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क्या हम सनातनी नहीं हैं? हम सनातनी,वैष्णव और शैष्णव सब हैंःराजबब्बर
भोपाल

क्या हम सनातनी नहीं हैं? हम सनातनी,वैष्णव और शैष्णव सब हैंःराजबब्बर

भोपाल दौरे पर आए फिल्म अभिनेता और नेता राजबब्बर (raj babbar) ने प्रेसवार्ता आयोजित कर भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि एमपी में गरीबी का आलम ये है कि दस हजार में बच्चियां बेची जा रही हैं। इसके अलावा राजबब्बर ने पीएम मोदी और सीएम शिवराज के उस बयान पर भी कटाक्ष किया जिसमें उन्होने कहा है कि राहुल और प्रियंका मनोरंजन करने आते हैं। जिस पर कांग्रेस नेता ने कहा कि चाहे हेमा मालिनी हों या प्रियंका हम महिलाओं का सम्मान करते हैं,इस प्रकार के बयान देना मतलब छिछोरा बयान की कहा जा सकता है। आयोध्या में श्रीराम मंदिर का अब तक दर्शन नहीं करने पर राजबब्बर ने कहा कि भगवान राम सबके हैं। मन में आस्था है और जब चाहेंगे तब भगवान राम के दर्शन करने जाएंगे क्या हम सनातनी नहीं हैं। हम सनातनी,वैष्णव और सैष्णव सब हैं। फिल्म अभिनेता ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि इतने साल में भाजपा ने घोटालों के अलावा किया क्या है। राजबब्बर ने कांग्रेस के वचन पत्र में दी गई गारंटी को याद दिलाते हुए कहा कि कांग्रेस महिलाओं को सम्मान के रुप में 1500 रुपये देना चाहती है। रोजगार देना चाहती है। बेरोजगारी भत्ता देना चाहती है। लेकिन भाजपा के संकल्प पत्र में ऐसा कोई भी संकल्प नहीं लिया गया है।

14/11/202399
कांग्रेस उपाध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता को पीसीसी चीफ कमलनाथ ने दी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
भोपाल

कांग्रेस उपाध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता को पीसीसी चीफ कमलनाथ ने दी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

नर्मदा सेवा सेना के अध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता (bhupendra gupta) को पीसीसी चीफ कमलनाथ (kamal nath) ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की ओर से मिली जिम्मेदारी के अनुसार भूपेन्द्र गुप्ता को वचन पत्र (congress vachan patra) की जानकारियां जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौपी गई है। जिसके तहत भूपेन्द्र गुप्ता आज नर्मदापुरम में प्रेसवार्ता का आयोजन करेंगे और वचन पत्र में दी गई गारंटी की जानकारी आम जनता तक पहुंचाने का का करेंगे। इसी प्रकार भूपेन्द्र गुप्ता पांच नवंबर को छिंदवाड़ा और छह नवंबर को बैतूल में प्रेसवार्ताएं आयोजित कर वचन पत्र की हर बात जनता तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। भूपेन्द्र गुप्ता प्रदेश उपाध्यक्ष के रुप में कांग्रेस की ओर से मिलने वाली जिम्मेदारियों का लगातार पालन कर रहे हैं। इससे पहले उनको प्रदेश भर में जन चौपाल लगाने की भी जिम्मेदारी सौंपी गई थी जिसके तहत भूपेन्द्र गुप्ता ने प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों में जन चौपाल का आयोजन किया और कांग्रेस पार्टी की बात जनता तक पहुंचाने का काम किया था।

3/11/2023531
कांग्रेस कल से करेगी महाजनसंपर्क अभियान का आगाज,भाजपा की गिनाई जाएगी नाकामी
भोपाल

