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'दिग्विजय' के किले पर नरोत्तम मिश्रा की 'सेंधमारी' भरी जीत की हुंकार
राजगढ़ लोकसभा (rajgarh constituency) का चुनाव अब दिलचश्प हो चला है। दरअसल चुनाव के दिलचश्प होने का कारण दो राजनीतिक महारथियों के आमने-सामने होने के कारण हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (digvijaya singh) राजगढ़ लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में हैं। वहीं भाजपा की तरफ से राजनीति के खिलाड़ी डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) को भाजपा उम्मीदवार को जिताने का जिम्मा सौंप दिया गया है। अभी तक माना जा रहा था कि राजगढ़ में दिग्विजय सिंह आसानी के साथ चुनाव में जीत दर्ज कर लेंगे और भाजपा के सभी 29 लोकसभा सीटें जीतने के मंसूबों पर पानी फिर सकता है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी ने अपने सबसे भरोसेमंद नेता को राजगढ़ चुनाव की कमान सौंप दी है जिनकी जिंदगी में हार जैसा शब्द नहीं है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा पूर्व प्रधानमंत्री अटलविहारी वाजपेयी की उस कविता को ध्येय वाक्य मानते हैं जिसमें उन्होने कहा था 'हार नहीं मानूंगा,रार नहीं ठानुंगा' इसी कविता को ध्येय वाक्य मानते हुए पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बुधवार को राजगढ़ में जीत की हुंकार भरते हुए दिग्विजय सिंह के किले पर सेंधमारी का ऐलान कर दिया। गौरतलब है कि इतिहास के पन्नों पर नजर डालें तो जब भी भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री को जब कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है तब-तब उन्होने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के विश्वास पर खरा उतर कर पार्टी की झोली में जीत डाली है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार राजगढ़ संसदीय क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं में हार की हताशा घर कर रही थी लेकिन डॉ. नरोत्तम मिश्रा की एक सभा ने मानों भाजपा कार्यकर्ताओं को संजीवनी देने का काम किया हो। जिस प्रकार से पूर्व गृह मंत्री ने राजगढ़ में सभा के दौरान कार्यकर्ताओं को संबोधित किया है उसके बाद भाजपा के कार्यकर्ता एक नए जोश और उत्साह के साथ चुनाव प्रचार में उतर चुके हैं। यूं ही डॉ. नरोत्तम मिश्रा को पार्टी का 'संकट मोचक' नहीं कहा जाता है। पार्टी को जब भी विषम परिस्थिति दिखती है तो पूर्व गृह मंत्री को वहीं पर खड़ा कर दिया जाता है जो अपने चिर परिचित अंदाज में जनता का मन बदल कर पूरा माहौल भाजपा के पक्ष में करने की महारत रखते हैं।

सीधी में कमलेश्वर पटेल की हार तय करने बीजेपी का मास्टर प्लान तैयार
सीधी लोकसभा चुनाव का मतदान 19 अप्रैल को होना है। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस उम्मीदवार कमलेश्वर पटेल (kamleshwar patel) ने बीजेपी को परास्त करने के लिए अलग-अलग तरीके निकाले और उससे स्थानीय जनता कहने लगी कि कमलेश्वर पटेल चुनाव जीत सकते हैं। लेकिन कमलेश्वर पटेल और उनके समर्थकों को यह नहीं मालूम कि भाजपा पहले विपक्षी की क्षमता को खंगालती है। और इस बीच यह देखती है कि उसकी ताकत क्या है और दुर्बलता कहां है। अब तक हुए चुनाव प्रचार में कमलेश्वर पटेल ने जम कर धन और बल का प्रदर्शन किया है। अब बारी भाजपा की है। भारतीय जनता पार्टी के नेता अब सीधी (sidhi constituency) में डेरा डालने वाले हैं। जिसकी शुरुआत राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा 12 अप्रैल से करने जा रहे हैं। इस दिन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सीधी में न सिर्फ एक चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे बल्कि सीधी लोकसभा सीट की जीत की आधारशिला भी रखेंगे। अभी तक यह माना जा रहा था कि धन और बल के कारण कांग्रेस उम्मीदवार भाजपा के उम्मीदवार राजेश मिश्रा पर हावी दिख रहे थे लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। भारतीय जनता पार्टी ने ऐसे ब्यूह की रचना की है जिससे कांग्रेस उम्मीदवार कमलेश्वर पटेल चारों खाने चित्त हो जाएंगे। भाजपा अब सीधे कमलेश्वर पटेल पर काउंटर अटैक करने जा रही है। जिस प्रकार से कमलेश्वर पटेल ने अपनी राजनीतिक रसूक के बल पर कई गांव में अपनी जमीन और घर दर्शा कर करोड़ों रुपये का फर्जी मुआबजा प्राप्त किया है भाजपा उसका भी खुलासा करने वाली है। भाजपा की स्थानीय इकाई कमलेश्वर पटेल की कुंडली को खंगालने में लगी है जिससे लोकसभा चुनाव में उनकी सच्चाई जनता के सामने लाई जा सके।

