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एग्रेसिव मूड में भाजपा,चुनाव से पहले सभी प्रत्याशी घोषित करने की तैयारी
प्रदेश में पांचवीं बार सत्ता हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी एग्रेसिव मूड में आ गई है (BJP MP)। चुनावी रणनीति से लेकर डैमेज कंट्रोल और एंटीइनकमबेंसी जैसी बाधाओं के लिए पार्टी जहां नतीजे कारक नर्णय ले रही है तो वहीं अपने प्रत्याशियों के नामों पर भी जल्द मोहर लगाने की तैयारी में है। ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी चुनाव की तारीख घोषित होने से पहले लगभग सभी प्रत्याशियों के नाम घोषित कर देगी। मप्र विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों की सूची जारी करने में भाजपा ने कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया है। पिछले दिनों 39 प्रत्याशियों के नाम सार्वजनिक कर पार्टी ने यह बता दिया है कि वो हर मोर्चे में अव्वल है,पता चला है कि 27 से 30 अगस्त के मध्य 64 प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी कर दी जाएगी। उसी दौरान भाजपा के केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक भी प्रस्तावित है। इसके बाद 15 सितंबर तक भाजपा की तीसरी सूची जारी करने की तैयारी भी की जा रही है। पार्टी सूत्रों की माने तो चुनाव आचार संहिता लागू होने तक भाजपा कुछ सीटों को छोड़ कर बांकी सभी सीटों में अपने प्रत्याशियों के ऐलान की योजना बना चुकी है। इसके पीछे भाजपा की रणनीति है कि कहीं भी प्रत्याशियों को लेकर विवाद या विरोध है या उन्हे लेकर गुटवाजी है तो समय रहते उसे दूर किया जा सके। जिससे पार्टी को चुनाव के दौरान किसी तरह का नुकसान ना हो। भाजपा हारी सीटों पर जल्द ही दूसरी सीट जारी करने वाली है लिहाजा उसके लिए चुनाव प्रबंधन और चुनाव संचालन से जुड़े बड़े नेता बुधवार से लेकर 25 अगस्त तक भोपाल प्रदेश कार्यालय में मंथन करेंगे। तीन दिनों में प्रत्याशियों के नामों पर विचार कर संभावित सूची तैयार की जाएगी। जिसे अंतिम मंजूरी के लिए केन्द्रीय चुनाव समिति के पास भेजा जाएगा।

कमजोर बूथों को कांग्रेस के अनुशांगिक संगठन लेंगे गोद
प्रदेश में कांग्रेस ने सत्ता में वापसी के लिए जो रोड मैप तैयार किया है उसमें सहयोगी संगठनों की बड़ी भूमिका निर्धारित की गई है (MP Congress)। सेक्टर और मंडलम् के साथ बूथ प्रबंधन का काम महिला, युवा, अनुसूचित जाति- जनजाति और किसान कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की टीम संभालेगी। सभी कमजोर मतदान केदो को गोद लेंगे। प्रत्येक केंद्र पर कार्यकर्ताओं को तैनात किया जाएगा। प्रत्याशियों के साथ सभी संगठनों के कार्यकर्ता प्रचार में जुटेंगे। मतदान के लिए मतदाताओं को घर से निकलने, पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने, पांच गारंटीयों का प्रचार करने, भाजपा सरकार की असफलता को जनता के बीच ले जाने का दायित्व भी सहयोगी संगठनों को सौंपा गया है। सभी ने अपने-अपने स्तर पर तैयारी भी तेज कर दी हैं। पूरा फोकस इस बात पर है कि प्रत्याशियों के साथ पूरा संगठन मैदान में करता दिखे। कांग्रेस संगठन की ओर से मिली जिम्मेदारी का आगाज सितंबर माह से किया जाएगा। इधर,प्रदेश कांग्रेस ने सहयोगी संगठनों के कामों पर नजर रखने के लिए प्रभारी और सह प्रभारी नियुक्त किए हैं जो यह सुनिश्चित करेंगे कि जो दायित्व संगठनों को दिया गया है,उसकी वास्तव में पूर्ति हो। प्रदेश कांग्रेस ने भाजपा के संगठन से मुकाबला करने के लिए इस बार मतदान केंद्र पर सर्वाधिक ध्यान केंद्रित किया है। बूथ,सेक्टर और मंडलम् बनाने के बाद सहयोगी संगठनों को भी बड़े-बड़े कार्यक्रम करने के स्थान पर मतदान केन्द्र पर फोकस करने के लिए कहा गया है। संगठन चाहता है कि प्रत्याशी के साथ-साथ संगठन की भी अपनी तैयारी रहे। अभी तक मतदान केन्द्रों पर पूरी टीम प्रत्याशी की रहती थी लेकिन इस बार कांग्रेस इसमें बदलाव करने की तैयारी में है।

