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मतदान से पहले जीते बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा,अब सबसे बड़ी जीत पर नजर
लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया लगातार जारी है। इस बीच खबर खजुराहो लेकसभा सीट (khajuraho constituency) से है जहां पर सपा उम्मीदवार मीरा यादव (meera yadav) का नामांकन रद्द हो गया है। यहां से कांग्रेस पार्टी ने अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं किया है क्योंकि इंडी गठबंधन के तहत कांग्रेस ने खजुराहो की सीट समाजवादी पार्टी को दे रखी थी। मीरा यादव का नामांकन रद्द होते ही खजुराहो लोकसभा सीट में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) की जीत तय मानी जा रही है। अब सपा उम्मीदवार नहीं होने के कारण बीजेपी उम्मीदवार वीडी शर्मा और बीएसपी उम्मीदवार के बीच चुनावी मुकाबला होगा। लेकिन सपा उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि एमपी की सभी 29 लोकसभा सीटों में खजुराहो की सीट सबसे बड़ी मार्जिन वाली सीट बन जाएगी। सपा उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी अब चुनाव प्रचार के लिए खुद को स्वतंत्र महसूस कर रहे होंगे। हालाकि जिस प्रकार से प्रदेश अध्यक्ष ने खजुराहो में विकास किया है उससे यह अंदाजा लगाया जा रहा था कि वीडी शर्मा को चुनाव जीतने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी।

मुरैना,ग्वालियर और गुना के प्रत्याशी आज तय करेगी कांग्रेस,पचौरी बने स्टार प्रचारक
भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों ने नामांकन भरना शुरु कर दिया है तो वहीं दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी अब तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा ही नहीं कर पाई है। प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में कांग्रेस 22 सीटों पर ही अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर पाई है (congress lok sabha list)। खजुराहो सीट समाजवादी पार्टी के लिए कांग्रेस ने छोड़ दिया है। बताया जा रहा है कि आज होने वाली कांग्रेस केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक में मुरैना,ग्वालियर,गुना समेत छह सीटों के नाम को आज तय कर लिया जाएगा। बैठक में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी,और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार शामिल होंगे। बालाघाट सीट से प्रत्याशी बनाए गए सरस्वार को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच विरोध शुरु हो गया है जिससे पार्टी की टेंशन बढ़ गई है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार गुना लोकसभा सीट से जातीय समीकरण को देखते हुए कांग्रेस उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। पहले अरुण यादव ने भी गुना से चुनाव लड़ने के लिए दावेदारी की थी लेकिन पार्टी वहां से स्थानीय उम्मीदवार को ही टिकट देना चाहती है। इधर मजे की बात यह है कि अब तक कांग्रेस के मजबूत नेता कहे जाने वाले सुरेश पचौरी ने जिस दिन से बीजेपी का दामन थामा है उस दिन से उन्होने कांग्रेस में लगातार तोड़-फोड़ मचा रखी है। वो हर दूसरे-तीसरे दिन कांग्रेस के नेताओं को बीजेपी की सदस्यता दिला रहे हैं। जिसके फलस्वरुप सुरेश पचौरी को भारतीय जनता पार्टी ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची में उन्हे स्थान दिया है। अब सुरेश पचौरी भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कांग्रेस पर हमला बैलते नजर आएंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को कौन सी 'जड़ी बूटी' दी,क्या है 'जड़ी बूटी' का रहस्य
रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी झाबुआ (pm modi in jhabua) प्रवास पर थे। ये माना जा रहा है कि पीएम मोदी के इस प्रवास से भारतीय जनता पार्टी ने मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव का शंखनाद कर दिया है (madhya pradesh elections)। झाबुआ जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र है और पीएम मोदी ने जनजातीय वर्ग को देखते हुए हजारों करोड़ रुपये की सौगात भी दी है मतलब साफ है कि भारतीय जनता पार्टी इस लोकसभा चुनाव में 400 पार का लक्ष्य लेकर चल रही है उसको देखते हुए पीएम मोदी से लेकर पार्टी के हर स्तर का कार्यकर्ता चुनाव प्रचार में जुट गया है। इस बीच झाबुआ में पीएम मोदी की प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) से कुछ देर मुलाकात हुई जिसमे उन्होने प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को एअ जड़ी बूटी दी है। अब सवाल ये उठता है कि पीएम मोदी ने प्रदेश अध्यक्ष को कौन सी जड़ी बूटी दी है और वो किस बीमारी के काम आती है। तो हम आपको बताते हैं कि ये चुनावी जड़ी बूटी है जिसका इस्तेमाल करने से प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटें भालतीय जनता पार्टी जीतेगी। पीएम मोदी ने प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से मुलाकात के दौरान कहा कि हर बूथ में 370 पार का लक्ष्य रखा जाना चाहिए। मतलब साफ है कि विपक्षी पार्टी को चारों खाने चित्त करना है तो उससे 370 वोट अधिक लाना जरुरी है। इस नारे के साथ एक और मतलब निकल रहा है। जम्मू कास्मीर में मोदी सरकार ने ही धारा 370 को खत्म किया है। मतलब मोदी ने 370 की जो जड़ी बूटी दी है वो ऐसे कारगर होनी चाहिए कि किसी भी असाध्य रोग को वो जड़ से खत्म कर सके।

बीजेपी ने हारे हुए उम्मीदवारों के साथ किया जीत के लिए मंथन
मप्र में विधानसभा चुनाव (mp elections) में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला है लेकिन भाजपा इतने में संतुष्ट होने वाली नहीं है। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी में एक बार फिर मंथन और समीक्षा का दौर शुरु हो गया है (bjp meeting)। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी की ओर से विधानसभा चुनाव में हारने वाले नेताओं के साथ बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का नेत्रृत्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) और प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा (hitanand sharma) के साथ राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश (shivprakash) भी शामिल हुए। इस मंथन में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (dr narottam mishra) को छोड़ कर करीब सभी हारने वाले नेता शामिल हुए। बैठक के दौरान हारने की वजहों का पता लगाने का प्रयास किया गया। साथ में सभी नेताओं को लोकसभा चुनाव में पूरी ताकत के साथ जुटने के लिए कहा गया है। इस मंथन में दस उम्मीदवार ऐसे भी थे जो बहुत ही कम मतों से हारे हैं। हारने वाली सीटों पर विकसित भारत यात्रा को मजबूती से शुरू करना के लिए भी कहा गया है। विधानसभा चुनाव में हारने वाले नेताओं से कहा गया है कि वो लोकसभा चुनाव में मेहनत करें और अपनी विधानसभा सीटों में पार्टी को जीत दिलाएं। बैठक के दौरान वोट शेयर पर भी खूब फोकस किया गया है और नेताओं से 51% से ऊपर वोट शेयर पहुंचाने के लिए कहा गया है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्यपाल से मुलाकात कर दी मंत्रियों की सूची
