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हरदा पटाखा फैक्ट्री ब्लाष्ट पर क्या बोल गए मुख्यमंत्री मोहन यादव
हरदा की ब्लास्ट वाली पटाखा फैक्ट्री में बुधवार को दूसरे दिन भी मलबा हटाया जा रहा है (harda blast)। मध्यप्रदेश के हरदा में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट से 11 लोगों की मौत हो गई। 217 लोग घायल हो गए, इनमें फैक्ट्री के 51 मजदूर शामिल हैं। 73 लोग हरदा, इंदौर, भोपाल और नर्मदापुरम के अस्पतालों में भर्ती हैं (harda firecracker factory blast)। इतनी दुखद घटना के बाद बीजेपी प्रदेश कार्यालय में कांग्रेस के दो महापौर सहित कई पार्षदों की ज्वाइनिंग कराई गई। इस दौरान सीएम मोहन यादव (cm mohan yadav) ने नए कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि घटना दुखद है लेकिन सरकार जो कर सकती थी सरकार ने किया। लेकिन मुख्यमंत्री ने जो चौकाने वाली बात कही वो ये है कि ऐसी घटना पर किसी का वश नहीं है। सवाल इस बात का उठता है कि रिहायशी क्षेत्रों में पटाखा फैक्ट्री लगाने के लिए अनुमति कौन देता है। क्या अनुमति देते समय मौके का मुआयना नहीं किया जाता है। और फिर घटना के बात सरकार ये कह कर इति श्री कर लेती है कि सरकार की तरफ से जो कुछ हो सकता है सरकार ने सबकुछ किया। लेकिन मुख्यमंत्री का गैर जिम्मेदाराना बयान कि घटना पर किसी का बस नही है।

आदिवासियों के हिस्से की 207 करोड़ राशि सरकार ने अन्य विभागों में की ट्रांफर,विक्रांत भूरिया ने उठाया मामला
कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया (vikrant bhuria) ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। डॉ. भूरिया ने कहा है कि भाजपा सरकार (mp government) आदिवासियों के हितों के साथ उनका हक किसी और को देकर खुले रूप से खिलवाड़ कर रही है जिसका ताजा उदाहरण भाजपा सरकार के निर्देश पर वित्त विभाग द्वारा इसी माह फरवरी में एक आदेश जारी किया गया है। कांग्रेस विधायक ने कहा कि जो राशि आदिवासियों की शिक्षा स्वास्थ्य उनके क्षेत्र में विकास कार्यों एवं शिक्षा स्वास्थ्य पर खर्च होने वाली थी और ट्राइबल सबप्लान की राशि थी। वो 207 करोड़ अन्य विभागों में स्थानांतरित कर दी गई है। विक्रांत भूरिया यहीं नहीं रुके उन्होने ये भी कहा कि भाजपा सरकार द्वारा आदिवासियों के साथ कुठाराघात कर खुले तौर पर उनके साथ अन्याय किया गया है। यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने कहा कि भाजपा आदिवासियों को एक वोट बैंक तक ही सीमित रखती है। आदिवासियों के विकास के लिए कार्य योजना बनाना तो दूर उनके हिस्से की राशि की बंदरबांट कर भ्रष्टाचार का नंगा नाच खेला जा रहा है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में आदिवासियों के वोट हासिल करने के लिए 11 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव आदिवासियों को गुमराह करने आ रहे हैं, अपने चुनावी वादों में आदिवासी किसान गरीब महिलाओं बेरोजगारों को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने का दावा किया था लेकिन इन्हीं वर्गों के वास्तविक और समुचित उत्थान के लिए बजट में कोई व्यवस्था सरकार नहीं कर पाई।

