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प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने दिल्ली में राष्ट्रीय पदाधिकारियों को दिया एमपी चुनाव की जीत का मंत्र
दिल्ली में आयोजित भाजपा की दो दिवसीय राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में शामिल हुए मध्यप्रदेश बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव (mp assembly elections) में भाजपा की डबल इंजन सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों और बूथ प्रबंधन की कुशलता से मिले अब तक के सर्वाधिक जनाधार के बारे में जानकारी अन्य पदाधिकारियों से साझा की। इस मौके पर मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में संगठन द्वारा किए गये विभिन्न नवाचारों के साथ प्रत्येक बूथ पर 51% वोटशेयर पाने की गतिविधियों की जानकारी भी दी गई। गौरतलब है कि प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के नेत्रृत्व में प्रदेश के सभी बूथों को डिजिटल करने से लेकर त्रिदेव बनाने की प्रक्रिया चुनाव में काफी असरदार रही है। जिस प्रकार से प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने प्रदेश की अलग-अलग विधानसभा सीटों पर प्रवास किया और बूथों को मजबूत करने से लेकर केन्द्र सरकार द्वारा संचालित गरीब कल्याण की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने का काम किया उसी का परिणाम है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा और प्रदेश में प्रचंड जीत दर्ज की। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने न केवल बूथों को डिजिटल किया बल्कि पन्ना प्रभारी और अर्ध पन्ना प्रभारियों की नियुक्ति कर जीत की आधार शिला रखी। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का विधानसभा चुनाव। के दौरान एक और नवाचार देखने को मिला जिसके तहत उन्होने कार्यकर्ताओं के साथ टिफिन बैठक कर उनके साथ खाना खाया जिससे कार्यकर्ताओं में छोटे और बड़े का भेदभाव भी खत्म हुआ। टिफिन बैठक में सभी कार्यकर्ता अपने घर से खाना लेकर आते थे और एकदूसरे के साथ खाते थे इससे कार्यकर्ताओं के बीच का भेदभाव खत्म करने में काफी मदद मिली। उसके बाद प्रदेश में जब मोदी की गारंटी चली तो प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा द्वारा की गई मेहनत का फल मिला और भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की।

मप्र और छग की विधानसभा में आज से 'ठाकुर' राज
भारतीय जनता पार्टी ने मप्र और छत्तीसगढ़ दोनों ही राज्यों के विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ जीत दर्ज कर सरकार बना ली है (assembly elections)। दोनों ही राज्यों में भारतीय जनता पार्टी ने चौकाने वाला निर्णय भी लिया है। छत्तीसगढ़ में लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रहे सबसे सीनियर नेता डॉ. रमन सिंह (Raman Singh) को छत्तीसगढ़ विधानसभा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उसी प्रकार एमपी में सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे चलने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Toma) rको मप्र विधानसभा अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यानि इससे यह तय हो गया है कि अब मप्र और छत्तीसगढ़ की विधानसभाओं में ठाकुरों का ही राज चलेगा। इस प्रकार का संयोग भी पहली बार देखने को मिला है। एमपी विधानसभा में ज्यादातर पंतित विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं और छत्तीसगढ़ में अभी तक चार विधानसभा अध्यक्ष बने और हर बार अलग-अलग वर्ग के अध्यक्ष बनाए गए हैं और इस बार भी वह प्रक्रिया लगातार जारी है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव ने ली प्रोटेम स्पीकर की शपथ
भारतीय जनता पार्टी के सबसे वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव (gopal bhargava) को प्रोटेम स्पीकर की शपथ राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने दिलाई है। शपथ ग्रहण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) ने और राज्यपाल ने गोपाल भार्गव को बधाई दी है। शपथ के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान,उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला,जगदीश देवड़ा सहित अन्य विधायक भी मौजूद रहे। जानकारी के मुलाबिक 18 से 21 दिसंबर के बीच विधानसभा का शीतकालीन सत्र भी आहुत किया जा रहा है जिसमें सभी विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी और उसके बाद पूर्णकालिक अध्यक्ष के रुप में वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव विधानसभा अध्यक्ष के रुप में चार्ज संभालेंगे।