मोहन कैबिनेट (mohan cabinet) का आज विस्तार होने जा रहा है। इस विस्तार को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही थी कि आखिर वह कौन दिन और कौन सा वक्त होगा जब मुख्यमंत्री मोहन यादव (mohan yadav) अपने कैबिनेट को शपथ दिलाएंगे। लगातार दो दिनों तक दिल्ली में हुए मंथन के बाद मंत्रियों की सूची तैयार कर ली गई है। सूची को अंतिम रूप देने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव को कल फिर बुलाया गया था और देर रात केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (amit shah) और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (jp nadda) ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को मंत्रियों की सूची सौंपी है। फिलहाल भाजपा की तरफ से यह कोई नहीं बता पा रहा कि कितने मंत्री शपथ ले रहे हैं (mp cabinet) और कौन-कौन नेता मंत्री बन रहे हैं। विधायकों को फोन करके गुप्त रूप से सूचित किया जा रहा है कि 3:30 पर उनको राजभवन में शपथ लेने के लिए पहुंचना है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस मंत्रिमंडल में करीब 28 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। सभी लोकसभा सीटों को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा छिंदवाड़ा को छोड़कर क्योंकि छिंदवाड़ा में भाजपा का एक भी विधायक नहीं जीत पाया है।

कांग्रेस की हार का बड़ा कारण,सर्वे एजेंसियों ने दावेदारों से डील कर कमलनाथ को दी गलत रिपोर्ट
मप्र विधानसभा चुनाव (madhya pradesh elections) में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला है। और कांग्रेस पार्टी (mp congress) को इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस हार में सबसे बड़ा हाथ कमलनाथ (kamal nath) द्वारा कराए गए उम्मीदवारों के लिए सर्वे रहा है। एक गुप्त रिपोर्ट के मुताबिक कमलनाथ ने मप्र से बाहर अलग-अलग स्टेट की सर्वे एजेंसियों को प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों में मजबूत दावेदारों का सर्वे करने का ठेका दिया था। इन सर्वे एजेंशियों ने कमलनाथ के साथ डबल क्रास किया। इन सर्वे एजेंसियों ने ना सिर्फ कमलनाथ से सर्वे के नाम पर पैसे लिया बल्किन इन एजेंसियों ने अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के संभावित दावेदारों की लिष्ट तैयार कर उनसे संपर्क किया और उनके पक्ष में रिपोर्ट तैयार करने के लिए उनसे मोटी रकम वसूल की। कमलनाथ ने उन्ही को टिकट दिया जिन्हे सर्वे एजेंसियों ने मजबूत कैंडिडेट बताया। यही कारण है कि कमलनाथ को पूरा विश्वास था कि उन्होने मजबूत उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा है और वो चुनाव में जीत दर्ज करेंगे। नतीजा ये निकला कि भाजपा के अभेद्य किले को भेदने निकले कांग्रेस के कमजोर उम्मीदवारों ने कमलनाथ और कांग्रेस की लुटिया डुबो कर रख दी। इस बात में कोई सक नहीं कि भाजपा ने जोरदार तरीके से किलेबंदी की थी जिसमें मोदी की गारंटी और लाड़ली बहनों का विश्वास शामिल था। ऐसे में उनका सामना करने के लिए कांग्रेस के कमजोर उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे और भाजपा ने उन्हे चारों खाने चित्त कर दिया।

प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने दिल्ली में राष्ट्रीय पदाधिकारियों को दिया एमपी चुनाव की जीत का मंत्र
