#MP
Total published stories tagged under #MP: 1884

कांग्रेस की सरकार बनी तो शर्त में मिलेंगे एक लाख,स्टांप पर लिख कर दिया
तीन दिसंबर को मतगणना होने वाली है लेकिन उसके पहले लोगों के धैर्य का बांद फूट रहा रहा (madhya pradesh elections)। दरअसल प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस में से किसकी सरकार बनेगी उसको लेकर शर्त लगाने का दौर तेज हो गया हो। दो लोगों ने शर्त की सीमा को लांघते हुए स्टांप पेपर पर एक लाख रुपये की शर्त लगा डाली है। बकायता दोनों ने स्टांप पेपर में एक लाख रुपये की शर्त लगाई है। धनीराम भलावी ने शर्तलगाते हुए कहा है कि कांग्रेस की सरकार (congress government) बनेगी वहीं नीरज मालवीय ने कहा है कि भाजपा की सरकार (bjp government) बनेगी। शर्त को और अपनी बात को सही साबित करने के लिए नोटरी से पचास रुपये स्टांप भी बनवाया गया है। इतना ही नहीं दोनों ने एक-एक लाख का चेक साइन कर गांव के ही अमित पांडे को दिया है जिसकी सर्त सही साबित होगी वो नीरज पांडे से एक लाख रुपये का चेक प्राप्त कर लेगा। यह पहला मौका नहीं है इससे कुछ दिन पहले भी इसी प्रकार से सर्त लगाई गई थी। फिलहाल इंतजार तीन दिसंबर का है जिस दिन मतगणना होगी उस दिन क्लियर होगा की एक लाख की लाटरी किसकी लगने वाली है।

17 जिलों के परिणाम तय करेंगे प्रदेश की भावी सरकार
मध्य प्रदेश के 17 जिलों के चुनाव परिणाम पर भाजपा और कांग्रेस,दोनों दलों की नजर है (madhya pradesh elections)। 2018 के चुनाव में यहां एकतरफा परिणाम रहे थे। टीकमगढ़,रीवा,सिंगरौली,शहडोल,उमरिया,हरदा,नर्मदापुरम,सीहोर और नीमच जिले की सभी सीटें भाजपा ने जीती थी। जबकि मुरैना,अशोक नगर,अनूपपुर,डिंडौरी,छिंदवाड़ा,अलीराजपुर और झाबुआ जिले की सभी सीटें कांग्रेस ने जीती थी। खरगोन जिले की छह में से पांच सीटें कांग्रेस ने तो एक पर कांग्रेस के बागी (केदार डाबर) निर्दलीय चुनाव लड़ कर जीते थे। अब ये कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान पर हैं। प्रदेश में बुरहानपुर और आगर जिला ऐसा है, जहां एक-एक सीट कांग्रेस और भाजपा तो एक-एक पर निर्दलीय चुनाव जीते थे। बुरहानपुर जिले में नेपानगर सीट कांग्रेस और बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक सुरेन्द्र सिंह शेरा चुनाव जीते थे। शेरा अब कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। यही स्थिति आगर जिले में भाजपा के साथ बनी थी। यहां एक सीट भाजपा तो एक निर्दलीय विक्रम सिंह राणा ने जीती थी। राणा इस चुनाव में भाजपा से मैदान में हैं। इस प्रकार 17 जिलों के परिणाम या तो भाजपा के पक्ष में थे या फिर कांग्रेस के।

