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राम मन्दिर से जुड़े कारसेवक से मिलने के बाद बीजेपी प्रदेश ने ब्यक्त किया उद्गार
कार सेवकों और उनके परिजनों से मुलाकात के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने कहा कि मेरा सौभाग्य हैं कि आज रामलला की कार सेवा में गए अचल सिंह से मिल रहा हूं 1992 में कलंक के उस ढांचे को मिटाने में इनका योगदान रहा हैं। आज अचल सिंह का मन गदगद हैं कि रामलला मंदिर में विराजेंगे (ram mandir pranpratishtha)।कारसेवकों ने कहा था कि रामलला हम आएंगे मंदिर वही बनायेंगे आज मंदिर वही बना हैं । कारसेवकों का वह संकल्प कल प्रधानमंत्री द्वारा रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पूरा होने जा रहा हैं। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा हम अंचल सिंह जी का संम्मान करने यहां आये हैं। आज उनका संकल्प पूरा हो रहा हैं। अंचल सिंह जी विवादित ढांचे पर चढ़े और वहां से गिरे। अब अंचल सिंह जी चल फिर नही सकते हैं। बीजेपी उन्हें रामलला के दर्शन करवाने ले जाएगी और भी कर सेवकों को बीजेपी रामलला के दर्शन करवाने ले जाएगी अयोध्या।

मोदी युग में राम-रीति से भारत का नवनिर्माण,राम-रीति से बन रहा नया भारतःवीडी शर्मा
बचपन से ही घर के बड़े-बुजुर्गों से प्रभु श्रीराम लला की कीर्ति, शौर्य और प्रभुता की बातें सुनता रहता था। युवा अवस्था के प्रारंभ में बताया गया कि आक्रांताओं ने अयोध्या में आक्रमण करके भगवान श्रीराम जन्मभूमि स्थान पर बने मंदिर को बर्बरतापूर्वक तोड़कर मस्जिद का विवादित ढांचा बनाया गया था। यह बात सुनने के बाद से ही मन उद्वलित रहने लगा कि हमारे आराध्य और रोम-रोम में बसने वाले भगवान श्रीराम के जन्मस्थान पर हुआ आक्रमण सनातन पर और हमारी आस्था पर आक्रमण था। इसके बाद से ही राष्ट्रीयता की विचारधारा से प्रेरित होकर कॉलेज में पहुंचते ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ (vd sharma)। अध्ययन के साथ ही श्रीराम जन्मभूमि का मुद्दा पूरी तरह से समझा। उसके उपरांत वर्ष 1992 में एबीवीपी के राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल होने कानपुर पहुंचा तो मुझे भी कारसेवा करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। वर्ष 1992 में ही 6 दिसंबर को कार सेवकों द्वारा श्रीराम जन्मस्थान पर बने विवादित ढांचे को गिरा दिया गया। उन दिनों राम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे नेताओं को यह सलाह दी जाती थी कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है जहां ऐसे सांप्रदायिक व अनावश्यक मुद्दों का कोई स्थान नहीं है। स्पष्ट है कि भारतीय जनता पार्टी के अतिरिक्त देश के सभी राजनीतिक दलों के लिए राम मंदिर आंदोलन एक सांप्रदायिक मुद्दे से अधिक और कुछ न था। युवा अवस्था में यह विचार मेरे मन मस्तिष्क में कौंधता रहता था कि जब भारत, भगवान श्रीराम की भूमि है तो यहां भगवान श्रीराम के जन्मस्थान पर आक्रांताओं द्वारा मंदिर तोड़कर बनाए गए विवादित ढांचे के स्थान पर रामलला के लिए भव्य मंदिर निर्माण की परिकल्पना सांप्रदायिक कैसे हो सकती है ? तत्समय एक बड़ा प्रभावशाली एवं विशिष्ट वर्ग भी सेकुलरिज्म की चादर में लिपटे हुए इन्हीं कुतर्कों को धार देता रहता था। ऐसी स्थिति में कभी-कभी लगता था कि अयोध्या में भव्य श्रीरामलला मंदिर का निर्माण एक दिवास्वप्न ही है, परंतु यह भारत का सौभाग्य है कि देश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसा एक ऐसा राष्ट्र निष्ठ संगठन है, जिसने श्रीरामलला के मंदिर निर्माण की आस कभी नहीं त्यागी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूरे देश में यह भरोसा जगाये रखा कि एक दिन राम मंदिर अवश्य बनेगा। राम जन्मभूमि का चरणबद्ध आंदोलन और विश्वास बनाए रखने के लिए रचे गए नारे इस प्रतिबद्धता के साक्षी रहे हैं। संघ ने देश की चेतना को जागृत रखते हुए श्रीराम मंदिर