होते ही लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) का शंखनाद कर दिया था। एमपी बीजेपी की ही बात करें तो कांग्रेस अब भी अपने सभी उम्मीदवारों का ऐलान नहीं कर पाई है। उधर बीजेपी ने न सिर्फ उम्मीदवारों का ऐलान किया है बल्कि शक्ति केन्द्रों पर पथ सम्मेलन,होली के मौके पर 'मोदी की राम-राम' लेकर भाजपा के कार्यकर्ता घर-घर पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं भारतीय जनता पार्टी के सातों मोर्चे और जितने भी अनुशांगिक संगठन हैं सभी घर-घर जाकर लगातार वोटरों से संवाद कर रहे हैं और इतना सबकुछ होने के बाद भी कांग्रेस के कुछ नेताओं को लग रहा है कि वो चुनाव में भाजपा को न सिर्फ टक्कर देंगे बल्कि वो जीत कर आएंगे। जबकि हकीकत यही है कि उन्हे इस बात का पूरी तरह से अहसास है कि चुनाव में उनकी करारी हार होने जा रही है। उन्ही नेताओं में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह,कांतीलाल भूरिया सहित कई ऐसे कांग्रेस नेता हैं जिन्हें मालूम है कि चुनाव में उनकी क्या दशा होने वाली है लेकिन पार्टी ने उम्मीदवारों के अभाव में इन बड़े नेताओं को चुनाव मैदान में उतरने का आदेश दिया है तो वो भी अपनी सियासी जमीन बचाए रखने के लिए ना-ना करते-करते चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। अब सवाल इस बात का उठता है कि जिस ईवीएम मशीन का दिग्विजय सिंह अब तक विरोध करते रहे हैं और उसमें फर्जी मतदान पड़ने का मीडिया के सामने डेमो भी देते रहे हैं अब उसी ईवीएम मशीन से दिग्विजय सिंह के लिए भी जनता वोट करेगी। दिग्विजय सिंह के ईवीएम को लेकर समय-समय पर लगाए गए आरोपों से यह सिद्ध होता है कि वो चुनाव में पहले से ही हारने का मन बना कर चुनाव मैदान में उतरे हैं। क्योंकि दिग्विजय सिंह को ईवीएम मशीन पर विश्वास नहीं है और उन्हे उसी ईवीएम की शरण में जाना पड़ेगा और चुनाव जीतना है तो उसी ईवीएम की आरती भी उतारनी पड़ेगी। कांग्रेस के कुछ अन्य उम्मीदवार भी हैं जो यह दम भर रहे हैं कि वो चुनाव में खुद के दम पर जीत दर्ज कर लेंगे। बाद में कहते हैं ईवीएम में गड़बड़ी के कारण कुछ भी हो सकता है। वहीं कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता ऐसे भी हैं जो पार्टी से नाराज चल रहे हैं और कहते हैं की पूरी पार्टी को भगवान राम का श्राप लगा है कांग्रेस के लोगों ने भगवान राम के प्रकोष्टव का आमंत्रण ठुकराया था उसके बाद से ही पार्टी की दुर्दशा होनी शुरु हो गई है।

रीवा,सतना,अनूपपुर,जबलपुर और छिंदवाड़ा के हजारों कांग्रेसियों ने थामा बीजेपी का दामन
लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) से पहले कांग्रेस पार्टी में पलायन का दौर लगातार जारी है। गुरुवार को हजारों की संख्या में रीवा,सतना,अनूपपुर जबलपुर और छिंदवाड़ा के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का हाथ छोड़ कर बीजेपी का दामन थाम लिया है। भाजपा में ज्वाइन करने वाले नेताओं में पूर्व विधायक और जिला पंचायत अध्यक्षों सहित अलग- अलग तरह के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की सदस्यता ली है। ज्वाइनिंग कमेटी के प्रदेश संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) ने जानकारी देते हुए बताया कि अब तक करीब 15 हजार कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। और यह आंकड़ा ठीक इसके डबल होने की उम्मीद जताई जा रही है। होली के बाद एक बार फिर ज्वाइनिंग का दौर शुरु होगा जिसमें हजारों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल होने वाले हैं। Mukhabirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार जीतू पटवारी (jitu patwari) के पीसीसी चीफ बनने के बाद ऐसा पहला मौका है जब कांग्रेस के कार्यकर्ता इतनी बड़ी संख्या में बीजेपी का रुख कर रहे हैं। इस पलायन का कारण भी जीतू पटवारी ही बताए जा रहे हैं क्योंकि उनके पीसीसी चीफ बनने के बाद कार्यकर्ताओं में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है इसके अलावा पार्टी का सत्ता में नहीं आना भी कांग्रेस से पलायन बड़ा कारण बताया जा रहा है।

