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प्रदेश के 19 लाख नव मतदाताओं को साधने में जुटा भाजपा युवा मोर्च और यूथ कांग्रेस
पहली बार मतदान करने वाले युवा मतदाताओं पर भाजपा और कांग्रेस की नजर है (MP Elections)। मतदाता सूची का प्रकाशन होते ही भाजपा और कांग्रेस युवाओं को आकर्षित करते के लिए रणनीति बनाने में जुट गई हैं (First time voters)। मतदाता सूची के अनुसार प्रदेश भर में 19 लाख मतदाता पहली बार वोट डालेंगे। युवा मतदाताओं की इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने युवा मोर्चा को जिम्मेदारी सौंप दी है (BJP Yuva Morcha)। पार्टी हाई कमान का आदेश मिलते ही भाजपा युवा मोर्चा ने तीन अक्टूबर से प्रदेश भर में नव मतदाता सप्ताह अभियान शुरु कर दिया है। इसके तहत युवा मोर्चा के कार्यकर्ता अपने सभी 1070 मंडलों में युवा मतदाताओं से घर-घर जाकर संपर्क करेंगे। दस अक्टूबर को सभी मंडलों में इसका समापन होगा। इसमें युवा मतदाताओं के अलावा जिले के भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में कुछ युवा मतदाताओं को सम्मानित भी किया जाएगा। प्रदेश में नवंबर में विधानसभा चुनाव है ऐसे में युवा मोर्चा और युवा कांग्रेस दोनों ही संगठन युवा मतदाताओं पर डोरे डाल रहे हैं। युवा मोर्चा ने 'खेलेगा मध्यप्रदेश' समेत कई अभियान शुरु किए हैं। इसी प्रकार युवा कांग्रेस ने 'बूथ जोड़ो, यूथ जोड़ो' अभियान शुरु किया है (Youth Congress)। प्रदेश में एक करोड़ 48 लाख युवा मतदाता हैं। दोनों दलों को लगता है कि इन्हे साधने से पूरे परिवार के वोट उनकी झोली में आ जाएंगे।

स्थायी रोजगार के लिए भटक रहे प्रदेश के 26 हजार स्वच्छाग्राही कर्मी,नोटा पर वोट देने को मजबूर
प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने अलग-अलग वर्गों को खुश करने के तमाम प्रयास किए लेकिन उनमें कुछ वर्ग मुख्यमंत्री की नजर में नहीं आए और वो भटकने को मजबूर हैं। ऐसे ही प्रदेश भर में काम कर रहे करीब 26 हजार स्वच्छाग्राही कर्मी (swacchagrahi workers) आज भी न्याय के लिए भटक रहे हैं। एक मामूली से पगार पर काम करने वाले इन स्वच्छाग्राही कर्मियों को जब पता चला कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंचायतों में काम करने वाले रोजगार सहायकों की नौ हजार से सीधे 18 हजार रुपये पगार कर दी और संविदा कर्मियों (samvida workers) को नियमित के समान वेतन और सुविधा कर दी तो स्वच्छाग्राहियों ने भी खुद के लिए न्याय की गुहार लगाना शुरु कर दिया। स्वच्छाग्राही संगठन सी.एफ. टी ने केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) के बंगले से लेकर कई मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों के पास गुहार लगाई लेकिन नतीजा शिफर ही रहा। थक हार कर स्वच्छाग्राही संगठन के पदाधिकारी पवन परमार बीजेपी प्रदेश कार्यालय भी पहुंचे लेकिन वहां भी उन्हे सुनने वाला कोई नहीं मिला। अब इस संगठन का कहना है कि सरकार इनके लिए उचित फैसला नहीं लेती है तो प्रदेश भर में इनकी 26 हजार संख्या है तो वो और उनके परिवार के सभी सदस्य नोटा की बटन दबाएंगे (NOTA)। गौरतलब है कि इनकी नियुक्ति राज्य सरकार के निर्देश पर ग्राम पंचायत में शिक्षित ब्यक्तियों का चयन कर जनपद भेजा गया था। इन स्वच्छाग्राहियों ने कोरोनाकाल में वालेंटियर का कार्य किया,ई.ओ.एल कार्य, एस. एल.डब्ल्यु का योजना का कार्य विशेषकर मप्र में स्वच्छता मिशन अंतर्गत मध्यप्रदेश के समस्त पंचायतों को ओडीएफ कराने में स्वच्छाग्राहियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह स्वच्छाग्राही महज 150 रुपये प्रति दिन के हिसाब से काम करते हैं महीने में इन्हे महज तीन हजार रुपये मनदेय दिया जाता है क्योंकि इनसे काम भी सिर्फ 20 दिन लिया जाता है। लिहाजा इतने कम मानदेय में इनका गुजारा नहीं हो पा रहा है लिहाजा इनकी सरकार से गुजारिश है कि इनका मानदेय बढ़ाया जाए और नियमित कर्मचारियों की भांति इनसे काम लिया जाए जिससे ये अपने परिवार का ठीक तरीके से भरण पोषण कर सकें। सरकार इनकी बात नहीं मानती है तो ये नोटा की बटन दबाने के लिए मजबूर होंगे।