बुंदेलखंड की कुछ सीटों पर सपा भाजपा और कांग्रेस का बिगाड़ सकती है गणित
इस बार विधानसभा चुनाव पर प्रत्याशियों से ज्यादा भाजपा, कांग्रेस और सपा के दिग्गज चेहरों पर नजर है। क्योंकि बुंदेलखंड (bundelkhand) में कुछ सीट ऐसी हैं जहां से हार जीत के साथ ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव (akhilesh yadav) भाजपा, की दिग्गज नेत्री उमा भारती (uma bharti) और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) सहित कांग्रेस के दिग्विजय सिंह (digvijaya singh) की प्रतिष्ठा दांव पर है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने छतरपुर की महाराजपुर और निवाड़ी विधानसभा में पूरा जोर लगा दिया है। क्योंकि पिछली बार छतरपुर से बिजावर सीट सपा को मिली थी। इसलिए वह प्रदेश में कहीं न कहीं अपना वजूद बनाए रखने के लिए ताबड़तोड़ सभाएं करते रहे। जिले की महाराजपुर सीट पर कांग्रेस से बागी हुए दौलत तिवारी के समर्थन में अखिलेश यादव ने चुनावी सभाएं कीं और नौगांव में पार्टी के लिए लोगों को संगठित करने का काम किया। बुंदेलखंड में चुनाव के नजदीक कुछ दिन अखिलेश यादव खजुराहो में डेरा डाले रहे।चुनावी परिणाम आने में अभी करीब आठ दिन बाकी हैं। चुनावी कयास भले ही किसी भी पार्टी के हार जीत के लगाए जाते रहे हों लेकिन असल फैसला तीन दिसंबर को ही सामने आएगा। अपने नाम का झंडा गाड़ने झौंकी पूरी ताकत बुंदेलखंड में छतरपुर टीकमगढ़ और निवाड़ी में उमा भारती, भाजपा प्रदेश ध्यक्ष वीडी शर्मा और अखिलेश यादव ने शुरू ये ही अपना प्रभाव जमा रखा था। कहीं न कहीं इन दिग्गजों के चाहने वाले ही चुनावी मैदान में उतरे हैं। इसलिए इन तीनों दिग्गजों की प्रतिष्ठा का भी सवाल है। हालांकि इस बार उमा भारती चुनावी मैदान में कम नजर आईं। खास बात यह है कि बुंदेलखंड की सीटों पर भोपाल और यूपी से नजरें गढ़ी हुई हैं। भाजपा कांग्रेस के प्रभाव के बीच अखिलेश यादव भी नौगांव, निवाड़ी और चंदला आदि सीटों पर अपना झंडा गाड़ने तुले हुए हैं। क्योंकि इन जगहों पर अखिलेश यादव ने एड़ी चोड़ी का जोर लगाया है। इस बार का चुनाव जो पिछला चुनाव हारे और इस बार पहली बार चुनाव में खड़े हुए प्रत्याशियों के लिए बेहद अहम है। क्योंकि इस बार की हार जीत आने वाले दिनों की राजनीति तय करेंगी। छतरपुर से ललिता यादव के लिए यह चुनाव बहुत अहम है। भाजपाइयों के कड़े अंदरूनी विरोध के चलते वह टिकट पाने में कामयाब रही थीं और उन्होंने पूरी दमदारी से चुनाव भी लड़ा है। लेकिन छतरपुर से कांग्रेस प्रत्याशी रहे आलोक चतुर्वेदी अपनी पहले से ही चुनावी चौसर बिछाए बैठे थे। इस कड़े चुनावी मुकाबले में कौन अधिक भारी है यह कह पाना मुश्किल है। क्योंकि यहां कांग्रेस से बागी हुए बब्बू राजा के चुनावी मैदान में आने से त्रिकोणीय मुकाबला हो गया है। इधर ललिता यादव तो मुख्यमंत्री को जीत की बधाई तक देने पहुंच गई। त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी महाराजपुर कांग्रेस से दौलत तिवारी के बागी होने के बाद से ही महाराजपुर में त्रिकोणीय मुकाबला कहा जा रहा था। यहां त्रिकोणीय मुकाबले में सीट फंसी हुई है। महाराजपुर से कौन जीतेगा यह कह पाना मुश्किल है। महाराजपुर से पहली बार भाजपा से चुनावी मैदान में उतरे कामाख्या प्रताप सिंह को मिला युवाओं का साथ चुनावी समीकरण बदलने का काम कर सकता है। इधर कांग्रेस के नीरज दीक्षित की घर-घर तक पकड़ रही है। बसपा प्रत्याशी भी सबसे आगे रहने के दावे कर रहे हैं। अब दोनों ही युवाओं में कौन भारी रहा है यह फैसला तीन दिसंबर को सामने आएगा।