कांग्रेस केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक,18 सीटों पर अब तक तय नहीं हो पाए उम्मीदवार
भारतीय जनता पार्टी से चुनावी तैयारियों में पिछड़ी कांग्रेस केन्द्रीय चुनाव समिति (congress working committee) की बैठक दिल्ली में आयोजित होने जा रही है जिसमें एमपी के लिए 18 उम्मीदवारों का ऐलान किया जाना है। कांग्रेस अब तक दस उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है 18 सीटों पर प्रत्याशियों का चयन किया जाना है। एक सीट खजुराहो कांग्रेस पार्टी ने अपने सहयोगी दल समाजवादी पार्टी को दिया है। अब तक हुई बैठकों में कांग्रेस को मजबूत प्रत्याशी नहीं मिले जिसके कारण पार्टी 18 सीटों पर उम्मीदवारों का चयन करने में नाकाम रही है। कांग्रेस पार्टी को विंध्य में भी उम्मीदवारों को लेकर काफी माथापच्ची करनी पड़ रही है। सतना छोड़ अन्य सीटों पर कांग्रेस अब भी उम्मीदवारों की खोज करने में लगी हुई है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस पार्टी रीवा से विधायक अभय मिश्रा की पत्नी नीलम मिश्रा को टिकट दे सकती है। ऐसी स्थिति में रीवा का मुकाबला का त्रिकोणीय होने वाला है। सतना में भी मुकाबला त्रिकोणीय होने की बात सामने आ रही है।

धर्म से बात न बने तो जातियों को अलग कर सत्ता तक पहुंचा जा सकता है,ऐसा सोचते हैं कांग्रेस के कार्यकर्ता
मिशन 2024 की तैयारियों में जुटी भाजपा और कांग्रेस में इन दिनों जनता के दिल तक उतरने के लिए मुद्दों की तलाश है। भाजपा का स्टैंड तो क्लियर है राम मंदिर और हिंदुत्व लेकिन कांग्रेस अब तक अपना चुनावी एजेंडा तय नहीं कर पाई कि चुनाव में जाकर वो भाजपा का काउंटर कैसे करेगी। ऐसे में शुक्रवार को कांग्रेस का एक कार्यकर्ता पीसीसी चीफ जीतू पटवारी (jitu patwari) के पास टिकट की चाहत लिए पहुंचता है। जीतू पटवारी कहते हैं कि युवा वर्ग चुनाव लड़ने का इच्छुक है अच्छी बात है लेकिन चुनावी समर में जब उतरोगे तो भाजपा के बड़े मुद्दों का काउंटर कैसे करोगे। ऐसे में कांग्रेस के कार्यकर्ता का जवाब आता है कि भाजपा धर्म की और भगवा की बात करती है जो जनता को पसंद आती है। इसकी काट यही है कि हम लगातार जातियों की बात करें। जाति आधारित जनगणना की बात करे। अलग-अलग वर्गों के पास जाएं बार-बार उनके पिछड़े होने का अहसास दिलाएं और बताएं की जातियों की जनगणना होने से सभी जातियों की संख्या क्लियर हो जाएगी और उससे विकास के नए दरवाजे खुलेंगे। मतलब साफ है कि कांग्रेस के पास भाजपा का काउंटर करने के लिए कुछ नहीं बचा तो डिवाइड एंड रुल की पॉलिसी पर कांग्रेस काम करने लगी मतलब फूट डालो और शासन करो की रणनीति पर कगंग्रेस पार्टी आगे बढ़ रही है। राहुल गांधी भी भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान हर जगह अपने संबोधन में जाति आधारित जनगणना कराने की बात करते हैं। सत्ता पाने के लिए जब धर्म का मुद्दा काम नहीं आया तो कांग्रेस ने जातियों का सहारा लेना शुरु कर दिया है।