भाजपा का 'चक्रब्यूह' हर तरफ से होगा हल्लाबोल,कांग्रेस का कौन होगा अभिमन्यु
शाह की 'शह' को कौन मात देगा यह कांग्रेस के लिए एक पहेली बनता चला जा रहा है। जब कांग्रेस अपने उम्मीदवारों के घोषणा की योजना तैयार कर रही थी तब भारतीय जनता पार्टी ने 39 उम्मीदवारों का ऐलान कर कांग्रेस को 11 हजार वॉट का झटका दे दिया था (। फिलहाल कांग्रेस पार्टी के नेता इस समय सदमे में हैं। कांग्रेस के रणनीतिकार दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) और कमलनाथ (Kamalnath) इस समय यही सोच रहे हैं कि भाजपा का अगला दांव क्या होगा। जब तक कांग्रेस के नेता पहले सदमें से बाहर निकलेंगे तब तक भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस को दूसरा झटका दे चुकी होगी। Mukhbir को पता चला है कि इसी महीने के अंत तक भारतीय जनता पार्टी दूसरी सूची जारी कर कांग्रेस को एक और झटका दे सकती है। लेकिन इसके अलावा भाजपा के ब्यूह रचना की बात करें तो अब भाजपा कांग्रेस पर चौतरफा हमला करने की योजना तैयार कर रही है। पता चला है कि दो सितंबर से भारतीय जनता पार्टी की जन आशीर्वाद यात्राओं (Jan Ashirwad Yatra MP) का आगाज होने जा रहा है। इस बार की जन आशीर्वाद यात्र पहले की तुलना में भिन्न होने वाली है। पहले जन आशीर्वाद यात्रा एक निकला करती थी जिसका नेतृत्व सीएम शिवराज करते थे लेकिन इस बार भाजपा की रणनीति अलग है। भारतीय जनता पार्टी इस बार एक साथ पांच जन आशीर्वाद यात्राएं निकालने जा रही है जिसके लिए रथों का निर्माण भी कराया जा रहा है। यानि मतलब साफ है भाजपा प्रदेश भर में हल्लाबोल करने जा रही है। इस दौरा कई रोड शो की भी योजना तैयार हो रही है। पांच जगहों से निकलने वाली जन आशीर्वाद यात्राओं का नेतृत्व अलग-अलग और क्षेत्रावार नेता करते चले जाएंगे। ग्वालियर चंबल में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) और ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) सहित अन्य नेता करेंगे तो महाकौशल में प्रहलाद सिंह पटेल (Prahlad Singh Patel) और फग्गन सिंह कुलस्ते (Faggan Singh Kulaste) करेंगे। मालवा क्षेत्र में कैलाश विजयवर्गी (Kailash Vijayvargiya)यात्रा का नेतृत्व करेंगे। विंध्य की बात करें तो यहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) खुद जन आशीर्वाद यात्रा का नेतृत्व करने जा रहे हैं। प्रदेश में 11 संभाग हैं और भाजपा के पांच रथ चलेंगे। एक रथ को दो संभागों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस जन आशीर्वाद यात्रा को भब्यता देने के लिए केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दो रोड शो रखे जाएंगे। एक रोड शो पीएम मोदी भी करेंगे। मतलब साफ है भारतीय जनता पार्टी प्रदेश में ऐसे सियासी ब्यूह की रचना करने जा रही है जिसके तहत जनता के मन में भाजपा के अलावा कुछ और ना बचे। लेकिन इस शह और मात के खेल में सवाल इस बात का उठ रहा है कि अमित शाह के चक्रब्यूह को तोड़ने के लिए कौन सा अभिमन्यू सामने आएगा। हांलाकि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह भी सियासत के मंझे हुए तीरंदाज हैं लेकिन यह देखना दिलचश्प होगा कि भाजपा के चौतरफा हमले का कांग्रेस कैसे जवाब देती है।

जन आशीर्वाद यात्रा का मास्टर प्लान तैयार,दो सितंबर से यात्रा की होगी शुरुआत
