#Narottam Mishra
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'दिग्विजय' के किले पर नरोत्तम मिश्रा की 'सेंधमारी' भरी जीत की हुंकार
राजगढ़ लोकसभा (rajgarh constituency) का चुनाव अब दिलचश्प हो चला है। दरअसल चुनाव के दिलचश्प होने का कारण दो राजनीतिक महारथियों के आमने-सामने होने के कारण हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (digvijaya singh) राजगढ़ लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में हैं। वहीं भाजपा की तरफ से राजनीति के खिलाड़ी डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) को भाजपा उम्मीदवार को जिताने का जिम्मा सौंप दिया गया है। अभी तक माना जा रहा था कि राजगढ़ में दिग्विजय सिंह आसानी के साथ चुनाव में जीत दर्ज कर लेंगे और भाजपा के सभी 29 लोकसभा सीटें जीतने के मंसूबों पर पानी फिर सकता है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी ने अपने सबसे भरोसेमंद नेता को राजगढ़ चुनाव की कमान सौंप दी है जिनकी जिंदगी में हार जैसा शब्द नहीं है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा पूर्व प्रधानमंत्री अटलविहारी वाजपेयी की उस कविता को ध्येय वाक्य मानते हैं जिसमें उन्होने कहा था 'हार नहीं मानूंगा,रार नहीं ठानुंगा' इसी कविता को ध्येय वाक्य मानते हुए पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बुधवार को राजगढ़ में जीत की हुंकार भरते हुए दिग्विजय सिंह के किले पर सेंधमारी का ऐलान कर दिया। गौरतलब है कि इतिहास के पन्नों पर नजर डालें तो जब भी भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री को जब कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है तब-तब उन्होने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के विश्वास पर खरा उतर कर पार्टी की झोली में जीत डाली है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार राजगढ़ संसदीय क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं में हार की हताशा घर कर रही थी लेकिन डॉ. नरोत्तम मिश्रा की एक सभा ने मानों भाजपा कार्यकर्ताओं को संजीवनी देने का काम किया हो। जिस प्रकार से पूर्व गृह मंत्री ने राजगढ़ में सभा के दौरान कार्यकर्ताओं को संबोधित किया है उसके बाद भाजपा के कार्यकर्ता एक नए जोश और उत्साह के साथ चुनाव प्रचार में उतर चुके हैं। यूं ही डॉ. नरोत्तम मिश्रा को पार्टी का 'संकट मोचक' नहीं कहा जाता है। पार्टी को जब भी विषम परिस्थिति दिखती है तो पूर्व गृह मंत्री को वहीं पर खड़ा कर दिया जाता है जो अपने चिर परिचित अंदाज में जनता का मन बदल कर पूरा माहौल भाजपा के पक्ष में करने की महारत रखते हैं।

जीतू पटवारी राहुल गांधी के पक्के चेले हैं,उन्हें हिंदी नहीं आती,इन्हें गिनती नही आती...
कांग्रेस में लगातार भगदड़ मची है रोजाना सैकड़ों और हजारों की संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता बीजेपी की सदस्यता ले रहे हैं। इतना सबकुछ होने के बाद भी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी (jitu patwari) ने मीडिया से कहा कि सिर्फ 336 लोगों ने अब तक भाजपा की सदस्यता ली है। जीतू पटवारी के बयान के बाद बीजेपी ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) ने करारा प्रहार करते हुए कहा कि जीतू पटवारी नींद से जागें और सही आंकड़े को स्वीकार करें। पूर्व गृह मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि छह अप्रैल को एक ही दिन में 47179 बूथ पर 282282 सदस्य बीजेपी के बने हैं। जितने जीतू पटवारी बता रहे हैं, उतने तो तीन दिन पहले दीपक सेक्सना कार्यकर्ता के साथ आए थे। पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि जितनी संख्या जीतू पटवारी ने बताई उतने तो पूर्व जनप्रतिनिधि ही आ चुके हैं। डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की चुटकी लेते हुए कहा कि जीतू पटवारी राहुल गांधी के पक्के चेले हैं। उन्हें हिंदी नही आती...इन्हें गिनती नही आती। हमारे दिल में और पार्टी में पर्याप्त जगह है और 'ज्वाइनिंग का अभियान आगे भी जारी रहेगा'

