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#lok sabha

Total published stories tagged under #lok sabha: 67

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खंडेलवाल ने पटवारी के 'खसरों' पर बार-बार चलाई कलम और हर बार किया चारों खाने चित्त पर्दे के पीछे से लोकसभा और पर्दे के सामने से राज्यसभा चुनाव में दी सिकस्त
मध्य प्रदेश

खंडेलवाल ने पटवारी के 'खसरों' पर बार-बार चलाई कलम और हर बार किया चारों खाने चित्त पर्दे के पीछे से लोकसभा और पर्दे के सामने से राज्यसभा चुनाव में दी सिकस्त

11/6/202635
लोकसभा चुनाव प्रबंधन समिति के सदस्य रहे कार्यकर्ताओं को अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से बढ़ी उम्मीद अब निराशा में हो रही तब्दील
मध्य प्रदेश

लोकसभा चुनाव प्रबंधन समिति के सदस्य रहे कार्यकर्ताओं को अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से बढ़ी उम्मीद अब निराशा में हो रही तब्दील

7/3/2026102
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की सदन में गूंजी आवाज,सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण 2.0 अभियान को लेकर लोकसभा में पूछा सवाल
मध्य प्रदेश

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की सदन में गूंजी आवाज,सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण 2.0 अभियान को लेकर लोकसभा में पूछा सवाल

9/8/2024179
पांच झंडे और 14 स्टीकर वाले विधायक जी को कराना है नगर निगम से गाड़ी की सर्विसिंग
भोपाल

पांच झंडे और 14 स्टीकर वाले विधायक जी को कराना है नगर निगम से गाड़ी की सर्विसिंग

31/5/2024185
भोपाल लोकसभा सीट पर तीन चुनाव से लगातार बढ़ा भाजपा का वोटबैंक,कांग्रेस का घटा
भोपाल

भोपाल लोकसभा सीट पर तीन चुनाव से लगातार बढ़ा भाजपा का वोटबैंक,कांग्रेस का घटा

मोदी की गारंटी हो या फिर भाजपा की सरकार द्वारा किए गए काम हों लेकिन भोपाल की लोकसभा सीट (bhopal lok sabha) पर भारतीय जनता पार्टी का वोटबैंक लगातार बढ़ा है। पिछले तीन चुनाव की बात करें तो भाजपा ने हर बार एअ नए कैंडीडेट को मौका दिया है और हर बार भाजपा के उम्मीदवार भोपाल में रिकार्ड मतों से जीत दर्ज करने में कामयाब हुए हैं। वहीं प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस का वोटबैंक लगातार खिसकता चला गया है। तीसरे मोर्चों में शामिल बसपा,सपा और जदयू के वोटिंग शेयर भी लगातार कम हो रहे हैं। पिछले तीन चुनावों पर नजर डालें तो इन चुनावों में प्रदेश के मतदाताओं का भरोसा भी भारतीय जनता पार्टी पर बढ़ा है। वर्ष 2009 के चुनाव में भाजपा को कुल मतदाताओं में से 43.45 प्रतिशत यानि 84 लाख 65 हजार 532 मतदाताओं ने भाजपा को वोट दिया। इसके अगले साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ कर 54.02 प्रतिशत हो गया। और एक करोड़ 60 लाख मतदाताओं ने भाजपा उम्मीदवारों को जिता कर संसद भेजा। इसके बाद अगले पांच साल में भाजपा की रीति-नीति ने मतदाताओं को फिर प्रभावित किया और 2019 में भाजपा वोटिंग शेयर बढ़ कर 58 प्रतिशत हो गया। कुल दो करोड़ 14 लाख 6 हजार 887 मतदाताओं ने भाजपा उम्मीदवारों को जिताने में सार्थक भूमिका का निर्वहन किया। इस मामले में बीजेपी प्रदेश मीडिया विभाग के प्रभारी आशीष अग्रवाल का कहना है कि भाजपा की सेवा और सुशासन की नीतियों ने भाजपा के प्रति मतदाताओं का रुझान बढ़ाया है। जनता अब मेनिफेस्टो को मानने लगी है। पिछले तीन चुनाव में जिस तरह से भाजपा को बढ़त मिली है यही वो कारण हैं कि लगातार जनता का रुझान भाजपा की तरफ हो रहा है।