निर्माण के संकल्प को हर नागरिक का संकल्प बना दिया। संघ से प्रेरणा लेने वाले अनेक संगठनों ने उस चेतना को प्रखर बनाये रखने में अपना गिलहरी रूपी योगदान देने के लिए कृतसंकल्पित रहे। जनसंघ के समय से ही श्रीराम मंदिर का निर्माण अतिमहत्वपूर्ण मुद्दा था और भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस से ही यह प्राथमिकता के शिखर पर पहुंच गया। फलस्वरूप आज अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण पूर्ण हो चुका है और भगवान श्रीराम अब सनातनियों द्वारा निर्मित भव्य -दिव्य मंदिर में विराजने वाले हैं। वास्तव में किसी देश की चेतना ही उसके भविष्य मार्ग को सुनिश्चित करती है। विशेषकर भारत के संदर्भ में यह बहुत महत्वपूर्ण है कि उसकी अस्मिता पर जब-जब हमले हुए तो उसने अपनी चेतना को जीवंत रखा। *कवि इकबाल ने कहा था कि-* *यूनान ओ मिस्र ओ रूमा सब मिट गए जहाँ से* *अब तक मगर है बाक़ी नाम-ओ-निशाँ हमारा* *कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी* *सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहां हमारा।* हजार साल तक बर्बर हमलों के बावजूद हमारे पुरखों ने देश की चेतना को जागृत रखा। हम बाह्य युद्ध हार गये, लेकिन मन का युद्ध जीतते रहे। दुर्भाग्य से 1947 के बाद स्वतंत्र भारत में ऐसी राजनीतिक धारा केंद्र में रही, जिसने देश के मन को हराने के कुत्सित प्रयास किए। उसने आम हिन्दू जनमानस को सदा इसके लिए तैयार किया कि वह अपने मूल्यों को छोड़ दे। अटल सरकार और विशेषकर 2014 में राजनीतिक धारा का केंद्र बदला तभी हमारे भविष्य की राह उज्ज्वल हुई। विश्व में भारत अपनी प्राचीन सनातन पहचान के साथ नये सिरे से उभरने लगा और एक नया भारत आकार लेने लगा। 2014 से पहले अयोध्या में श्रीराम मंदिर की वकालत करते हुए हम सब यह कल्पना भी नहीं कर पाते थे कि इसके बनने के समय भारत की स्थिति क्या होगी? यह मुद्दा हिन्दू अस्मिता के प्रश्न से जुड़ा था, लेकिन अब मंदिर निर्मित होते-होते यह स्पष्ट हो गया है कि यह केवल अस्मिता का विषय ही नहीं, यह भारत के भविष्य और भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने का विषय था। आज यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि अयोध्या में सिर्फ राम मंदिर नहीं बन रहा है, इसके साथ-साथ एक नया भारत भी बन रहा है जो विश्व का नेतृत्व करने के लिए संकल्पित है। यह नया भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अगुवाई में बहुलता, विविधता और समावेशिकता का सम्मान करने वाला एकमात्र देश है। यह भारत अपनी पुरातन सांस्कृतिक पहचान को आधुनिक कलेवर में भी पोषित और संर्वधित करने की क्षमता रखता है। यह भारत अपनी धरोहर को वापस पाने के लिए सदियों तक प्रतीक्षा कर सकता है और अहिंसा के रास्ते पर चलकर उसे प्राप्त भी कर सकता है। यह नया भारत युद्ध एवं परमाणु बम के उपयोग के बिना ही अपनी विधि-व्यवस्था के माध्यम से सबसे पुरानी समस्याओं को सुलझाने की क्षमता रखता है। उसे कोई बाहरी दखल बर्दाश्त नहीं है। यह नया भारत स्वदेशी चंद्रयान का सफल परीक्षण कर सकता है तो यह अपने आराध्य श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का पुनः निर्माण कर सदियों की बर्बर गुलामी के चिह्न को भी मिटा सकता है। प्रश्न यह है कि भारत सदियों से दिव्य शक्तियों और असीम क्षमताओं वाला देश रहा है तो फिर इसकी अपनी महिमा, गरिमा क्यां धुमिल हो गई थी? इसका एक ही उत्तर है, देश की चैतन्यता पर प्रहार। देश की चेतना ऐसी बना दी गई थी कि राम मंदिर की बात करना सांप्रदायिक और मुस्लिम तुष्टीकरण करना सेकुलरिज्म

500 के नोंट पर छपेगी भगवान राम की तस्वीर,डिजाइन किए जा रहे तैयार