प्रदेश सरकार की जन आशीर्वाद यात्राएं दो सितंबर से प्रारंभ हो सकती हैं (Jan Ashirwad Yatra)। इस संबंध में ग्वालियर में हुई बैठक में निर्णय लिया गया है। बताया गया है कि पांच संभागों में एक साथ यात्राएं निकाली जाएंगी,जिसके लिए रथ तैयार किए जा रहे हैं। भाजपा चुनाव से पहले अपने विकास कार्यों और योजनाओं को लेकर जनता से आशीर्वाद लेने यात्राएं निकालती है (BJP MP)। इसी क्रम में यात्राएं निकाली जानी हैं,लेकिन इस बार पांच अलग-अलग यात्राएं निकाली जाएंगी,जिसमें वरिष्ठ नेता जनता के पास जाकर एक बार फिर से भाजपा को समर्थन देने का आग्रह करेंगे। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की यात्रा ग्वालियर से,महाकौशल क्षेत्र की जबलपुर से,मालवा की उज्जैन और खंडवा से और विंध्य क्षेत्र की यात्रा रीवा से निकाली जाएगी। शुभारंभ में पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। यात्रा का समापन 25 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi)भोपाल में करेंगे। यहां मोदी की जनसभा होगी। यात्राओं को लेकर सोमवार को चुनाव प्रभारी भूपेन्द्र यादव,चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक नरेन्द्र सिंह तोमर और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा की मौजूदगी में नव गठित केन्द्रीय और संभागीय टोली की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में हाल ही में बनाए गए भाजपा प्रत्याशी भी शामिल थे। इन सभी को वरिष्ठ नेताओं ने संबोधित किया। इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि यात्राओं के माध्यम से जनता से सीधे रु-ब-रु होने का मौका मिलता है जो नेताओं और जनता के लिहाज से बढ़िया होता है।

शिक्षक भर्ती अभ्यार्थियों ने नियुक्ति की मांग के लिए किया विरोध प्रदर्शन
सोमवार को जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) शिक्षक पात्रता परीक्षा-2022 के साढे पांच हजार चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दे रहे थे,वहीं दूसरी तरफ ओबीसी चयनित वर्ग के करीब 500 से अधिक अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री आवास में सुबह आठ बजे पहुंच अपनी नौकरी के लिए गुहार लगाने की कोशिश की लेकिन सीएम से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई। उन्होने द्वितीय काउंसलिंग में चयनित 882 ओबीसी अभ्यर्थियों के नियुक्ति आदेश जारी करने की मांग की। हांलाकि उनकी सीएम शिवराज से मुलाकात नहीं हो पाई इस दौरान अधिकारियों ने 25 अगस्त के बाद सीएम से मिलवाने का आश्वासन दिया है। इसके बाद सभी अभ्यर्थी बीजेपी प्रदेश कार्यालय पहुंच गए। अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्राथमिक शिक्षक के 7500 पदों पर नियुक्ति के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया शुरु हुई। प्रथम काउंसलिंग जिलेवार आरक्षण के अनुसार ही पूरी की गई। द्वितीय काउंसलिंग में अभ्यर्थियों ने दस्तावेज सत्यापन के बाद अंतिम चयन सूची में स्थान प्राप्त किया और प्रक्रिया के तहत विभाग द्वारा जिला आवंटन भी किया गया,लेकिन दस अगस्त को जारी आदेश में अंतिम चयन सूची में स्थान प्राप्त करने वाले 6380 में से मात्र 5498 अभ्यर्थियों के आदेश ही जारी किए गए (teacher recruitment mp)। ओबीसी वर्ग के 882 अभ्यार्थियों के आदेश बिना किसी स्पष्टीकरण के रोक दिए गए। अभ्यर्थिकों का कहना है कि उन्हे अधिकारी बता रहे हैं कि भर्तियों में आरक्षण संबंधी लंबित याचिकाएं उच्च न्यायालय में क्रियाधीन है। जबकि वर्ग-03 का आरक्षण संबंधी प्रकरण न्यायालय में दर्ज ही नहीं है। चयनित शिक्षक खोमेश ने जानकारी देते कि महे अपने भविष्य की चिंता सता रही है। सीएम साहब से बस इतनी गुजारिश है कि वो 882 अभ्यर्थियों को नियुक्त दे दें।

भाजपा नेत्री रौशनी यादव छोड़ेंगी पार्टी,कांग्रेस का थामेंगी दामन