18/4/2024177
भाजपा और कांग्रेस के लिए विंध्य बना वोट 'मशीन' तैयार नहीं कर पाए नेत्रृत्व
मुखबिर विशेष

भाजपा और कांग्रेस के लिए विंध्य बना वोट 'मशीन' तैयार नहीं कर पाए नेत्रृत्व

राजनीतिक पार्टियों के लिए विंध्य (vindhya politics) हमेशा वोट की एक मशीन की तरह रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और श्रीनिवास तिवारी का स्वर्गवास होने के बाद कांग्रेस इस क्षेत्र से विलुप्त हो गई और भाजपा ने लगातार जीत का पर्चम लहराया। लेकिन भाजपा के लिए विंध्य हमेशा वोटिंग मशीन से ज्यादा और कुछ नहीं रहा। 30 विधानसभा क्षेत्र वाले विंध्य में एकतरफा बीजेपी की सीटें आ रही हैं लेकिन भाजपा ने राजेन्द्र शुक्ला के अलावा यहां से किसी अन्य चेहरे को तरजीह नहीं दी। जबकि राजेन्द्र शुक्ला का आम आदमी से कोई सरोकार नहीं वो सिर्फ वीवीआपी लोगों के नेता हैं आम नागरिक की पहुंच से वो काफी दूर हैं। गिरीश गौतम ने लगातार पांच बार विधानसभा का चुनाव जीता लेकिन उन्हे पार्टी ने कभी महत्व नहीं दिया। दिब्यराज सिंह लगातार तीन बार से चुनाव जीत रहे हैं लेकिन उन्हे भी पार्टी ज्यादा महत्व नहीं दे रही है। सीधी से केदारनाथ शुक्ला कई बार विधायक रहे उन्हे पार्टी ने कभी महत्व नहीं दिया अंत में पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया गया। सतना की बात करें तो वहां से भी भाजपा ने किसी नेता को महत्व नहीं दिया। मतलब साफ है कि भाजपा के एमपी का जो नेत्रृत्व है वो विंध्य में बड़े नेताओं को तैयार नहीं होने देना चाहता। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को मालूम है कि अगर विंध्य से बड़े नेता तैयार होंगे तो ग्वालियर-चंबल,बुंदेलखंड और मालवा-निमाड़ का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। इसी लिए भाजपा के संगठन की तरफ से विंध्य में नेत्रृत्व तैयार नहीं होने दिया जाता है। कांग्रेस की तरफ से नेत्रृत्व तैयार करने का प्रयास जरुर हुआ लेकिन कमलेश्वर पटेल पर कांग्रेस ने दांव लगाया जिस पर क्षेत्र की जनता विश्वास नहीं करती। कमलेश्वर पटेल कुर्मी समाज से आते हैं और कट्टर कुर्मी के रुप में उनकी पहचान है। महज 15 महीने की सरकार में उनके बंगले पर कुर्मी समाज के अलावा किसी और वर्ग को महत्व नहीं दिया गया। यही कारण है कि आज लोकसभा चुनाव में कमलेश्वर पटेल की हालत खराब है। अजय सिंह (राहुल) के रुप में कांग्रेस के पास जरुर एक बड़ा चेहरा विंध्य में था लेकिन कांग्रेस ने उन्हे लगातार उपेक्षित कर अजय सिंह के राजनीतिक कैरियार को अंत की ओर अग्रसर कर दिया है। कुल मिला कर विंध्य क्षेत्र भाजपा और कांग्रेस के लिए वोट मशीन से ज्यादा कुछ नहीं है।

14/4/2024453
खुद के बनाए जाल में उलझी कांग्रेस,अपनी ही सीट पर उलझे कांग्रेस के महारथी
भोपाल