कम वाटों के अंतर से जीतने वाली विधानसभा सीटों पर कांग्रेस और भाजपा में फंसा पेंच
कांग्रेस पार्टी हर सीट में उम्मीदवार की घोषणा करने से पहले काफी सोच विचार कर रही है (MP Congress)। अब कांग्रेस में कम वोटों से जीत दर्ज करने वाली सीटों पर मंथन चल रहा है और उन्ही सीटों पर पेंच फंसा है। दरअसल कांग्रेस ने 2018 में नौ सीटें एक हजार से 300 से कम मतों के अंतर से जीती थी। इनमें से तीन सीटें भाजपा (MP BJP) ने उपचुनाव में जीत लीं। वहीं भाजपा सात सीटें एक हजार 234 से कम मतों से जीती थी। इन सीटों को दोनों ही दल अपने पाले में करने का जतन कर रहे हैं। कांग्रेस ने जहां कुछ सीटों पर प्रत्याशी बदलने का मन बनाया है तो कुछ को फिर मौका दिया जा रहा है। यही स्थिति भाजपा की है। साल 2018 के चुनाव में अधिक मत प्रतिशत प्राप्त करने के बाद भी भाजपा सरकार बनाने से चूक गई थी। भाजपा को 41.02 प्रतिशत मत मिले थे और 109 प्रत्याशी जीते थे। इसमें सात ऐसे थे,जो एक हजार 234 मत या उससे कम मतों के अंतर से चुनाव जीते थे। इनमें सागर जिले की बीना से महेश राय 460 मतों से जीते थे। 720 मतों के अंतर से जीतने वाले कोलारस के भाजपा विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी अब कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। जावरा से राजेन्द्र पांडे भी 511 मतों के अंतर से जीते थे। यही स्थिति चांदला,नागौद,देवतालाव और इंदौर पांच सीट से भी भाजपा प्रत्याशी कम मतों के अंतर से जीते थे। जबकि कांग्रेस को 40.89 प्रतिशत मिले थे और 114 विधायक चुनाव जीते थे। इनमें नौ एक हजार 284 या उससे कम मतों के अंतर से जीत मिली थी। इनमें दमोह से विधायक राहुल सिंह,मंधाता नारायण पटेल,नेपानगर सुमित्रा देवी कास्डेकर और सुवासरा से विधायक चुने गए हरदीप सिंह डंग ने कांग्रेस छोड़ी और विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर भाजपा की सदस्यता ले ली। राहुल सिंह को छोड़कर बांकी सभी उचुनाव में विजयी रहे। ब्यावरा से 826 मतों से जीते गोवर्धन दांगी के निधन पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के रामचंन्द्र दांगी विजयी रहे। इसके अलावा राजनगर से विक्रम सिंह 732, जबलपुर उत्तर से विनय सक्सेना और राजपुर से बाला बच्चन 932 मतों से जीते थे। प्रदेश में सबसे कम 121 मतों के अंतर से कांग्रेस के प्रवीण पाठक ने ग्वालियर दक्षिण से जीत प्राप्त की थी। भाजपा और कांग्रेस की तरफ से प्रत्याशी चयन को लेकर सर्वे कराया जा चुका है (MP Elections 2023)। कार्यकर्ताओं से फीडबैक भी लिया जा चुका है। भाजपा ने तीन सूचियों में 79 नामों की घोषणा कर दी है इनमें हारी हुई सीटों के प्रत्याशी शामिल हैं। और नए चेहरों पर भी दांव लगाया गया है।

'कैसे बनेगी भाजपा की सरकार',कितनी सीटें घटेंगी और कितनी बढ़ेंगी,कमलनाथ अपने ही करीबियों के शब्दजाल में फंसे
