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मोहन यादव की कैबिनेट में राजगढ़ जिले से मिल सकता है मंत्री पद
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज करने के बाद बीजेपी के मनोनीत मुख्यमंत्री मोहन यादव (mohan yadav) ने बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। मोहन यादव के साथ जगदीश देवड़ा (jagdish dewda) और राजेश शुक्ला (rajesh shukla) ने भी राज्य के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। बता दें, बीजेपी ने मुरैना से विधायक और पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (narendra singh tmar) को विधानसभा स्पीकर नियुक्त किया है। वहीं, आज वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव (gopal bhargava) को प्रोटेम स्पीकर की शपथ दिलाई गई। अब सबके मन में सवाल उठ रहा है कि मध्य प्रदेश की नई सरकार में कौन-कौन विधायक होंगे, जिन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। माना जा रहा है कि 30 से 35 विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। ऐसे में मंत्री पद पर उनका हक ज्यादा बताया जा रहा है जहां वोट प्रतिशत अधिक रहा है। वोट प्रतिशत अधिक, इसलिए मंत्री पद पर हक ज्यादा राजगढ़ जिले की पांचों सीटों पर भाजपा ने प्रचंड जीत दर्ज की है। राजगढ़ जिले में वोट प्रतिशत 80 रहा है। ऐसे में इस जिले से नई सरकार में मंत्री पद मिलना लगभग तय माना जा रहा है। जिले की ब्यावरा विधानसभा सीट से नारायण सिंह पंवार, राजगढ़ सीट से अमर सिंह यादव और नरसिंहगढ़ से मोहन शर्मा का नाम शामिल है। बता दें कि पिछली 15 वीं विधानसभा में इस जिले से कोई मंत्री नहीं था। वहीं, 18 महीने की कांग्रेस सरकार में खिलचीपुर सीट से विधायक प्रियव्रत सिंह को ऊर्जा मंत्री बनाया गया था। ऐसे में नई सरकार इस जिले से किसी एक विधायक को मंत्रीमंडल में शामिल कर सकती है। बता दें कि शिवराज सरकार में शिक्षा मंत्री रहे मोहन यादव राजगढ़ जिले के प्रभारी मंत्री रह चुके हैं। जिसका फायदा जीतकर आए विधायकों को मिल सकता है। इन सीटों पर 80 प्रतिशत वोट राजगढ़, आगर-मालवा, नीमच, शाजापुर, सिवनी, राजगढ़ और रतलाम इनका हक ज्यादा राजगढ़ और सिवनी इन सीटों पर 75 से फीसदी तक बालाघाट, डिंडौरी, मंदसौर, श्योपुर, निवाड़ी, नर्मदापुरम, देवास, विदिशा, खरगोन और शहडोल इनका हक ज्यादा श्योपुर, निवाड़ी और शहडोल

कार्यकारी सीएम शिवराज का बयान,यह अंत नहीं लौट कर आउंगा
प्रदेश की 18 साल तक बागडोर संभालने वाले कार्यकारी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने प्रेसवार्ता आयोजित कर अपने 18 साल के कार्यकाल की जानकारी दी। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब वो मुख्यमंत्री बने थे तब प्रदेश बीमारु राज्य हुआ करता था जिसको उन्होने दिन रात मेहनत कर विकसित राज्य की श्रेणी में खड़ा किया है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि लाड़ली बहना योजना उन्होने महिलाओं वोट के लिए नहीं शुरु की थी बल्कि नारी सशक्तिकरण की दिशा में कदम उठाने के प्रयास किया था। और उसका असर भी देखने को माला है। कार्यकारी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि भाई बहन और मामा का जो रिस्ता है वो हमेशा आखिरी सांस तक बना रहेगा। प्रेसवार्ता समाप्त होने के बाद शिवराज सिंह चौहान जब मीडिया कर्मियों के बीच आए तो उन्होने कहा कि यह अंत नहीं है लौक कर जरुर आउंगा किसी न किसी भूमिका में। शिवराज सिंह चौहान जब 74 बंगला स्थित उनके नवीन भवन में पहुंचे तो उनसे मिलने के लिए उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला भी उनका स्वागत करने के लिए आए। जहां दोनों नेताओं ने काफी देर तक आपस में बात की। गौरतलब है कि राजेन्द्र शुक्ला और शिवराज सिंह चौहान को एक दूसरे का बेहद करीबी माना जाता है।

