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चुनावी मिठाई में आएगी खटास,बैंड के शोर पर भी लगेगी लगाम
चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही निर्वाचन आयोग ने अलग-अलग गाइडलाइन तय कर दी है जिससे उम्मीदवारों की समस्याएं बढ़ गई हैं। गौरतलब है कि निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाल (lok sabha elections) में उम्मीदवारों द्वारा की जा रही फिजूल खर्ची पर भी रोक लगाने की योजना तैयार की है। जिसके तहत बैंड पार्टी से प्रचार-प्रसार किया तो सात हजार रुपये खर्च में जोड़ दिए जाएंगे। वहीं अगर प्रचार के दौरान स्पेशल अंजीर की मिठाई से मुंह मीठा कराया तो एक हजार रुपये जेब खर्च में अलग से जोड़ दिए जाएंगे। निर्वाचन शाखा द्वारा चाय,नास्ता,बैंड,सवारी,पटाखा,मिठाई सहित 400 वस्तुओं की दरें तय कर दी गई हैं। इन दरों को राजनीतिक दलों के समक्ष भी रखा गया है। जिला निर्वाचन शाखा द्वारा इन दरों की सूची तैयार कर ली गई है। जिसे आज निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह की अनुमति के बाद जारी कर दिया जाएगा। दो ढोल के प्रतिदिन 1500 रुपये चार्ज होंगे तो वहीं घोड़ा गाड़ी बुलाने पर 2100 रुपये तक चार्ज किए जाएंगे। इनके अलावा एक कट चाय पांच रुपये,पूड़ी,सब्जी और अचार के 50 रुपये जबकि मीठा लेने पर 16 रुपये अलग जोड़े जाएंगे।

लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान,एमपी में चार चारण में होगा मतदान
चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव-2024 (lok sabha elections) की तारीखों का ऐलान कर दिया है। आयोग की घोषणा के मुताबिक 19 अप्रैल से 7 चरणों में वोटिंग होगी. इसके बाद 4 जून को मतों की गिनती होगी और चुनाव के नतीजे घोषित हो जाएंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने लोकसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की। इस मौके पर चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एस एस संधू और दूसरे बड़े अधिकारी मौजूद थे। निर्वाचन आयोग लोकसभा चुनाव के लिए कार्यक्रम की घोषणा आज यानी शनिवार को करने की सूचना पहले ही दी थी। गौरतलब है कि मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल 16 जून को खत्म हो रहा है और नई लोकसभा का गठन उससे पहले होना है। चुनाव आयोग के मुताबिक पहले चरण में 19 अप्रैल, दूसरे चरण में 26 अप्रैल, तीसरे चरण में 7 मई, चौथे चरण में 13 मई, पांचवें चरण में 20 मई, छठे चरण में 25 और सातवें चरण में 1 जून को वोट डाले जाएंगे। चुनाव आयोग के मुताबिक पहले चरण में 21 राज्य में 19 अप्रैल को 102 सीटों पर चुनाव होगा। दूसरे चरण में 26 अप्रैल को 13 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेश में 89 सीटों पर चुनाव होंगे। तीसरे चरण में 7 मई को कुल 12 राज्यों में 94 सीटों पर चुनाव होंगे. चौथे चरण में 13 मई को कुल 10 राज्यों और केंद्र शासित राज्यों 96 सीटों पर चुनाव होंगे। जबकि पांचवें चरण में 20 मई को कुल 49 सीटों पर, छठे चरण 26 मई को कुल 57 सीटों पर और सातवें चरण में 1 जून को कुल सीट 57 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। आंध्र प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और ओडिशा में विधानसभाओं का कार्यकाल जून में अलग-अलग तारीखों पर खत्म हो रहा है। पिछली बार लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा 10 मार्च को की गयी थी और 11 अप्रैल से सात चरणों में मतदान हुआ था। मतगणना 23 मई को हुई थी. आगामी चुनावों में 10.5 लाख से अधिक मतदान केंद्रों पर करीब 97 करोड़ लोग मतदान करने के पात्र हैं। 1.5 करोड़ पोलिंग कर्मचारी और सुरक्षा स्टाफ इसके लिए लगाए गए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि 85 वर्ष से अधिक के मतदाता और 40 फीसदी विकलांगता वाले मतदाता अगर मतदान केंद्र पर नहीं आना चाहें तो अपने घर से वोट दे सकते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि पिछले 11 चुनाव में 3400 करोड़ रुपये जब्त किए गए। इस पूरी रकम में 835 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

जीत कर भी हारे कमलनाथ,अब राजनीति से सन्यास लेने की तैयारी,बेटे को बीजेपी में सेट करने की मजबूरी
कई बार खेल में जीतते जीतते भी टीमें हार जाती हैं। और ठीक उसी प्रकार राजनीति में भी देखने को मिलता है। ताजा उदाहरण पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (kamal nath) का है जिनकी बीजेपी में बात हो ग ई लेकिन अंत में बीजेपी के कुछ नेताओं ने कमलनाथ को लेकर विरोध कर दिया जिसके चलते कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ (nakul nath) की बीजेपी में ज्वाइनिंग पर सस्पेंश बन गया है।दरअसल भाजपा के नेताओं का मानना है कि सिक्ख दंगे के मुख्य आरोपी कमलनाथ थे और अभी तक भारतीय जनता पार्टी के नेता कमलनाथ पर सिक्ख दंगे को लेकर लगातार टिप्पड़ी करते रहे हैं ऐसे में कमलनाथ भाजपा ज्वाइन करते हैं तो पार्टी को दिक्कत हो सकती है। हांलाकि भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान कमलनाथ की बात भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से हुई थी और यही कारण था कि कमलनाथ अपने बेटे नकुलनाथ के साथ दिल्ली गए थे लेकिन वहां पर ठीक से बात नहीं बन पाई। अब माना जा रहा है कि अगले कुछ समय में कमलनाथ फिर भाजपा नेताओं से बात करेंगे और भाजपा में भी कमलनाथ को लेकर आपसी सहमति बनाई जाएगी। माना जा रहा है कि कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ को भाजपा में ज्वाइनिंग कराई जाएगी और कमलनाथ राजनीति से दूरी बना लेंगे। हांलाकि नकुलनाथ के बीजेपी में शामिल होने से पहले शर्ते भी हैं जिन्हे पूरा करना कमलनाथ के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकता है। भाजपा की शर्त है कि नकुलनाथ के साथ कमसे कम 20 विधायक भाजपा में शामिल होने चाहिए। कमलनाथ के साथ कुछ विधायक भाजपा ज्वाइन करने के लिए तो तैयार हैं लेकिन उनकी संख्या 20 तक नहीं पहुंच रही है। इधर कांग्रेस पार्टी को भी जबसे इसकी जानकारी हुई है तभी से प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी विधायकों की घेराबंदी करने में जुट गए हैं। जोड़ तोड़ की राजनीति अगले कुछ समय पर पूरे शबाब में पहुंचने वाली है। आने वाले कुछ समय में कांग्रेस और भाजपा में काफी बदलाव देखने को मिलने वाले हैं।