भाजपा समर्थित जन प्रतिनिधि रोशनी यादव (Roshni Yadav) ने भाजपा को छोड़ कांग्रेस में जाने का मन बना लिया है। उन्होंने लंबे नोट में कहा कि भाजपा की रीति, नीति और नेतृत्व से वो काफ़ी समय से नाखुश हैं। रोशनी का कहना है कि भाजपा सिर्फ महिलाओं को ठगने का काम करती है। जनता में प्रदेश और केंद्र की नेतृत्व दोनों से नाराजगी है, जिस दल से जानता खुश नही है उससे जुड़ा कर भला सेवा का कार्य कैसे हो सकता है। रोशनी यादव ने कहा क्षेत्र की जनता और कार्यकर्ता दोनो का अपार समर्थन और स्नेह उनके साथ है। हजारों कार्यकर्ताओं के साथ मैं दिनांक 24 अगस्त को कांग्रेस ज्वाइन करूंगी। रौशनी यादव ने कहा बहुत दुखी मन से मै भाजपा की सदस्यता त्याग रही हूं। मेरे राजनीतिक सफर में कई अनुभव मुझे भाजपा में रहते मिला जिसके लिए मैं आजीवन आभारी रहूंगी लेकिन कुछ महीनों से शीर्ष नेतृत्व का कार्यकर्ताओं के प्रति निराशा, नीति और नेतृत्व में उदासीनता, महिलाओं के प्रति दिखावटी योजना एवं उनके प्रति बढ़ते अत्याचार को देखकर मैं आहत हूं, भाजपा की सदस्य होकर रोजाना जनता से उठ रहे बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महंगाई के सवालों का उत्तर देने में असमर्थ हूं। कार्यकर्ता केंद्रित दल अब नेता केन्द्रित है। गौर करने वाली बात ये है कि एक तरह से यह रोशनी की घर वापसी है क्योंकि इनका परिवार पुराना कांग्रेसी परिवार के रूप में देखा जाता है, रोशनी कांग्रेस नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व राज्यपाल राम नरेश यादव की पुत्रवधु है इसलिए इन्हे विरासत में राजनीति प्राप्त है जिसका इन्हें अच्छा अनुभव है। जानता का ना प्रदेश सरकार में विश्वास है ना केंद्र सरकार पर, जिस दल से जनता खुश नहीं है उस दल में रहकर सेवा नही किया जा सकता है। भाजपा सरकार में भाजपा संगठन के ही कार्यकर्ताओं की अनदेखी और उनके साथ सौतेला व्योवहार के चलते प्रदेश में भाजपा की लगातार छवि खराब हो रही है। भाजपा कार्यकर्ता (MP BJP) जब भी संगठन के उच्च अधिकारियों से या सरकार के मंत्रियों और नेताओं से अपनी समस्या साझा करते हैं, तो मंत्री और नेता तथा पदाधिकारी निराकरण तो दूर उनकी बात तक नहीं सुनते। कार्यकर्ताओं की इस स्तर की उपेक्षा से रौशनी यादव आहत हैं। निवाड़ी की जनता लगातार भाजपा शासन में स्वयं को पीड़ित महसूस कर रही है। चूंकि जनता की पीड़ा मेरी अपनी भी पीड़ा है।इसलिए नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौप रही हूं।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह का भाजपा के प्रवासी विधायकों पर तंज 'किराए के टट्टुओं से चुनाव नहीं जीते जाते'
भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर प्रवासी विधायकों को भेजा है (BJP MLA)। भाजपा साशित चार राज्यों से आए विधायकों को भोपाल में ट्रेनिंग देने के बाद उन्हे अलग-अलग विधानसभा सीटों में रवाना भी कर दिया गया है। भाजपा के प्रवासी विधायक अलग-अलग विधानसभा सीटों पर जाएंगे और उन विधानसभा सीटों की क्या स्थिति है उसकी रिपोर्ट तैयार कर भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व को सौंपेंगे। लेकिन इस बीच प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह (Govind Singh) ने एक विवादास्पद बयान देकर प्रवासी विधायकों के दौरे पर सवाल खड़ा कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि किराए के टट्टुओं से कभी चुनाव नहीं जीते जाते हैं। नेता प्रतिपक्ष ने साफ कहा कि भाजपा का यह प्लान पूरी तरह से फ्लॉप साबित होगा। भारतीय जनता पार्टी की चुनाव में हालत खराब है इसी लिए भाजपा इस प्रकार के हथकंडे आजमा रही है लेकिन इसके