लाड़ली बहन को सीएम भाई का वादा,बहन मै तुम्हारे साथ हूं
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) प्रदेश की महिलाओं को लाड़ली बहना (ladli behna yojana) कहने तक ही सीमित नहीं हैं इसकी जीती जागती तस्वीर भी जनता के सामने आती रहती है। जब भी किसी महिला पर अत्याचार की खबर मुख्यमंत्री के पास पहुंची है तो वो एक भाई की तरह ही उससे संपर्क करते हैं और यथासंभव अपने निवास पर बुला कर उसको संबल देने का काम भी करते हैं। दरअसल सीहोर से लगे अहमदपुर थाना के बरखेड़ा हसन गांव में एक ऐसा मामला सामने आया जहां की रहने वाली महिला का आरोप है कि बीजेपी को वोट देने पर उसके देवर ने जमकर मारपीट कर दी। सीएम को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने महिला को सीएम आवास बुलाकर चर्चा की, उसका हाल जाना और उसे सुरक्षा और सम्मान देने को लेकर आश्वस्त किया। दरअसल, समीना बी नाम की महिला अपने बच्चों के साथ सीएम हाउस पहुंचीं. उन्हें सीएम शिवराज सिंह ने यहां बुलाया था। कारण, सीएम को जानकारी मिली थी कि बीजेपी को वोट देने पर सीहोर जिले के बरखेड़ा हसन गांव की मुस्लिम महिला के साथ मारपीट की गई है. इसके बाद सीएम शिवराज ने समीना बी को सीएम आवास बुलाकर चर्चा की, उसका हाल जाना और उसे सुरक्षा और सम्मान देने को लेकर आश्वस्त किया। मुलाकात के बाद सीएम शिवराज ने कहा कि मजबूत लोकतंत्र के लिए भाजपा को अपना मत देने पर मेरी एक बहन को उसके परिवार द्वारा प्रताड़ित करने का मामला मेरे संज्ञान में आया है। मैंने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देशित कर उचित कार्रवाई करने को कहा है. इसके साथ ही पीड़ित बहन को पूरी सुरक्षा व आर्थिक मदद भी दी जाएगी। मैंने उनसे कहा है कि मेरी बहन, तुम किसी बात की चिंता मत करना, तुम्हारा भाई सदैव तुम्हारे साथ है।

करारी हार के बाद भी कांग्रेस के एजेंडे से बाहर है सामान्य वर्ग
मप्र में करारी हार का मंथन करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को दिल्ली में बैठक बुलाई थी (aicc meeting)। जिसमें पीसीसी चीफ कमलनाथ (kamal nath),दिग्विजय सिंह (digvijaya singh),गोविंद सिंह (govind singh) सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक के दौरान मप्र में कांग्रेस की हुई करारी हार के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया गया। करीब दो घंटे तक चली बैठक में एमपी कांग्रेस के अलग-अलग नेताओं से बात की गई। बैठक के बाद प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला मीडिया से रु-ब-रु हुए । इस दौरान उन्होने बैठक के बिंदुओं का एक-एक करके जवाब दिया। रणदीप सुरजेवाला ने अपने बयान में कहा कि एमपी में कांग्रेस चुनाव भले हार गई है लेकिन जनता की सेवा कांग्रेस लगातार करती रहेगी। इस दौरान रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि एससी,एसटी और पिछड़ा वर्ग के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय भाजपा की सरकार में हुआ तो कांग्रेस पार्टी बर्दास्त नहीं करेगी। लेकिन इस बयान में सामान्य वर्ग का नाम रणदीप सुरजेवाला ने नहीं लिया। अब सवाल इस बात का उठता है कि क्या सामान्य वर्ग के लोगों के साथ अन्याय नहीं होता है,क्या सामान्य वर्ग के लोग गरीब नहीं होते हैं। इसी प्रकार कांग्रेस ने टिकट वितरण के दौरान भी सामान्य वर्ग की लगातार उपेक्षा की थी जिसका परिणाम रहा कि कांग्रेस पार्टी को इतनी करारी हार का सामना करना पड़ा जिसकी उम्मीद तो भाजपा के नेताओं को भी नहीं थी। अब कांग्रेस की बैठक में सामान्य वर्ग का किसी प्रकार से नाम नहीं आने का मतलब साफ है कि कांग्रेस पार्टी के किसी भी एजेंडे में सामान्य वर्ग शामिल ही नहीं है। कांग्रेस की सरकार नहीं बनी इतनी नाकामी मिली उसके बाद भी कांग्रेस पार्टी सामान्य वर्ग के हित की बात नहीं कर रही है। कांग्रेस का मीडिया विभाग संभालने वाले भी सामान्य वर्ग के खिलाफ ही बात करते नजर आते हैं मतलब साफ है कि कांग्रेस पार्टी में सामान्य वर्ग के लिए कोई स्थान नहीं है।