दिल्ली में आयोजित भाजपा की दो दिवसीय राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में शामिल हुए मध्यप्रदेश बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव (mp assembly elections) में भाजपा की डबल इंजन सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों और बूथ प्रबंधन की कुशलता से मिले अब तक के सर्वाधिक जनाधार के बारे में जानकारी अन्य पदाधिकारियों से साझा की। इस मौके पर मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में संगठन द्वारा किए गये विभिन्न नवाचारों के साथ प्रत्येक बूथ पर 51% वोटशेयर पाने की गतिविधियों की जानकारी भी दी गई। गौरतलब है कि प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के नेत्रृत्व में प्रदेश के सभी बूथों को डिजिटल करने से लेकर त्रिदेव बनाने की प्रक्रिया चुनाव में काफी असरदार रही है। जिस प्रकार से प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने प्रदेश की अलग-अलग विधानसभा सीटों पर प्रवास किया और बूथों को मजबूत करने से लेकर केन्द्र सरकार द्वारा संचालित गरीब कल्याण की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने का काम किया उसी का परिणाम है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा और प्रदेश में प्रचंड जीत दर्ज की। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने न केवल बूथों को डिजिटल किया बल्कि पन्ना प्रभारी और अर्ध पन्ना प्रभारियों की नियुक्ति कर जीत की आधार शिला रखी। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का विधानसभा चुनाव। के दौरान एक और नवाचार देखने को मिला जिसके तहत उन्होने कार्यकर्ताओं के साथ टिफिन बैठक कर उनके साथ खाना खाया जिससे कार्यकर्ताओं में छोटे और बड़े का भेदभाव भी खत्म हुआ। टिफिन बैठक में सभी कार्यकर्ता अपने घर से खाना लेकर आते थे और एकदूसरे के साथ खाते थे इससे कार्यकर्ताओं के बीच का भेदभाव खत्म करने में काफी मदद मिली। उसके बाद प्रदेश में जब मोदी की गारंटी चली तो प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा द्वारा की गई मेहनत का फल मिला और भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की।

पीएम मोदी से मिले मुख्यमंत्री मोहन यादव और राजेन्द्र शुक्ला
मंत्रिमंडल विस्तार से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला (rajendra shukla) और जगदीश देवड़ा (jagdish dewda) के साथ दिल्ली दौरे पर गए। इस दौरान उन्होने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (amit shah) ,राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (jp nadda) और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (pm narendra modi) से मुलाकात की। तीनों नेताओं का यह दिल्ली दौरा मप्र की दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है। दरअसल 13 दिसंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ दो उप मुख्यमंत्रियों ने शपथ ली थी। लेकिन किसी मंत्री को शपथ नहीं दिलाई गई। इस वक्त मप्र में हर ब्यक्ति की जुवान पर एक ही नाम है कि मंत्रिमंडल में कौन शामिल होगा। सूत्रों के मुताबिक आज मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल की सूची पर अंतिम मुहर लगवा ली है। अब शपथ का इंतजार है। बताया जा रहा है कि इस मंत्रिमंडल में कुछ पुराने चेहरों के लिया जाएगा। बांकी नए चेहरों को ज्यादा से ज्यादा मौका देने की बात सामने आ रही है। इस बार की विधानसभा में बहुत से ऐसे नेता हैं जो तीसरी अथवा चौथी बार जीत कर आए हैं और वो सभी मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं। सभी नेताओं को खुश नहीं किया जा सकता लेकिन केन्द्रीय नेत्रृत्व ऐसे नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल करना चाहता है जो लोकसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा मेहनत कर सकें।

पूर्व सीएम शिवराज की पिक्चर खत्म,दक्षिण भारत में पार्टी के लिए करेंगे काम