सुरेश पचौरी के बीजेपी में शामिल होते ही एमपी कांग्रेस में 'दिग्विजय' बाद हावी
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि कांग्रेस नेता आधारित पार्टी है। जहां नेताओं के जयकारे लगाए जाते हैं न कि पार्टी के समर्थन में जयकारे लगाए जाते हैं। पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी (suresh pachouri) ने अपने कई समर्थकों के साथ बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। सुरेश पचौरी के कांग्रेस छोड़ने पर पार्टी के नेताओं को पछतावा तो दूर की बात है बल्कि कांग्रेस पार्टी में जश्न का माहौल है। क्योंकि सुरेश पचौरी के पार्टी छोड़ने के बाद कांग्रेस में मैदान खाली हो गया। एक के बाद एक कांटे कांग्रेस के खुद निकलते चले गए ऐसे में मैदान खाली देख कांग्रेस पार्टी में दिग्विजय सिंह (digvijaya singh) के समर्थकों ने अपना आधिपत्य स्थापित करना शुरु कर दिया। इन दिनों एमपी कांग्रेस में पूर्व सीएम दिग्विजय खेमे का बोलबाला देखने को मिल रहा है। ऐसे में जो दिग्विजय समर्थक नहीं हैं अथवा उनके खेमे के नहीं हैं वो अपनी ही पार्टी में बेगाना सा महसूस करने लगे हैं। पार्टी में अब भी ऐसे कई प्रतिभाशाली और मेहनती वर्कर हैं जो पार्टी के लिए काम तो करना चाहते हैं लेकिन दिग्विजय वाद हावी होने के कारण वो पार्टी में काम नहीं कर पा रहे हैं। कार्यालय में पार्टी के कार्यकर्ता आते हैं तो उन्हे बैठने के लिए स्थान भी नहीं मिलता जिसके कारण वो पार्टी कार्यालय के बाहर चाय की दुकान में भटकते हुए अक्शर देखे जाते हैं। जीतू पटवारी को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया लेकिन वो अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहे हैं। जिस दिन से जीतू पटवारी को पार्टी की कमान मिली है उस दिन से कांग्रेस में लगातार पलायन का दौर जारी है। एक के बाद एक बड़े नेता कांग्रेस का हाथ छोड़ कर फूल का दामन थामते चले जा रहे हैं। कुल मिला कर कांग्रेस पार्टी इस समय अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है। पार्टी की स्थिति सुधरना तो दूर लगातार नए-नए खेमे पनपते चले जा रहे हैं और जो नेता खेमेबाजी करने में सक्षम नहीं हैं वो दिग्विजय सिंह के सामने माथा टेकने के लिए मजबूर हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरु हो चुकी है और कांग्रेस कार्यालय में किसी प्रकार की चुनावी रौनक देखने को अब तक नहीं मिल रही है। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि टीवी डिवेट में बैठने के लिए कांग्रेस में प्रवक्ता तक उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। ऐसे में बीजेपी प्रवक्ताओं को भी डिबेट करने में मजा नहीं आ रहा है।

पूरी कांग्रेस खाली हुई जा रही है और राहुल गांधी चने के झाड़ में बैठ कर गिनती कर रहे हैं
कांग्रेस मुक्त अभियान के तहत भारतीय जनता पार्टी में लगातार ज्वाइनिंग का कारवां बढ़ता चला जा रहा है। बुधवार को मुरैना जिले के करीब 500 और छिंदवाड़ा के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की सदस्यता ले ली (bjp membership)। इन सभी कार्यकर्ताओं को ज्वाइनिंग कमेंटी (bjp joining committee) के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने पार्टी का अंग वस्त्र पहना कर बीजेपी की सदस्यता दिलाई है। विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक के सफर में कांग्रेस के 15 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं बीजेपी का दामन थाम लिया है। मजे की बात ये है कि रोजाना सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता बीजेपी की सदस्यता ले रहे हैं यहां तक की कांग्रेस के पास इस वक्त मजबूत उम्मीदवार तक नहीं हैं इसके वाबजूद कांग्रेस के नेता पार्टी में चल रहे पलायन को रोकने का कोई उपाय नहीं कर रहे हैं। राहुल गांधी (rahul gandhi) भारत न्याय यात्र निकाल कर चने के झाड़ में चढ़े बैठे हैं उन्हे लग रहा है कि जनता कांग्रेस को जिताएगी और भारतीय जनता पार्टी है कि कांग्रेस के हर कार्यकर्ता को भाजपा की सदस्यता दिलाती चली जा रही है।