एग्जिट अनुमान अबकी बार 'कमल' की सरकार
मप्र में 17 नवंबर को मतदान संपन्न हुए थे तब से अब तक सभी प्रकार के राजनीतिक पंडित अपने-अपने तरीके से गणित लगा रहे थे कि एमपी में अगली किसकी सरकार बन रही है (madhya pradesh elections)। लंबे इंतजार के बाद गुरुवार को अलग-अलग एजेंसियों का एग्जिट पोल जारी हो गया। एग्जिट पोल (exit polls) में जिस प्रकार से चौकाने वाले आंकड़े आए हैं उसके बाद कांग्रेसी खेमें में खामोशी सी छा गई है। वहीं दूसरी तरफ भाजपा (mp bjp) में भी तरह-तरह की बातें शुरु हो गई है। दरअसल जिस प्रकार से एग्जिट पोल के अनुमान आया है उसके मुताबिक भारतीय जनता पार्टी प्रदेश में एक बार फिर से प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। मतलब साफ है कि एग्जिट पोल के मुताबिक कमलनाथ (kamal nath) की कोई भी गारंटी काम नहीं आई। कांग्रेस के वचन पत्र में महिलाओं,कर्मचारियों,किसानों हर वर्ग को साधने के लिए कुछ न कुछ गारंटी दी गई थी। यह भी बार-बार कहा जा रहा था कि इस बार कांग्रेस पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ रही है लेकिन एग्जिट पोल के नतीजों ने कांग्रेस (mp congress) की बकिया उधेड़ कर रख दी है। कांग्रेस की ओर से एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि भाजपा की साजिश के तहत इस प्रकार के रुझान दर्शाए जा रहे हैं जबकि स्थिति ठीक इसके उलट है। वहीं भाजपा नेताओं की मानें तो उधर खुशी की लहर है। भाजपा के नेताओं का मानना है कि एग्जिट पोल के अनुमान से भी अच्छे परिणाम भाजपा के पक्ष में आएंगे क्योंकि भाजपा की सरकार ने इतने काम किए हैं जिसका परिणाम वोट के रुम में भाजपा के पक्ष में आएगा।

एग्जिट पोल पर भरोसा नहीं करतीं पूर्व सीएम उमा भारती
मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेत्री उमा भारती (uma bharti) ने गुरुवार को कहा कि वो एग्जिट पोल (exit poll) पर भरोसा नहीं करतीं हैं। उनका ये बयान पांच राज्यों के एग्जिट पोल जारी होने से पहले आया। पत्रकारों ने जब उनसे एग्जिट पोल के बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा कि वह (एग्जिट पोल) भरोसा नहीं करतीं। उन्होंने दावा किया कि वे भविष्यवाणी करते हैं कि एक पार्टी 112 से 130 सीटों के बीच जीतेगी। उन्होंने कहा कि अब अगर उस पार्टी को 112 सीटें मिलती हैं और चुनाव हार जाती है, तो एग्जिट पोल करने वालों का दावा है कि वे सही साबित हुए हैं, लेकिन अगर उस पार्टी को 120 सीटें मिलती हैं और वह जीतती है, तो एग्जिट पोल का दावा है कि उनकी भविष्यवाणी सही थी। जब उनसे पूछा गया कि भाजपा कितनी सीटें जीतेगी, तो उन्होंने कहा कि पार्टी हर सीट जीतने के लिए चुनाव लड़ती है। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2018 और मार्च 2020 के बीच 15 महीने की अवधि को छोड़कर भाजपा 2003 से मध्य प्रदेश में सत्ता में है। मार्च 2020 में कांग्रेस की सरकार गिर गई और भाजपा सत्ता में वापस आ गई।