दांव पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ, दस लाख रुपये की लगी शर्त
मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में हाट सीट रही छिंदवाड़ा से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ मैदान में हैं (kamal nath)। मतगणना तीन दिसंबर को होगी। इससे पहले हार-जीत पर शर्त लगाई जाने लगी है। छिंदवाड़ा में एक पत्र व स्टांप पेपर इंटरनेट मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है। जिसमें कमल नाथ की हार पर 10 लाख रुपयों की शर्त लगाई गई है। दो लोगों के बीच लगी शर्त में स्टांप पेपर पर तीन गवाह भी शामिल हैं। हालांकि मामला सुर्खियों में आने के बाद शर्त लगाने वालों ने यह शर्त रद की बात कही। शहर के लालबाग निवासी प्रकाश साहू और राम मोहन साहू ने एक एग्रीमेंट तैयार किया था। इसमें लिखा गया कि अगर कमल नाथ हारते हैं तो वह राम मोहन साहू को 10 लाख रुपये देंगे। अगर भाजपा के बंटी साहू (banti sahu) हारेंगे तो राम मोहन साहू एक लाख रुपये देंगे। इस इकरारनामे में तीन गवाह भी शामिल हैं। इसी प्रकार कांग्रेस के दो युवाओं ने भी आपस में शर्त लगाई है। (madhya pradesh elections)

मतगणना से पहले कांग्रेस देगी उम्मीदवारों को ट्रेनिंग
मप्र में 17 नवंबर को वोटिंग हो चुकी है और अब तीन दिसंबर को मतगणना होनी है (madhya pradesh elections)। उसके पहले भाजपा और कांग्रेस पार्टी अपने उम्मीदवारों को मतगणना को ट्रेनिंग देने की योजना बना रहे हैं। जिससे मतगणना के दौरान किसी प्रकार की हेरा फेरी ना होने पाए। दिलचश्प पहलू यह है कि कांग्रेस पार्टी के जितने भी एजेंट मतगणना में मौजूद रहेंगे वो हर राउंड के बाद प्रमाण पत्र लेंगे। कांग्रेस पार्टी की ओर से बकायदा ट्रेनिंग देने का काम किया जा रहा है जिसके लिए 26 तारीख तय की गई है। पार्टी के सभी 230 उम्मीदवार अथवा उनका कोई प्रतिनिधि प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में 26 नवंबर को आकर ट्रेनिंग लेगा। और फिर वो अपने क्षेत्र में जाकर अन्य कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग देगा। ठीक इसी प्रकार से भारतीय जनता पार्टी ने भी रणनीति तैयार की है लेकिन भाजपा के उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को भोपाल बुलाने के बजाय उन्हे जिला मुख्यालय में ही ट्रेनिंग देने का काम किया जाएगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी एक्सपर्टों की टीम सभी जिला मुख्यालयों में भेजेगी जहां उस संबंधित जिले की सभी विधानसभा सीटों के प्रत्याशी और उनके एजेंट मौजूद रहेंगे जिन्हे एक्सपर्टों के माध्यम से ट्रेनिंग दी जाएगी। गौरतलब है कि तीन दिसंबर को प्रदेश भर में मतगणना होने जा रही है (assembly elections results) भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां अपनी जीत का दावा कर रही हैं और उनका दावा खोंखला साबित न होने पाए, मतगणना के दौरान किसी प्रकार की कोई कमी न रह जाए जिसके कारण भविष्य में पछताना न पड़े इसी लिए भाजपा और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग देने की रणनीति तैयार की है। जिसको अमली जामा पहनाने के लिए भाजपा और कांग्रेस की ओर से काम भी शुरु हो चुका है।