'सुन लो रे कांग्रेसियो प्रदेश के हर घर में लाड़ली बहनों का ही राज चलता है'
मप्र में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड जीत दर्ज की है (madhya pradesh elections)। प्रदेश का हर राजनीतिक पंडित यही कह रहा था कि इस बार टफ फाइट है,कुछ ने यह माना कि इस बार के चुनाव में कांग्रेस पार्टी 140 से 160 सीटें जीतेगी,लेकिन उन राजनीतिक पंडितों को यह नहीं मालूम था कि हारी बाजी कैसे जीती जाती है उसका सबसे बड़ा उदाहरण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) हैं। जहां से राजनीतिक पंडितों की सोच खत्म होती है वहीं से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सोच शुरु होती है। प्रदेश का हर ब्यक्ति यही कह रहा था कि सीएम के खिलाफ एंटीइंबेंसी है लेकिन उसे प्रो इंकंबेंसी में कैसे तब्दील करना है यह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बखूबी आता है। जिस वक्त लोग पाला बदलने में लगे थे उस वक्त मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी योजनाओं को अमली जामा पहनाने में लगे थे। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले प्रदेश की आधी आवादी यानि महिलाओं को भाजपा की सरकार और खुद से जोड़ने की मुहिम शुरु की (ladli behna)। जिसके तहत उन्होने लाड़ली बहना योजना का आगाज किया। जिसके तहत सीएम शिवराज ने महिलाओं को आर्थिक रुप से सक्षम बनाने पर जोर दिया और उन्हे एक हजार रुपये देने की घोषणा कर दी। योजना की पहली किस्त डालते समय मुख्यमंत्री ने एक और बड़ा दांव खेला और कहा कि इस योजना को वो आगे बढ़ा कर तीन हजार रुपये तक कर देंगे। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने लाड़ली बहना योजना के तहत घरेलू गैस सिलेंडर को 450 रुपये में देने की घोषणा भी कर दी। इस योजना को लांच करने के बाद मुख्यमंत्री ने ताबड़ तोड़ सभाएं लेनी शुरु की और महिलाओं से लगातार संपर्क और संवाद किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस बात का अहसास था कि बहनें अपने भाई को कभी धोखा नहीं दे सकतीं। और भाई बहन के इस अटूट संबंध को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लगातार मजबूत किया। सीएम शिवराज की जितनी तस्वीरें भी जारी होती थी वो लाड़ली बहनों के साथ ही होती थी। आखिरकार मुख्यमंत्री द्वारा बनाई गई रणनीति काम आई और लाड़ली बहनों ने अपने लाड़ले भाई का विश्वास नहीं तोड़ा। यह भी बता दिया कि घर के बाहर किसी का राज चले लेकिन घर के अंदर लाड़ली बहनों का ही राज चलता है।

कांग्रेस की सरकार बनी तो शर्त में मिलेंगे एक लाख,स्टांप पर लिख कर दिया
तीन दिसंबर को मतगणना होने वाली है लेकिन उसके पहले लोगों के धैर्य का बांद फूट रहा रहा (madhya pradesh elections)। दरअसल प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस में से किसकी सरकार बनेगी उसको लेकर शर्त लगाने का दौर तेज हो गया हो। दो लोगों ने शर्त की सीमा को लांघते हुए स्टांप पेपर पर एक लाख रुपये की शर्त लगा डाली है। बकायता दोनों ने स्टांप पेपर में एक लाख रुपये की शर्त लगाई है। धनीराम भलावी ने शर्तलगाते हुए कहा है कि कांग्रेस की सरकार (congress government) बनेगी वहीं नीरज मालवीय ने कहा है कि भाजपा की सरकार (bjp government) बनेगी। शर्त को और अपनी बात को सही साबित करने के लिए नोटरी से पचास रुपये स्टांप भी बनवाया गया है। इतना ही नहीं दोनों ने एक-एक लाख का चेक साइन कर गांव के ही अमित पांडे को दिया है जिसकी सर्त सही साबित होगी वो नीरज पांडे से एक लाख रुपये का चेक प्राप्त कर लेगा। यह पहला मौका नहीं है इससे कुछ दिन पहले भी इसी प्रकार से सर्त लगाई गई थी। फिलहाल इंतजार तीन दिसंबर का है जिस दिन मतगणना होगी उस दिन क्लियर होगा की एक लाख की लाटरी किसकी लगने वाली है।