विंध्य में 'नड्डा' बजाएंगे बीजेपी का डंका,12 अप्रैल को सीधी का करेंगे दौरा
विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने लगातार विंध्य क्षेत्र की कमान अपने हाथ में थाम रखी है। यही कारण है कि विंध्य में बीजेपी काफी कमजोर लग रही थी तो केन्द्रीय नेत्रृत्व पर विंध्य की जनता ने विश्वास दिखाया और 30 में 25 सीटें बीजेपी की झोली में डाल दी। इस बात में कोई शक नहीं कि राजनीतिक जानकारों के लिए विंध्य हमेशा अबूझ पहेली रहा है। इतिहास गवाह है विंध्य ने हमेशा चौकाने वाले नतीजे दिए हैं और यही कारण है कि बीजेपी का केन्द्रीय नेत्रृत्व लगातार विंध्य में नजरें गड़ाए बैठा है। अब लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (jp nadda) 12 अप्रैल को पहले सीधी में चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे फिर रीवा का दौरा करेंगे। विंध्य में रीवा की बात करें तो यहां पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है ठीक इसी प्रकार सतना में भी त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। वहीं सीधी की बात करें तो यहां पर बीजेपी उम्मीदवार राजेश मिश्रा से ज्यादा मजबूत उम्मीदवार कमलेश्वर पटेल दिख रहे हैं जिसके चलते बीजेपी के केन्द्रीय नेत्रृत्व को विंध्य में आगे आना पड़ रहा है। विंध्य में दो चरणों में चुनाव होने वाला है। सीधी और शहडोल में 19 अप्रैल को वोटिंग होगी तो वहीं सतना और रीवा में 26 अप्रैल को वोटिंग होनी है।

शासकीय कर्मचारी भाजपा से नाराज,4% डीए की मोहन सरकार ने नहीं ली गारंटी,कैसे मिलेंगी 29 सीटें
लोकसभा का चुनाव प्रचार पूरे शबाब पर है। मोदी के चेहरे पर भाजपा के नेता लगातार चुनाव प्रचार कर रहे हैं। लेकिन एमपी सरकार (mp government) ने जिस प्रकार से शासकीय कर्मचारियों को तड़पा-तड़पा कर चार फीसदी डीए दिया है उससे प्रदेश के शासकीय कर्मचारी (government employees) खासे नाराज हैं। प्रदेश की मोहन सरकार के चार फीसदी डीए देने के बाद भी राज्य सरकार के कर्मचारी केन्द्रीय कर्मचारियों की तुलना में उनसे चार फीसदी डीए कम पा रहे हैं। वर्तमान में राज्य के शासकीय कर्मचारी 46 प्रतिशत के हिसाब से डीए पा रहे हैं तो वहीं केन्द्रीय कर्मचारी 50% के हिसाब से मंहगाई भत्ता पा रहे हैं। मतलब हर कर्मचारी को हर महीने में चार से पांच हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। ऐसे में मोदी की गारंटी पर शासकीय कर्मचारी किस प्रकार से विश्वास कर आएंगे। Mukhbirmp.com की टीम ने प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों के संगठनों से संपर्क किया तो चुनाव आचार संहिता के चलते उन्होने खुल कर तो नहीं बोला लेकिन नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जिस प्रकार से राज्य सरकार उनकी उपेक्षा कर रही है उससे सभी शासकीय कर्मचारियों में भाजपा सरकार के प्रति काफी नाराजगी है। और वो नाराजगी कहीं न कहीं तो दिखेगी और चुनाव से बेहतर कोई और प्लेटफार्म नहीं हो सकता। गौरतलब है कि जिस प्रकार से भाजपा प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटें जीतने का दावा कर रही है उसमें अगर प्रदेश के साढ़े सात लाख से ज्यादा शासकीय सेवकों ने कहीं भाजपा से किनारा किया तो उसमें भाजपा की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। प्रदेश की मोहन सरकार ने चुनाव आचार संहिता लगने के ठीक दो दिन पहले राज्य के शासकीय कर्मचारियों को चार फीसदी डीए देने का ऐलान किया था। जिसके तहत महंगाई भत्ता 42% से बढ़कर 46% हो गया है। आदेश