एक ऐसा नायक जो सबकुछ करके भी नहीं लेता क्रेडिट,कौन है वो नायक...
चुनाव जीतने के लिए सभी राजनीति करते हैं लेकिन जो दूसरों को जिताने के लिए राजनीति करे वो असल में नायक कहलाता है। और सबसे बड़ी बात तो यह है कि वो सबकुछ करके भी कोई क्रेडिट नहीं लेता। बात करते हैं साल 2019 की जब प्रदेश में भाजपा की सरकार नहीं बनी। महज कुछ सीटों के अंतर से भाजपा को विपक्ष में बैठना पड़ा। भाजपा के कई नेताओं की राजनीतिक विरासत खतरे में पड़ गई। ऐसे में भाजपा का एक ऐसा नेता सामने आया जिसे 'संकट मोचक' भी कहा जाता है। कट्टर हिंदुत्व की छवि तो उनमें दिखती ही है साथ ही प्रदेश के हर जिले का ब्राह्मण उन्हे अपना नेता मानता है। वो नाम है डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) जिसने राजनीति में कभी हारना नहीं सीखा है। कहते हैं कुछ लोग जीवन में इतने संघर्ष करके आगे आते हैं कि छोटे मोटे राजनीतिक झटके उसके लिए कोई मायने नहीं रखते उन्ही में हैं डॉ. नरोत्तम मिश्रा। बीजेपी की सरकार जा चुकी थी उस वक्त उन्होने केन्द्रीय नेत्रृत्व को भरोसा दिलाया कि वो कांग्रेस की सरकार गिरा सकते हैं एक-दो मीटिंग में तो केन्द्रीय नेत्रृत्व ने उनकी बात पर विश्वास नहीं किया लेकिन नरोत्तम मिश्रा तो उन नायकों में हैं जो एक बार कदम बढ़ा देते हैं तो फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखते। आखिर डॉ. नरोत्तम मिश्रा के आगे केन्द्रीय नेत्रृत्व भी झुका और आपरेशन लोटस की अनुमति दे दी। इस आपरेशन को सफल बनाने के लिए डॉ. नरोत्तम मिश्रा जुट गए और वो दिन आया कि जब कांग्रेस के डेढ़ दर्जन विदायक अचानक गायब हो गए। आखिर कांग्रेस की सरकार गिर गई। यहां भी सबकुछ करने के बाद भी डॉ. नरोत्तम मिश्रा के हाथ सीएम पद की कुर्सी नहीं बल्कि गृह मंत्रालय हाथ लगा। सबकुछ करके भी पूर्व गृह मंत्री ने किसी प्रकार का क्रेडिट नहीं लिया। साढ़े तीन साल सरकार चलने के बाद विधानसभा चुनाव हुआ और वो सियासत का नायक खुद चुनाव हार गया। हांलाकि राजनीतिक जानकारों का तो यहां तक कहना है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बढ़ते राजनीतिक कद को देखते हुए उन्हे हराया गया है। लेकिन कभी न हार मानने वाले डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने यह साबित किया कि उन्हे कितना भी दरकिनार किया जाए लेकिन वो कभी हार नहीं मानते। ज्वाइनिंग कमेटी का उन्हे संयोजक बना दिया गया और जिस दिन से उन्हे नई जिम्मेदारी मिली कांग्रेस में भगदड़ मच गई। कांग्रेस के पूर्व विधायक से लेकर पूर्व सांसद और अन्य पदाधिकारियों सहित कांग्रेस के हर छोटे बड़े नेताओं के बीजेपी में आने का सिलसिला शुरु हो गया। छह अप्रैल भाजपा का स्थापना दिवस होता है इस दिन को यादगार बनाने के लिए डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने एक लाख नए सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा और एक दिन में एक लाख 26 हजार से ज्यादा नए कार्यकर्ताओं को बीजेपी में शामिल कराने का कीर्तिमान रच दिया। ओवरआल तीन महीने की ज्वाइनिंग के आंकड़े की बात करें तो दो लाख 58 हजार से ज्यादा कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल हुए। इन सबके बीच जब डॉ. नरोत्तम मिश्रा से पूछा गया तो उन्होने पूरा श्रेय पीएम मोदी,राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा,सीएम मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को दिया और कहा कि उन्ही के नेत्रृत्व से प्रभावित होकर सभी लोग भाजपा में शामिल हो रहे हैं। मतलब साफ है कि सबकुछ करके सारा श्रेय भी किसी दूसरे को कैसे दिया जाता है। यह बात पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा में देखने को मिली इसी लिए लोग उन्हे राजनीति का नायक और चाणक्य कहते हैं।