बंपर वोटिंग सत्ता परिवर्तन के दे रही संकेत,राजनीतिक पार्टियां निकाल रहीं वोटिंग के मायने
प्रदेश में जब भी बंपर वोटिंग हुई है तब सत्ता परिवर्तन हुए हैं (madhya pradesh elections)। भाजपा और कांग्रेस इस वक्त यही गुत्थी सुलझाने में लगे हैं कि बंपर वोटिंग के मायने क्या हैं यह वोटिंग भाजपा के पक्ष में हुई है अथवा कांग्रेस के पक्ष में हुई है। आइए जानते हैं कि 2003 से लेकर 2018 तक राज्य में कितनी वोटिंग हुई और किसकी सरकार बनी। मध्यप्रदेश में 2018 में 75 फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई थी। 2018 के विधानसभा चुनाव में 75.2 फीसदी मतदान हुआ था। जिसके बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ था। हालांकि किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। कांग्रेस को सबसे ज्यादा 114 और बीजेपी को 109 सीटें मिलीं थी। वहीं, वोट शेयर की बात करें तो 2018 में बीजेपी को कांग्रेस से ज्यादा वोट मिले थे। 2013 के विधानसभा चुनाव में राज्य की 230 विधानसभा सीटों पर 70.8 फीसदी वोटिंग हुई थी। इस चुनाव में बीजेपी को 165 और कांग्रेस को मात्र 57 सीटों पर जीत मिली थी। मध्यप्रदेश में 2008 के विधानसभा चुनाव में 69 फीसदी वोटिंग हुई थी। 70 फीसदी से कम हुई वोटिंग के बाद भी बीजेपी ने अपनी सरकार को बरकरार रखा था। बीजेपी को 143 और कांग्रेस को 71 सीटों पर जीत मिली थी। मध्यप्रदेश में 2003 के चुनाव बेहद अमह माने जाते थे। मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ के अलग होने के बाद राज्य में पहली बार चुनाव हुए थे। 2003 में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। बीजेपी ने उमा भारती के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था। 2003 में राज्य में 67 फीसदी वोटिंग हुई थी। तब बीजेपी को 173 और कांग्रेस को मात्र 38 सीटों पर जीत मिली थी। मध्यप्रदेश के बीते पांच चुनावों की बात करें तो केवल 2018 में ही 75 फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई थी। 2018 में किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत तो नहीं मिला था लेकिन राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी थी। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो यह साफ होता है कि 75 फीसदी से ज्यादा वोटिंग राज्य में बदलाव का संकेत देती है (madhya pradesh voter turnout)।

एमपी में सियासी जमीन की तलाश में तीसरे दलों ने कई सीटों पर भाजपा-कांग्रेस का बिगाड़ा गणित
मप्र में मतदान हो चुका है और उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो चुकी है (mp elections)। साल 2018 की तुलना में इस साल बंपर वोटिंग हुई है जिससे भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। भाजपा के नेताओं का मानना है कि लाड़ली बहना योजना के कारण महिलाएं घर से बाहर निकली हैं और भाजपा कज पक्ष में वोट किया है वहीं कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि पीसीसी चीफ कमलनाथ ने जिस प्रकार से अपने वचन पत्र में गारंटियां दी हैं उसी का परिणाम है कि प्रदेश में बंपर वोटिंग हुई है। खैर किस पार्टी का वर्चश्व होगा वो तो तीन दिसंबर को ही पता चलेगा लेकिन सबसे अहम बात यह है कि मप्र में हुए इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के अलावा बसपा,आमआदमी पार्टी,सपा सहित कई अन्य दलों ने भी खूब पसीना बहाया और मजबूत उम्मीदवार उतारे हैं। प्रदेश की करीब दो दर्जन से ज्यादा ऐसी सीटें हैं जहां पर त्रिकोणीय मुकाबला है। अकेले विंध्य की दर्जन भर सीटों में त्रृकोणीय मुकाबला देखने को माल रहा है। जिसमें बीएसपी और सपा दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों ने अलग-अलग सीटों पर भाजपा और कांग्रेस को खासी टक्कर दी है। पूरे एमपी में माना जा रहा है कि बीएसपी की करीब पांच से छह सीटें आने वाली हैं। जिस प्रकार से वोटिंग प्रतिशत आया है उससे दोनों पार्टियों में उत्साह तो खूब है लेकिन अंदर ही अंदर दोनों पार्टियों में चिंता की लकीरें भी देखने को मिल रही हैं। सभी नेता हिसाब लगाने में जुट गए हैं कि वोट प्रतिशत बढ़ा है तो इसका मतलब क्या है?