खुद के बनाए जाल में उलझी कांग्रेस,अपनी ही सीट पर उलझे कांग्रेस के महारथी

लोकसभा चुनाव में एमपी से करीब दस सीटें जीतने का कांग्रेस (mp congress) के नेता दावा कर रहे हैं जबकि हकीकत उसके कुछ उलट ही देखने को मिल रही है। दरअसल कांग्रेस पार्टी में जिन नेताओं के ऊपर पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में संगठन को सक्रिय करने की सियासी जिम्मेदारी थी अब वो सभी नेता अपनी ही सीट पर उलझ कर रह गए हैं। कांग्रेस पिछड़ा वर्ग विभाग के प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाहा सतना से तो आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम को बैतूल लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतार गया है। इसी तरह पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह राजगढ़, कमलनाथ छिंदवाड़ा और कांतिलाल भूरिया रतलाम में उलझ कर रह गए हैं। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस ने रणनीति के तहत कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए अपने वरिष्ठ नेताओं को चुनाव मैदान में उतारा है। गौरललब है कि 2018 से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के हाथों में पार्टी की पूरी बागडोर थी वही सत्ता और संगठन के केंद्र बिंदु थे उन्होंने अपने हिसाब से जमत भी की थी लेकिन जब चार माह पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को पराजय मिली तो पार्टी ने उन्हें हटाकर जीतू पटवारी को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया। इसके बाद प्रदेश में आदिवासी और पिछड़ा वर्ग को पार्टी के पक्ष में जोड़ने की जिम्मेदारी जिन संगठनों की थी, उनके मुखिया ही चुनाव लड़ रहे हैं। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार न तो सिद्धार्थ कुशवाहा सतना छोड़ रहे हैं और न ही रामू टेकाम बैतूल से बाहर निकल पा रहे हैं। इससे संगठन की गतिविधियां भी एक प्रकार से तप हो गई हैं और टीम भी एक दिशा में काम नहीं कर पा रही है। यही स्थिति युवा कांग्रेस के साथ भी हो रही थी। इसके प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया के पिता कांतिलाल भूरिया रतलाम लोकसभा से चुनाव लड़ रहे हैं। वह स्वयं झाबुआ से विधायक भी हैं जो रतलाम लोकसभा क्षेत्र में ही आता है इसलिए वो पूरा समय वहीं दे रहे थे। इससे संगठन की गतिविधियां प्रभावित हो रही थी जिसे देखते हुए उन्होंने पद छोड़ने की पेशकश की, जिसे स्वीकार करते हुए अब मितेंद्र सिंह को अध्यक्ष बनाया गया है। फिलहाल भाजपा के आगे कांग्रेस के चुनावी जमावट की बात करें तो कांग्रेस बेहद कमजोर नजर आ रही है। भाजपा के नेता एक साथ एक दिन में आठ से दस लोकसभा सीट कवर कर रहे हैं तो वहीं कांग्रेस एकात सीट से आगे नहीं निकल पा रही है। इसके अलावा कांग्रेस इतने बड़े चुनाव में कांर्यकर्ताओं की कमी से भी जूझ रही है।

13/4/2024144
विंध्य में 'नड्डा' बजाएंगे बीजेपी का डंका,12 अप्रैल को सीधी का करेंगे दौरा
भोपाल