कांग्रेस कल से करेगी महाजनसंपर्क अभियान का आगाज,भाजपा की गिनाई जाएगी नाकामी

कांग्रेस चार नवंबर से महाजनसंपर्क अभियान शुरू कर रही है (maha jansampark abhiyan)। इसमें पार्टी के दिग्गज नेता एक साथ अलग-अलग क्षेत्र में उतरेंगे। इसमें पार्टी के वचन पत्र की गारंटी को पूरा करने का विश्वास जनता को दिलाएंगे (congress vachan patra)। साथ ही भाजपा सरकार (mp government) के घोटाले और भ्रष्टाचार को भी गिनाएंगे। पार्टी के नेताओं का कहना है कि दोनों नेता वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा कर आगामी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देंगे। गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) और कमलनाथ (Kamal Nath) के बीच द्वंद्व होने की चर्चा भाजपा से कांग्रेस में आए विधायक वीरेंद्र रघुवंशी की टिकट कटने के बाद सामने आई थी। इसमें कमलनाथ ने टिकट कटने पर रघुवंशी समर्थकों को दिग्विजय सिंह और जयवर्धन सिंह के कपड़े फाड़ने की बात कही थी। इसके बाद से दोनों ही नेताओं के बीच सबकुछ ठीक नहीं होने की अटकलें लग रही थी। इन अटकलों पर प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने दोनों नेताओं को शोले फिल्म का जय और वीरू बताया था। वहीं, दिग्विजय सिंह ने भी दोनों के बीच लड़ाई को भाजपा को षड्यंत्र बताया था। कांग्रेस के महाजनंपर्क अभियान का मतलब है कि प्रदेश भर में पार्टी एकजुटता का मैसेज देना चाहती है। जिस प्रकार से कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बीच विवाद की खबर आई थी और उससे कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति निर्मित हो गई थी इसी लिए पार्टी संपर्क अभियान से एकजुटता का परिचय देना चाहती है।

3/11/2023312
कांग्रेस को 'राम' से आपत्ति है या 'मंदिर' से स्पष्ट करें: सुधांशु त्रिवेदी
भोपाल

कांग्रेस को 'राम' से आपत्ति है या 'मंदिर' से स्पष्ट करें: सुधांशु त्रिवेदी

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी (sudhanshu trivedi) ने कांग्रेस पर करारा प्रहार कर राम के नाम और मंदिर पर सवाल किया है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि उसे राम से आपत्ति है अथवा मंदिर से। गौरतलब है कि कांग्रेस की तरफ से एक प्रेसवार्ता के दौरान बाबरी मस्जिद के विवादित ढांचे को गिराने पर शहीदी का नाम दिया गया था (babri masjid demolition)। कांग्रेस का इस प्रकार बयान आते ही भारतीय जनता पार्टी को मौका मिला और राम के नाम के साथ मंदिर के नाम पर कांग्रेस के ऊपर हमला बोल दिया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि जब न्यायालय ने मान लिया कि वहां पर राम मंदिर था और उसी को आधार मानते हुए मंदिर बनाने का आदेश दिया गया फिर भी कांग्रेस की ओर से विवादित ढांचे को शहीदी का नाम देने का तात्पर्य क्या है। कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि वो श्री राम का विरोध कर रही है या मंदिर का। सुधांशु त्रिवेदी ने साफ आरोप लगाया कि जब चुनाव आते हैं तब कांग्रेस के नेता मंदिर जाने लगते हैं खुद को हिंदू बताने लगते हैं लेकिन चुनाव खत्म होते ही कांग्रेस वालों के बयान बदल जाते हैं।

29/10/2023101
'जय वीरु' की दोस्ती में दरार,दिग्विजय सिंह ने चुनाव प्रचार से बनाई दूरी
भोपाल