हर जगह एक ही सवाल किसकी सरकार होगी। सरकार बनेगी तो कैसे बनेगी। हर जगह गुड़ा भाग,राजनीतिक हिसाब लगाए जा रहे हैं सारे सियासी पंडित चार दीवारी में बैठ कर सरकार तय कर रहे हैं कुछ राजनीतिक पंडित टीवी डिवेट में बैठ कर सरकार बना रहे हैं (MP Elections)। कांग्रेस के प्रवक्ता और नेता कहते हैं कि इस बार कांग्रेस 150 से 180 सीटों के आस पास लेकर आएगी। पूर्व सीएम कमलनाथ (Kamal Nath) को भी उनके करीबी सलाहकार 180 सीटों का ही सपना दिखा रहे हैं। जब उनके करीबी उनके पास से निकल जाते हैं तो फिर कमलनाथ मन में सोचते हैं कि इसमें अगर कम करो तो 140 सीट तो आ ही जाएगी। लेकिन उसके उलट भाजपा के गणित की बात करें तो वहां कुछ और ही खिचड़ी पक रही है जिस पर कांग्रेस की शायद नजर नहीं पड़ी अथवा पड़ी भी है तो कोई ध्यान नहीं देना चाहता क्योंकि कांग्रेस में विश्वास कम अति विश्वास ज्यादा दिखाई पड़ रहा है। अब बात भाजपा के गणित की करते हैं। वर्तमान में भाजपा के पास 127 विधायक हैं। भाजपा यह मान कर चल रही है कि 127 में 57 सीट वो हार सकती है मतलब 70 सीट भाजपा 127 वर्तमान की सीटों में बचा पाएगी। इसकी पुष्टि तो कांग्रेस की वो 66 सीटें भी कर रही हैं जहां कांग्रेस लगातार तीन बार से हार रही है और भाजपा की वो सीटें गढ़ बनी हुई हैं। 230 विधानसभा सीटों में 127 विधायक भाजपा के पास हैं। 95 वे विधायक कांग्रेस के पास हैं बांकी अन्य,सपा बसपा के पास हैं। भाजपा ने हारी हुई 103 सीट जिन्हे आकांक्षी विधानसभा सीटों का नाम भी दिया गया था। उन सीटों पर भाजपा ने करीब एक साल से ही मंथन करना शुरु कर दिया था। आकांक्षी सीटों पर भाजपा ने जमकर काम किया,हर दावेदार के हिसाब से पार्टी ने सर्वे भी कराया यही कारण है कि आकांक्षी सीटों पर जहां भाजपा के पास जिताऊ उम्मीदवार नहीं थे वहां पर भाजपा ने नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ,कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) और प्रहलाद पटेल (Prahlad Patel) जैसे नेताओं नेताओं को चुनाव मैदान पर उतार दिया। मतलब साफ है सरकार कैसे बनाना है भाजपा को मालूम है। भाजपा का हिसाब है कि 103 आकांक्षी सीटों में भाजपा 50 सीटों पर जीत दर्ज करेगी। ऐसी स्थिति में 70 और 50 को प्लस करें तो भाजपा को 120 सीट मिल रही है और वो सरकार बना रही है। इससे कुछ ऊपर नीचे होता है तो भाजपा उस पर अलग से विचार कर रही है पार्टी के नेता अलग-अलग आप्शनों पर भी काम कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की बात करें तो कमलनाथ के करीबी उन्हे 180 सीटों का सपना दिखा रहे हैं जिस पर कमलनाथ 140 सीट का आंकड़ा लेकर चल रहे हैं।

मासूम बच्ची को देख सीएम शिवराज ने गोदी पर उठाया,कहा हम 'सरकार नहीं परिवार चलाते हैं'
इंदौर के राऊ क्षेत्र में एक वाकये ने सबको भावविभोर कर दिया। मामला उस वक्त का है जब रात के 11.30 बज चुके थे, मुख्यमंत्री शिवराज चौहान (Shivraj Singh Chouhan) मंच से जनता से संवाद कर रहे थे। सामने हज़ारों की संख्या में जनता मौजूद थी, बड़ी संख्या में लाड़ली बहनें (Ladli Behna Yojana) मौजूद थीं। तभी मंच के सामने भीड़ में से एक 3-4 वर्ष की मासूम बालिका मुख्यमंत्री जी की तरफ़ देख 'मामा,मामा,मामा' ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी और उनसे मिलने के लिये मंच की तरफ़ आगे बढ़ी। मामा शिवराज ने भी मासूम बिटिया को देख उसी समय अपना संबोधन रोका , बेटी को मंच पर बुलवाया , उसे गोदी में उठाया , दुलार और स्नेह दिया,मासूम भांजी , मामा से मिलकर बेहद खुश हुई जैसे उसकी कोई कामना पूरी हो गयी हो। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनता से कहा " मैं इसीलिये तो कहता हूं कि हम सरकार नहीं परिवार चलाते हैं। निश्चित तौर पर यह दृश्य वहां उपस्थित हज़ारों लोगों को भावविभोर कर देने वाला था। यह पहला मौका नहीं है जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसी मासूम को अपनी गोद में लिया है इससे पहले सीएम शिवराज का यह रुप पहले भी देखने को मिलता रहा है जिसको लेकर उनके विरोधी उन पर तंज कसते रहे हैं लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के स्वभाव में अभी बदलाव नहीं आया उनको प्रदेश के बच्चों का 'मामा' ऐसे ही नहीं कहा जाता अब तो स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि छोटे-छोटे बच्चों से उनके मामा का नाम पूछो तो वो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का ही नाम लेने लगे हैं और मामा से मिलने की जिद भी करने लगे हैं।