हरदा ब्लास्ट पर सख्त हुए सीएम मोहन यादव,बुलाई बैठक,दिए सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (mohan yadav) ने हरदा में पटाखा फैक्ट्री में हुई दुर्घटना (harda blast) के संबंध में मंत्रालय में आपात बैठक ली, अद्यतन स्थिति की जानकारी प्राप्त की और आवश्यक दिशा निर्देश प्रदान किए। उन्होंने कहा कि घायलों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हरदा के आसपास के क्षेत्र से एंबुलेंस हरदा पहुंचाई जा रही हैं इसके साथ ही हेलीकॉप्टरों की व्यवस्था के लिए सेना से संपर्क किया गया है।भोपाल, इंदौर में मेडिकल कॉलेज और aiims भोपाल में बर्न यूनिट को तैयारी रखने के निर्देश दे दिए गए हैं। होशंगाबाद में भी अस्पतालों में घायलों के उपचार के लिए व्यवस्था की गई है। बैठक में बताया गया कि हरदा में होशंगाबाद सहित आसपास के क्षेत्र से 14 डॉक्टर तत्काल रवाना किए गए हैं। हरदा में 20 एम्बुलेंस मौजूद हैं, तथा 50 और पहुंच रही है। भोपाल इंदौर स बैतूल, होशंगाबाद भेरूंदा, रेहटी सहित अन्य नगरीय निकायों तथा संस्थाओं से फायर ब्रिगेड हरदा भेजे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉक्टर यादव ने कैबिनेट मंत्री उदय प्रताप सिंह, ACS अजीत केसरी, डीजी होमगार्ड को तत्काल हेलीकॉप्टर से हरदा जाने के निर्देश दिए हैं। NDRF, SDRF की टीमों को भेजा जा रहा है।बैठक में मुख्य सचिव वीरा राणा, पुलिस महानिदेशक सुधीर सक्सेना, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य मोहम्मद सुलेमान, प्रमुख सचिव गृह संजय दुबे, प्रमुख सचिन नगरी प्रशासन एवं विकास नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री राघवेंद्र सिंह तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

शासकीय कर्मचारियों के दबाव में मोहन सरकार,रिटायरमेंट सीमा 65 करने पर फंसी सरकार,शिक्षकों ने दी धमकी
शासकीय सेवकों की रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष करने के मामले में अब प्रदेश की मोहन सरकार (mohan government) फंसती नजर आ रही है। दरअसल शासकीय सेवकों (mp government employees) की रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष की जाती है तो चयनित शिक्षकों की नियुक्ति पर असर पड़ेगा। एक तरफ सरकारी नौकरी नहीं निकल रही है, युवा बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे में राज्य की मोहन सरकार शासकीय कर्मचारियों की रिटायरमेंट की आयु 62 से बढ़ाकर 65 साल करने की तैयारी कर रही है। इधर, इस फैसले से चयनित शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि चार सालों से हम नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं, ऐसे में यदि सरकार ऐसा कुछ फैसला लेती है तो चयन के बावजूद हम बाहर हो जाएंगे। शिक्षक पात्रता परीक्षा 2018 के चयनित उम्मीदवार इस कवायद से चिंतित हैं। मंत्रालय में मौजूद सूत्रों के अनुसार सरकार रिटायरमेंट की आयु बढ़ाने जा रही है। शिक्षक पात्रता परीक्षा 2018 के चयनित शिक्षकों का कहना है कि चयनित होने के बावजूद हम नियुक्ति-पत्र का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में पुराने शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ने से उनके हाथ में आया यह अवसर भी खत्म हो जाएगा। शिक्षक पात्रता परीक्षा 2018 के चयनित उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा है कि सरकार ने कुछ साल पहले ही सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 की थी। इस प्रकार से सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने से शिक्षित युवाओं को मौका नहीं मिल रहा है, वहीं बेरोजगारों की लिस्ट बढ़ती जा रही है। इससे चयनित शिक्षक जिन्हें अब तक नियुक्ति पत्र नहीं मिला है, वो बेहद चिंतित है। उनका कहना है कि यदि सरकार ऐसा करती है तो चयन के बावजूद हमारे हाथ से सरकारी नौकरी का मौका निकल जाएगा। हजारों चयनित शिक्षकों में से कई ओवरएज हो जाएंगे। शिक्षकों का कहना है कि यदि सरकार बार-बार आयु ही बढ़ाती रहेगी तो युवाओं का भविष्य अंधकार में आ जाएगा। सेवानिवृत्ति की आयु पहले की तरह 60 साल करना चाहिए। प्रदेश में 2018 तक सरकारी कर्मचारियों के रिटायरमेंट की उम्र 60 साल थी. 