में वित्त विभाग ने कहा है कि कर्मचारियों को एक जुलाई 2023 से 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता स्वीकृत किया जाता है। अब शासकीय कर्मचारियों का मानना है कि चुनाव था इसलिए चार फीसदी मंहगाई भत्ता दे दिया गया है। लेकिन वो फिर भी केन्द्र से चार फीसदी पीछे हैं। और चुनाव समाप्त होने के बाद अब सरकार उनके बचे हुए चार फीसदी मंहगाई भत्ते को देगी या नहीं देगी इसकी गारंटी मोहन सरकार ने नहीं ली है इसलिए कर्मचारी सोच में हैं कि वो भाजपा को वोट कैसे दें क्योंकि उसी भाजपा की प्रदेश में सरकार है जिसने अब भी उनका चार फीसदी मंहगाई भत्ता रोक रखा है।

जीतू पटवारी राहुल गांधी के पक्के चेले हैं,उन्हें हिंदी नहीं आती,इन्हें गिनती नही आती...
कांग्रेस में लगातार भगदड़ मची है रोजाना सैकड़ों और हजारों की संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता बीजेपी की सदस्यता ले रहे हैं। इतना सबकुछ होने के बाद भी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी (jitu patwari) ने मीडिया से कहा कि सिर्फ 336 लोगों ने अब तक भाजपा की सदस्यता ली है। जीतू पटवारी के बयान के बाद बीजेपी ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) ने करारा प्रहार करते हुए कहा कि जीतू पटवारी नींद से जागें और सही आंकड़े को स्वीकार करें। पूर्व गृह मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि छह अप्रैल को एक ही दिन में 47179 बूथ पर 282282 सदस्य बीजेपी के बने हैं। जितने जीतू पटवारी बता रहे हैं, उतने तो तीन दिन पहले दीपक सेक्सना कार्यकर्ता के साथ आए थे। पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि जितनी संख्या जीतू पटवारी ने बताई उतने तो पूर्व जनप्रतिनिधि ही आ चुके हैं। डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की चुटकी लेते हुए कहा कि जीतू पटवारी राहुल गांधी के पक्के चेले हैं। उन्हें हिंदी नही आती...इन्हें गिनती नही आती। हमारे दिल में और पार्टी में पर्याप्त जगह है और 'ज्वाइनिंग का अभियान आगे भी जारी रहेगा'

घर-घर घूम कर प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने लिया जन आशीर्वाद
चुनाव में जीत भले ही तय हो लेकिन जब तक ईवीएम नहीं खुल जाता तब तक चुनाव सरल नहीं माना जाता है। और इसकी जीती जागती मिशाल खजुराहो लोकसभा (khajuraho constituency) सीट में देखी जा सकती है। जहां प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) का सघन जनसंपर्क अभियान लगातार जारी है। गौरतलब है कि खजुराहो लोकसभा सीट से कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी खड़ा न करके इंडी गठबंधन को यह सीट दी थी जिसके तहत समाजवादी पार्टी ने वहां से महिला उम्मीदवार मीरा यादव को चुनाव मैदान में उतारा था लेकिन उनका नामांकन रद्द होने से अब खजुराहों में बीजेपी और बीएसपी के बीच ही मुकाबला बचा है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने पिछले पांच साल में जिस प्रकार से संगठन को मजबूत किया है उसके बाद बीजेपी के मुकाबले अन्य कोई दल अथवा प्रत्याशी टिकता नजर नहीं आ रहा है। यह सबकुछ जानते हुए भी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा चिलचिलाती धूप में घर-घर सघन जनसंपर्क अभियान कर लोगों से आशीर्वाद लेकर उन्हे केन्द्र और राज्य सरकार की जनहितकारी योजनाओं की जानकारी देकर अपनी जीत की बुनियाद को मजबूत कर रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भी वीडी शर्मा ने खजुराहो की जनता से संपर्क कभी खत्म नहीं किया। जबकि खजुराहो संसदीय क्षेत्र में सभी विधानसभा सीटों पर बीजेपी ने जीत का पर्चम लहराया है और वहां बीजेपी के कार्यकर्ता इतने सजग हैं कि प्रदेश अध्यक्ष की जीत में कोई संशय नहीं है लेकिन प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि जिस जनता के बल पर वो संसद में जाते हैं उस जनता का आशीर्वाद लेना जरुरी है यही कारण है कि वो लगातार लोगों के घर-घर जाकर संपर्क कर रहे हैं।

एक ऐसा नायक जो सबकुछ करके भी नहीं लेता क्रेडिट,कौन है वो नायक...