कांग्रेस में उम्मीदवारों का अकाल,पूछ रही सवाल क्या गारंटी है टिकट मिला तो आप अंत तक टिके रहेंगे
कांग्रेस पार्टी जिन नेताओं पर दांव लगाने का सोचती है वही नेता भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर लेते हैं। मंगलवार को कांग्रेस के दस नामों की जारी सूची में स्पष्ट नजर आया कि देश की सबसे पुरानी पार्टी के पास आज उम्मीदवारों का अकाल पड़ चुका है (congress lok sabha candidate list) । कांग्रेस पार्टी ने दस उम्मीदवारों में तीन वर्तमान विधायकों को चुनावी मैदान में उतारा है उससे यह तस्वीर साफ हो गई कि कांग्रेस में उम्मीदवारों का अकाल पड़ गया है। हार के डर से पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह,विवेक तन्खा सहित कई नेताओं ने चुनाव लड़ने से साफ मना कर दिया है। ऊपर से कांग्रेस जिन नेताओं पर दांव लगाने का सोचती है वही नेता अगले दिन भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर लेते हैं। इसी प्रकार कांग्रेस नेत्रृत्व ने जबलपुर महापौर जगत बहादुर सिंह और सागर से अरुणोदय को भी लोकसभा में उतारने की रणनीति बनाई थी लेकिन इन दोनों नेताओं ने ऐन मौके पर कांग्रेस का हाथ छोड़ फूल का दामन थाम लिया। दिल्ली में जब कांग्रेस चुनाव समिति की बैठक हुई तो सबसे पहले यही सवाल उठा कि जिन नेताओं को वो टिकट देंगे उनकी मैदान में टिके रहने की क्या गारंटी है। पिछले एक हफ्ते से कांग्रेस का केन्द्रीय नेत्रृत्व लगातार अपने नेताओं को फोन करके सवाल कर रहा है कि चुनाव लड़ने की इच्छा है क्या? और अगर पार्टी आपको टिकट देती है तो क्या आप चुनाव मैदान में डटे रहेंगे। इस प्रकार के कई सवाल कांग्रेस नेत्रृत्व द्वारा संभावित दावेदारों से किए जा रहे हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी की ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस की कमर तोड़ने का पूरी तरह से मन बना लिया है। वो लगातार कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भाजपा में शामिल कराते जा रहे हैं इसी लिए पूरी कांग्रेस में खलबली मची हुई है। कांग्रेस पार्टी में बचे खुचे नेताओं को सक की नजर से देखा जा रहा है। कोई भी नेता एक दूसरे पर विश्वास नहीं कर रहा है।

कांग्रेस टिकट देने से पहले पूछ रही पार्टी तो नहीं छोड़ोगे,आज 14 उम्मीदवारों की घोषणा करेगी कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी ने केन्द्रीय चुनाव समिति (congress cec meeting) की बैठक में एमपी की 14 लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों का नाम तय कर लिया है (congress candidate list)। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस चुनाव समिति की बैठक में सोनिया गांधी की मौजूदगी में उम्मीदवारों के नामों पर मंथन किया गया। बैठक में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी,नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघर भी शामिल हुए। बैठक के बाद जानकारी देते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बताया कि 70% सीटों पर नाम तय कर लिए गए हैं। सर्वे के आधार पर जो नाम सर्वश्रेष्ठ थे उन्ही नामों पर सहमति बनी है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार छिंदवाड़ा से नकुलनाथ एक बार फिर चुनाव मैदान में होंगे। जिन सीटों पर सिंगल नाम थे उन सीटों को भी फायनल कर दिया गया है। कांग्रेस के पास उम्मीदवारों की कमी का मुद्दा भी इस बैठक में जमकर गर्माया है। कांग्रेस के कई ऐसे दावेदार थे जिन्हे पार्टी लोकसभा में उतारने जा रही थी लेकिन उन्होने नाम की घोषणा से पहले ही कांग्रेस का हाथ छोड़ कर फूर थाम लिया जिसके कारण कांग्रेस पार्टी को उम्मीदवारों की घोषणा करने पर दिक्कत हो रही है। कांग्रेस के नेता एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं। टिकट देने से पहले कांग्रेस अपने संभावित दावेदारों से पूछ रही है कि ऐन मौके पर पार्टी छोड़ कर तो नहीं जाओगे। जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी ने मिशन कांग्रेस मुक्त अभियान चला कर कांग्रेस नेताओं को भाजपा में शामिल करने का अभियान चलाया है उससे कांग्रेस का केन्द्रीय नेत्रृत्व काफी सहमा हुआ है। कांग्रेस के नेता पूरे दम-खम के साथ लोकसभा चुनाव लड़ने की बात तो कर रहे हैं लेकिन उन्हे यही विश्वास नहीं हो रहा कि जिन्हे वो टिकट दे रहे हैं क्या वास्तव में वो नामांकन के आखिरी दिन तक कांग्रेस पार्टी में रहेंगे अथवा मौके पर पार्टी का दामन छोड़ कर हाथ में फूल तो नहीं थाम लेंगे।

कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका,सुरेश पचौरी सहित आधा दर्जन नेता बीजेपी में हुए शामिल
मप्र में राहुल गांधी के जाते ही कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। कांग्रेस नेताओं में चार बार राज्यसभा सांसद रहे और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी (suresh pachouri) ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। सुरेश पचौरी के साथ, विशाल पटेल,गजेंद्र सिंह राजू खेड़ी,संजय शुक्ला,अर्जुन पलिया,आलोक चंसोरिया,कैलाश मिश्रा,योगेश शर्मा,अतुल शर्मा,सुभाष यादव,दिनेश ढिमोले ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इन सभी नेताओं को जॉइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) भाजपा में लेकर आए हैं। ज्वानिंग के दौरान प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा,सीएम मोहन यादव,पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान,मंत्री कैलाश विजय वर्गीय मौजूद रहे। भाजपा की सदस्यता लेने के बाद सुरेश पचौरी ने कहा कि जिस प्रकार से भगवान राम के स्थापना दिवस के निमंत्रण को कांग्रेस ने अस्वीकार कर दिया था उसके बाद से ही वो आहत चल रहे थे। साथ में सुरेश पचौरी ने ये भी कहा कि पहले वाली कांग्रेस अब नहीं रही। और यही कारण है कि उन्होने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। सुरेश पचौरी ने कहा कि यूं ही कोई वेबफा नहीं होता। कुछ तो कारण रहे होंगे वेवफा होने के।

बीजेपी में पांच सीटों पर अब तक नहीं हुआ फैसला,चार में महिला उम्मीदवार की उम्मीद,कांग्रेस की बैठक आज
भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए एमपी की 29 लोकसभा सीटों में 24 की घोषणा कर दी है (bjp lok sabha candidate list) । अब पांच सीटों पर संशय की स्थिति बन गई है। केन्द्रीय हाई कमान का मानना है कि कमजोर सीटों पर महिला उम्मीदवारों को मौका दिया जाना चाहिए। माना जा रहा है कि इसी लिए भाजपा में बची हुई पांच सीटों के लिए फैसला नहीं हो पार रहा है। Mukhabirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार छिंदवाड़ा छोड़ कर बांकी की चार सीटों पर बीजेपी महिला उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतार सकती है (mo bjp)। अभी तक 24 सीटों में चार महिला उम्मीदवारों को भाजपा ने मौका दिया है। पार्टी के केन्द्रीय नेत्रृत्व का मानना है कि महिलाओं की भागीदारी और बढ़नी चाहिए इसलिए पांच में चार सीटें महिलाओं के खाते में जाने की संभावना बढ़ गई है। उधर कांग्रेस की बात करें तो अभी तक एक भी प्रत्याशी की घोषणा कांग्रेस पार्टी नहीं कर पाई है। आज दिल्ली में कांग्रेस ने केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक आयोजित की है। जिसमें स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा प्रस्तावित नामों पर विचार कर उसे अंतिम रुप दिया जाएगा। बैठक में प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी जितेन्द्र सिंह, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी,विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पूर्व मंत्री ओमकार सिंह मरकाम भाग लेंगे। गौरतलब है कि कांग्रेस ने प्रत्याशी चयन के लिए सभी 29 लोकसभा क्षेत्रों में रायशुमारी कराई थी। समन्वयकों ने जिला,ब्लाक इकाइयों के पदाधिकारी,विधायक,विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी,पार्टी के सभी संगठनों के पदाधिकारियों से संभावित दावेदारों से जानकारी ली है।