'जय वीरु' की दोस्ती में दरार,दिग्विजय सिंह ने चुनाव प्रचार से बनाई दूरी

विधानसभा चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों और 'पुराने दोस्तों' में ठन गई है(MP Elections)। कमलनाथ से नाराज होकर दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने प्रचार अभियान से दूरी बना ली है। दमोह में प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) के कार्यक्रम से भी वह नदारद रहे। टिकट वितरण और उससे उपजे असंतोष पर कमलनाथ (Kamal Nath) के 'दिग्विजय सिंह के कपड़े फाड़ो' वाले बयान ने कांग्रेस में असहज स्थिति बना दी है। कांग्रेस के चुनाव अभियान के दो अग्रणी नेताओं में मनभेद हो गया है। कमलनाथ से नाराज होकर दिग्विजय सिंह कोपभवन में चले गए हैं। न तो कांग्रेस के कार्यक्रमों में दिखाई दे रहे हैं और न ही बगावत शांत करने में सक्रिय दिख रहे हैं। दमोह में प्रियंका गांधी की सभा में भी वह नहीं दिखे। नदारद ही रहे। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार दिग्विजय सिंह अपने कुछ समर्थकों को टिकट दिलाना चाहते थे (congress candidate list)। कमलनाथ ने फीडबैक सर्वे के बहाने उनकी इच्छा को अस्वीकार कर दिया। इससे उखड़े दिग्विजय सिंह ने खुद को अपने भोपाल के बंगले में कैद कर लिया है। शुक्रवार को उन्होंने पार्टी के मध्य प्रदेश के प्रभारी महासचिव रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) से भी मुलाकात कर अपना पक्ष रखा था। इसमें भी कोई रास्ता नहीं निकला है। उच्च स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं ताकि दिग्विजय सिंह फिर से बागियों और बगावत करने वाले नेताओं का गुस्सा शांत करने की अपनी भूमिका को निभाएं। हालांकि, दोनों ही तरफ से नाराजगी या असंतोष को लेकर कोई बयान नहीं है। दिग्विजय सिंह खुले तौर पर स्वीकार कर चुके हैं कि कोलारस विधानसभा सीट से भाजपा विधायक रहे वीरेंद्र रघुवंशी (Veerendra Raghuvanshi) को कांग्रेस में शामिल होने के बाद शिवपुरी में टिकट मिलना चाहिए था। टिकट नहीं मिल सका, इसका उन्हें खेद है। कमलनाथ के कपड़ा फाड़ बयान को लेकर उन्होंने यह भी कहा था कि दोनों बहुत पुराने दोस्त हैं। उन्हें मुझे गाली देने और मेरे कपड़े फाड़ने की पॉवर ऑफ अटॉर्नी दे रखी है। भाजपा भी इसका लाभ उठाने की कोशिश कर रही है। लगातार हमले किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) से लेकर केंद्रीय नेता तक दिग्विजय सिंह की नाराजगी और कपड़े फाड़ने के बयान को मुद्दा बना चुके हैं। भाजपा प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी (Pankaj Chaturvedi) ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कपड़ा फाड़ से बहिष्कार तक बात पहुंच गई है। दिग्विजय सिंह शुक्रवार को प्रचार के लिए नहीं निकले। वह पीसीसी चीफ कमलनाथ से नाराज होकर कोप भवन में चले गए हैं।

28/10/2023115
'जय और वीरु' की दोस्ती में दरार नहीं डाल पाएगा 'गब्बर सिंह'
भोपाल

'जय और वीरु' की दोस्ती में दरार नहीं डाल पाएगा 'गब्बर सिंह'

मप्र विधानसभा चुनाव में जय वीरु और गब्बर सिंह की एंट्री हो चुकी है। दरअसल खबर है कि प्रत्याशी चयन को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh)!कमलनाथ (Kamal nath) और प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) से नाराज चल रहे हैं। जिस पर सफाई देते हुए कांग्रेस प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस में किसी प्रकार की नाराजगी नहीं है। सवाल इस बात का उठता है कि कांग्रेस में क्या चल रहा है इस बात के लिए भाजपा वालों के पेट में दर्द क्यों हो रहा है। गौरतलब है कि प्रत्याशी चयन को लेकर प्रदेश कांग्रेस (mp congress) में अलग-अलग जिलों से लेकर प्रदेश कार्यालय तक जम कर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है। और यही कारण है कि दिग्विजय सिंह पार्टी से नाराज चल रहे हैं उन्हे मनाने के लिए प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला दिग्विजय सिंह के निवास भी गए थे और अब उसके बाद ही रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि दिग्विजय सिंह और कमलनाथ की जोड़ी जय वीरु वाली दोस्ती है जिसे कोई गब्बर तोड़ नहीं पाएगा। जिसके चलते कांग्रेस ने कई उम्मीदवारों को बदला भी है। कुछ उसी प्रकार से कांग्रेस में अलग-अलग जगहों पर विरोध हो रहा है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी की ओर से दोनों नेताओं को जय वीरु कहने के बाद अब यह बात चल रही है कि दोनों के बीच कुछ तो चल रहा है। रणदीप सुरजेवाला ने प्रेसवार्ता कर भाजपा सरकार पर कई तरह का आरोप लगाया है। उन्होने सीएम शिवराज (Shivraj Singh Chouhan) पर किसानों के साथ छल करने का भी आरोप लगाया है।