चुनाव जीतने के लिए सभी राजनीति करते हैं लेकिन जो दूसरों को जिताने के लिए राजनीति करे वो असल में नायक कहलाता है। और सबसे बड़ी बात तो यह है कि वो सबकुछ करके भी कोई क्रेडिट नहीं लेता। बात करते हैं साल 2019 की जब प्रदेश में भाजपा की सरकार नहीं बनी। महज कुछ सीटों के अंतर से भाजपा को विपक्ष में बैठना पड़ा। भाजपा के कई नेताओं की राजनीतिक विरासत खतरे में पड़ गई। ऐसे में भाजपा का एक ऐसा नेता सामने आया जिसे 'संकट मोचक' भी कहा जाता है। कट्टर हिंदुत्व की छवि तो उनमें दिखती ही है साथ ही प्रदेश के हर जिले का ब्राह्मण उन्हे अपना नेता मानता है। वो नाम है डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) जिसने राजनीति में कभी हारना नहीं सीखा है। कहते हैं कुछ लोग जीवन में इतने संघर्ष करके आगे आते हैं कि छोटे मोटे राजनीतिक झटके उसके लिए कोई मायने नहीं रखते उन्ही में हैं डॉ. नरोत्तम मिश्रा। बीजेपी की सरकार जा चुकी थी उस वक्त उन्होने केन्द्रीय नेत्रृत्व को भरोसा दिलाया कि वो कांग्रेस की सरकार गिरा सकते हैं एक-दो मीटिंग में तो केन्द्रीय नेत्रृत्व ने उनकी बात पर विश्वास नहीं किया लेकिन नरोत्तम मिश्रा तो उन नायकों में हैं जो एक बार कदम बढ़ा देते हैं तो फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखते। आखिर डॉ. नरोत्तम मिश्रा के आगे केन्द्रीय नेत्रृत्व भी झुका और आपरेशन लोटस की अनुमति दे दी। इस आपरेशन को सफल बनाने के लिए डॉ. नरोत्तम मिश्रा जुट गए और वो दिन आया कि जब कांग्रेस के डेढ़ दर्जन विदायक अचानक गायब हो गए। आखिर कांग्रेस की सरकार गिर गई। यहां भी सबकुछ करने के बाद भी डॉ. नरोत्तम मिश्रा के हाथ सीएम पद की कुर्सी नहीं बल्कि गृह मंत्रालय हाथ लगा। सबकुछ करके भी पूर्व गृह मंत्री ने किसी प्रकार का क्रेडिट नहीं लिया। साढ़े तीन साल सरकार चलने के बाद विधानसभा चुनाव हुआ और वो सियासत का नायक खुद चुनाव हार गया। हांलाकि राजनीतिक जानकारों का तो यहां तक कहना है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बढ़ते राजनीतिक कद को देखते हुए उन्हे हराया गया है। लेकिन कभी न हार मानने वाले डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने यह साबित किया कि उन्हे कितना भी दरकिनार किया जाए लेकिन वो कभी हार नहीं मानते। ज्वाइनिंग कमेटी का उन्हे संयोजक बना दिया गया और जिस दिन से उन्हे नई जिम्मेदारी मिली कांग्रेस में भगदड़ मच गई। कांग्रेस के पूर्व विधायक से लेकर पूर्व सांसद और अन्य पदाधिकारियों सहित कांग्रेस के हर छोटे बड़े नेताओं के बीजेपी में आने का सिलसिला शुरु हो गया। छह अप्रैल भाजपा का स्थापना दिवस होता है इस दिन को यादगार बनाने के लिए डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने एक लाख नए सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा और एक दिन में एक लाख 26 हजार से ज्यादा नए कार्यकर्ताओं को बीजेपी में शामिल कराने का कीर्तिमान रच दिया। ओवरआल तीन महीने की ज्वाइनिंग के आंकड़े की बात करें तो दो लाख 58 हजार से ज्यादा कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल हुए। इन सबके बीच जब डॉ. नरोत्तम मिश्रा से पूछा गया तो उन्होने पूरा श्रेय पीएम मोदी,राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा,सीएम मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को दिया और कहा कि उन्ही के नेत्रृत्व से प्रभावित होकर सभी लोग भाजपा में शामिल हो रहे हैं। मतलब साफ है कि सबकुछ करके सारा श्रेय भी किसी दूसरे को कैसे दिया जाता है। यह बात पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा में देखने को मिली इसी लिए लोग उन्हे राजनीति का नायक और चाणक्य कहते हैं।