नतीजे सार्थक साबित नहीं होंगे। नेता प्रतिपक्ष ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) पर भी जमकर निशाना साधा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आज देश में जो भी विकास दिख रहा है वो कांग्रेस की देन है। साथ ही नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने अमित शाह को चुनौती देते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) दस साल तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। दस सालों में अमित शाह दिग्विजय सिंह पर एक भी घोटाला साबित करके दिखा दें। अमित शाह सिर्फ जनता को बर्गलाने का प्रयास कर रहे हैं उससे ज्यादा कुछ नहीं लेकिन प्रदेश की जनता इस बार भाजपा की बातों में आने वाली नहीं है (MP BJP)।

पन्ना प्रमुखों को अमित शाह की सलाह,बीमा एजेंट की तरह करें काम,कांग्रेसियों को तोड़ें
ग्वालियर में आयोजित भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में जिला अध्यक्षों को अमित शाह ने जमकर फटकार लगाई है (Amit Shah in Gwalior)। अमित शाह ने कहा कि आप लोगों की ऐसी ही वर्किंग रही तो संभाग जीतना मुस्किल होगा। प्रदेश कार्यसमिति के बाद एक बैठक में अमित शाह ने जिलाध्यक्षों से मतदान केन्द्रों की जानकारी मांगी थी। जानकारी मिलने पर अमित शाह संतुष्ट नहीं हुए (panna pramukh)। अमित शाह ने कहा कि बतौर प्रतिनिधि आप लोग अपने कामों में काफी पीछे हैं। अमित शाह ने बूथ स्तर पर काम करने की सलाह देते हुए कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को तोड़ने की बात कही। केन्द्रीय गृह मंत्री ने साफ कहा है कि बीमा एजेंटो की तरह काम करें और कांग्रेसियों को तोड़ें। इसके अलावा अमित शाह ने क्षेत्रीय स्तर पर भाजपा नेताओं के छत्रपों को जिम्मेदारी सौंपी है। ग्वालियर-चंबल को भाजपा काफी गंभीरता से ले रही है लिहाजा अमित शाह ने इस क्षेत्र में केन्द्रीय गृह मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर,ज्योतिरादित्य सिंधिया और अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालासिंह आर्य को जिम्मेदारी सौंपी है। विंध्य को लेकर भाजपा खेमें में काफी चिंता देखने को मिल रही है यही कारण है कि विंध्य का जिम्मा खुद सीएम शिवराज सिंह चौहान को सौंपा गया है। महाकौशल क्षेत्र की जिम्मेदारी प्रहलाद पटेल को तो मालवा अंचल में कैलाश विजयवर्गीय को जिम्मेदारी सौंपी गई है। कुल मिला कर भाजपा ऐसी रणनीति तैयार कर रही है जिसके तहत कांग्रेस को चुनाव में किसी प्रकार का मौका ना मिलने पाए। भाजपा का मानना है कि जिनके बल पर कांग्रेस चुनाव जीतने का दावा कर रही है उन्ही को कांग्रेस में नहीं रहने दिया जाएगा किसी तरह से कांग्रेस के मजबूत कार्यकर्ताओं को तोड़ो और भाजपा में शामिल करवाओ। अगले कुछ दिनों में एमपी में जमकर तोड़फोड़ की राजनीति देखने को मिलने वाली है। भोपाल में भी गरीब कल्याण योजना के तहत शिवराज सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए अमित शाह ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा था। करीब 25 घोटालों का उल्लेख करते हुए अमित शाह ने साफ कहा था कि सभी मामलों की जांच चल रही है जिस दिन जांच पूरी हो जाएगी उस दिन सबकुछ सामने आ जाएगा।

कांग्रेस की सरकार में गरीबों का राशन कांग्रेसी चट्टे-बट्टे ही चट कर जाते थे,हिम्मत है तो 50 साल का रिपोर्ट कार्ड दे कांग्रेस