बंपर वोटिंग सत्ता परिवर्तन के दे रही संकेत,राजनीतिक पार्टियां निकाल रहीं वोटिंग के मायने
प्रदेश में जब भी बंपर वोटिंग हुई है तब सत्ता परिवर्तन हुए हैं (madhya pradesh elections)। भाजपा और कांग्रेस इस वक्त यही गुत्थी सुलझाने में लगे हैं कि बंपर वोटिंग के मायने क्या हैं यह वोटिंग भाजपा के पक्ष में हुई है अथवा कांग्रेस के पक्ष में हुई है। आइए जानते हैं कि 2003 से लेकर 2018 तक राज्य में कितनी वोटिंग हुई और किसकी सरकार बनी। मध्यप्रदेश में 2018 में 75 फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई थी। 2018 के विधानसभा चुनाव में 75.2 फीसदी मतदान हुआ था। जिसके बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ था। हालांकि किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। कांग्रेस को सबसे ज्यादा 114 और बीजेपी को 109 सीटें मिलीं थी। वहीं, वोट शेयर की बात करें तो 2018 में बीजेपी को कांग्रेस से ज्यादा वोट मिले थे। 2013 के विधानसभा चुनाव में राज्य की 230 विधानसभा सीटों पर 70.8 फीसदी वोटिंग हुई थी। इस चुनाव में बीजेपी को 165 और कांग्रेस को मात्र 57 सीटों पर जीत मिली थी। मध्यप्रदेश में 2008 के विधानसभा चुनाव में 69 फीसदी वोटिंग हुई थी। 70 फीसदी से कम हुई वोटिंग के बाद भी बीजेपी ने अपनी सरकार को बरकरार रखा था। बीजेपी को 143 और कांग्रेस को 71 सीटों पर जीत मिली थी। मध्यप्रदेश में 2003 के चुनाव बेहद अमह माने जाते थे। मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ के अलग होने के बाद राज्य में पहली बार चुनाव हुए थे। 2003 में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। बीजेपी ने उमा भारती के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था। 2003 में राज्य में 67 फीसदी वोटिंग हुई थी। तब बीजेपी को 173 और कांग्रेस को मात्र 38 सीटों पर जीत मिली थी। मध्यप्रदेश के बीते पांच चुनावों की बात करें तो केवल 2018 में ही 75 फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई थी। 2018 में किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत तो नहीं मिला था लेकिन राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी थी। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो यह साफ होता है कि 75 फीसदी से ज्यादा वोटिंग राज्य में बदलाव का संकेत देती है (madhya pradesh voter turnout)।

एमपी में सियासी जमीन की तलाश में तीसरे दलों ने कई सीटों पर भाजपा-कांग्रेस का बिगाड़ा गणित
मप्र में मतदान हो चुका है और उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो चुकी है (mp elections)। साल 2018 की तुलना में इस साल बंपर वोटिंग हुई है जिससे भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। भाजपा के नेताओं का मानना है कि लाड़ली बहना योजना के कारण महिलाएं घर से बाहर निकली हैं और भाजपा कज पक्ष में वोट किया है वहीं कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि पीसीसी चीफ कमलनाथ ने जिस प्रकार से अपने वचन पत्र में गारंटियां दी हैं उसी का परिणाम है कि प्रदेश में बंपर वोटिंग हुई है। खैर किस पार्टी का वर्चश्व होगा वो तो तीन दिसंबर को ही पता चलेगा लेकिन सबसे अहम बात यह है कि मप्र में हुए इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के अलावा बसपा,आमआदमी पार्टी,सपा सहित कई अन्य दलों ने भी खूब पसीना बहाया और मजबूत उम्मीदवार उतारे हैं। प्रदेश की करीब दो दर्जन से ज्यादा ऐसी सीटें हैं जहां पर त्रिकोणीय मुकाबला है। अकेले विंध्य की दर्जन भर सीटों में त्रृकोणीय मुकाबला देखने को माल रहा है। जिसमें बीएसपी और सपा दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों ने अलग-अलग सीटों पर भाजपा और कांग्रेस को खासी टक्कर दी है। पूरे एमपी में माना जा रहा है कि बीएसपी की करीब पांच से छह सीटें आने वाली हैं। जिस प्रकार से वोटिंग प्रतिशत आया है उससे दोनों पार्टियों में उत्साह तो खूब है लेकिन अंदर ही अंदर दोनों पार्टियों में चिंता की लकीरें भी देखने को मिल रही हैं। सभी नेता हिसाब लगाने में जुट गए हैं कि वोट प्रतिशत बढ़ा है तो इसका मतलब क्या है?