2018 की विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने जून 2018 से इसे बढ़ाकर 62 साल कर दिया था. अब 6 साल बाद फिर से सरकारी कर्मचारियों के रिटायर होने की आयु सीमा को बढ़ाकर 65 साल करने की तैयारी की जा रही है. आयु सीमा बढ़ाए जाने का सरकार को वित्तीय लाभ भी होगा. दरअसल, वित्तीय स्थिति ठीक ना होने से सेवानिवृत्ति पर शासन को एक मुश्त भुगतान की राशि भी कर्मचारियों को नहीं देनी पड़ेगी। उधर इस प्रस्ताव को लेकर राज्य सरकार ने वित्त विभाग से अभिमत मांगा है। वित्त विभाग से पूछा गया है कि कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ने से विभाग की वित्तीय स्थिति पर क्या फर्क पड़ेगा। हांलाकि सरकार अब अपने फैसले पर ही विचार कर रही है क्योंकि आगे लोकसभा चुनाव है और अगर प्रदेश का युवा सरकार के फैसले से नाराज हुआ तो लोकसभा चुनाव में काफी दिक्कतें आ सकती हैं।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा तोहफा,लंबित मानदेय की मिली सौगात
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं (anganwadi workers) को मध्य प्रदेश सरकार (mp government) ने बड़ा तोहफा दिया है। प्रदेश सरकार ने 3 महीने के लंबित मानदेय भुगतान का आदेश जारी कर दिया है। इसके लिए 207 करोड़ रुपए की स्वीकृति दे दी गई है। यह राशि अनुसूचित जनजाति उप योजना से लिए जायेंगे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के भुगतान को विशेष प्रकरण मानते हुए अनुसूचित जाति उप योजना की राशि से मानदेय दिया जाएगा। इसे लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आदेश जारी कर दिया है। गौरतलब है कि लंबे समय से आगनबाड़ी कार्यकर्ता मानदेय भुगतान की मांग कर रही थी। राज्य

युवाओं को रोजगार देने के बजाय एमपी सरकार शासकीय कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु 65 करने की तैयारी में, सरकार के पास नहीं पैसे
आर्थिक तंगी से जूझ रही मध्य प्रदेश की मोहन सरकार (mp government) ने युवाओं को रोजगार देने के बजाय कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने का प्लान तैयार किया है। बताया जा रहा है कि मोहन यादव (mohan yadav) सरकार इस बार प्रदेश के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 3 साल बढ़ाकर 65 साल कर सकती है। मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण समिति ने शासकीय सेवकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा में एकरूपता लाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि शासकीय सेवकों की सेवानिवृत्ति की आयु 62 साल से बढ़ाकर 65 साल करने पर शासन विचार करे। (mp government employees) मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा द्वारा लाए गए संकल्प पत्र 2023 में मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र में एकरूपता लाने का भी बिंदु शामिल था। राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश शर्मा ने अपने पत्र में इस बिंदु का भी हवाला दिया है। उन्होंने लिखा है कि मध्य प्रदेश के शासकीय सेवकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा में एकरूपता लाई जाए। उन्होंने लिखा है कि सरकार को शासकीय कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ानी चाहिए क्योंकि पदोन्नति नहीं होने की वजह से सरकारी विभागों में कैडर गड़बड़ा गया है और कई विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं। प्रदेश में 2018 तक सरकारी कर्मचारियों के रिटायरमेंट की उम्र 60 साल थी। 