स्थापना दिवस पर सवा लाख से ज्यादा कांग्रेसियों ने थामा बीजेपी का दामन
छह अप्रैल भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस (bjp foundation day) । इस दिन को यादगार बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने सदस्यता अभियान चलाया और जिम्मेदारी ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) को दी गई। डॉ. नरोत्तम मिश्रा बीजेपी के उन नेताओं में गिने जाते हैं जो अपनी जिम्मेदारी को पूरी शिद्दत से निभाते हैं। हुआ भी वही पूर्व गृह मंत्री ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि इस स्थापना दिवस को ऐतिहासिक बनाते हुए वो एक लाख से अधिक कांग्रेसियों को बीजेपी की सदस्यता दिलाएंगे। और अब जो आंकड़े जारी हुए हैं उसके मुताबिक एक दिन में एक लाख 26 हजार कांग्रेसियों ने बीजेपी की सदस्यता ली है। जो अब तक का सबसे बड़ा रिकार्ड माना जा रहा है। बांकी बीजेपी की तरफ से सदस्यता अभियान विधानसभा चुनाव के बाद से ही जारी है। उस आंकड़े को भी शामिल किया जाए तो यह आंकड़ा बढ़ कर दो लाख 58 हजार 523 कार्यकर्ताओं ने बीजेपी का दामन थामा है। यह अभियान अभी और तेज होने की बात भी कही जा रही है मतलब यह आंकड़ा तीन लाख से ऊपर जाने की उम्मीद जताई जा रही है। इतनी बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं का बीजेपी में शामिल होने पर डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कोई श्रेय नही लिया उन्होने कहा कि पीएम मोदी का आभामंडल और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के संगठनात्मक ढांचे से खुश होकर लोग बीजेपी में आ रहे हैं। साथ ही पूर्व गृह मंत्री ने सीएम मोहन यादव की नेत्रृत्व क्षमता और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भी सदस्यता का श्रेय दिया है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि भाजपा की सरकार और संगठन दोनों बढिया काम कर रहे हैं और उसी का फल है इतनी बड़ी सफलता।

मेरे हारने से कोई पार्टी खत्म होती है तो वही सही,खुद को नहीं दूसरों को दिया श्रेयःडॉ.नरोत्तम मिश्रा
बीजेपी ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (dr narottam mishra) कांग्रेस के लिए एक ऐसी सुनामी बन कर उभरे हैं मानो उन्होने रौद्र रुप धारण कर लिया हो। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पार्टी का जनाधार बढ़ाने का संकल्प लिया और ऐसा संकल्प लिया कि प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों से उन्होने कांग्रेसी खेमें में सेंधमारी शुरु कर दी। नतीजा यह निकला कि भाजपा के 45 वें स्थापना दिवस तक करीब ढाई लाख कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को वो भाजपा की सदस्यता दिला चुके हैं। पूर्व गृह मंत्री की यह भूख लगातार बढ़ती चली जा रही है। कुछ विधानसभा क्षेत्र तो ऐसे हैं जहां पर कांग्रेस का कोई नाम लेने वाला ही नहीं बचा है। कुछ सीटों पर कांग्रेस को एजेंट नहीं मिल रहे हैं। सबसे बड़ी और दिलचश्प बात तो यह है कि इतना बड़ा अभियान और इतनी बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बीजेपी में शामिल कराने का श्रेय भी डॉ. नरोत्तम मिश्रा खुद नहीं ले रहे। जिस प्रकार से उनके नेत्रृत्व में कांग्रेस के खिलाफ सुनामी आई है उसका श्रेय वो पीएम मोदी,राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा,सीएम मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के नेत्रृत्व को देते हैं। पूर्व गृह मंत्री द्वारा चलाए गए अभियान पर राजनीतिक विश्लेषक से बात की गई तो उनका कहना है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा जब खाली बैठते हैं तो उनका खालीपन हमेशा कांग्रेस के लिए हमेशा घातक साबित हुआ है। साल 2019 की हो जब पार्टी सरकार बनाने में नाकाम हुई थी या फिर ताजा उदाहण अभी का है जब डॉ. नरोत्तम मिश्रा चुनाव हारे और कांग्रेस के लिए काल बन गए। उनका अभियान अभी भी थमा नहीं है अनबरत जारी है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा कहते भी हैं कि कांग्रेस गुलामी का आखिरी प्रतीक है जो खत्म होना चाहिए और उसी अभियान में वो एक गिलहरी की भूमिका निभा रहे हैं।