28/10/2023100
चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस को चाहिए 75 प्रतिशत का स्ट्राइक रेट,भाजपा के लिए आसान
भोपाल

चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस को चाहिए 75 प्रतिशत का स्ट्राइक रेट,भाजपा के लिए आसान

क्रिकेट की तरह ही सियासत की पिच पर भी स्ट्राइक रेट का काफी महत्व होता है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों (2008, 2013 और 2018) के आंकड़े देखें तों 'स्ट्राइक रेट' में कांग्रेस भाजपा से पीछे है (madhya pradesh elections)। हम बात कर रहे हैं पिछले तीन चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के लिहाज से सबसे मजबूत ( तीन में से तीन जीत) सीटों के बारे में। बड़े दिलचश्प हैं ये आंकड़े। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 74 सीटें ऐसी हैं,जिन पर कांग्रेस ने पिछले तीनों चुनाव में जीत दर्ज नहीं की है। वहीं भाजपा के लिए ऐसी सीटों की संख्या केवल 11 है। दूसरी ओर पिछले तीनों चुनावों में जीती जाने वाली भाजपा के सीटों की संख्या 58 है,जबकि कांग्रेस के खाते में ऐसी सिर्फ 10 सीटें हैं। इसे दूसरे अर्थों में यूं कहा जा सकता है कि कांग्रेस को इस बार सत्ता में आना है, तो 230 नहीं बल्कि 156 (230-74) सीटों में से बहुमत का आंकड़ा 116 छूना होगा। मतलब करीब 75 प्रतिशत स्ट्राइक रेट कांग्रेस को चाहिए होगा। भाजपा के लिए यह समीकरण थोड़ा आसान है। कुल सीटों मे से उसकी कमजोर 11 सीटें हटा दें, तो 219 सीटें रहती हैं, जिनमें 116 पर जीत दर्ज करने पर सरकार बनेगी। वनडे क्रिकेट में स्लाग ओवर्स मतलब आखिरी के ओवर में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की आवश्यकता होती है। कुछ ऐसा ही कांग्रेस को उन 61 सीटों पर करना होगा। जहां जहां पिछले तीन चुनावों के आंकड़े के अनुसार परिणाम कुछ भी हो सकता है। 2018 में कांग्रेस इनमें से 41 सीट जीती थी और सत्ता पर आई थी। जबकि भाजपा को सिर्फ 20 पर ही संतोष करना पड़ा था। इस बार भी ये सीट कांग्रेस की झोली में जाती है तो परिणाम कुछ भी हो सकते हैं।

27/10/202377
'गोरिल्ला' वॉर की तैयारी में भाजपा,30 अक्टूबर के बाद भाजपा कांग्रेस को करेगी 'चारों खाने चित्त'
भोपाल

'गोरिल्ला' वॉर की तैयारी में भाजपा,30 अक्टूबर के बाद भाजपा कांग्रेस को करेगी 'चारों खाने चित्त'

