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राज्यसभा में 'कमल' के खिलने की बढ़ी संभावना क्रॉस वोटिंग से बचने के लिए कांग्रेस आजमाएगी आखिरी दांव

आपातकाल के 50 वर्ष पूरे,भाजपा देश को फिर दिलाएगी आपातकाल की याद,कांग्रेस को देना होगा जवाब

कांग्रेस की भगदड़ पर जीतू पटवारी का जवाब,दिग्विजय और कमलनाथ पर मढ़ा सारा दोष
पिछले तीन महीने से कांग्रेस पार्टी में लगातार भगदड़ का माहौल है। अब तक करीब 17 हजार से ज्यादा कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का हाथ छोड़ फूल का दामन थाम लिया है। इस मामले में कांग्रेस के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने पीसीसी चीफ जीतू पटवारी (jitu patwari) से जवाब तलब किया है। कहा यह भी जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (mallikarjun kharge) ने जीतू पटवारी को बंद कमरे में जमकर खरी खोटी भी सुनाई है। कांग्रेस के केन्द्रीय नेत्रृत्व द्वारा पूछे गए सवाल पर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने अपनी लिखित सफाई दी है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार जीतू पटवारी ने अपनी सफाई में सारा दोष दिग्विजय सिंह और कमलनाथ पर मढ़ दिया है। जीतू पटवारी ने अपने जवाब में कहा है कि उनको नाकाम साबित करने के लिए दिग्विजय सिंह और कमलनाथ इस प्रकार का भयानक षड़यंत्र रच रहे हैं इसी लिए ज्यादातर दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के करीबी लोग ही बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। पीसीसी चीफ ने इनके अलावा दो और नेताओं का नाम भी शामिल किया है जिसमें अरुण यादव और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह (राहुल) को भी कांग्रेस की भगदड़ का दोषी बताया है। उन्होने कहा है कि बीजेपी ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा और इन नेताओं की आपस में दोस्ती है और ये सब मिल कर इतना बड़ा खेल- खेल रहे हैं। हांलाकि केन्द्रीय नेत्रृत्व ने जीतू पटवारी के आरोपों को ज्यादा तबज्जो नहीं दी है। बल्कि कांग्रेस में लगातार जारी पलायन को जल्दी से जल्दी रोकने की नसीहत दी गई है।

कम वाटों के अंतर से जीतने वाली विधानसभा सीटों पर कांग्रेस और भाजपा में फंसा पेंच
कांग्रेस पार्टी हर सीट में उम्मीदवार की घोषणा करने से पहले काफी सोच विचार कर रही है (MP Congress)। अब कांग्रेस में कम वोटों से जीत दर्ज करने वाली सीटों पर मंथन चल रहा है और उन्ही सीटों पर पेंच फंसा है। दरअसल कांग्रेस ने 2018 में नौ सीटें एक हजार से 300 से कम मतों के अंतर से जीती थी। इनमें से तीन सीटें भाजपा (MP BJP) ने उपचुनाव में जीत लीं। वहीं भाजपा सात सीटें एक हजार 234 से कम मतों से जीती थी। इन सीटों को दोनों ही दल अपने पाले में करने का जतन कर रहे हैं। कांग्रेस ने जहां कुछ सीटों पर प्रत्याशी बदलने का मन बनाया है तो कुछ को फिर मौका दिया जा रहा है। यही स्थिति भाजपा की है। साल 2018 के चुनाव में अधिक मत प्रतिशत प्राप्त करने के बाद भी भाजपा सरकार बनाने से चूक गई थी। भाजपा को 41.02 प्रतिशत मत मिले थे और 109 प्रत्याशी जीते थे। इसमें सात ऐसे थे,जो एक हजार 234 मत या उससे कम मतों के अंतर से चुनाव जीते थे। इनमें सागर जिले की बीना से महेश राय 460 मतों से जीते थे। 720 मतों के अंतर से जीतने वाले कोलारस के भाजपा विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी अब कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। जावरा से राजेन्द्र पांडे भी 511 मतों के अंतर से जीते थे। यही स्थिति चांदला,नागौद,देवतालाव और इंदौर पांच सीट से भी भाजपा प्रत्याशी कम मतों के अंतर से जीते थे। जबकि कांग्रेस को 40.89 प्रतिशत मिले थे और 114 विधायक चुनाव जीते थे। इनमें नौ एक हजार 284 या उससे कम मतों के अंतर से जीत मिली थी। इनमें दमोह से विधायक राहुल सिंह,मंधाता नारायण पटेल,नेपानगर सुमित्रा देवी कास्डेकर और सुवासरा से विधायक चुने गए हरदीप सिंह डंग ने कांग्रेस छोड़ी और विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर भाजपा की सदस्यता ले ली। राहुल सिंह को छोड़कर बांकी सभी उचुनाव में विजयी रहे। ब्यावरा से 826 मतों से जीते गोवर्धन दांगी के निधन पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के रामचंन्द्र दांगी विजयी रहे। इसके अलावा राजनगर से विक्रम सिंह 732, जबलपुर उत्तर से विनय सक्सेना और राजपुर से बाला बच्चन 932 मतों से जीते थे। प्रदेश में सबसे कम 121 मतों के अंतर से कांग्रेस के प्रवीण पाठक ने ग्वालियर दक्षिण से जीत प्राप्त की थी। भाजपा और कांग्रेस की तरफ से प्रत्याशी चयन को लेकर सर्वे कराया जा चुका है (MP Elections 2023)। कार्यकर्ताओं से फीडबैक भी लिया जा चुका है। भाजपा ने तीन सूचियों में 79 नामों की घोषणा कर दी है इनमें हारी हुई सीटों के प्रत्याशी शामिल हैं। और नए चेहरों पर भी दांव लगाया गया है।