डॉ. नरोत्तम मिश्रा के लिए उमड़ा ब्राह्मणों का जन सैलाव,जम कर लगे नारे
देश में ब्राम्हण भी खूब हैं और नेता भी खूब हैं लेकिन ऐसा एक भी ब्राम्हण नेता नहीं जो ब्राम्हणों के हित की बात खुलेआम करता हो। आज प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला (rajendra shukla) हैं जो किसी ब्राम्हण के कार्यक्रम में जाने से परहेज करते हैं वहीं किसी मुस्लिम के टेंट हाउस का शुभारंभ करना हो तो वो उसका रिबन काटने के लिए समय से पहले पहुंच जाते हैं। एक और ब्राम्हण नेता बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) हैं जिनके निवास पर ब्राम्हण जाते हैं तो वो पहले ही कह देते हैं कि मै कोई ब्राम्हण नेता नहीं हूं। कुछ हद तक गोपाल भार्गव (gopal bhargava) अपने क्षेत्र में कोशिश करते हैं लेकिन वो भी बेमन होकर। और एक हैं पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा जिसको प्रदेश के हर कोने का ब्राम्हण राजनीति से हट कर अपना नेता मानता है। क्योंकि डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) का ही एक ऐसा दरवाजा है जो ब्राम्हणों के हित के लिए 24 घंटे खुला रहता है। ऐसा भी नहीं है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा सिर्फ ब्राम्हणों के हित की ही बात करते हैं वो हर समाज के विकास की बात करते हैं और हर समाज के ब्यक्ति के सुख समृद्धि की हमेशा कामना करते हैं। असल में ब्राम्हण भी वही है जो समाज के हर वर्ग की बात करे। आज देश का हर वर्ग ब्राम्हणों को गाली देने में ब्यस्त रहता है लेकिन कभी कोई यह नहीं सोचता कि ब्राम्हतों ने शिक्षा देने में कभी कोई भेदभाव नहीं किया। ब्राम्हणों के दरवाजे जिस समाज का भी ब्यक्ति गया उसके कल्याण की बात ब्राम्हण करता है। मंगलवार को गुना में ब्राम्हणों के होली मिलन में जब डॉ. नरोत्तम मिश्रा पहुंचे तो वहां पर मौजूद ब्राम्हण समाज के लोगों ने दोनों बाहें फैला कर उनका स्वागत किया। डॉ. नरोत्तम मिश्रा का जब तक संबोधन चला उसका एक-एक शब्द लोग ऐसे सुन रहे थे जैसे श्रीमद भगवत गीता का पाठ चल रहा हो। डॉ. नरोत्तम मिश्रा को आज ब्राम्हण वर्ग के समर्थन की जरुरत है क्योंकि एक ब्राम्हण हजार पर भारी होता है।

डॉ. नरोत्तम मिश्रा के आगे जीतू पटवारी का सरेंडर,कुनवा रोकने में नाकाम हुए जीतू पटवारी
पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) विधानसभा चुनाव क्या हारे ऐसा लगता है उन्होने रौद्र रुप धारण कर लिया है। जब-जब पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को राजनीतिक आघात लगा है तब-तब उन्होने कांग्रेसी खेमे में तबाही मचाई है। इससे पहले साल 2019 में कांग्रेस की सरकार बनी थी जिसके बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा को कांग्रेस ने टारगेट करने का प्रयास किया नतीजा यह निकला कि उन्होने कांग्रेस की सरकार गिराने की कसम खा ली और कांग्रेस की सरकार को धराशाही भी कर दिया। 2023 के विधानसभा चुनाव में डॉ. नरोत्तम मिश्रा चुनाव हार गए भाजपा ने उन्हे बीजेपी ज्वाइनिंग कमेटी (bjp joining committee) का प्रदेश संयोजक बना दिया। पूर्व गृह मंत्री को भाजपा ने ज्वाइनिंग कमेटी का संयोजक क्या बनाया उन्होने रौद्र रुप धारण कर कांग्रेस के समूल नाश का बीड़ा उठा लिया। हालात यहां तक पहुंच गए अब तक 17 हजार से ज्यादा कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को बीजेपी में शामिल करा चुके हैं। ऐसा लगता है कि जैसे नरोत्तम मिश्रा के आगे पूरी कांग्रेस ने सरेंडर कर दिया है। इतना ही नहीं विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने जीतू पटवारी को पीसीसी चीफ बना दिया उनके अध्यक्ष बनते ही कांग्रेस में पलायन का दौर तेज हो गया। ऐसा लगता है जैसे पर्दे के पीछे से जीतू पटवारी (jitu patwari) खुद अपने नेताओं को बीजेपी में जाने की सलाह दे रहे हैं। दिलचश्प बात यह भी है कि चुनाव से पहले कांग्रेस के नेता पार्टी छोड़ रहे हैं और जीतू पटवारी ने एक भी ऐसी बैठक नहीं की जिसमें उन्होने नेताओं और कार्यकर्ताओं के पार्टी छोड़ने का कारण पूछा हो। मतलब साफ है कि जीतू पटवारी ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा के सामने खुद सरेंडर कर दिया है।