सियासत में शतरंज के खेल और उसकी बाजी का बड़ा महत्व होता है। और इस पूरे मामले में इस वक्त भारतीय जनता पार्टी का कोई तोड़ नहीं है (mp bjp)। मप्र के विधानसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी है, अभी तक लग रहा था कि इस चुनावी चौसर में भारतीय जनता पार्टी काफी पीछे है लेकिन दिन बीतते-बीतते जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आती चली जा रही है भाजपा के सियासी घोड़े उल्टी चाल चलने लगे हैं जिसका जवाब कांग्रेस पार्टी (mp congress) दे पाने में असमर्थ साबित हो रही है। प्रदेश में 17 नवंबर को मतदान है और 30 अक्टूबर नामांकन की आखिरी तारीख है (MP Elections)। भाजपा ने अब तय कर लिया है कि कर्नाटक की गलतियों को एमपी में नहीं दोहराया जाएगा,और कांग्रेस को किसी प्रकार का मौका नहीं दिया जाएगा। इसी लिए भारतीय जनता पार्टी ने 'गोरिल्ला' वार की तैयारी को अंजाम देना शुरु कर दिया है। दरअसल भारतीय जनता पार्टी अब अपने विपक्षी दलों को किसी प्रकार का मौका नहीं देना चाहती है। शतरंज के खेल में सामने वाले खिलाड़ी की नजर में देखना बहुत जरुरी होता है कि वो अगली चाल कौन सी चलने वाला है। भाजपा भी कुछ ऐसा ही करने जा रही है। 30 अक्टूबर के बाद भाजपा अपने सभी मोहरों को एमपी विधानसभा के चुनाव में उतारने जा रही है। कांग्रेस पार्टी के पास स्टार प्रचारकों से लेकर कार्यकर्ताओं की भारी कमी है। रही सही कसर कांग्रेस के नाराज खेमे पूरी कर दे रहे हैं। जिस प्रकार से कांग्रेस के बाहर और अंदर विरोध हो रहा है उसका भरपूर फायदा भारतीय जनता पार्टी उठाने की योजना बना रही है। कांग्रेस की जब एक जगह सभा हो रही होगी तब भाजपा की पांच से छह जगहों पर एक साथ सभाएं हो रही होंगी। कांग्रेस भाजपा पर एक आरोप लगाएगी तो उसके बदले भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ताओं की पूरी फौज कांग्रेस पर काउंटर अटैक करने के लिए बैठी है। मतलब साफ है कि शह और मात के इस खेल में भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस को सोचने का भी मौका नहीं देने वाली है। जो कांग्रेस पार्टी अभी तक 180 सीटों का हिसाब लगा रही थी उसी कांग्रेस के नेता अब दबी जुवां कह रहे हैं कि जिस प्रकार से भाजपा की तैयारी चल रही है उससे लगता है कि बहुत करीबी मुकाबला होने वाला है। भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियों को अंजाम दे दिया है उसको अमली जामा पहनाने के लिए 30 अक्टूबर का इंतजार किया जा रहा है। गोरिल्ला युद्ध के मास्टर माइंड केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) अगले तीन दिनों तक एमपी में ही रहने वाले हैं और वो कई बैठकें भी करेंगे। सभी 230 विधानसभा सीटों के प्रभारियों को वो जीत का मंत्र भी देंगे इस दौरान वो ये भी बताएंगे कि किस प्रकार से कांग्रेस को चारों खाने चित्त करना है। भाजपा की नजर तो सीधे सेनापति पर भी है कि उन्ही को विधानसभा चुनाव में हरा दिया जाए। जिससे प्रदेश की जनता को पता चल सके कि कांग्रेस कितने पानी में है।

27/10/2023130
'सियासत में राम' भाजपा और कांग्रेस के बीच छिड़ा संग्राम,'सबके हैं राम'
भोपाल

'सियासत में राम' भाजपा और कांग्रेस के बीच छिड़ा संग्राम,'सबके हैं राम'

चुनावी माहौल हो और राजनीतिक पार्टियों की जुवान पर भगवान श्रीराम का नाम ना हो ऐसा भारत देश में तो संभव नहीं है। समय-समय पर नेता यह बता देते हैं कि जब तक भगवान राम की क्रिपा उन पर है तब तक तो वो अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक ही सकते हैं। इसकी बानगी उस वक्त देखने को मिली जब खुद को हनुमान भक्त कहने वाले कमलनाथ (Kamal Nath) ने छिंदवाड़ा में नामांकन भरने के दौरान सियासी हुंकार भरते हुए कहा, भाजपा नेता तो ऐसे बता रहे हैं कि जैसे राम मंदिर (Ram Mandir Ayodhya) उनका हो। कमलनाथ के इस बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि कमलनाथ चुनावी हिंदू हैं और चुनाव देख कर छद्म हिंदुत्व राग अलापने लगते हैं। लेकिन देश की जनता जानती है कि उनकी ही पार्टी ने भगवान राम और राम सेतु के अस्तित्व को नकारा था। इस मामले में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) ने भी कांग्रेस पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण को लटकाने,भटकाने,अटकाने वाले और प्रभु श्रीराम को काल्पनिक बताने वाले कांग्रेस नेता किस मुंह से राम मंदिर पर बात कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं को राम मंदिर पर बात करने का अधिकार नहीं है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि बाबरी विध्वंस के बाद भाजपा की चार राज्य सरकारों को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने बर्खास्त कर दिया था। जिसमें मप्र की भाजपा सरकार भी शामिल थी। सरकार को बर्खास्त करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी असंबैधानिक बताया था। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अयोध्या में राम जन्मभूमि पर बाबरी मस्जिद बनाने का फिर से संकल्प लिया था। यह निर्णय लेने वाली सरकार में सनातन विरोधी कमलनाथ प्रमुखता से शामिल थे। गुरुवार को केन्द्रीय मंत्री मिनाक्षी लेखी (Meenakshi Lekhi) ने भी कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि कन्या पूजन को नौटंकी बताने वाले कभी भारतीय संस्कृति और सनातन के पक्ष में नहघं हो सकते। कांग्रेस में कभी महिलाओं का सम्मान नहीं हुआ। जबकि भाजपा सरकार ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए कानून बनाया। तीन तलाक की कुप्रथा समाप्त की। प्रदेश में पुलिस भर्ती में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया है।