शास्त्रों के अनुसार भगवान राम (lord ram) को नारायण का अवतार माना जाता है और उनकी पत्नी हैं लक्ष्मी। इस बात में कोई शक नहीं कि भगवान राम देश के हर नागरिक के रोम-रोम में बसते हैं। देश की संस्कृति ही भगवान राम (ram mandir ayodhya)के नाम पर पहचानी जाती है। कोई भी काम होता है तो उसमें भगवान गणेश के बाद भगवान राम का ही नाम लिया जाता है। और इस वक्त जिस प्रकार से पूरा देश राम मय है हर तरफ से सिर्फ और सिर्फ भगवान राम और उनके मंदिर की बात हो रही है उससे देश की भाजपा सरकार भी लाभ लेना चाहती है (ram mandir pratishtha)। जिस प्रकार से मोदी सरकार में राम मंदिर के लिए ऐतिहासिक फैसला हुआ और फिर पीएम मोदी ने राम मंदिर की आधारशिला रखी और फिर मंदिर को बनाने के लिए तेजी से काम शुरु हुआ उसी का फल है कि आज पूरे देश में सोते जागते लोग सिर्फ राम और राम मंदिर की बात कर रहे हैं। अब इस बात की भी खबर मिल रही है कि आने वाले समय में 500 रुपये के नोट में भगवान राम की तस्वीर अंकित हो सकती है। अभी तक 500 के नोट में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर हुआ करती है लेकिन अब जो नए नोट आएंगे उसमें भगवान श्रीराम की तस्वीर को भी अंकित करने पर विचार चल रहा है। और आखिर ऐसा हो भी क्यों न। यह सनातनियों का देश है जिस देश में नोट को लक्ष्मी का दर्जा दिया जाता है उसी देश में नोट पर लक्ष्मी पति की तस्वीर लगना कोई आश्चर्य की बात नहीं है लिहाजा नोट में भगवान श्रीराम की किस प्रकार की तस्वीर होगी उसको लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक नोट के डिजाइन तैयार कर लिए गए हैं अभी सरकार की मंजूरी मिलना बांकी है जैसे ही सरकार की मंजूरी मिलेगी 500 के नोट में भगवान श्रीराम की तस्वीर को अंकित किया जाएगा। माना यह भी जा रहा है कि अयोध्या के राम मंदिर में भगवान राम की जो प्रतिमा स्थापित की जाएगी उसी तस्वीर को नोट पर स्थान दिया जा सकता है।

राम मंदिर की प्रतिमा पर दिग्विजय सिंह ने उठाया सवाल,कहा नई मूर्ति की क्या आवश्यकता पड़ गई
22 जनवरी को भगवान राम गर्भगृह में विराजने जा रहा हैं लेकिन उससे पहले सियासत का बाजार गर्म हो गया है (ayodhya ram mandir)। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (digvijaya singh) ने आरोप लगाते हुए कहा है कि जिस मूर्ति के लिए इतना संघर्ष हुआ वो मूर्ति कहां है और नई प्रतिमा की आवश्यक्ता क्यों पड़ गई। गौरतलब है कि 22 जनवरी को आयोध्या स्थित राम मंदिर के गर्भगृह में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है जिसके लिए देश भर में पीले चावल वितरित कर दर्शनार्थियों को आमंत्रित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में देश भर से वीआईपी और वीवीआईपी को भी आमंत्रित किया गया है। पूरी अयोध्या को दुल्हन की तरह सजाया गया है। दरअसल कांग्रेस इस बात पर विवाद खड़ा कर रही है कि पीले चावल भाजपा के कार्यकर्ता क्यों वितरित कर रहे हैं। वहीं भाजपा का मानना है कि वो रामकाज कर रहे हैं कांग्रेस के लोगों को क्या किसी ने रोक रखा है। कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी रामकाज में जुटना चाहिए लेकिन वो ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि वो गांधी खानदान की भक्ति करते हैं लिहाजा कांग्रेस के लोग वही करेंगे जो गांधी खानदान कहेगा। फिलहाल भगवान राम के नाम पर प्रदेश भर में सियासत का माहौल गर्म है। और दिग्विजय सिंह अपने चिरपरिचित अंदाज में भगवान राम की मूर्ति का विरोध करते नजर आ रहे हैं।

भगवान राम के भाई लक्ष्मण को नहीं मिला न्योता,हुए नाराज
अयोध्या राम मंदिर (Ram Mandir Inauguration ) के भव्य उद्घाटन समारोह की जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। भगवान राम के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में बॉलीवुड से लेकर छोटे पर्दे के कई बड़े दिग्गज सितारे शामिल होंगे (Ram Mandir). पॉपुलर शो में 'रामायण' (Ramayan) में राम का किरदार निभा चुके अरुण गोविल (Arun Govil) को न्यौता भेजा गया है. साथ ही सीता माता का रोल करने वालीं दीपिका चिखलिया (Dipika Chikhlia) को भी इन्वाइट किया गया है, लेकिन इस भव्य कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सुनील लहरी (sunil lahri) को नहीं बुलाया गया है. इस वजह से वह काफी आहत और नाराज हैं. सुनील लहरी ने इस मामले में अपना रिएक्शन दिया है। सुनील लहरी ने ई टाइम्स के साथ इंटरव्यू के दौरान कहा, 'ये जरूरी नहीं है कि हर बार आपको बुलाया जाए. अगर मुझे न्यौता मिलता तो मैं जरूर जाता है। अगर मुझे इन्वाइट किया जाता तो अच्छा लगता. इतिहास का हिस्सा बनने का मुझे भी मौका मिलता, लेकिन कोई बात नहीं. इसमें परेशान होने वाली कोई बात नहीं है।' इसके बाद सुनील लहरी ने हैरानी जताई कि 'रामायण' के मेकर्स को भी नहीं बुलाया गया है. उन्होंने कहा, 'शायद उन्हें लगता है कि लक्ष्मण का किरदार उतना महत्वपूर्ण नहीं है या वे मुझे व्यक्तिगत रूप से पसंद नहीं करते हैं. मैं प्रेम सागर के साथ था, लेकिन उन्हें भी नहीं बुलाया गया. मुझे यह अजीब लगता कि उन्होंने रामायण के मेकर्स में से किसी को भी न्यौता नहीं भेजा।' उन्होंने आगे कहा, 'यह कमेटी का अपना निजी फैसला है कि किसी बुलाना है और किसे नहीं. मैंने सुना है कि 7000 मेहमानों और 3000 वीआईपी को आमंत्रित किया गया है. इसलिए मुझे लगता है कि उन्हें उन लोगों को भी आमंत्रित करना चाहिए था, जो रामायण शो से जुड़े हैं, खासकर मुख्य कलाकारों और निर्माताओं को.' इस तरह सुनील लहरी ने साफ कर दिया कि अगर उन्हें भगवान राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में बुलाया जाता तो वह जरूर जाते।

अयोध्या में किस रुप में बिराजेंगे रामलला,कौन बना रहा भगवान की छवि
अयोध्या में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां अपने आखिरी दौर में चल रही हैं (ayodhya ram mandir). 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (pm narendra modi) के हाथों रामलला मंदिर के गर्भगृह में विराजेंगे. मंदिर में रामलला के पांच वर्ष की बालस्वरूप की खड़ी प्रतिमा स्थापित की जाएगी. इस मूर्ति का निर्माण अयोध्या में चल रहा है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्ट के महासचिव ने कहा कि रामलला की प्रतिमा तीन लोग बना रहे हैं, ये जो भी बना रहे हैं उनके बारे में सभी को जानकारी दी जाएगी। चंपत राय ने कहा कि, 'रामलला की नई प्रतिमा अयोध्या में बन रही है, इतना पर्याप्त है. तीन लोग उसे बना रहे हैं, कौन लोग बना रहे हैं ये बात मैं पहले भी कई बार बोल चुका हूं. बार-बार कहने की कोई जरुरत नहीं है. मूर्ति वहीं बनाएगा जो उसका जानकार होगा, जिसमें 100-50 मूर्तियां पहले बनाई होंगी, तकनीकी काम वहीं करता है जो उसका जानकार होता है। तकनीक को मनुष्य-मनुष्य का भेद करके नहीं देखा जाता है.' राम मंदिर में विद्वानों के चयन और पूजा पद्धति को लेकर भी चंपत राय ने जानकारी दी और कहा कि राम मंदिर के लिए विद्वानों का चयन किस प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है ये बताया नहीं जा सकता है. जो लोग इस तरह के सवाल पूछ रहे हैं वो इन विद्वानों को जानते भी नहीं होंगे और जब विद्वान आएँगे तो उनके नाम भी प्रकाशित किए जाएंगे. मंदिर में आज भी विद्वान लोग ही पूजा अर्चना कर रहे हैं. वैसे ही आगे भी रामलला की पूजा होगी. आज भी लोग मंदिर में पूजा कर रहे हैं, आगे भी ऐसे ही करेंगे, इसमें ज्यादा विचार करने की बात नहीं हैं।

बीजेपी के सोशल मीडिया हैंडल्स पर श्रीराम का आगमन,मंदिर के साथ पीएम मोदी और नड्डा की लगी तस्वीर