विंध्य में 'नड्डा' बजाएंगे बीजेपी का डंका,12 अप्रैल को सीधी का करेंगे दौरा

विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने लगातार विंध्य क्षेत्र की कमान अपने हाथ में थाम रखी है। यही कारण है कि विंध्य में बीजेपी काफी कमजोर लग रही थी तो केन्द्रीय नेत्रृत्व पर विंध्य की जनता ने विश्वास दिखाया और 30 में 25 सीटें बीजेपी की झोली में डाल दी। इस बात में कोई शक नहीं कि राजनीतिक जानकारों के लिए विंध्य हमेशा अबूझ पहेली रहा है। इतिहास गवाह है विंध्य ने हमेशा चौकाने वाले नतीजे दिए हैं और यही कारण है कि बीजेपी का केन्द्रीय नेत्रृत्व लगातार विंध्य में नजरें गड़ाए बैठा है। अब लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (jp nadda) 12 अप्रैल को पहले सीधी में चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे फिर रीवा का दौरा करेंगे। विंध्य में रीवा की बात करें तो यहां पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है ठीक इसी प्रकार सतना में भी त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। वहीं सीधी की बात करें तो यहां पर बीजेपी उम्मीदवार राजेश मिश्रा से ज्यादा मजबूत उम्मीदवार कमलेश्वर पटेल दिख रहे हैं जिसके चलते बीजेपी के केन्द्रीय नेत्रृत्व को विंध्य में आगे आना पड़ रहा है। विंध्य में दो चरणों में चुनाव होने वाला है। सीधी और शहडोल में 19 अप्रैल को वोटिंग होगी तो वहीं सतना और रीवा में 26 अप्रैल को वोटिंग होनी है।

9/4/202496
घर-घर घूम कर प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने लिया जन आशीर्वाद
मध्य प्रदेश

घर-घर घूम कर प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने लिया जन आशीर्वाद

चुनाव में जीत भले ही तय हो लेकिन जब तक ईवीएम नहीं खुल जाता तब तक चुनाव सरल नहीं माना जाता है। और इसकी जीती जागती मिशाल खजुराहो लोकसभा (khajuraho constituency) सीट में देखी जा सकती है। जहां प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) का सघन जनसंपर्क अभियान लगातार जारी है। गौरतलब है कि खजुराहो लोकसभा सीट से कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी खड़ा न करके इंडी गठबंधन को यह सीट दी थी जिसके तहत समाजवादी पार्टी ने वहां से महिला उम्मीदवार मीरा यादव को चुनाव मैदान में उतारा था लेकिन उनका नामांकन रद्द होने से अब खजुराहों में बीजेपी और बीएसपी के बीच ही मुकाबला बचा है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने पिछले पांच साल में जिस प्रकार से संगठन को मजबूत किया है उसके बाद बीजेपी के मुकाबले अन्य कोई दल अथवा प्रत्याशी टिकता नजर नहीं आ रहा है। यह सबकुछ जानते हुए भी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा चिलचिलाती धूप में घर-घर सघन जनसंपर्क अभियान कर लोगों से आशीर्वाद लेकर उन्हे केन्द्र और राज्य सरकार की जनहितकारी योजनाओं की जानकारी देकर अपनी जीत की बुनियाद को मजबूत कर रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भी वीडी शर्मा ने खजुराहो की जनता से संपर्क कभी खत्म नहीं किया। जबकि खजुराहो संसदीय क्षेत्र में सभी विधानसभा सीटों पर बीजेपी ने जीत का पर्चम लहराया है और वहां बीजेपी के कार्यकर्ता इतने सजग हैं कि प्रदेश अध्यक्ष की जीत में कोई संशय नहीं है लेकिन प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि जिस जनता के बल पर वो संसद में जाते हैं उस जनता का आशीर्वाद लेना जरुरी है यही कारण है कि वो लगातार लोगों के घर-घर जाकर संपर्क कर रहे हैं।

8/4/2024120
एक ऐसा नायक जो सबकुछ करके भी नहीं लेता क्रेडिट,कौन है वो नायक...
मुखबिर विशेष

एक ऐसा नायक जो सबकुछ करके भी नहीं लेता क्रेडिट,कौन है वो नायक...