स्थापना दिवस पर सवा लाख से ज्यादा कांग्रेसियों ने थामा बीजेपी का दामन
छह अप्रैल भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस (bjp foundation day) । इस दिन को यादगार बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने सदस्यता अभियान चलाया और जिम्मेदारी ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) को दी गई। डॉ. नरोत्तम मिश्रा बीजेपी के उन नेताओं में गिने जाते हैं जो अपनी जिम्मेदारी को पूरी शिद्दत से निभाते हैं। हुआ भी वही पूर्व गृह मंत्री ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि इस स्थापना दिवस को ऐतिहासिक बनाते हुए वो एक लाख से अधिक कांग्रेसियों को बीजेपी की सदस्यता दिलाएंगे। और अब जो आंकड़े जारी हुए हैं उसके मुताबिक एक दिन में एक लाख 26 हजार कांग्रेसियों ने बीजेपी की सदस्यता ली है। जो अब तक का सबसे बड़ा रिकार्ड माना जा रहा है। बांकी बीजेपी की तरफ से सदस्यता अभियान विधानसभा चुनाव के बाद से ही जारी है। उस आंकड़े को भी शामिल किया जाए तो यह आंकड़ा बढ़ कर दो लाख 58 हजार 523 कार्यकर्ताओं ने बीजेपी का दामन थामा है। यह अभियान अभी और तेज होने की बात भी कही जा रही है मतलब यह आंकड़ा तीन लाख से ऊपर जाने की उम्मीद जताई जा रही है। इतनी बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं का बीजेपी में शामिल होने पर डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कोई श्रेय नही लिया उन्होने कहा कि पीएम मोदी का आभामंडल और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के संगठनात्मक ढांचे से खुश होकर लोग बीजेपी में आ रहे हैं। साथ ही पूर्व गृह मंत्री ने सीएम मोहन यादव की नेत्रृत्व क्षमता और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भी सदस्यता का श्रेय दिया है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि भाजपा की सरकार और संगठन दोनों बढिया काम कर रहे हैं और उसी का फल है इतनी बड़ी सफलता।

मेरे हारने से कोई पार्टी खत्म होती है तो वही सही,खुद को नहीं दूसरों को दिया श्रेयःडॉ.नरोत्तम मिश्रा
बीजेपी ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (dr narottam mishra) कांग्रेस के लिए एक ऐसी सुनामी बन कर उभरे हैं मानो उन्होने रौद्र रुप धारण कर लिया हो। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पार्टी का जनाधार बढ़ाने का संकल्प लिया और ऐसा संकल्प लिया कि प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों से उन्होने कांग्रेसी खेमें में सेंधमारी शुरु कर दी। नतीजा यह निकला कि भाजपा के 45 वें स्थापना दिवस तक करीब ढाई लाख कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को वो भाजपा की सदस्यता दिला चुके हैं। पूर्व गृह मंत्री की यह भूख लगातार बढ़ती चली जा रही है। कुछ विधानसभा क्षेत्र तो ऐसे हैं जहां पर कांग्रेस का कोई नाम लेने वाला ही नहीं बचा है। कुछ सीटों पर कांग्रेस को एजेंट नहीं मिल रहे हैं। सबसे बड़ी और दिलचश्प बात तो यह है कि इतना बड़ा अभियान और इतनी बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बीजेपी में शामिल कराने का श्रेय भी डॉ. नरोत्तम मिश्रा खुद नहीं ले रहे। जिस प्रकार से उनके नेत्रृत्व में कांग्रेस के खिलाफ सुनामी आई है उसका श्रेय वो पीएम मोदी,राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा,सीएम मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के नेत्रृत्व को देते हैं। पूर्व