रीवा,सतना,अनूपपुर,जबलपुर और छिंदवाड़ा के हजारों कांग्रेसियों ने थामा बीजेपी का दामन
लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) से पहले कांग्रेस पार्टी में पलायन का दौर लगातार जारी है। गुरुवार को हजारों की संख्या में रीवा,सतना,अनूपपुर जबलपुर और छिंदवाड़ा के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का हाथ छोड़ कर बीजेपी का दामन थाम लिया है। भाजपा में ज्वाइन करने वाले नेताओं में पूर्व विधायक और जिला पंचायत अध्यक्षों सहित अलग- अलग तरह के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की सदस्यता ली है। ज्वाइनिंग कमेटी के प्रदेश संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) ने जानकारी देते हुए बताया कि अब तक करीब 15 हजार कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। और यह आंकड़ा ठीक इसके डबल होने की उम्मीद जताई जा रही है। होली के बाद एक बार फिर ज्वाइनिंग का दौर शुरु होगा जिसमें हजारों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल होने वाले हैं। Mukhabirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार जीतू पटवारी (jitu patwari) के पीसीसी चीफ बनने के बाद ऐसा पहला मौका है जब कांग्रेस के कार्यकर्ता इतनी बड़ी संख्या में बीजेपी का रुख कर रहे हैं। इस पलायन का कारण भी जीतू पटवारी ही बताए जा रहे हैं क्योंकि उनके पीसीसी चीफ बनने के बाद कार्यकर्ताओं में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है इसके अलावा पार्टी का सत्ता में नहीं आना भी कांग्रेस से पलायन बड़ा कारण बताया जा रहा है।

पूरी कांग्रेस खाली हुई जा रही है और राहुल गांधी चने के झाड़ में बैठ कर गिनती कर रहे हैं
कांग्रेस मुक्त अभियान के तहत भारतीय जनता पार्टी में लगातार ज्वाइनिंग का कारवां बढ़ता चला जा रहा है। बुधवार को मुरैना जिले के करीब 500 और छिंदवाड़ा के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की सदस्यता ले ली (bjp membership)। इन सभी कार्यकर्ताओं को ज्वाइनिंग कमेंटी (bjp joining committee) के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने पार्टी का अंग वस्त्र पहना कर बीजेपी की सदस्यता दिलाई है। विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक के सफर में कांग्रेस के 15 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं बीजेपी का दामन थाम लिया है। मजे की बात ये है कि रोजाना सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता बीजेपी की सदस्यता ले रहे हैं यहां तक की कांग्रेस के पास इस वक्त मजबूत उम्मीदवार तक नहीं हैं इसके वाबजूद कांग्रेस के नेता पार्टी में चल रहे पलायन को रोकने का कोई उपाय नहीं कर रहे हैं। राहुल गांधी (rahul gandhi) भारत न्याय यात्र निकाल कर चने के झाड़ में चढ़े बैठे हैं उन्हे लग रहा है कि जनता कांग्रेस को जिताएगी और भारतीय जनता पार्टी है कि कांग्रेस के हर कार्यकर्ता को भाजपा की सदस्यता दिलाती चली जा रही है।