चुनाव जीतने के लिए सभी राजनीति करते हैं लेकिन जो दूसरों को जिताने के लिए राजनीति करे वो असल में नायक कहलाता है। और सबसे बड़ी बात तो यह है कि वो सबकुछ करके भी कोई क्रेडिट नहीं लेता। बात करते हैं साल 2019 की जब प्रदेश में भाजपा की सरकार नहीं बनी। महज कुछ सीटों के अंतर से भाजपा को विपक्ष में बैठना पड़ा। भाजपा के कई नेताओं की राजनीतिक विरासत खतरे में पड़ गई। ऐसे में भाजपा का एक ऐसा नेता सामने आया जिसे 'संकट मोचक' भी कहा जाता है। कट्टर हिंदुत्व की छवि तो उनमें दिखती ही है साथ ही प्रदेश के हर जिले का ब्राह्मण उन्हे अपना नेता मानता है। वो नाम है डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) जिसने राजनीति में कभी हारना नहीं सीखा है। कहते हैं कुछ लोग जीवन में इतने संघर्ष करके आगे आते हैं कि छोटे मोटे राजनीतिक झटके उसके लिए कोई मायने नहीं रखते उन्ही में हैं डॉ. नरोत्तम मिश्रा। बीजेपी की सरकार जा चुकी थी उस वक्त उन्होने केन्द्रीय नेत्रृत्व को भरोसा दिलाया कि वो कांग्रेस की सरकार गिरा सकते हैं एक-दो मीटिंग में तो केन्द्रीय नेत्रृत्व ने उनकी बात पर विश्वास नहीं किया लेकिन नरोत्तम मिश्रा तो उन नायकों में हैं जो एक बार कदम बढ़ा देते हैं तो फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखते। आखिर डॉ. नरोत्तम मिश्रा के आगे केन्द्रीय नेत्रृत्व भी झुका और आपरेशन लोटस की अनुमति दे दी। इस आपरेशन को सफल बनाने के लिए डॉ. नरोत्तम मिश्रा जुट गए और वो दिन आया कि जब कांग्रेस के डेढ़ दर्जन विदायक अचानक गायब हो गए। आखिर कांग्रेस की सरकार गिर गई। यहां भी सबकुछ करने के बाद भी डॉ. नरोत्तम मिश्रा के हाथ सीएम पद की कुर्सी नहीं बल्कि गृह मंत्रालय हाथ लगा। सबकुछ करके भी पूर्व गृह मंत्री ने किसी प्रकार का क्रेडिट नहीं लिया। साढ़े तीन साल सरकार चलने के बाद विधानसभा चुनाव हुआ और वो सियासत का नायक खुद चुनाव हार गया। हांलाकि राजनीतिक जानकारों का तो यहां तक कहना है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बढ़ते राजनीतिक कद को देखते हुए उन्हे हराया गया है। लेकिन कभी न हार मानने वाले डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने यह साबित किया कि उन्हे कितना भी दरकिनार किया जाए लेकिन वो कभी हार नहीं मानते। ज्वाइनिंग कमेटी का उन्हे संयोजक बना दिया गया और जिस दिन से उन्हे नई जिम्मेदारी मिली कांग्रेस में भगदड़ मच गई। कांग्रेस के पूर्व विधायक से लेकर पूर्व सांसद और अन्य पदाधिकारियों सहित कांग्रेस के हर छोटे बड़े नेताओं के बीजेपी में आने का सिलसिला शुरु हो गया। छह अप्रैल भाजपा का स्थापना दिवस होता है इस दिन को यादगार बनाने के लिए डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने एक लाख नए सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा और एक दिन में एक लाख 26 हजार से ज्यादा नए कार्यकर्ताओं को बीजेपी में शामिल कराने का कीर्तिमान रच दिया। ओवरआल तीन महीने की ज्वाइनिंग के आंकड़े की बात करें तो दो लाख 58 हजार से ज्यादा कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल हुए। इन सबके बीच जब डॉ. नरोत्तम मिश्रा से पूछा गया तो उन्होने पूरा श्रेय पीएम मोदी,राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा,सीएम मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को दिया और कहा कि उन्ही के नेत्रृत्व से प्रभावित होकर सभी लोग भाजपा में शामिल हो रहे हैं। मतलब साफ है कि सबकुछ करके सारा श्रेय भी किसी दूसरे को कैसे दिया जाता है। यह बात पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा में देखने को मिली इसी लिए लोग उन्हे राजनीति का नायक और चाणक्य कहते हैं।