2018 की विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने जून 2018 से इसे बढ़ाकर 62 साल कर दिया था। अब 6 साल बाद फिर से सरकारी कर्मचारियों के रिटायर होने की आयु सीमा को बढ़ाकर 65 साल करने की तैयारी की जा रही है। आयु सीमा बढ़ाए जाने का सरकार को वित्तीय लाभ भी होगा। दरअसल, वित्तीय स्थिति ठीक ना होने से सेवानिवृत्ति पर शासन को एक मुश्त भुगतान की राशि भी कर्मचारियों को नहीं देनी पड़ेगी। उधर इस प्रस्ताव को लेकर राज्य सरकार ने वित्त विभाग से अभिमत मांगा है। वित्त विभाग से पूछा गया है कि कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ने से विभाग की वित्तीय स्थिति पर क्या फर्क पड़ेगा। हांलाकि रिटायरमेंट आयु बढ़ाने पर कर्मचारी दो खेमे में बंटे नजर आ रहे हैं। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि युवाओं को मौका मिलना चाहिए 60 वर्ष की आयु के बाद काम करना और रोज आफिस जाना मुस्किल होता है।

अधिकारियों कर्मचारियों को डीए देने से पहले रिटायरमेंट के बाद राहत देने के मूड में मोहन सरकार
प्रदेश के कर्मचारियों को डीए का तोहफा नहीं मिला लेकिन मोहन सरकार (mohan government) ने रिटायरमेंट के बाद एक बड़ी राहत का निर्णय जरुर लिया गया है। पता चला है कि शासकीय सेवा में रहते आर्थिक गड़बड़ी या पद के दुरुपयोग की शिकायतों पर चलने वाली विभागीय जांच अब सेवानिवृत्ति के पहले पूरी करनी होगी। इसके लिए प्रक्रिया तय करने वरिष्ठ अधिकारियों की समिति बनाई गई है, जो एक सप्ताह में मुख्य सचिव वीरा राणा को रिपोर्ट देगी। यह कदम सेवानिवृत्ति के बाद तक चलने वाली जांच को लेकर मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव (mohan yadav) की आपत्ति जताने के बाद उठाया गया है। दरअसल, हर कैबिनेट बैठक में पांच-सात प्रकरण अधिकारियों-कर्मचारियों की विभागीय जांच पर निर्णय के लिए आते हैं। कमल नाथ सरकार में ऐसे प्रकरणों को कैबिनेट में लाने के स्थान पर निर्णय के लिए सामान्य प्रशासन मंत्री की अध्यक्षता में मंत्रियों की एक समिति बना दी थी लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई और फिर कैबिनेट में प्रकरण भेजे जाने लगे। मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि जब यह पता होता कि जिसकी जांच चल रही है, वह कब सेवानिवृत्त हो रहा है तो फिर प्रकरण का निराकरण सेवा में रहते ही हो जाना चाहिए। यदि वह दोषी है तो सेवा में रहते ही वसूली आदि की कार्रवाई आसानी से की जा सकती है। कर्मचारी को भी बार-बार दूरदराज से आना नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन की मंशा को देखते हुए मुख्य सचिव के निर्देश पर समिति बनाई गई है जो सेवानिवृत्ति के बाद लंबित विभागीय जांच से संबंधित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण और सेवानिवृत्ति से पहले ही जांच प्रक्रिया पूरी करने की प्रक्रिया को लेकर रिपोर्ट देगी। समिति में अपर मुख्य सचिव विनोद कुमार, डा.राजेश कुमार राजौरा, प्रमुख सचिव निकुंज श्रीवास्तव और सचिव उमेश पांडव को शामिल किया है।

भैंस चराने को मजबूर एमपी पुलिस, रोज पांच हजार रुपये से ज्यादा का आ रहा खर्चा
खंडवा से एक दिलचश्प खबर है जहां पुलिस (mp police)मुजरिमों की धरपकड़ छोड़ इन दिनों भैंस चराने में ब्यस्त है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार खंडवा से लगे जावर थाना पुलिस ने कुछ दिनों पहले चेकिंग के दौरान 17 भैंसे पकड़ी जो बिना परमिट के ट्रांसपोर्ट की जा रही थी। मामले की जानकारी पुलिस को लगी तो स्थानीय पुलिस ने छापामार कार्रवाई करते हुए अवैध रुप से ट्रांसपोर्ट की जा रही भैंसों को जब्त कर लिया। पुलिस के अनुसार, एक भैंस की कीमत 8 लाख़ से ज्यादा की बताई जा रही है। आमतौर पर जब कभी गाय पकड़ाती है तो,उन्हें गौशाला भिजवा दिया जाता है पर महंगी भैंस होने के कारण पुलिस सभी भैंसों को थाने ले आई। अब उन भैसों की जब्ती पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुकी है। कोर्ट के आदेश के इंतज़ार में पुलिसकर्मी भैंसो चारा खिलाने, पानी पिलाने से लेकर गोबर सफाई तक कर रही है। भैंसों की सुरक्षा में पुलिसकर्मी भी तैनात किए गए हैं। जावर थाना प्रभारी जेपी वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि हर रोज़ लगभग ₹5000 रुपये उन भैंसों की खिलाई पिलाई का खर्चा आ रहा है जो वह अपने जेब से वहन कर रहे हैं।