डॉ. नरोत्तम मिश्रा से मिले कांग्रेस नेता गोविंद सिंह,भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज
पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह (govind singh) पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) से मिलने उनके निवास पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने करीब बीस मिनट तक बंद कमरे में बात की जिसके बाद डॉ. गोविंद सिंह की भाजपा में शामिल होने की अटकलें लगाई जाने लगी हैं। हांलाकि पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने इस मुलाकात को सौजन्य मुलाकात बताते हुए भाजपा में शामिल होने की अटकलों को विराम लगाने का प्रयास किया है। लेकिन जिस वक्त कांग्रेस में भगदड़ मची हुई है उस वक्त डॉ. गोविंद सिंह का पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा से मिलना कई तरह के राजनीतिक कयासों को हवा दे रहा है। डॉ. गोविंद सिंह ने ये भी कहा कि जो नेता कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में जा रहे हैं उन्हे उनके कद के हिसाब से पार्टी में सम्मान नहीं मिल पाया जिसके कारण उन्होने भाजपा की सदस्यता ली है। लोकसभा चुनाव लड़ने के विषय पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुरैना लोकसभा सीट से वो चुनाव लड़ना चाहते थे और पार्टी भी तैयार थी लेकिन आखिरी वक्त पर उन्होने अपना मन बदल लिया और अब वो लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। साथ ही डॉ. गोविंद सिंह ने भाजपा की ज्वाइनिंग को लेकर कहा है कि अभी वो भाजपा ज्वाइन नहीं कर रहे हैं लेकिन जब भी भाजपा ज्वाइन करेंगे मीडिया को सबसे पहले बुला कर जरुर बताएंगे। गौरतलब है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा भाजपा ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक हैं और जिस प्रकार से डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने अपने काम को अंजाम दिया है उससे पूरी कांग्रेस में उथल पुथल सी स्थिति बन गई है। और ऐसी स्थिति में दोनों बड़े नेताओं की मुलाकात ने कांग्रेसी खेमे में हलचल बढ़ा दी है।

कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका,सुरेश पचौरी सहित आधा दर्जन नेता बीजेपी में हुए शामिल
मप्र में राहुल गांधी के जाते ही कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। कांग्रेस नेताओं में चार बार राज्यसभा सांसद रहे और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी (suresh pachouri) ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। सुरेश पचौरी के साथ, विशाल पटेल,गजेंद्र सिंह राजू खेड़ी,संजय शुक्ला,अर्जुन पलिया,आलोक चंसोरिया,कैलाश मिश्रा,योगेश शर्मा,अतुल शर्मा,सुभाष यादव,दिनेश ढिमोले ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इन सभी नेताओं को जॉइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) भाजपा में लेकर आए हैं। ज्वानिंग के दौरान प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा,सीएम मोहन यादव,पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान,मंत्री कैलाश विजय वर्गीय मौजूद रहे। भाजपा की सदस्यता लेने के बाद सुरेश पचौरी ने कहा कि जिस प्रकार से भगवान राम के स्थापना दिवस के निमंत्रण को कांग्रेस ने अस्वीकार कर दिया था उसके बाद से ही वो आहत चल रहे थे। साथ में सुरेश पचौरी ने ये भी कहा कि पहले वाली कांग्रेस अब नहीं रही। और यही कारण है कि उन्होने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। सुरेश पचौरी ने कहा कि यूं ही कोई वेबफा नहीं होता। कुछ तो कारण रहे होंगे वेवफा होने के।

बीजेपी की रायशुमारी में चौकाने वाला नाम,मंडल अध्यक्षों ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा का लिया नाम
लोकसभा चुनाव (lok sabha elections) को लेकर जिला पार्टी पदाधिकारियों की हुई रायशुमारी में पूर्व गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) अब तक के दावेदारों में सबसे आगे आ चुके हैं। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार केन्द्र सरकार द्वारा सभी लोकसभा सीटों से मंडल अध्यक्ष और स्थानीय विधायकों सहित अन्य पदाधिकारियों से रायशुमारी की योजना तैयार की गई है। रायशुमारी में पहले प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और फिर जिला अध्यक्ष सुमित पचौरी का नाम सामने आया था लेकिन अब पता चला है कि पहली तीन पसन्दों में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम उभरा है। मंडल अध्यक्षों और पदाधिकारियों को अपनी पसंद के तीन नाम देने को कहा गया था। सूत्रों का कहना है कि तीन नामों में अधिकांश ने पहले दो नामों में प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम दिया है। डॉ. मिश्रा का नाम अचानक सामने आने से पार्टी का नेतृत्व भी हैरान है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा कि अभी तक ग्वालियर या मुरैना से चुनाव लड़ने की चर्चा थी। इन दो नामों के अलावा मौजूदा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह,जिला अध्यक्ष सुमित पचौरी,शैलेन्द्र शर्मा के नाम भी रायशुमारी में सामने आए हैं।