भाजपा की दूसरी सूची जारी होने के बाद नेता खुद पत्र लिख कर चुनाव नहीं लड़ने की जता रहे इच्छा
जब तक भारतीय जनता पार्टी की दूसरी सूची (BJP Second List) जारी नहीं हुई थी तब तक तो सब ठीक था लेकिन सूची जारी होते ही जिस प्रकार वरिष्ठ नेताओं को चुनाव मैदान में उतार दिया गया है उसके बीजेपी में कानाफूसी का दौर तेज हो गया है। दरअसल प्रदेश सरकार (Shivraj Government) के खिलाफ एंटीइंकबेंसी का आलम मे है कि अब सभी नेताओं को खुद का भविष्य अंधकार में दिखने लगा है। दूसरी सूची में सात सांसदों सहित तीन केन्द्रीय मंत्रियों को टिकट मिलने के बाद अब अन्य सांसदों के दिमांग में यही चल रहा है कि अगली सूची में उनका नाम तो नहीं। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि कुछ नेता खुद पत्र लिख कर संगठन से कह रहे हैं कि वो चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं हैं। उन्ही में एक बड़ा नाम है मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया (yashodhara raje scindia) का जिन्होने पत्र लिख कर स्वास्थ कारणों से चुनाव नहीं लड़ने की इच्छा जताई है। यशोधरा के चुनाव नहीं लड़ने की स्थिति में कयास लगाए जा रहे हैं कि अब उसी सीट से ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) को चुनाव लड़ाया जा सकता है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार अभी दस और सांसद ऐसे हैं जिन्हे जिन्हे संगठन चुनाव मैदान में उतारने की योजना बना रहा है। सांसदों और मंत्रियों को चुनाव मैदान में उतारे जाने के बाद भाजपा में ही कानाफूसी का दौर चल रहा है। भाजपा के कार्यकर्ता दबी जुवान कह रहे हैं कि भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व एक तीर से कई शिकार कर रहा है। कुछ का कहना है कि जिन नेताओं को केन्द्रीय राजनीति से बाहर करना है उन्ही नेताओं को विधानसभा का चुनाव दिया जा रहा है। कुछ कार्यकर्ताओं का यह भी मानना है कि विधानसभा में अगर इन दिग्गज नेताओं को हार मिलती है तो चनका यह आखिरी चुनाव होगा। मतलब साफ है जिस प्रकार से भाजपा की दूसरी सूची जारी हुई है उसको देखते हुए कई नेताओं की धड़कनें तेज हो गई हैं। भाजपा की सूची पर इस वक्त कांग्रेस के नेता जमकर चुटकी ले रहे हैं। कांग्रेस में साफ कहा जा रहा है कि इन सभी नेताओं को निपटाया गया है।

एमपी कांग्रेस के 95 वे विधायकों में 76 के पक्ष में सर्वे रिपोर्ट,हारी हुई 66 सीटों पर मंथन जारी
मप्र की 230 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 95 वे विधायक हैं (MP Congress)। इनमें से 76 विधायकों के पक्ष में सर्वे रिपोर्ट आई है। इसके अलावा संगठन पदाधिकारियों का लगातार फीडबैक ले रहा है। इसके साथ ही उन 66 सीटों पर भी विचार मंथन किया जा रहा है जहां पार्टी लगातार तीन चुनाव हार चुकी है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार पहली सूची में विधायकों के साथ लगातार हारने वाली सीटों के प्रत्याशी घोषित किए जा सकते हैं (congress candidate list)। पांच अक्टूबर को धार के मोहनखेड़ा में पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी की जनसभा के बाद प्रत्याशियों की घोषणा हो सकती हैं। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा द्वारा प्रत्याशियों की तीन सूची जारी करने के बाद अब कांग्रेस ने भी पहली सूची घोषित करने की तैयारी कर ली है। शुक्रवार को दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित वरिष्ठ नेताओं ने विधायक और लगातार हारने वाली 66 सीटों के प्रत्याशियों के नाम पर विचार किया। अब 3 अक्टूबर को स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में केंद्रीय चुनाव समिति को भेजने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। 