17 जिलों के परिणाम तय करेंगे प्रदेश की भावी सरकार
मध्य प्रदेश के 17 जिलों के चुनाव परिणाम पर भाजपा और कांग्रेस,दोनों दलों की नजर है (madhya pradesh elections)। 2018 के चुनाव में यहां एकतरफा परिणाम रहे थे। टीकमगढ़,रीवा,सिंगरौली,शहडोल,उमरिया,हरदा,नर्मदापुरम,सीहोर और नीमच जिले की सभी सीटें भाजपा ने जीती थी। जबकि मुरैना,अशोक नगर,अनूपपुर,डिंडौरी,छिंदवाड़ा,अलीराजपुर और झाबुआ जिले की सभी सीटें कांग्रेस ने जीती थी। खरगोन जिले की छह में से पांच सीटें कांग्रेस ने तो एक पर कांग्रेस के बागी (केदार डाबर) निर्दलीय चुनाव लड़ कर जीते थे। अब ये कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान पर हैं। प्रदेश में बुरहानपुर और आगर जिला ऐसा है, जहां एक-एक सीट कांग्रेस और भाजपा तो एक-एक पर निर्दलीय चुनाव जीते थे। बुरहानपुर जिले में नेपानगर सीट कांग्रेस और बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक सुरेन्द्र सिंह शेरा चुनाव जीते थे। शेरा अब कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। यही स्थिति आगर जिले में भाजपा के साथ बनी थी। यहां एक सीट भाजपा तो एक निर्दलीय विक्रम सिंह राणा ने जीती थी। राणा इस चुनाव में भाजपा से मैदान में हैं। इस प्रकार 17 जिलों के परिणाम या तो भाजपा के पक्ष में थे या फिर कांग्रेस के।

मतगणना से पहले कांग्रेस देगी उम्मीदवारों को ट्रेनिंग
मप्र में 17 नवंबर को वोटिंग हो चुकी है और अब तीन दिसंबर को मतगणना होनी है (madhya pradesh elections)। उसके पहले भाजपा और कांग्रेस पार्टी अपने उम्मीदवारों को मतगणना को ट्रेनिंग देने की योजना बना रहे हैं। जिससे मतगणना के दौरान किसी प्रकार की हेरा फेरी ना होने पाए। दिलचश्प पहलू यह है कि कांग्रेस पार्टी के जितने भी एजेंट मतगणना में मौजूद रहेंगे वो हर राउंड के बाद प्रमाण पत्र लेंगे। कांग्रेस पार्टी की ओर से बकायदा ट्रेनिंग देने का काम किया जा रहा है जिसके लिए 26 तारीख तय की गई है। पार्टी के सभी 230 उम्मीदवार अथवा उनका कोई प्रतिनिधि प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में 26 नवंबर को आकर ट्रेनिंग लेगा। और फिर वो अपने क्षेत्र में जाकर अन्य कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग देगा। ठीक इसी प्रकार से भारतीय जनता पार्टी ने भी रणनीति तैयार की है लेकिन भाजपा के उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को भोपाल बुलाने के बजाय उन्हे जिला मुख्यालय में ही ट्रेनिंग देने का काम किया जाएगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी एक्सपर्टों की टीम सभी जिला मुख्यालयों में भेजेगी जहां उस संबंधित जिले की सभी विधानसभा सीटों के प्रत्याशी और उनके एजेंट मौजूद रहेंगे जिन्हे एक्सपर्टों के माध्यम से ट्रेनिंग दी जाएगी। गौरतलब है कि तीन दिसंबर को प्रदेश भर में मतगणना होने जा रही है (assembly elections results) भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां अपनी जीत का दावा कर रही हैं और उनका दावा खोंखला साबित न होने पाए, मतगणना के दौरान किसी प्रकार की कोई कमी न रह जाए जिसके कारण भविष्य में पछताना न पड़े इसी लिए भाजपा और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग देने की रणनीति तैयार की है। जिसको अमली जामा पहनाने के लिए भाजपा और कांग्रेस की ओर से काम भी शुरु हो चुका है।

