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#mp assembly elections

Total published stories tagged under #mp assembly elections: 4

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कोई कुछ भी कहे सीएम तो मामा ही बनेगा...
भोपाल

कोई कुछ भी कहे सीएम तो मामा ही बनेगा...

प्रदेश में इस वक्त हर ब्यक्ति की जुवां पर एक ही सवाल है कि अगला सीएम कौन बनेगा (madhya pradesh cm)। तो भाई लोग इसका जवाब ये है कि अगला सीएम भी कोई और नहीं शिवराज सिंह चौहान ही बनेंगे (shivraj singh chouhan)। जब भाजपा के अलग-अलग नेता दिल्ली दरवार में चक्कर लगा रहे हैं तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उन जगहों पर सभाएं ले रहे हैं जहां पर भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। सीएम शिवराज पहले छिंदवाड़ा दौरे पर गए जहां की भाजपा सातों सीट हार गई है। उसके बाद सीएम शिवराज शिवपुरी भी गए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जिस प्रकार लाड़ले भांजे भांजियों के सीच प्यार लुटा रहे हैं और लाड़ली बहनों का सम्मान हासिल कर रहे हैं ऐसी स्थिति में भारतीय जनता पार्टी सीएम बदलने का जोखिम नहीं उठा सकती है। सवाल इस बात का भी उठता है कि आखिर में भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व प्रदेश में सीएम क्यों बदलेगा। शिवराज सिंह चौहान पार्टी की तरफ से सीएम चेहरा जरुर घोषित नहीं किए गए थे लेकिन जब चुनाव हुआ तो प्रदेश के सीएम वही थे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अकेले करीब डेढ़ सौ विधानसभा सीटों में जाकर पार्टी के लिए चुनाव प्रचार किया। जिस वक्त लोग कह रहे थे कि सरकार विरोधी लहर है तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाड़ली बहना योजना लांच की और उसी योजना को गेम चेंजर के रुप में देखा भी जा रहा है। हांलाकि इस बीच प्रदेश में मोदी मैजिक और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की संगठनात्मक शक्ति भी देखने को मिली लेकिन बात वहीं आकर रुप जाती है कि जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के रहते भाजपा ने 163 सीटें जीत कर प्रचंड बहुमत हासिल किया है तो फिर पार्टी सीएम क्यों बदलेगी।

7/12/2023130
17 जिलों के परिणाम तय करेंगे प्रदेश की भावी सरकार
भोपाल

17 जिलों के परिणाम तय करेंगे प्रदेश की भावी सरकार

मध्य प्रदेश के 17 जिलों के चुनाव परिणाम पर भाजपा और कांग्रेस,दोनों दलों की नजर है (madhya pradesh elections)। 2018 के चुनाव में यहां एकतरफा परिणाम रहे थे। टीकमगढ़,रीवा,सिंगरौली,शहडोल,उमरिया,हरदा,नर्मदापुरम,सीहोर और नीमच जिले की सभी सीटें भाजपा ने जीती थी। जबकि मुरैना,अशोक नगर,अनूपपुर,डिंडौरी,छिंदवाड़ा,अलीराजपुर और झाबुआ जिले की सभी सीटें कांग्रेस ने जीती थी। खरगोन जिले की छह में से पांच सीटें कांग्रेस ने तो एक पर कांग्रेस के बागी (केदार डाबर) निर्दलीय चुनाव लड़ कर जीते थे। अब ये कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान पर हैं। प्रदेश में बुरहानपुर और आगर जिला ऐसा है, जहां एक-एक सीट कांग्रेस और भाजपा तो एक-एक पर निर्दलीय चुनाव जीते थे। बुरहानपुर जिले में नेपानगर सीट कांग्रेस और बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक सुरेन्द्र सिंह शेरा चुनाव जीते थे। शेरा अब कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। यही स्थिति आगर जिले में भाजपा के साथ बनी थी। यहां एक सीट भाजपा तो एक निर्दलीय विक्रम सिंह राणा ने जीती थी। राणा इस चुनाव में भाजपा से मैदान में हैं। इस प्रकार 17 जिलों के परिणाम या तो भाजपा के पक्ष में थे या फिर कांग्रेस के।

28/11/2023105
लाड़ली बहनों पर पुष्प वर्षा करते हुए डॉ. नरोत्तम ने कहा मैं आपके हर सुख दुख में साथ हूं
भोपाल