5 अक्टूबर के बाद पार्टी 100 से अधिक प्रत्याशियों की पहली सूची घोषित कर सकती है। कांग्रेस प्रत्याशियों के नाम पर विचार करने के लिए 11,12 और 13 सितंबर को दिल्ली में स्क्रीनिंग कमेटी (congress screening committee)की पहली बैठक हुई थी। सर्वे रिपोर्ट और संगठन के फीडबैक के आधार पर पहले उन सीटों के प्रत्याशियों के नाम पर विचार किया गया,जहां अभी पार्टी के विधायक हैं।

कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय ने किया शक्ति प्रदर्शन
बीजेपी की दूसरी सूची जारी होते ही प्रदेश की सियासत एकाएक गर्मा गई है (BJP Second List)। कांग्रेस के साथ- साथ खुद बीजेपी में भी हलचल मच गई है। सबसे ज्यादा शोर इंदौर की राजनीति को लेकर हो रहा है (Indore Politics)। कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) को इंदौर एक से बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया है। जबकि कैलाश विजयवर्गीय खुद पार्टी के इस फैसले से खुश नहीं हैं। अब कैलाश विजयवर्गीय और उनके समर्थकों को उनके बेटे वर्तमान में इंदौर 3 से बीजेपी विधायक आकाश विजयवर्गीय (Akash Vijayvargiya) के टिकट कटने की आशंका लग रही है। इसी आशंका से अब विजयवर्गीय समर्थक पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाने लगे हैं (MP BJP)। इसी कड़ी में आकाश विजयवर्गीय को टिकट दिलाने का दबाव बनाने के लिए उनके समर्थक बड़ी संख्या में भोपाल बीजेपी प्रदेश कार्यालय पहुंचे (BJP office)। इंदौर से पांच बसों और अन्य गाड़ियों से यह समर्थक भोपाल पहुंचे थे। प्रदेश कार्यालय में समर्थकों की चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव (Bhupendra Yadav) से बंद कमरे में मुलाकात हुई। मुलाकात में हुई चर्चा को लेकर सभी खामोश हैं। समर्थक भी अभी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। मगर इशारा जरूर कर रहे हैं कि, आकाश विजयवर्गीय को भी टिकट मिलना चाहिए। अब इस मामले में माना जा रहा है कि अगर आकाश विजयवर्गीय का टिकट कटा तो, समर्थक खामोश नही रहेंगे। जिसका नुकसान पार्टी को हो सकता है। गौरतलब है कि कैलाश विजयवर्गीय पिछले कुछ समय से चुनावी पिच से दूर हैं और वो लगातार संगठन के लिए काम कर रहे हैं। यही कारण है कि उन्हे पश्चिम बंगाल का प्रभारी भी बनाया गया था जिसमें कुछ हद तक उन्हे सफलता भी मिली है। लेकिन इस चुनाव में जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने अप्रत्याशित फैसला लेते हुए तीन केन्द्रीय मंत्रियों सहित सात सांसदों को चुनाव मैदान में उतारा और राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर संगठन के लिए काम कर रहे कैलाश विजयवर्गीय को इंदौर वन से टिकट देकर सबको हैरान कर दिया है। भाजपा के इस फैसले के बाद अब राजनीतिक पंडित अपने-अपने सियासी गड़ित लगाने में जुट गए हैं। कुछ लोगों का यह मानना है कि भाजपा की दूसरी सूची की तर्ज पर ही चौथी सूची में भी चौकाने वाले नाम आ सकते हैं। माना यह भी जा रहा है कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भी केन्द्रीय नेतृत्व पन्ना से विधानसभा के चुनावी रण में उतार सकता है।

कमलनाथ पर सीएम शिवराज का तंज, कहा- तू इधर-उधर की बात ना कर, काफिला किसने लूटा ये बता
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ पर एक ओर सवाल दागते हुए कहा कि दूध उत्पादक को 5 रुपए प्रति लीटर बोनस का कमलनाथ ने वादा किया था। क्या दूध उत्पादक को 5 रुपए प्रति लीटर बोनस दिया ?