26/10/202384
जगह-जगह घूम रहा हाथी,पंजे और फूल से मुकाबला करने कई दावेदार हाथी पर हुए सवार
भोपाल

जगह-जगह घूम रहा हाथी,पंजे और फूल से मुकाबला करने कई दावेदार हाथी पर हुए सवार

मप्र के विधानसभा चुनाल में एकबार फिर हाथी जमकर घूम रहा है (bsp mp)। साल 2018 विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार हाथी अच्छी खुराग लेकर निकला है। यूपी से लगे क्षेत्रों में हाथी, पंजे और कमल को टक्कर देने के लिए लगातार फुफकार रहा है। भाजपा (mp bjp) और कांग्रेस (mp congress) के कई बागियों ने बसपा का दामन थामा और उन्हे 24 घंटे के अंदर बसपा की ओर से टिकट देकर चुनाव मैदान में उतार दिया गया है। यह बागी ऐसे हैं कि इनका वोटबैंक भाजपा और कांग्रेस का ही है और ये नुकसान भी भाजपा और कांग्रेस को ही पहुंचाएंगे। साल 2018 में करीब एक दर्जन ऐसी सीटें थी जहां पर बसपा के उम्मीदवारों ने दस हजार से ज्यादा का वोट हासिल कर भाजपा और कांग्रेस को काफी नुकसान पहुंचाया था यही कारण है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां बहुमत से दूर रह गई थी। बाद में कमलनाथ ने निर्दलीयों,सपा और बसपा के विधायकों को अपने साथ मिला कर प्रदेश में 15 साल बाद कांग्रेस की सरकार बनाने में कामयाबी हासिल की थी। इस विधानसभा चुनाव में जिस प्रकार से बसपा ने कुछ मजबूत उम्मीदवारों पर दांव लगाया है उससे ऐसी स्थिति स्पष्ट हो रही है कि तीन दिसंबर के बाद एमपी में एक बार फिर हाथी दौड़ लगाएगा। कुछ भाजपा के तो कुछ कांग्रेस के नाराज नेता इस बार बसपा से विधानसभा चुनाव मैदान में उतरे हैं और उनमें कुछ ऐसे उम्मीदवार भी हैं जो चुनाव जीत भी सकते हैं पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा के खाते में दो सीट आई थी लेकिन हालिया स्थिति की बात करें तो इस चुनाव में बसपा के खाते में ज्यादा सीटें आती दिख रही हैं। बसपा ने कुछ सीटों पर ब्राम्हण तो कुछ सीटों पर ठाकुरों को मौका दिया है जो चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं।

24/10/2023142
आग इधर भी है आग उधर भी है,अब देखना है इस आग में घी कौन डालता है
भोपाल