'शिवराज जी बेरोजगार नहीं होंगे,तीन दिसंबर के बाद मुंबई जाएंगे ऐक्टिंग करेंगेःकमलनाथ
पीसीसी चीफ कमलनाथ (kamal nath) ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) पर तंज कसते हुए कहा है कि शिवराज तीन दिसंबर के बाद बेरोजगार नहीं होंगे,मुंबई जाएंगे ऐक्टिंग करेंगे। कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश की जनता भाजपा का सफाया करने जा रही है। महिलाओं में वोटिंग को लेकर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। इसके अलावा पीसीसी चीफ ने कहा कि भाजपा जब कमजोर पड़ने लगती है तो शराब,पैसा और प्रशासन का इस्तेमाल करने लगती है लेकिन इस चुनाव में भाजपा का कोई भी हथकंडा नहीं चलने वाला है क्योंकि प्रदेश की जनता बदलाव का मन बना चुकी है। साथ ही कमलनाथ ने ये की कहा कि आज भाजपा के पास स्थिति ये है कि वो अपने सीएम उम्मीदवार का नाम तक नहीं ले सकती है क्योंकि वहां से किसी को सीएम कैंडीडेट ही नहीं बनाया गया है। वोटिंग को लेकर कांग्रेस में कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है कांग्रेस के कार्यकर्ता यह मान कर चल रहे हैं कि इस चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ कांग्रेस की सरकार बना रही है (madhya pradesh assembly elections)। महिलाएं जिस प्रकार से वोटिंग में हिस्सा ले रही हैं उसको कांग्रेस खुद से जोड़ कर यह मान रही है कि कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में जिस प्रकार से महिलाओं के लिए घोषणा की है उसी को देखते हुए महिलाएं घर से निकल रहीं हैं और कांग्रेस के पक्ष में वोट कर रही हैं।

कांग्रेस के कंट्रोल रुम का पीसीसी चीफ कमलनाथ ने किया निरीक्षण
मप्र में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान जारी है। प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों की पल-पल जानकारी के लिए प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में कंट्रोल रुम का निर्माण किया गया है। छिंदवाड़ा से वोट डालने के बाद पीसीसी चीफ कमलनाथ (kamal nath) प्रदेश कांग्रेस कार्यालय स्थित कंट्रोल रुम पहुंचे जहां उन्होने पदाधिकारियों से मुलाकात कर सभी सीटों के बारे में जानकारी ली। गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी ने अपने वचन पत्र में कई लोक लुभावन घोषणाएं की हैं जिसमें कांग्रेस को उम्मीद है कि उसे भारी बहुमत मिलेगा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं में चुनाव को लेकर काफी उत्साह भी देखने को मिल रहा है। कांग्रेस के पदाधिकारी यह मान कर चल रहे हैं कि तीन दिसंबर को जब मतगणना होगी तो कांग्रेस को प्रदेश की जनता का वोट के रुप में जम कर समर्थन मिलेगा।