एमपी में सियासी जमीन की तलाश में तीसरे दलों ने कई सीटों पर भाजपा-कांग्रेस का बिगाड़ा गणित
मप्र में मतदान हो चुका है और उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो चुकी है (mp elections)। साल 2018 की तुलना में इस साल बंपर वोटिंग हुई है जिससे भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। भाजपा के नेताओं का मानना है कि लाड़ली बहना योजना के कारण महिलाएं घर से बाहर निकली हैं और भाजपा कज पक्ष में वोट किया है वहीं कांग्रेस के नेताओं का दावा है कि पीसीसी चीफ कमलनाथ ने जिस प्रकार से अपने वचन पत्र में गारंटियां दी हैं उसी का परिणाम है कि प्रदेश में बंपर वोटिंग हुई है। खैर किस पार्टी का वर्चश्व होगा वो तो तीन दिसंबर को ही पता चलेगा लेकिन सबसे अहम बात यह है कि मप्र में हुए इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के अलावा बसपा,आमआदमी पार्टी,सपा सहित कई अन्य दलों ने भी खूब पसीना बहाया और मजबूत उम्मीदवार उतारे हैं। प्रदेश की करीब दो दर्जन से ज्यादा ऐसी सीटें हैं जहां पर त्रिकोणीय मुकाबला है। अकेले विंध्य की दर्जन भर सीटों में त्रृकोणीय मुकाबला देखने को माल रहा है। जिसमें बीएसपी और सपा दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों ने अलग-अलग सीटों पर भाजपा और कांग्रेस को खासी टक्कर दी है। पूरे एमपी में माना जा रहा है कि बीएसपी की करीब पांच से छह सीटें आने वाली हैं। जिस प्रकार से वोटिंग प्रतिशत आया है उससे दोनों पार्टियों में उत्साह तो खूब है लेकिन अंदर ही अंदर दोनों पार्टियों में चिंता की लकीरें भी देखने को मिल रही हैं। सभी नेता हिसाब लगाने में जुट गए हैं कि वोट प्रतिशत बढ़ा है तो इसका मतलब क्या है?

'शिवराज जी बेरोजगार नहीं होंगे,तीन दिसंबर के बाद मुंबई जाएंगे ऐक्टिंग करेंगेःकमलनाथ
पीसीसी चीफ कमलनाथ (kamal nath) ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) पर तंज कसते हुए कहा है कि शिवराज तीन दिसंबर के बाद बेरोजगार नहीं होंगे,मुंबई जाएंगे ऐक्टिंग करेंगे। कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश की जनता भाजपा का सफाया करने जा रही है। महिलाओं में वोटिंग को लेकर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। इसके अलावा पीसीसी चीफ ने कहा कि भाजपा जब कमजोर पड़ने लगती है तो शराब,पैसा और प्रशासन का इस्तेमाल करने लगती है लेकिन इस चुनाव में भाजपा का कोई भी हथकंडा नहीं चलने वाला है क्योंकि प्रदेश की जनता बदलाव का मन बना चुकी है। साथ ही कमलनाथ ने ये की कहा कि आज भाजपा के पास स्थिति ये है कि वो अपने सीएम उम्मीदवार का नाम तक नहीं ले सकती है क्योंकि वहां से किसी को सीएम कैंडीडेट ही नहीं बनाया गया है। वोटिंग को लेकर कांग्रेस में कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है कांग्रेस के कार्यकर्ता यह मान कर चल रहे हैं कि इस चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ कांग्रेस की सरकार बना रही है (madhya pradesh assembly elections)। महिलाएं जिस प्रकार से वोटिंग में हिस्सा ले रही हैं उसको कांग्रेस खुद से जोड़ कर यह मान रही है कि कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में जिस प्रकार से महिलाओं के लिए घोषणा की है उसी को देखते हुए महिलाएं घर से निकल रहीं हैं और कांग्रेस के पक्ष में वोट कर रही हैं।

कांग्रेस के कंट्रोल रुम का पीसीसी चीफ कमलनाथ ने किया निरीक्षण
मप्र में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान जारी है। प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों की पल-पल जानकारी के लिए प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में कंट्रोल रुम का निर्माण किया गया है। छिंदवाड़ा से वोट डालने के बाद पीसीसी चीफ कमलनाथ (kamal nath) प्रदेश कांग्रेस कार्यालय स्थित कंट्रोल रुम पहुंचे जहां उन्होने पदाधिकारियों से मुलाकात कर सभी सीटों के बारे में जानकारी ली। गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी ने अपने वचन पत्र में कई लोक लुभावन घोषणाएं की हैं जिसमें कांग्रेस को उम्मीद है कि उसे भारी बहुमत मिलेगा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं में चुनाव को लेकर काफी उत्साह भी देखने को मिल रहा है। कांग्रेस के पदाधिकारी यह मान कर चल रहे हैं कि तीन दिसंबर को जब मतगणना होगी तो कांग्रेस को प्रदेश की जनता का वोट के रुप में जम कर समर्थन मिलेगा।