7/4/2024522
मतदान से पहले जीते बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा,अब सबसे बड़ी जीत पर नजर
भोपाल

मतदान से पहले जीते बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा,अब सबसे बड़ी जीत पर नजर

लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया लगातार जारी है। इस बीच खबर खजुराहो लेकसभा सीट (khajuraho constituency) से है जहां पर सपा उम्मीदवार मीरा यादव (meera yadav) का नामांकन रद्द हो गया है। यहां से कांग्रेस पार्टी ने अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं किया है क्योंकि इंडी गठबंधन के तहत कांग्रेस ने खजुराहो की सीट समाजवादी पार्टी को दे रखी थी। मीरा यादव का नामांकन रद्द होते ही खजुराहो लोकसभा सीट में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) की जीत तय मानी जा रही है। अब सपा उम्मीदवार नहीं होने के कारण बीजेपी उम्मीदवार वीडी शर्मा और बीएसपी उम्मीदवार के बीच चुनावी मुकाबला होगा। लेकिन सपा उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि एमपी की सभी 29 लोकसभा सीटों में खजुराहो की सीट सबसे बड़ी मार्जिन वाली सीट बन जाएगी। सपा उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी अब चुनाव प्रचार के लिए खुद को स्वतंत्र महसूस कर रहे होंगे। हालाकि जिस प्रकार से प्रदेश अध्यक्ष ने खजुराहो में विकास किया है उससे यह अंदाजा लगाया जा रहा था कि वीडी शर्मा को चुनाव जीतने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी।

5/4/2024190
पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल की हार तय,बीजेपी ने बूथ स्तर पर कसा सिकंजा
भोपाल

पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल की हार तय,बीजेपी ने बूथ स्तर पर कसा सिकंजा

सीधी लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार कमलेश्वर पटेल (kamleshwar patel) की हार लगभग तय हो चुकी है। अभी तक कमलेश्वर पटेल के सघन जनसंपर्क कभियान को देख कर लोग कयास लगा रहे थे कि कांग्रेस उम्मीदवार सीधी से जीत दर्ज कर सकते हैं लेकिन भाजपा की रणनीति जिस प्रकार की है उसके आगे कमलेश्वर पटेल बौने साबित होने लगे हैं। ऐसा भी माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने कमलेश्वर पटेल को अभी तक मौका दिया था जिससे उनकी क्षमता का बीजेपी के नेता पता लगा सकें। और अब मतदान को महज 18 दिन बचे हैं ऐसी स्थिति में भारतीय जनता पार्टी ने अपने पासे फेंकने शुरु कर दिए हैं। भाजपा का संगठन शक्ति केन्द्र,मंडल और बूथ स्तर से लेकर पन्ना और अर्ध पन्ना प्रभारियों तक फैला है। जिसमें भाजपा ने कसावट लाना शुरु कर दिया है। भाजपा की तरफ से स्टार प्रचारकों को भी प्रचार के लिए जल्द भेजा जाने वाला है। जिसकी शुरुआत राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शहडोल से कर दी है। अब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की नजर सीधी,सतना और रीवा में है। क्योंकि भाजपा के लिए सतना और रीवा की सीट भी इस बार बेहद कठिन मानी जा रही है यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी का केन्द्रीय नेत्रृत्व खुद विंध्य में फोकस कर रहा है। ठीक इसी प्रकार से भाजपा के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने विधानसभा चुनाव में भी कसावट करने का काम किया था जिसका परिणाम भाजपा के पक्ष में रहा और अब एक बार फिर विंध्य में भाजपा के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने मोर्चा थाम लिया है। मतलब साफ है कि अब भारतीय जनता पार्टी का पूरा फोकस विंध्य में होने वाला है। विंध्य की दो सीट सीधी और शहडोल में प्रथम चरण 19 अप्रैल को वोटिंग होने वाली है तो वहीं 26 अप्रैल यानि दूसरे चरण में सतना और रीवा में वोटिंग होनी है।

3/4/2024169
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