'शिवराज जी बेरोजगार नहीं होंगे,तीन दिसंबर के बाद मुंबई जाएंगे ऐक्टिंग करेंगेःकमलनाथ
पीसीसी चीफ कमलनाथ (kamal nath) ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) पर तंज कसते हुए कहा है कि शिवराज तीन दिसंबर के बाद बेरोजगार नहीं होंगे,मुंबई जाएंगे ऐक्टिंग करेंगे। कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश की जनता भाजपा का सफाया करने जा रही है। महिलाओं में वोटिंग को लेकर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। इसके अलावा पीसीसी चीफ ने कहा कि भाजपा जब कमजोर पड़ने लगती है तो शराब,पैसा और प्रशासन का इस्तेमाल करने लगती है लेकिन इस चुनाव में भाजपा का कोई भी हथकंडा नहीं चलने वाला है क्योंकि प्रदेश की जनता बदलाव का मन बना चुकी है। साथ ही कमलनाथ ने ये की कहा कि आज भाजपा के पास स्थिति ये है कि वो अपने सीएम उम्मीदवार का नाम तक नहीं ले सकती है क्योंकि वहां से किसी को सीएम कैंडीडेट ही नहीं बनाया गया है। वोटिंग को लेकर कांग्रेस में कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है कांग्रेस के कार्यकर्ता यह मान कर चल रहे हैं कि इस चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ कांग्रेस की सरकार बना रही है (madhya pradesh assembly elections)। महिलाएं जिस प्रकार से वोटिंग में हिस्सा ले रही हैं उसको कांग्रेस खुद से जोड़ कर यह मान रही है कि कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में जिस प्रकार से महिलाओं के लिए घोषणा की है उसी को देखते हुए महिलाएं घर से निकल रहीं हैं और कांग्रेस के पक्ष में वोट कर रही हैं।

कांग्रेस के कंट्रोल रुम का पीसीसी चीफ कमलनाथ ने किया निरीक्षण
मप्र में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान जारी है। प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों की पल-पल जानकारी के लिए प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में कंट्रोल रुम का निर्माण किया गया है। छिंदवाड़ा से वोट डालने के बाद पीसीसी चीफ कमलनाथ (kamal nath) प्रदेश कांग्रेस कार्यालय स्थित कंट्रोल रुम पहुंचे जहां उन्होने पदाधिकारियों से मुलाकात कर सभी सीटों के बारे में जानकारी ली। गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी ने अपने वचन पत्र में कई लोक लुभावन घोषणाएं की हैं जिसमें कांग्रेस को उम्मीद है कि उसे भारी बहुमत मिलेगा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं में चुनाव को लेकर काफी उत्साह भी देखने को मिल रहा है। कांग्रेस के पदाधिकारी यह मान कर चल रहे हैं कि तीन दिसंबर को जब मतगणना होगी तो कांग्रेस को प्रदेश की जनता का वोट के रुप में जम कर समर्थन मिलेगा।

बीजेपी मीडिया सेंटर ने 650 से अधिक प्रेसवार्ताएं आयोजित कर बनाया रिकार्ड
17 नवंबर को प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं। उस चुनाव के परिणाम कुछ भी हों लेकिन बीजेपी प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल (ashish agrawal) के नेतृत्व में बीजेपी मीडिया सेंटर (bjp media centre) ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 24 सितंबर 2023 को बंसल वन स्थित बीजेपी मीडिया सेंटर का शुभारंभ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan),केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव (bhupendra yadav),अश्वनी वैष्णव (ashwini vaishnaw) और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma)ने किया था। इस बीच बीजेपी मीडिया सेंटर में 39 पत्रकार वार्ताएं आयोजित की गई। राष्ट्रीय और राज्य स्तर के कई दिग्गज नेताओं ने भोपाल स्थित बीजेपी मीडिया सेंटर में प्रेसवार्ताएं की। मीडिया सेंटर से अब तक 510 प्रेस विज्ञप्तियां प्रकाशित की गई। मीडिया सेंटर की तरफ से 370 फोटो प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भेजी गई। मीडिया सेंटर से 'जन आशीर्वाद यात्रा' 'मीडिया दिग्दर्शिका' और 'संकल्प पत्र' का विमोचन किया गया है। प्रदेश के सात संभागों में छह मीडिया सेंटर नवरात्रि के दौरान स्थापित किए गए जिनमें 60 से अधिक प्रेसवार्ताएं आयोजित की गई। 57 जिलों में दस अक्टूबर से अब तक 650 से अधिक प्रेसवार्ताएं आयोजित कराई जा चुकी हैं। एक प्रदेश प्रवक्ता से प्रदेश मीडिया प्रभारी बनाए गए आशीष अग्रवाल को ऐसे समय प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी जब चुनाव के लिए महज कुछ महीनों का वक्त बचा था लेकिन उन्होने इस पूरी जिम्मेदारी को एक चुनौती के रुप में लिया। सहज और सरल स्वभाव के धनी आशीष अग्रवाल ने मीडिया सेंटर के सफल संचालन के लिए युवाओं की फौज तैयार की,अनुभव का तड़का भी लगाया और पार्टी की ओर से मिली जिम्मेदारी को पूरा करने का प्रयास किया। देश भर से मीडिया सेंटर में आने वाले अलग-अलग नेताओं ने मीडिया सेंटर के प्रबंधन की जमकर तारीफ भी की।