वोटिंग के दो दिन पहले पीएम मोदी का किसानों को बड़ा तोहफा
वोटिंग के लिए अब दिन नहीं बल्कि घंटों का समय बचा है। लेकिन उसके पहले पीएम मोदी द्वारा किसानों को मिली सौगात चुनाव का माहौल बदलने की बड़ी भूमिका निभा सकती है (madhya pradesh elections)। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किसानों को आर्थिक रुप से सक्षम बनाने के लिए दो-दो हजार रुपये की साल में तीन किस्त देते हैं। जिसके तहत किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (pradhanmantri kisan samman nidhi) के रुप में साल में छह हजार रुपये मिलते हैं। और ठीक इतनी ही राशि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) भी किसानों के खाते में डालते हैं। कुल मिला कर केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से किसानों को साल में 12 हजार रुपये मिलते हैं। प्रधानमंत्री की ओर से किसानों को मिलने वाली सम्मान राशि की एक किस्त आज डाली गई है। और दो दिन बाद प्रदेश में वोटिंग होनी है। मामले में वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा का मानना है कि इस राशि से चुनाव में ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। क्योंकि वोटिंग के लिए अब दो दिन का वक्त बचा है और अब तक में प्रदेश के 99% किसान अपना बन बना चुके होते हैं कि वोट किस पार्टी अथवा किस उम्मीदवार को लेना है। लेकिन यह पीएम मोदी की किसानों के हित में संचालित होने वाली योजना है। इस राशि के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी प्रदेश के किसानों को मजबूत करने का काम करते हैं इसलिए लोकसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को जरुर लाभ होगा।

विंध्य की जनता को किसी एक पार्टी पर नहीं विश्वास,BSP का होगा वर्चश्व
विधानसभा चुनाव पूरे शबाब पर है। भाजपा और कांग्रेस पार्टी अपनी तरफ से पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में हैं लेकिन विंध्य की बात करें तो इस बार किसी एक पार्टी पर विंध्य की जनता को विश्वास होता नहीं दिख रहा है (vindhya politics)। दरअसल विंध्य में जातिगत सियासत होती है और यही कारण है कि जो पार्टी जातियों का सही समीकरण बैठाती है उस पार्टी का विंध्य में वर्चश्व होता है। साल 2018 में विंध्य की जनता ने भारतीय जनता पार्टी को 30 में 24 सीटें देकर यह बता दिया था कि वो विकास के पक्षधर हैं। लेकिन जब साल 2020 में कांग्रेस की सरकार गिरी और भाजपा की सरकार फिर बनी तब विंध्य की जमकर उपेक्षा की गई। विंध्य से तीन मंत्री बनाए गए लेकिन उनमें सामान्य वर्ग का एक भी मंत्री नहीं था यहीं से विंध्य की जनता ने भाजपा से किनारा करना शुरु कर दिया। हांलाकि भाजपा ने बाद में भरपाई के लिए गिरीश गौतम (girish gautam) को विधानसभा अध्यक्ष बना कर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इस चुनाव में भाजपा ने विंध्य की कई सीटों में बदलाव किया है तो वहीं कांग्रेस पार्टी ने इस चुनाव में बेहतर तरीके से जातिगत समीकरण बैठाया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कांग्रेस की स्थिति काफी मजबूत है। भाजपा और कांग्रेस के कई उम्मीदवार एक ही वर्ग के आमने सामने हैं। इस बीच बीएसपी ने होशियारी का परिचय देते हुए दोनों पार्टियों की तुलना में अलग वर्ग के प्रत्याशी दिए हैं। रीवा की बात करें तो वहां पर आठ विधानसभा सीटों में भाजपा,कांग्रेस और बीएसपी तीनों ही पार्टियों को इस बार प्रतिनिधित्व मिलने जा रहा है। सतना की बात करें तो यहां भी बीएसपी कई सीटों में कड़ा मुकाबला कर रही है खास कर सतना की गणेश सिंह (ganesh singh) जिस सीट से चुनाव मैदान पर हैं उस सीट पर बीएसपी जीतने की स्थिति में दिख रही है। सीधी से भी यही खबर है यहां पर भी बीएसपी उम्मीदवार कठिन चुनौती देने में कामयाब हो रहे हैं और दो सीट बीएसपी सीधी में भी पाती हुई नजर आ रही है। सिंगरौली की बात करें तो वहां की भी कुछ ऐही ही स्थिति है।