भाजपा से लोकसभा चुनाव लड़ेंगी कमलनाथ की बहू,कमलनाथ ने दिया संकेत
कांग्रेस पार्टी में भगदड़ का दौर लगातार जारी है। दरअसल खबर है कि कांग्रेस के नेता प्रमोद कृष्णन भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन करने के लिए लगातार संपर्क कर रहे हैं। इस मामले पर जब पूर्व सीएम कमलनाथ (kamal nath) से सवाल किया गया तो उन्होने खुले तौर पर कहा कि सब स्वतंत्र हैं कोई किसी पार्टी से बंधा हुआ नहीं है। गौरतलब है कि लंबे समय से माना जा रहा है कि कमलनाथ भी भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की जुगाड़ बना रहे हैं। एक खबर और निकल कर सामने आ रही है कि कमलनाथ,नकुलनाथ (nakul nath) दोनो लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे बल्कि नकुलनाथ की पत्नी को भारतीय जनता पार्टी छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा सकती है (lok sabha elections) । जिस प्रकार से पूरे देश में राम मंदिर का मुद्दा चल रहा है उसके बाद कांग्रेस में इस वक्त लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार नहीं मिल रहे हैं। कांग्रेस के कुछ नेताओं का साफ कहना है कि वो चुनाव हारने के लिए नही लड़ेंगे क्योंकि भाजपा की लहर है और कांग्रेस से जो भी चुनाव लड़ेगा उसकी हार तय है। माना जा रहा है कि भाजपा प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीट जीतने के लिए कमलनाथ की बहू को पार्टी से टिकट दे सकती है।

कांग्रेस सांसद डीके सुरेश के देश विरोधी बयान पर बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा ने किया करारा प्रहार
कांग्रेस नेताओं की तरफ से देश विरोधी बयान पर बीजेपी सख्त हो गई है। हाल ही में कांग्रेस सांसल डीके सुरेश (dk suresh) ने एक देश विरोधी बयान दिया है जिस पर मप्र बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह देश विरोधी कदम है। कांग्रेस फूट डालो राज करो की नीति के साथ यह बयान उसका परिचायक है। कांग्रेस के सांसद और कांग्रेस के उपमुख्यमंत्री डी के शिव कुमार के वो भाई है और उनका इस प्रकार का बयान आना, भारत की एकता और अखंडता पर प्रहार है। राहुल गांधी जो यात्रा निकाल रहे हैं उस यात्रा का नाम रखते हो भारत जोड़ो। यही भारत जोड़ो है कि जो भारत को तोड़ने का काम कांग्रेस के सांसद कर रहे हैं । प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सोनिया गांधी को और राहुल गांधी को इस बात का जवाब देना चाहिए की डीके सुरेश ने जो कहा है क्या वह इस बात का समर्थन करते हैं। अन्यथा उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए और डीके सुरेश के खिलाफ कांग्रेस को कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

कर्मचारी हितैषी नहीं है प्रदेश की मोहन सरकार,कर्मचारियों के डीए पर भारी पड़ रही लाड़ली बहना योजना