बीजेपी मीडिया सेंटर ने 650 से अधिक प्रेसवार्ताएं आयोजित कर बनाया रिकार्ड
17 नवंबर को प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं। उस चुनाव के परिणाम कुछ भी हों लेकिन बीजेपी प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल (ashish agrawal) के नेतृत्व में बीजेपी मीडिया सेंटर (bjp media centre) ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 24 सितंबर 2023 को बंसल वन स्थित बीजेपी मीडिया सेंटर का शुभारंभ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan),केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव (bhupendra yadav),अश्वनी वैष्णव (ashwini vaishnaw) और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma)ने किया था। इस बीच बीजेपी मीडिया सेंटर में 39 पत्रकार वार्ताएं आयोजित की गई। राष्ट्रीय और राज्य स्तर के कई दिग्गज नेताओं ने भोपाल स्थित बीजेपी मीडिया सेंटर में प्रेसवार्ताएं की। मीडिया सेंटर से अब तक 510 प्रेस विज्ञप्तियां प्रकाशित की गई। मीडिया सेंटर की तरफ से 370 फोटो प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भेजी गई। मीडिया सेंटर से 'जन आशीर्वाद यात्रा' 'मीडिया दिग्दर्शिका' और 'संकल्प पत्र' का विमोचन किया गया है। प्रदेश के सात संभागों में छह मीडिया सेंटर नवरात्रि के दौरान स्थापित किए गए जिनमें 60 से अधिक प्रेसवार्ताएं आयोजित की गई। 57 जिलों में दस अक्टूबर से अब तक 650 से अधिक प्रेसवार्ताएं आयोजित कराई जा चुकी हैं। एक प्रदेश प्रवक्ता से प्रदेश मीडिया प्रभारी बनाए गए आशीष अग्रवाल को ऐसे समय प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी जब चुनाव के लिए महज कुछ महीनों का वक्त बचा था लेकिन उन्होने इस पूरी जिम्मेदारी को एक चुनौती के रुप में लिया। सहज और सरल स्वभाव के धनी आशीष अग्रवाल ने मीडिया सेंटर के सफल संचालन के लिए युवाओं की फौज तैयार की,अनुभव का तड़का भी लगाया और पार्टी की ओर से मिली जिम्मेदारी को पूरा करने का प्रयास किया। देश भर से मीडिया सेंटर में आने वाले अलग-अलग नेताओं ने मीडिया सेंटर के प्रबंधन की जमकर तारीफ भी की।

बीजेपी मीडिया सेंटर ने 650 से अधिक प्रेसवार्ताएं आयोजित कर बनाया रिकार्ड
17 नवंबर को प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं। उस चुनाव के परिणाम कुछ भी हों लेकिन बीजेपी प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल (ashish agrawal) के नेतृत्व में बीजेपी मीडिया सेंटर (bjp media centre) ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 24 सितंबर 2023 को बंसल वन स्थित बीजेपी मीडिया सेंटर का शुभारंभ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan),केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव (bhupendra yadav),अश्वनी वैष्णव (ashwini vaishnaw) और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma)ने किया था। इस बीच बीजेपी मीडिया सेंटर में 39 पत्रकार वार्ताएं आयोजित की गई। राष्ट्रीय और राज्य स्तर के कई दिग्गज नेताओं ने भोपाल स्थित बीजेपी मीडिया सेंटर में प्रेसवार्ताएं की। मीडिया सेंटर से अब तक 510 प्रेस विज्ञप्तियां प्रकाशित की गई। मीडिया सेंटर की तरफ से 370 फोटो प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भेजी गई। मीडिया सेंटर से 'जन आशीर्वाद यात्रा' 'मीडिया दिग्दर्शिका' और 'संकल्प पत्र' का विमोचन किया गया है। प्रदेश के सात संभागों में छह मीडिया सेंटर नवरात्रि के दौरान स्थापित किए गए जिनमें 60 से अधिक प्रेसवार्ताएं आयोजित की गई। 57 जिलों में दस अक्टूबर से अब तक 650 से अधिक प्रेसवार्ताएं आयोजित कराई जा चुकी हैं। एक प्रदेश प्रवक्ता से प्रदेश मीडिया प्रभारी बनाए गए आशीष अग्रवाल को ऐसे समय प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी जब चुनाव के लिए महज कुछ महीनों का वक्त बचा था लेकिन उन्होने इस पूरी जिम्मेदारी को एक चुनौती के रुप में लिया। सहज और सरल स्वभाव के धनी आशीष अग्रवाल ने मीडिया सेंटर के सफल संचालन के लिए युवाओं की फौज तैयार की,अनुभव का तड़का भी लगाया और पार्टी की ओर से मिली जिम्मेदारी को पूरा करने का प्रयास किया। देश भर से मीडिया सेंटर में आने वाले अलग-अलग नेताओं ने मीडिया सेंटर के प्रबंधन की जमकर तारीफ भी की।