आग इधर भी है आग उधर भी है,अब देखना है इस आग में घी कौन डालता है

सियासी आग इस वक्त प्रदेश में इस कदर जल रही है कि उसकी लपटें प्रदेश के हर कोने में जल रही हैं और धुंआ चारों ओर फैला हुआ है (MP elections)। दरअसल मतदान की तारीख जितनी करीब आती चली जा रही है चुनाव का नशा और उसकी खुमारी उसी प्रकार बढ़ती चली जा रही है। जिन वर्तमान विधायकों का टिकट कटा वो हार मानने के लिए तैयार नहीं हैं। और जिन्हे टिकट मिला उन्हे भाजपा और कांग्रेस अपना बेस्ट आप्शन मान कर चल रहे हैं। अब बात करते हैं उम्मीदवारों के चयन और सरकार के रास्ते का। कांग्रेस ने पहली सूची में 144 नामों की घोषणा की जिसमें कांग्रेस यह मान कर चल रही है कि उसमें पार्टी को कमसे कम 120 सीटें मिलेंगी (congress candidate list)। दूसरी सूची 88 नामों की आई जिसमें कांग्रेस यह मान कर चल रही है कि उसके खाते में 30 विधायक आएंगे। कुल मिला कर कांग्रेस का यह मानना है कि उसके 150 विधायक आएंगे। कांग्रेस के कुछ नेताओं का यह मानना है कि 150 विधायक आएंगे तो भाजपा खरीद फरोख्त नहीं कर पाएगी,इसी लिए कांग्रेस पार्टी 150 से अधिक विधायकों का लक्ष्य लेकर चल रही है। कांग्रेस की जिस प्रकार 2020 में सरकार गिरी उसके बाद कांग्रेसी खेमें में विश्वास की कमी आई और यही कारण है कि कांग्रेस नेता चाहते हैं कि माहौल का फायदा उठाया जाना चाहिए और कमसे कम 150 विधायकों की जीत होनी चाहिए। वहीं भारतीय जनता पार्टी है कि वो सत्ता को अपने हाथ से जाने नही देना चाहती है। जिसके चलते आलम ये है कि भाजपा अभी भी 94वे उम्मीदवारों का ऐलान नहीं कर पाई है (bjp candidate list)। भाजपा के नेताओं का मानना है कि गिरी हालत में उसके 120 से 130 विधायक जीत कर आएंगे। मतलब साफ है कि भाजपा किसी भी सूरत में सत्ता को छोड़ने के मूड में नहीं दिख रही है।

21/10/2023154
कांग्रेस ने 88 प्रत्याशियों की जारी की सूची,छह विधायकों के काटे टिकट
भोपाल

कांग्रेस ने 88 प्रत्याशियों की जारी की सूची,छह विधायकों के काटे टिकट

विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार देर रात को प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी कर दी (congress second list) । इसमें 88 नाम हैं, जिसमें में पहली सूची में घोषित तीन प्रत्याशी के टिकट भी बदले गए हैं। पार्टी ने छह विधायकों के टिकट काटे हैं। सूची के अनुसार अब दतिया से अवधेश नायक की जगह राजेंद्र भारती, गोटेगांव में शेखर चौधरी की जगह नर्मदा प्रसाद प्रजापति यथावत और पिछोर से शैलेंद्र सिंह का टिकट काटकर अरविंद लोधी को प्रत्याशी बनाया गया है। भोपाल दक्षिण-पश्चिम से पीसी शर्मा,गोविंदपुरा से रवीन्द्र साहू,हुजूर से नरेश ज्ञानचंदानी और भोपाल उत्तर से विधायक आरिफ अकील के उत्तराधिकारी के तौर पर आतिफ अकील मैदान में होंगे। छिंदवाड़ा से सांसद नकुल नाथ ने जिन तीन प्रत्याशियों के नाम पहले घोषित किए थे उन्हें शामिल करते हुए 88 प्रत्याशियों की सूची जारी की गई है (congress candidate list)। अब केवल बैतूल जिले की आमला सीट का प्रत्याशी घोषित होना बांकी है। कांग्रेस यहां से राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी निशा बांगरी को चुनाव लड़ना चाहती है। पर अभी शासन ने उनका त्यागपत्र स्वीकार नहीं किया है। शिवपुरी से प्रत्याशी केपी सिंह को वापस किशोर भेजे जाने की चर्चा थी लेकिन पार्टी अपने पूर्व के निर्णय पर कायम रही। यहां से भाजपा से कांग्रेस में आए विधायक वीरेंद्र रघुवंशी का प्रत्याशी बनने की मांग रघुवंशी समाज कर रहा था। भिंड से एक बार फिर चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को मैदान में उतर गया है वह भाजपा से फिर कांग्रेस में लौटे हैं।

19/10/2023228