गृह मंत्री द्वारा चलाए गए अभियान पर राजनीतिक विश्लेषक से बात की गई तो उनका कहना है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा जब खाली बैठते हैं तो उनका खालीपन हमेशा कांग्रेस के लिए हमेशा घातक साबित हुआ है। साल 2019 की हो जब पार्टी सरकार बनाने में नाकाम हुई थी या फिर ताजा उदाहण अभी का है जब डॉ. नरोत्तम मिश्रा चुनाव हारे और कांग्रेस के लिए काल बन गए। उनका अभियान अभी भी थमा नहीं है अनबरत जारी है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा कहते भी हैं कि कांग्रेस गुलामी का आखिरी प्रतीक है जो खत्म होना चाहिए और उसी अभियान में वो एक गिलहरी की भूमिका निभा रहे हैं।

आज बीजेपी का मेगा ज्वाइनिंग अभियान,एक लाख से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ता लेंगे बीजेपी की सदस्यता
भारतीय जनता पार्टी स्थापना दिवस के मौके पर आज रिकार्ड दर्ज करने वाली है। (bjp foundation day) और इस स्थापना दिवस को एमपी बीजेपी के नेता ऐतिहासिक बनाने के लिए न सिर्फ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को शामिल करने वाले हैं बल्कि कांग्रेस के कुछ विधायक भी बीजेपी में शामिल होने वाले हैं। दरअसल बीजेपी ने स्थापना दिवस को यादगार बनाने के लिए एक लाख कार्यकर्ताओं की सदस्यता का लक्ष्य रखा है और जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी ने रणनीति तैयार की है उस रणनीति के तहत भाजपा एक लाख से ज्यादा कार्यकर्ताओं को सदस्यता दिला सकती है। वहीं कांग्रेस पार्टी यह सोच कर हैरान हो रही है कि भाजपा के नेता एक लाख सदस्यता की फर्जी बातें कर रहे हैं। जबकि सभी को यह मालूम है कि भाजपा का संगठन बहुत मजबूत है और बाजपा मंडल से लेकर बूथ स्तर तक काफी मजबूत है। प्रदेश भर में 65 हजार से ज्यादा बूथ हैं और भाजपा ने हर बूथ पर दो कार्यकर्ताओं की सदस्यता का लक्ष्य रखा है। इस प्रकार भारतीय जनता पार्टी अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर लेगी और कांग्रेस यही गणित सुलझाने में लगी है कि भाजपा किस हिसाब से एक लाख कार्यकर्ताओं को सदस्यता करवाएगी। दिलचश्प बात यह है कि इस सदस्यता अभियान में भाजपा कांग्रेस के कुछ वर्तमान और पूर्व विधायकों को सदस्यता दिला कर बड़ा झटका भी देने वाली है। कुछ ऐसे नेता भाजपा में शामिल होने वाले हैं जिनका अंदाजा न कांग्रेस नेताओं को है न ही भाजपा के नेताओं को है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए बीजेपी ज्वाइनिंग टोली के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं।

मतदान से पहले जीते बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा,अब सबसे बड़ी जीत पर नजर
लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया लगातार जारी है। इस बीच खबर खजुराहो लेकसभा सीट (khajuraho constituency) से है जहां पर सपा उम्मीदवार मीरा यादव (meera yadav) का नामांकन रद्द हो गया है। यहां से कांग्रेस पार्टी ने अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं किया है क्योंकि इंडी गठबंधन के तहत कांग्रेस ने खजुराहो की सीट समाजवादी पार्टी को दे रखी थी। मीरा यादव का नामांकन रद्द होते ही खजुराहो लोकसभा सीट में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) की जीत तय मानी जा रही है। अब सपा उम्मीदवार नहीं होने के कारण बीजेपी उम्मीदवार वीडी शर्मा और बीएसपी उम्मीदवार के बीच चुनावी मुकाबला होगा। लेकिन सपा उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि एमपी की सभी 29 लोकसभा सीटों में खजुराहो की सीट सबसे बड़ी मार्जिन वाली सीट बन जाएगी। सपा उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी अब चुनाव प्रचार के लिए खुद को स्वतंत्र महसूस कर रहे होंगे। हालाकि जिस प्रकार से प्रदेश अध्यक्ष ने खजुराहो में विकास किया है उससे यह अंदाजा लगाया जा रहा था कि वीडी शर्मा को चुनाव जीतने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी।