लाड़ली बहनों पर पुष्प वर्षा करते हुए डॉ. नरोत्तम ने कहा मैं आपके हर सुख दुख में साथ हूं

प्रदेश के गृह मंत्री और दतिया से भाजपा प्रत्याशी डॉ नरोत्तम मिश्रा (dr narottam mishra) जनसंपर्क के लिए बसई के ग्राम पारखेड़ा पहुंचे। यहां उनके स्वागत के लिए सैकड़ों महिलाओं का हुजूम उमड़ पड़ा ।जब बहनें और माताएँ डॉक्टर मिश्रा पर पुष्प वर्षा कर रही थी तो उन्होंने उनके हाथ से फूलों की टोकरी लेकर बहिनों तथा माताओं पर पुष्प वर्षा करते हुए कहा कि मैं सदैव आपके सुख दुख में साथ हूं ।आपसे मेरा रिश्ता राजनैतिक नहीं ,पारिवारिक है। बसई और बसई का हर गाँव मुझे जान से भी प्यारा है। यहाँ के विकास के लिए में कोई कोर कसर नहीं छोड़ूंगा। डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा की जन कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी नागरिकों को दी और कहा कि आने वाले पाँच सालों में मैं और तेज़ी से विकास योजनाओं को यहाँ क्रियान्वित करूँगा, ताकि हर बसईवासी गर्व कर सके। ग्रामीणों ने अपने लाड़ले नेता डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा का एक हज़ार फ़ीट लंबी फूल माला से स्वागत किया।

10/11/2023108
विंध्य की जनता को किसी एक पार्टी पर नहीं विश्वास,BSP का होगा वर्चश्व
भोपाल

विंध्य की जनता को किसी एक पार्टी पर नहीं विश्वास,BSP का होगा वर्चश्व

विधानसभा चुनाव पूरे शबाब पर है। भाजपा और कांग्रेस पार्टी अपनी तरफ से पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में हैं लेकिन विंध्य की बात करें तो इस बार किसी एक पार्टी पर विंध्य की जनता को विश्वास होता नहीं दिख रहा है (vindhya politics)। दरअसल विंध्य में जातिगत सियासत होती है और यही कारण है कि जो पार्टी जातियों का सही समीकरण बैठाती है उस पार्टी का विंध्य में वर्चश्व होता है। साल 2018 में विंध्य की जनता ने भारतीय जनता पार्टी को 30 में 24 सीटें देकर यह बता दिया था कि वो विकास के पक्षधर हैं। लेकिन जब साल 2020 में कांग्रेस की सरकार गिरी और भाजपा की सरकार फिर बनी तब विंध्य की जमकर उपेक्षा की गई। विंध्य से तीन मंत्री बनाए गए लेकिन उनमें सामान्य वर्ग का एक भी मंत्री नहीं था यहीं से विंध्य की जनता ने भाजपा से किनारा करना शुरु कर दिया। हांलाकि भाजपा ने बाद में भरपाई के लिए गिरीश गौतम (girish gautam) को विधानसभा अध्यक्ष बना कर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इस चुनाव में भाजपा ने विंध्य की कई सीटों में बदलाव किया है तो वहीं कांग्रेस पार्टी ने इस चुनाव में बेहतर तरीके से जातिगत समीकरण बैठाया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कांग्रेस की स्थिति काफी मजबूत है। भाजपा और कांग्रेस के कई उम्मीदवार एक ही वर्ग के आमने सामने हैं। इस बीच बीएसपी ने होशियारी का परिचय देते हुए दोनों पार्टियों की तुलना में अलग वर्ग के प्रत्याशी दिए हैं। रीवा की बात करें तो वहां पर आठ विधानसभा सीटों में भाजपा,कांग्रेस और बीएसपी तीनों ही पार्टियों को इस बार प्रतिनिधित्व मिलने जा रहा है। सतना की बात करें तो यहां भी बीएसपी कई सीटों में कड़ा मुकाबला कर रही है खास कर सतना की गणेश सिंह (ganesh singh) जिस सीट से चुनाव मैदान पर हैं उस सीट पर बीएसपी जीतने की स्थिति में दिख रही है। सीधी से भी यही खबर है यहां पर भी बीएसपी उम्मीदवार कठिन चुनौती देने में कामयाब हो रहे हैं और दो सीट बीएसपी सीधी में भी पाती हुई नजर आ रही है। सिंगरौली की बात करें तो वहां की भी कुछ ऐही ही स्थिति है।

9/11/2023133