भारतीय जनता पार्टी फर्ष से अर्ष तक लेकर जाती है तो अर्ष से फर्ष में भी पहुंचाना जानती है। यही हाल पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) का हुआ है। दरअसल मप्र में शिवराज विरोधी लहर थी उस बीच भाजपा ने सीएम का चेहरा घोषित किए बगैर मोदी की 'गारंटी' पर चुनाव लड़ा। नतीजा ये निकला कि प्रदेश में एक बार फिर भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ आई। लेकिन पूर्व सीएम शिवराज यह साबित करने में जुट गए कि मोदी की गारंटी नहीं बल्कि उनके द्वारा लांच की गई लाड़ली बहना योजना के कारण प्रदेश में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनी है। यहीं से पूर्व सीएम शिवराज और केन्द्रीय नेत्रृत्व के बीच अहम की लड़ाई शुरु हो गई। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान आए दिन लाड़ली बहनों के साथ वीडियो जारी करवाते और महिलाओं के रोने की तस्वीर वायरल करवाते। केन्द्रीय नेत्रृत्व ने सबकुछ भांप लिया। और मर्ज बढ़ने से पहले उसका उपचार करने की योजना तैयार कर ली। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आनन-फानन में शिवराज सिंह चौहान को दिल्ली बुलाया गया और वहां शिवराज सिंह चौहान का दक्षिण भारत के लिए टिकट कटवा दिया गया। शिवराज सिंह चौहान से कहा गया कि आप संगठन मजबूत करने के लिए अभ्यस्त नेता हैं लिहाजा आप दक्षिण भारत जाइए और पार्टी के संगठन को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाइए। आखिर में शिवराज सिंह चौहान ने भी कह दिया कि पार्टी का काम ही उनके लिए मिशन है। पार्टी जो काम और भूमिका देगी वो पूरी करुंगा

मंत्रिमंडल पर तस्वीर अब तक नहीं हुई साफ,ओबीसी पर फोकस
एमपी में भाजपा की राजनीति का केन्द्र लगातार ओबीसी बना हुआ है (mp politics)। पार्टी नेताओं की दिल्ली में हाई कमान के साथ हुई बैठक में प्रदेश के नेताओं को भी अवगत कराया गया है। मंत्रिमंडल विस्तार में भी इसकी झलक दिखाई देगी (mohan cabinet)। बैठक में शामिल हुए प्रदेश के सभी बड़े नेताओं की ओर से प्रस्तावित नाम की सूची भी हाई कमान के पास है। लेकिन इस पर किसी तरह का अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। बताया जा रहा है कि अब केंद्रीय मंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष द्वारा अंतिम सूची तैयार की जाएगी। बैठक में हाई कमान ने मंत्रियों के चयन के लिए अलग- अलग तरह के पैरामीटर (मानक) बनाए हैं इस आधार पर मंत्रियों का चयन होगा। प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (mohan yadav) प्रदेश संगठन और संघ द्वारा प्रस्तावित नामों की सूची भेजी गई है। इसके अलावा राष्ट्रीय महासचिव विजय वर्गी और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल से भी सुझाव लिए गए हैं। बैठक में यह भी योजना तैयार की गई है कि भ्रष्टाचार के दाग या छवि खराब होने वाले विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया जाएगा। जो नेता कई वर्षों से कैबिनेट में रहे हैं उन्हें भी इस मंत्रिमंडल में स्थान नहीं दिया जाएगा। जिन दावेदारों के नाम पर सहमति बनेगी उनका जाति, वर्ग और क्षेत्रीय समीकरणों के आधार पर चयन किया जाएगा। मंत्रिमंडल में लोकसभा चुनाव का अनुमान और विधानसभा चुनाव के परिणाम को भी ध्यान में रखा जाएगा। जिन दावेदारों के नाम पर अंतिम मोहर लगेगी उनमें से संघ और भाजपा संगठन की सहमति अवश्य ली जाएगी।

एमपी विधानसभा में बजा सनातन का डंका,12 विधायकों ने ली संस्कृत में शपथ
मप्र की 16 वीं विधानसभा (madhya pradesh vidhansabha) में भारतीय जनता प्रचंड बहुमत के साथ आई है। और जिस प्रकार से भाजपा के नेता सनातन की बात करते हैं उसकी छवि भी देखने को मिली है। पहले दिन 207 विधायकों ने विधायक पद की शपथ ली। जिसमें अहम बात यह रही कि उसमें भाजपा के 12 विधायकों ने देव लिपि संस्कृति में शपथ ली जिसके लिए वो सदन में चर्चा का विषय बने रहे। इन सब में भाजपा के युवा विधायक अभिलाश पांडे कुछ अलग ही अंदाज में दिखाई पड़े। अभिलाश पांडे (abhilash pandey) शुद्ध भारतीय परिधान धोती और कुर्ता पहन कर विधानसभा में दाखिल हुए। अभिलाश पांडे जब विधानसभा में प्रवेश कर रहे थे तब उनके हाथ में भगवान श्रीराम का मंदिर था। गौरतलब है कि 22 जनवरी को भगवान श्रीराम अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर (ayodhya ram mandir) में स्थापित हो रहे हैं जिसके लिए देश भर के लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है। वही झलक अभिलाश पांडे ने दिखाने की कोशिश की।