जीतू पटवारी के खिलाफ दर्ज होगा सबसे नाकाम अध्यक्ष का वर्ल्ड रिकार्ड,6 अप्रैल को लगेगा एक लाख झटका
जीतू पटवारी (jitu patwari) की विधानसभा चुनाव (mp assembly elections) में करारी शिकस्त के तुरंत बाद कांग्रेस पार्टी ने उन्हे यह सोच कर पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था कि युवा चेहरा है कुछ नया करेगा। लेकिन इतना नया करेगा कांग्रेस के हाई कमान को इस बात का अंदाजा नहीं था। दरअसल जीतू पटवारी के पीसीसी चीफ बनने के बाद पार्टी में ऐसे पलायन का दौर चला कि अब तक 18 हजार से ज्याना नेता और कार्यकर्ता पार्टी छोड़ कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं। और जीतू पटवारी हैं कि अब भी अपने ही कार्यकर्ताओं पर सारा दोष मढ़ रहे हैं। और अब तो जीतू पटवारी अपने अध्यक्ष के नाकामी का वर्ल्ड रिकार्ड भी कायम करने वाले हैं। छह अप्रैल को भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस है। और इस दिन को यादगार बनाने के लिए बीजेपी ज्वाइनिंग कमेटी के प्रदेश संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बड़ी मुहिम चला दी है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. मिश्रा ने ऐलान किया है कि वो भाजपा के स्थापना दिवस पर प्रदेश भर में करीब एक लाख कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ज्वाइनिंग भाजपा में कराने जा रहे हैं। पूर्व गृह मंत्री की इस घोषणा के बाद से पूरी कांग्रेस में हलचल सी पैदा हो गई है। मजे की बात यह है कि पार्टी में बचे-खुचे कार्यकर्ता एक दूसरे को सक की निगाहों से देख रहे हैं। कुछ कार्यकर्ता एक दूसरे से यह भी सवाल कर रहे हैं कि क्या तुम भी बीजेपी में शामिल हो रहे हो। Mukhbirmp.com की टीम ने कुछ कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से संपर्क किया तो नाम न छापने की शर्त पर उन्होने कहा कि कांग्रेस में उन्हे किसी प्रकार का सम्मान नहीं मिल रहा है। पहले कमलनाथ अध्यक्ष थे तो उनका कद इतना बड़ा था कि उनसे मिलना बहुत मुस्किल था और कमलनाथ के बाद जीतू पटवारी को पीसीसी चीफ बनाया गया तो उनसे मिलना कमलनाथ से भी ज्यादा कठिन हो गया है। उनके निवास पर घंटों इंतजार करना पड़ता है किसी तरह जीतू पटवारी बंगले से बाहर निकलते हैं तो देखते हैं कि भीड़ में उनका करीबी कौन है और फिर वो उस कार्यकर्ता के कंधे पर अपना हाथ रख कर कुछ देर तक इधर- उधर घूमते हैं फिर सभी से यह कहते हैं कि जमकर चुनाव की तैयारियां कीजिए हम कुछ सीटों पर अच्छी स्थिति में हैं और जीत भी दर्ज करेंगे। पीसीसी चीफ की इस प्रकार की बांते सुन कर कार्यकर्ता और नेता उदास हो जाते हैं यही कारण है कि कार्यकर्ता अब कांग्रेस में अपने आपको ठगा सा महसूस करते हैं। जिसके चलते अब वो अपना भविष्य भाजपा में देख रहे हैं। इधर बीजेपी ने इतनी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को शामिल कराने के लिए अपने बूथ स्तर की इकाइयों को भी लगा दिया है और सभी से कहा गया है कि ज्यादा से ज्यादा कांग्रेस कार्यकर्ताओं से संपर्क कर उन्हे बीजेपी में शामिल कराया जाए। तभी प्रदेश भर में एक लाख कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल हो पाएंगे।