शिवराज सरकार का रिपोर्ट कार्ड (Shivraj Government Report Card) पेश करने आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने रविवार को भोपाल (Amit Shah in Madhya Pradesh) में कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। शाह ने कहा कि 53 साल में 6-7 साल छोड़कर पूरे समय मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार रही। कांग्रेस के 53 साल के शासन में मध्य प्रदेश को बीमारू राज्य कहा जाता था, लेकिन अब डबल इंजन की सरकार में मध्य प्रदेश में तेजी से विकास हुआ। शिवराज सिंह के नेतृत्व में कई परिवर्तन हुए। गृह मंत्री ने कहा कि बीजेपी ने राजनीति में जवाबदेही की परंपरा शुरू की। अमित शाह ने कहा कि 2024 को लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की सभी सीटें बीजेपी जीतेगी (MP Elections)। शाह ने कहा कि 2014 में लोकसभा की 29 में से 27 सीटें, 2019 में 29 में 28 सीटें भाजपा को मिली। अब मैं विश्वास के साथ कह रहा हूं कि एक सीट की कमी है, 2024 में यह कमी भी मध्य प्रदेश की जनता पूरी कर देगी, मुझे पूरा विश्वास है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि मैं कांग्रेस नेताओं से कहना चाहता हूं कि इधर-उधर की बातें करके जनता को भ्रमित ना करते हुए मध्य प्रदेश के विकास के इस रिपोर्ट कार्ड का जवाब दें। कांग्रेस सरकार के 53 सालों का हिसाब दे मिस्टर बंटाधार और कमलनाथ की जोड़ी। शाह ने कहा कि कभी बंटाधार माना जाने वाला मध्य प्रदेश आज विकास की बुलंदियां छू रहा है। 20 साल में बिजली, पानी, सड़क और शिक्षा जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाते हुए भाजपा सरकार ने मध्य प्रदेश में विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। अमित शाह ने शाह ने आगे कहा कि यहां 11,700 से 1 लाख 40 हजार तक प्रति व्यक्ति आय पहुंचाना, ये सारे पैमाने को रिकॉर्ड तोड़ने वाला विकास है। मोदी जी और शिवराज जी की जोड़ी ने मध्य प्रदेश को यहां तक पहुंचाया है। इस दौरान शाह ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ पर भी निशाना साधा। शाह ने कहा कि कमलनाथ ने कभी हल नहीं पकड़ा, लेकिन एमएसपी की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार में राशन उनके चट्टे-बट्टे ही खा जाते थे। कांग्रेस के समय में 52 लाख राशन के लाभार्थी परिवार थे, अब एक करोड़ 25 लाख परिवारों को राशन पहुंच रहा है। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि कांग्रेस के पास अगर हिम्मत है अपने 50 साल का रिपोर्ट कार्ड लेकर आए। हमने राजनीति के अंदर जवाबदेही की परंपरा खड़ी की है। जहां-जहां हमारी सरकार है, वहां हम हिसाब लेकर जाते हैं। शाह ने कहा कि 15 महीने की कमलनाथ सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की गरीब कल्याण योजनाओं को बंद कर दिया या फिर उन योजनाओं का पोषण ना करके लंगड़ी करने का काम किया। उन्हें अपने 15 महीने के सरकार का हिसाब जनता को देना चाहिए।

अबकी बार धर्मेश चतुर्वेदी पर विश्वास
पंडित दीन दयाल के आदर्शों पर चलने वाली भारतीय जनता पार्टी आज ब्राम्हण वर्ग के साथ किस प्रकार का ब्योहार करती है उसकी बानगी सतना के जनसेवक धर्मेश चतुर्वेदी (Dharmesh Chaturvedi) के साथ देखने को मिली। धर्मेश चतुर्वेदी सतना (Satna) के उन जनसेवकों में शुमार किए जाते हैं जो 24 घंटे जनता की सेवा में जुटे रहते हैं। लेकिन लोकतंत्र में अगर जनता की ठीक से सेवा करनी है तो उसके लिए चुनाव लड़ना और जीतना जरुरी है। क्योंकि जन आकाक्षाओं को पूरा करना जरुरी होता है यही कारण है कि धर्मेश चतुर्वेदी ने जनता की सेवा के लिए राजनीति में आना स्वीकार किया। धर्मेश चतुर्वेदी ने 2009 में बीएसपी से टिकट लेकर चुनाव लड़ा राजनीति का नया अनुभव होने के कारण वो चुनाव में तो जीत दर्ज नहीं कर पाए लेकिन धर्मेश चतुर्वेदी ने जनता का दिल जीत लिया। स्थानीय जनता ने धर्मेश चतुर्वेदी पर इतना विश्वास जताया कि धर्मेश चतुर्वेदी ने जनता की सेवा को ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। सतना में धर्मेश चतुर्वेदी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कांग्रेस नेताओं ने भी उनसे करीबता बनाई लेकिन कहानी में ट्विस्ट उस वक्त आया जब भाजपा नेता अरविंद मेनन ने धर्मेश चतुर्वेदी से मुलाकात की और उन्हे भारतीय जनता पार्टी (MP BJP) में काम करने के लिए कहा। इस आफर पर जब धर्मेश चतुर्वेदी ने ज्यादा ध्यान नहीं किया तब अरविंद मेनन ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से धर्मेश चतुर्वेदी की फोन पर बात करवाई। फोन का स्पीकर खोल कर रखा गया और कई नेताओं के बीच मुख्यमंत्री ने धर्मेश चतुर्वेदी को भाजपा में काम करने के लिए कहा उन्ये यह भी आश्वासन दिया गया कि चुनाव के बाद निगम मंडल में अध्यक्ष बनाया जाएगा।जिसके बाद वो भाजपा में काम करने के लिए राजी हो गए। दरअसल धर्मेश चतुर्वेदी सतना में ब्राम्हण नेता के रुप में पहचान रखते हैं,ब्राम्हणों के बीच उनकी लोकप्रियता को भाजपा लोकसभा चुनाव में गणेश सिंह के लिए भुनाना चाहती थी।सतना से भाजपा सांसद गणेश सिंह को चुनाव जिताने के लिए यह सब रणनीति तैयार की गई थी क्योंकि 2009 के बाद से धर्मेश चतुर्वेदी ने सतना की स्थानीय जनता और ब्राम्हणों के दिल में जिस प्रकार से अपने लिए जगह बनाई थी तो उसका लाभ भाजपा लेना चाहती थी। भाजपा को इस बात का शुरु से अहसास था कि गणेश सिंह को चुनाव जिताना है तो ब्राम्हणों का समर्थन जरुरी है। और धर्मेश चतुर्वेदी ब्राम्हणों के दिल में बसते हैं फिर क्या था भाजपा की तरफ से भावनात्मक ड्रामा रचा गया और 2014 में धर्मेश चतुर्वेदी को भाजपा में शामिल करवा दिया गया। भाजपा की रणनीति कामयाब भी हुई धर्मेश चतुर्वेदी के अजय सिंह (राहुल) से संबंध भी अच्छे थे फिर भी उन्होने भाजपा में शामिल होकर पूरी निष्ठा के साथ गणेश सिंह के लिए चुनाव प्रचार किया और गणेश सिंह एक बार फिर चुनाव जीत गए। इस बीच धर्मेश चतुर्वेदी को भाजपा ने कई काम दिए जिसमें उन्हे 27 पोलिंगों का इंचार्ज बनाना शामिल है। इसके बाद बारी आई चित्रकूट उपचुनाव की यहां से धर्मेश चतुर्वेदी की उपेक्षाओं का दौर शुरु हो गया। नतीजा यह निकला कि यहां से कांग्रेस ने जीत दर्ज की। कहते हैं कि जनता की सेवा का जिसने संपल्प लिया हो उसके लिए किसी दल या संगठन की जरुरत नहीं होती,जनसेवक धर्मेश चतुर्वेदी ने भाजपा से उपेक्षित होने के बाद हार नहीं मानी और वो केसरिया हिंदुस्तान,विंध्योदय सेना के साथ जुड़ कर लगातार जनता की सेवा करते रहे। जनता की सेवा करते-करते अब स्थानीय जनता की एक ही इच्छा है कि भाजपा इस विधानसभा चुनाव में धर्मेश चतुर्वेदी को टिकट दे जिससे वो विधायक बन कर जनता की और ताकत के साथ मदद कर पाएं।

'कांग्रेस वाले बौखला गए हैं' देखते रहें हम क्या-क्या करने वाले हैंःसीएम
भारतीय जनता पार्टी की ओर से 230 प्रवासी विधायकों के लिए प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया (BJP MLA training)। अलग-अलग सत्रों में आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में सीएम शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan),प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma), राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिवप्रकाश (Shivprakash) सहित अन्य नेताओं ने प्रदेश सरकार की ओर से किए गए विकास कार्यों की जानकारी दी। चार राज्यों से आए विधायक अगले सात दिन तक प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों का दौरा करेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रवासी विधायक खुद के वाहनों से विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करेंगे,प्रवासी