बीजेपी मीडिया सेंटर ने 650 से अधिक प्रेसवार्ताएं आयोजित कर बनाया रिकार्ड
17 नवंबर को प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं। उस चुनाव के परिणाम कुछ भी हों लेकिन बीजेपी प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल (ashish agrawal) के नेतृत्व में बीजेपी मीडिया सेंटर (bjp media centre) ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 24 सितंबर 2023 को बंसल वन स्थित बीजेपी मीडिया सेंटर का शुभारंभ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan),केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव (bhupendra yadav),अश्वनी वैष्णव (ashwini vaishnaw) और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma)ने किया था। इस बीच बीजेपी मीडिया सेंटर में 39 पत्रकार वार्ताएं आयोजित की गई। राष्ट्रीय और राज्य स्तर के कई दिग्गज नेताओं ने भोपाल स्थित बीजेपी मीडिया सेंटर में प्रेसवार्ताएं की। मीडिया सेंटर से अब तक 510 प्रेस विज्ञप्तियां प्रकाशित की गई। मीडिया सेंटर की तरफ से 370 फोटो प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भेजी गई। मीडिया सेंटर से 'जन आशीर्वाद यात्रा' 'मीडिया दिग्दर्शिका' और 'संकल्प पत्र' का विमोचन किया गया है। प्रदेश के सात संभागों में छह मीडिया सेंटर नवरात्रि के दौरान स्थापित किए गए जिनमें 60 से अधिक प्रेसवार्ताएं आयोजित की गई। 57 जिलों में दस अक्टूबर से अब तक 650 से अधिक प्रेसवार्ताएं आयोजित कराई जा चुकी हैं। एक प्रदेश प्रवक्ता से प्रदेश मीडिया प्रभारी बनाए गए आशीष अग्रवाल को ऐसे समय प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी जब चुनाव के लिए महज कुछ महीनों का वक्त बचा था लेकिन उन्होने इस पूरी जिम्मेदारी को एक चुनौती के रुप में लिया। सहज और सरल स्वभाव के धनी आशीष अग्रवाल ने मीडिया सेंटर के सफल संचालन के लिए युवाओं की फौज तैयार की,अनुभव का तड़का भी लगाया और पार्टी की ओर से मिली जिम्मेदारी को पूरा करने का प्रयास किया। देश भर से मीडिया सेंटर में आने वाले अलग-अलग नेताओं ने मीडिया सेंटर के प्रबंधन की जमकर तारीफ भी की।

वोटिंग के दो दिन पहले पीएम मोदी का किसानों को बड़ा तोहफा
वोटिंग के लिए अब दिन नहीं बल्कि घंटों का समय बचा है। लेकिन उसके पहले पीएम मोदी द्वारा किसानों को मिली सौगात चुनाव का माहौल बदलने की बड़ी भूमिका निभा सकती है (madhya pradesh elections)। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किसानों को आर्थिक रुप से सक्षम बनाने के लिए दो-दो हजार रुपये की साल में तीन किस्त देते हैं। जिसके तहत किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (pradhanmantri kisan samman nidhi) के रुप में साल में छह हजार रुपये मिलते हैं। और ठीक इतनी ही राशि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) भी किसानों के खाते में डालते हैं। कुल मिला कर केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से किसानों को साल में 12 हजार रुपये मिलते हैं। प्रधानमंत्री की ओर से किसानों को मिलने वाली सम्मान राशि की एक किस्त आज डाली गई है। और दो दिन बाद प्रदेश में वोटिंग होनी है। मामले में वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा का मानना है कि इस राशि से चुनाव में ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। क्योंकि वोटिंग के लिए अब दो दिन का वक्त बचा है और अब तक में प्रदेश के 99% किसान अपना बन बना चुके होते हैं कि वोट किस पार्टी अथवा किस उम्मीदवार को लेना है। लेकिन यह पीएम मोदी की किसानों के हित में संचालित होने वाली योजना है। इस राशि के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी प्रदेश के किसानों को मजबूत करने का काम करते हैं इसलिए लोकसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को जरुर लाभ होगा।