मप्र सरकार पर वित्तीय संकट,कई योजनाओं पर लगा ब्रेक
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 जीतने के लिए शिवराज सरकार (shivraj government) ने सरकारी खजाना खोल दिया था। अब खजाना खाली हो गया है। मध्य प्रदेश पर 3.31 लाख करोड़ का लोन है और अब केवल 15000 करोड़ की लिमिट बची है। नतीजा सरकार ने मध्य प्रदेश के 38 विभागों द्वारा संचालित योजनाओं पर रोक लगा दिए। मध्य प्रदेश शासन (mp government) के वित्त विभाग ने 38 विभागों की योजनाओं पर रोक लगाते हुए, निर्देशित किया है कि सभी विभाग राजस्व संग्रहण के काम को प्राथमिकता पर रखें। जिन योजनाओं पर रोक लगाई गई है, उनमें नगरीय प्रशासन विभाग की महाकाल परिसर विकास योजना, मेट्रो ट्रेन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा संचालित तीर्थ दर्शन योजना भी शामिल है। इसके अलावा अपंजीकृत निर्माण मजदूरों को अंत्येष्टि एवं अनुग्रह राशि देने की योजना भी समाप्त कर दी गई है। गृह विभाग के अंतर्गत थानों के सुदृढ़ीकरण, परिवहन विभाग की ग्रामीण परिवहन नीति के क्रियान्वयन, खेल विभाग के खेलो इंडिया एमपी, सहकारिता विभाग की मुख्यमंत्री ऋण समाधान योजना, लोक निर्माण विभाग की विभागीय संपत्तियों के संधारण, स्कूल शिक्षा विभाग की निशुल्क पाठ्य सामग्री के प्रदाय, प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लेपटाप प्रदाय, एनसीसी के विकास एवं सुदृढीकरण, जनजातीय कार्य विभाग टंट्या भील मंदिर के जीणोद्धार, उच्च शिक्षा विभाग की योजना, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के नए आईटी पार्क की स्थापना, विमानन विभाग की भू-अर्जन के लिए मुआवजा, ग्रामीण विकास विभाग की पीएम सड़क योजना में निर्मित सड़कों का नवीनीकरण और महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए भवन निर्माण सहित अन्य योजनाओं में व्यय बिना वित्त विभाग की अनुमति के नहीं किया जा सकेगा। अपंजीकृत निर्माण मजदूरों को अंतिम संस्कार हेतु मदद वाली योजना भी बंद मध्य प्रदेश के अपंजीकृत निर्माण मजदूरों को अंत्येष्टि एवं अनुग्रह राशि नहीं दी जाएगी। नई राज्य सरकार ने नौ साल पहले शिवराज सरकार के समय बनाई योजना, जिसमें अपंजीकृत निर्माण श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए उनकी दुर्घटना में मृत्यु पर तीन हजार रुपये अंत्येष्टि सहायता एवं एक लाख रुपये अनुग्रह राशि देने का प्रविधान था, इसे भी बंद कर दिया है। मध्य प्रदेश श्रम विभाग के अंतर्गत कार्यरत भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मंडल ने चार दिसंबर 2014 को मंडल में अपंजीकृत निर्माण श्रमिकों को भी सामाजिक सुरक्षा देने की योजना जारी की थी जिसमें निर्माण श्रमिकों को उनकी मृत्यु पर तीन हजार रुपये अंत्येष्टि सहायता, निर्माण कार्य के दौरान घटित दुर्घटना में मृत्यु होने पर एक लाख रुपये एवं दुर्घटना में स्थाई अपंगता आने पर 75 हजार रुपये अनुग्रह राशि देने का प्रविधान था। 13 जनवरी 2017 में इस योजना में बदलाव कर प्रविधान किया गया था कि दुर्घटना में मृत्यु होने पर चार लाख रुपये एवं दुर्घटना में स्थाई अपंगता आने पर दो लाख रुपये अनुग्रह राशि दी जाएगी। अब यह योजना पूरी तरह बंद कर दी गई है।