विधायकों को स्थानीय कार्यकर्ताओं से ज्यादा करीबता नहीं बनाने की ताकीद दी गई है। विंध्य क्षेत्र में जाने वाले विधायकों को पहले ट्रेन से भेजा जाएगा उसके बाद उन्हे संगठन की ओर से वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। हर विधायक को एक स्थानीय कार्यकर्ता गाइड के रुप में दिया जाएगा बांकी पार्टी का कोई अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता विधायकों के पास नहीं जा पाएगा। यह सभी विधायक उनको मिली प्रभार वाली विधानसभा में पार्टी की स्थिति का आंकलन करेंगे,कितने दावेदार हैं उसकी लिष्ट अलग तैयार करेंगे,इसके अलावा क्षेत्र में किस कार्यकर्ता का कितना वर्चश्व है और उसे चुनाव के लिए टिकट दिया जाता है तो वो कितनी मजबूती के साथ विपक्षी दल पर कितना प्रभाव डाल पाएगा इन सभी की रिपोर्ट तैयार कर केन्द्रीय नेतृत्व को ये विधायक सौंपेंगे। बैठक में विधायकों को संबोधित करने पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कोई भी विधायक यहां पर खुद को बाहरी ना समझें। सारे विधायक हमारे परिवार का हिस्सा हैं। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस बौखला गई है। जिस प्रकार से भाजपा की सरकार और संगठन काम कर रहे हैं उसको देखते हुए कांग्रेसी खेमे में बेचैनी छा गई है। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि अभी तो देखते जाइए हम क्या-क्या करने वाले हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 27 अगस्त को कोई बड़ी घोषणा करने वाले हैं और माना जा रहा है कि उस दिन सीएम कोई बड़ी घोषणा कर अपना सबसे बड़ा दांव खेलने वाले हैं और मुख्यमंत्री ने उसी ओर इशारा करते हुए उन्होने कहा है कि देखते जाइए हम क्या-क्या करने वाले हैं।

सीएम को राखी भेज चयनित पटवारियों ने नियुक्ती की लगाई गुहार
पटवारी चयन परीक्षा में भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद चयनित पटवारियों (Patwari Result) की नियुक्ति पर राज्य सरकार ने रोक लगा दी थी। चयनित पटवारियों का आरोप है कि उन्हे राजनीति की भेंट चढ़ाया जा रहा है। इस बीच चयनित पटवारियों ने हर दरवाजे पर गुहार लगाई,सीएम हाउस की बात हो अथवा भोपाल के नीलम पार्क में विरोध प्रदर्शन सबकुछ किया लेकिन राज्य सरकार का दिल नहीं पसीजा। सालों से मेहनत कर रहे चयनित पटवारियों ने जब किसी तरह से परीक्षा उत्तीर्ण की तो उनकी नियुक्ति पर रोक लगा दी गई। अब चयनित पटवारी दर-दर भटकने को मजबूर हैं। सभी तरह के उपाय करने के बाद अब चयनित पटवारियों ने सीएम (Shivraj Singh Chouhan) तक अपनी बात पहुंचाने के अलग-अलग रास्ते तैयार किए हैं। चयनित पटावरियों ने ट्विटर पर पोस्ट डाल कर मामा से नियुक्ति की गुहार लगाई थी और अब उन्ही चयनित पटवारियों ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों से सीएम शिवराज को राखी भेज कर उन्हे नियुक्ति देने की मांग उठाई है। सभी चयनित पटवारी शांति तरीके से मर्यादाओं में रह कर अपना विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं और अपनी बात सीएम शिवराज सिंह तक पहुंचाने का भी प्रयास कर रहे हैं। लेकिन इतनी मेहनत के बाद भी अब तक सरकार का दिल नहीं पसीजा है। चयनित पटवारी इस बात को लेकर भी परेशान हैं कि कभी भी चुनाव आचार सहिंता लग जाएगी जिसके बाद उनकी नियुक्ति अधर में लटक जाएगी। अगली सरकार किसकी बनेगी पटवारी इस बात को लेकर भी संशय में हैं और यही कारण है कि चयनित पटवारी अपनी बात सीएम तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं और अब उन्होने सीएम शिवराज को रक्षा सूत्र भेज कर भांजे होने का फर्ज निभा दिया है अब देखना यह दिलचश्प होगा कि मामा को भांजों की याद कब तक आती है।