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बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने चुनावी 'रण' में अपनी नीति को किया लागू,मिली प्रचंड जीत
किसी भी जीत में पार्टी का कार्यकर्ता बहुत अहम होता है। और उस कार्यकर्ता के कर्तब्य बोद को याद दिलाना टीम के कप्तान का काम होता है। इस मामले में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) का कोई सानी नहीं है। आम तौर पर प्रदेश अध्यक्ष को लेकर यह भ्रांतियां हैं कि वो कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए हमेशा उपलब्ध रहते हैं लेकिन मिलते ही कहते हैं कि काम करो पार्टी आपके काम के आधार पर खुद आपको उठा लेगी। करीब चार साल से प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभाल रहे वीडी शर्मा को उस वक्त पार्टी की कमान सौंपी गई थी जब भाजपा सत्ता से बाहर हो चुकी थी लेकिन सिंधिया भाजपा में आए और प्रदेश में भाजपा की सरकार फिर स्थापित हो गई इसी लिए वीडी शर्मा जी को पार्टी में शुभंकर अध्यक्ष भी कहा जाता है। साल 2020 में जब 28 सीटों पर उप चुनाव हुए तो पार्टी ने 19 सीटों पर जीत दर्ज कर स्थाई सरकार बना ली। लेकिन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का काम वहीं पर समाप्त नहीं हुआ। उन्होने पार्टी को मजबूत करने के लिए अलग-अलग उपाय अपनाने शुरु किए। बूथ स्तर पर त्रिदेव बनाया,हर बूथ को डिजिटल बनाने का रिकार्ड बनाया,मंडलों को मजबूत किया,लगातार प्रदेश के जिलों और विधानसभाओं में प्रवास किया। कार्यकर्ताओं को लगातार ब्यस्त रखने और उनको पार्टी में अपनी उपयोगिता साबित करने के लिए कई तरह के अभियान चलाए। जिससे हर कार्यकर्ता को यह महसूस हो कि पार्टी को उनकी चिंता है और उनके काम को वाच किया जा रहा है। एक सामान्य परिवार से आए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपने राजनीतिक जीवन की कहानी शुरु की थी। तब किसी ने यह नहीं सोचा था कि यह युवा नेता एक दिन भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनेगा और कुशल संगठक कहलाएगा। लोगों के मुगालते उस वक्त दूर होने शुरु हुए जब वीडी शर्मा ने एक के बाद एक कड़े फेसले लिए,पार्टी में युवाओं को भी लगातार मौका दिया,सभी युवाओं ने जी तोड़ मेहनत की। नतीजे के तौर पर पहले उप चुनाव में जीत दर्ज कर भाजपा की स्थाई सरकार बनाई और अब प्रचंड बहुमत के के प्रदेश में पांचवीं बार भाजपा की सरकार बनाने की पूरी पटकथा लिख डाली। जब प्रदेश के सभी जिलों से सरकार के खिलाफ एंटीइंबेंसी की खबरें आती थी तो बीजेपी अध्यक्ष हमेशा यही कहते थे कि भाजपा ऐसी जीत जर्ज करेगी जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। आखिर रविवार को वो दिन भी आया जब प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की कही हर बात सत्य हुई और इससे यह भी साबित हुआ संघर्ष की भट्ठी में तपे बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा सियासत की हर चाल का जवाब देना बखूबी जानते हैं और बाजी को अपने पक्ष में कैसे करना है वो उन्हे खूब आता है। (madhya pradesh election result)

17 जिलों के परिणाम तय करेंगे प्रदेश की भावी सरकार
मध्य प्रदेश के 17 जिलों के चुनाव परिणाम पर भाजपा और कांग्रेस,दोनों दलों की नजर है (madhya pradesh elections)। 2018 के चुनाव में यहां एकतरफा परिणाम रहे थे। टीकमगढ़,रीवा,सिंगरौली,शहडोल,उमरिया,हरदा,नर्मदापुरम,सीहोर और नीमच जिले की सभी सीटें भाजपा ने जीती थी। जबकि मुरैना,अशोक नगर,अनूपपुर,डिंडौरी,छिंदवाड़ा,अलीराजपुर और झाबुआ जिले की सभी सीटें कांग्रेस ने जीती थी। खरगोन जिले की छह में से पांच सीटें कांग्रेस ने तो एक पर कांग्रेस के बागी (केदार डाबर) निर्दलीय चुनाव लड़ कर जीते थे। अब ये कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान पर हैं। प्रदेश में बुरहानपुर और आगर जिला ऐसा है, जहां एक-एक सीट कांग्रेस और भाजपा तो एक-एक पर निर्दलीय चुनाव जीते थे। बुरहानपुर जिले में नेपानगर सीट कांग्रेस और बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक सुरेन्द्र सिंह शेरा चुनाव जीते थे। शेरा अब कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। यही स्थिति आगर जिले में भाजपा के साथ बनी थी। यहां एक सीट भाजपा तो एक निर्दलीय विक्रम सिंह राणा ने जीती थी। राणा इस चुनाव में भाजपा से मैदान में हैं। इस प्रकार 17 जिलों के परिणाम या तो भाजपा के पक्ष में थे या फिर कांग्रेस के।

मतगणना से पहले कांग्रेस देगी उम्मीदवारों को ट्रेनिंग
मप्र में 17 नवंबर को वोटिंग हो चुकी है और अब तीन दिसंबर को मतगणना होनी है (madhya pradesh elections)। उसके पहले भाजपा और कांग्रेस पार्टी अपने उम्मीदवारों को मतगणना को ट्रेनिंग देने की योजना बना रहे हैं। जिससे मतगणना के दौरान किसी प्रकार की हेरा फेरी ना होने पाए। दिलचश्प पहलू यह है कि कांग्रेस पार्टी के जितने भी एजेंट मतगणना में मौजूद रहेंगे वो हर राउंड के बाद प्रमाण पत्र लेंगे। कांग्रेस पार्टी की ओर से बकायदा ट्रेनिंग देने का काम किया जा रहा है जिसके लिए 26 तारीख तय की गई है। पार्टी के सभी 230 उम्मीदवार अथवा उनका कोई प्रतिनिधि प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में 26 नवंबर को आकर ट्रेनिंग लेगा। और फिर वो अपने क्षेत्र में जाकर अन्य कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग देगा। ठीक इसी प्रकार से भारतीय जनता पार्टी ने भी रणनीति तैयार की है लेकिन भाजपा के उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को भोपाल बुलाने के बजाय उन्हे जिला मुख्यालय में ही ट्रेनिंग देने का काम किया जाएगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी एक्सपर्टों की टीम सभी जिला मुख्यालयों में भेजेगी जहां उस संबंधित जिले की सभी विधानसभा सीटों के प्रत्याशी और उनके एजेंट मौजूद रहेंगे जिन्हे एक्सपर्टों के माध्यम से ट्रेनिंग दी जाएगी। गौरतलब है कि तीन दिसंबर को प्रदेश भर में मतगणना होने जा रही है (assembly elections results) भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां अपनी जीत का दावा कर रही हैं और उनका दावा खोंखला साबित न होने पाए, मतगणना के दौरान किसी प्रकार की कोई कमी न रह जाए जिसके कारण भविष्य में पछताना न पड़े इसी लिए भाजपा और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग देने की रणनीति तैयार की है। जिसको अमली जामा पहनाने के लिए भाजपा और कांग्रेस की ओर से काम भी शुरु हो चुका है।