प्रदेश में जब भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री बदला तो लोगों को लगा था कि अब कुछ नया देखने को मिलेगा। सिर्फ बात नहीं बल्कि काम भी होगा। लेकिन लोगों की उन उम्मीदों पर अब पानी फिरना शुरु हो गया है। दरअसल लंबे समय से शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) को उम्मीद थी कि उनका डीए मोहन सरकार (mohan government) जरुर देगी लेकिन नई सरकार का गठन होने के बाद कई कैबिनेट की बैठकें हो चुकी हैं लेकिन एक भी कैबिनेट बैठक में मोहन सरकार में शासकीय कर्मचारियों के डीए पर चर्चा नहीं हुई। मंत्रालय में मौजूद सूत्रों की मानें तो निकट भविष्य में फिलहाल कर्मचारियों को डीए मिलने की किसी प्रकार की कोई संभावना नहीं है। ऐसा नहीं है कि इस विषय की जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) को नहीं है लेकिन वो कर्मचारियों के विषय पर बात करने के लिए किसी प्रकार से तैयार नहीं हैं। कर्मचारियों की बात आती है तो सरकार मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार के पास फिलहाल बजट नहीं है जिसके कारण वो डीए नहीं दे पाएंगे। दरअसल कर्मचारियों के डीए के आड़े लाड़ली बहना योजना आ रही है। राज्य सरकार पर लाड़ली बहना योजना की हर महीने मिलने वाली किस्त इतनी भारी पड़ रही है कि अन्य विकास के बारे में मुख्यमंत्री मोहन यादव सोच ही नहीं पा रहे हैं। इसके उलट बात करें तो केन्द्र सरकार अपने कर्मचारियों को 46 फीसदी मंहगाई भत्ता दे रही है और प्रदेश के शासकीय कर्मचारी सिर्फ 42 फीसदी ही मंहगाई भत्ता पा रहे हैं। खबर ये भी है कि केन्द्र सरकार लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर केन्द्रीय कर्मचारियों का चार फीसदी मंहगाई भत्ता बढ़ाने वाली है। मतलब साफ है कि केन्द्र सरकार मप्र के शासकीय कर्मचारियों के जले पर नमक छिड़कने का काम कर रही है। मोहन सरकार द्वारा शासकीय कर्मचारियों की अनदेखी के चलते नाराजगी भी देखने को मिल रही है। लेकिन कर्मचारी सरकार के खिलाफ जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं।

अब चलेगी 'तोमर साही' राज्य स्तरीय अधिमान्य पत्रकारों का ही जारी होगा पास
मप्र विधानसभा में तानाशाही का दौर शुरु हो चुका है। दरअसल सात फरवरी से शुरु हो रहे विधानसभा के बजट सत्र (mp vidhansabha) में नए विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर (narendra singh tomar) ने पत्रकार दीर्घा के लिए नई गाईडलान तय कर दी है। जिसके बाद विधानसभा में सैकड़ों पत्रकारों और कैमरामैनों का प्रवेश वर्जित हो जाएगा। दरअसल इस बार से विधानसभा के पत्रकार दीर्घा में उन्ही पत्रकारों को प्रवेश पत्र जारी किया जाएगा जिनके राज्य स्तरीय अधिमान्यता कार्ड जारी किए गए हैं। विधानसभा में मिली जानकारी के अनुसार इस बार नियम का सख्ती से पालन किया जाएगा। अभी तक करीब छह सौ पत्रकारों और कैमरामैनों का पत्रकार दीर्घा के लिए पास जारी किया जाता था। लेकिन इस बार तो गाईडलाइन तय की गई है उसके तहत महज 100 पत्रकारों को ही पत्रकार दीर्घा का पास जारी हो पाएगा। विधानसभा का तर्क है कि वो सोशल मीडिया के माध्यम से न्यूज चैनलों और न्यूज पेपरों को खबरें जारी करते हैं तो फिर विधानसभा में पत्रकारों का आने का कोई मतलब ही नहीं है। लिहाजा पत्रकारों की संख्या करने के लिए इस प्रकार की गाईडलाइन तय की जा रही है जिससे सांप भी मर जाए और लाठी भी नहीं टूटे। अब अगर विधानसभा सिर्फ राज्य स्तरीय पत्रकारों के लिए ही पास जारी करेगा तो जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार विधानसभा नहीं जा पाएंगे। इसके अलावा उन युवा पत्रकारों की भी संख्या बड़ी है जो अभी तक किसी भी श्रेणी में अधिमान्य नहीं हैं। मतलब साफ है कि विधानसभा में अब तानाशाही का दौर तेज हो गया है। जो वो बताना चाहेंगे और दिखाना चाहेंगे वही मीडिया में चल पाएगा। जो वरिष्ठ पत्रकार हैं वो सब जानते हुए भी कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं हैं और जो जूनियर पत्रकार हैं वो बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। लिहाजा इस बार के विधानसभा सत्र में पत्रकारों का प्रवेश मुश्किल होने वाला है।