अयोध्या में श्रीराम मंदिर के उद्घाटन की तैयारियां तेजी से जारी है (Ram Mandir)। इच बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपने आधिकारिक x (पूर्व में ट्विटर) और फेसबुक हैंडल पर एक नयी बैनर तस्वीर को पोस्ट किया है। आगामी लोकसभा चुनाव 2024 के लिए केंद्र की सत्ता में बैठी भारतीय जनता पार्टी कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहती है। अयोध्या में बन रहे राम मंदिर हमेशा से भाजपा के अहम मुद्दों में से एक रहा था। अब पार्टी चुनावी सीजन में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को भी भुनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में पार्टी ने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर इस मुद्दे को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है (bjp social media(। भारतीय जनता पार्टी ने अपने आधिकारिक x (पूर्व में ट्विटर) और फेसबुक हैंडल पर एक नयी बैनर तस्वीर पोस्ट की है। इस तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (pm modi) और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा (jp nadda) को अयोध्या में आगामी राम मंदिर के साथ में दिखाया गया है। अयोध्या में होने वाले उद्घाटन समारोह के संदर्भ में बैनर तस्वीर की टैगलाइन में ‘जय श्री राम, 22 जनवरी, 2024’ लिखा गया है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने हाल ही में राम मंदिर के उद्घाटन की तारीख का खुलासा कर दिया था। चंपत राय ने बताया था कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भगवान श्री रामलला सरकार के श्री विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा दिनांक 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर कमलों द्वारा की जाएगी। प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक घड़ी पर 4000 पूजनीय संत और 2500 गणमान्य नागरिक उपस्थित रहेंगे।

'सियासत में राम' भाजपा और कांग्रेस के बीच छिड़ा संग्राम,'सबके हैं राम'
चुनावी माहौल हो और राजनीतिक पार्टियों की जुवान पर भगवान श्रीराम का नाम ना हो ऐसा भारत देश में तो संभव नहीं है। समय-समय पर नेता यह बता देते हैं कि जब तक भगवान राम की क्रिपा उन पर है तब तक तो वो अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक ही सकते हैं। इसकी बानगी उस वक्त देखने को मिली जब खुद को हनुमान भक्त कहने वाले कमलनाथ (Kamal Nath) ने छिंदवाड़ा में नामांकन भरने के दौरान सियासी हुंकार भरते हुए कहा, भाजपा नेता तो ऐसे बता रहे हैं कि जैसे राम मंदिर (Ram Mandir Ayodhya) उनका हो। कमलनाथ के इस बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि कमलनाथ चुनावी हिंदू हैं और चुनाव देख कर छद्म हिंदुत्व राग अलापने लगते हैं। लेकिन देश की जनता जानती है कि उनकी ही पार्टी ने भगवान राम और राम सेतु के अस्तित्व को नकारा था। इस मामले में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) ने भी कांग्रेस पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण को लटकाने,भटकाने,अटकाने वाले और प्रभु श्रीराम को काल्पनिक बताने वाले कांग्रेस नेता किस मुंह से राम मंदिर पर बात कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं को राम मंदिर पर बात करने का अधिकार नहीं है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि बाबरी विध्वंस के बाद भाजपा की चार राज्य सरकारों को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने बर्खास्त कर दिया था। जिसमें मप्र की भाजपा सरकार भी शामिल थी। सरकार को बर्खास्त करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी असंबैधानिक बताया था। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अयोध्या में राम जन्मभूमि पर बाबरी मस्जिद बनाने का फिर से संकल्प लिया था। यह निर्णय लेने वाली सरकार में सनातन विरोधी कमलनाथ प्रमुखता से शामिल थे। गुरुवार को केन्द्रीय मंत्री मिनाक्षी लेखी (Meenakshi Lekhi) ने भी कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि कन्या पूजन को नौटंकी बताने वाले कभी भारतीय संस्कृति और सनातन के पक्ष में नहघं हो सकते। कांग्रेस में कभी महिलाओं का सम्मान नहीं हुआ। जबकि भाजपा सरकार ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए कानून बनाया। तीन तलाक की कुप्रथा समाप्त की। प्रदेश में पुलिस भर्ती में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया है।