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अब 65 वर्ष नहीं होगी शासकीय कर्मचारियों के रिटायरमेंट की आयु,वित्त विभाग ने किया क्लियर
मध्य प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) की सेवानिवृत्ति की आयु अब 65 वर्ष नहीं होगी। पिछले कुछ समय से इस बात को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे थे कि शासकीय कर्मचारियों के रिटायरमेंट की सीमा बढ़ने वाली है। इस मामले में जहां युवाओं में सरकार के प्रति विरोध के स्वर निकलने लगे थे वहीं शासकीय कर्मचारी भी इस फैसले पर हैरान थे। कुछ कर्मचारी तो रिटायरमेंट आयु की सीमा बढ़ाए जाने से नाराज थे कुछ इसका समर्थन कर रहे थे। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार मंत्रालय ने रिटायरमेंट एज लिमिट बढ़ाने से इनकार कर दिया है। यह मध्य प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के लिए गुड न्यूज़ है लेकिन सरकार के लिए चिंता की बात है क्योंकि सरकार के पास रिटायर होने वाले कर्मचारियों को देने के लिए GPF और दूसरा फंड नहीं है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान भाजपा के संकल्प पत्र-2023 में मप्र सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु में एकरूपता लाने का बिंदु शामिल था। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बीती 11 जनवरी को राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के पूर्व अध्यक्ष रमेश शर्मा ने मप्र के शासकीय सेवकों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा में एकरूपता लाने के लिए नोटशीट लिखी। जिसमें कहा गया कि शासकीय सेवकों की सेवानिवत्ति की आयु सीमा 62 से बढ़ाकर 65 करने पर शासन को विचार करना चाहिए। उन्होंने पदोन्नति नहीं होने की वजह से सरकारी विभागों में कैडर गड़बड़ाने और खाली पदों को लेकर भी मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित कराया था। जिसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने की फाइल मंत्रालय में दौड़ पड़ी थी। सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने वित्त विभाग से खजाने पर पड़ने वाले भार के लिए अभिमत मांगा था। इसी बीच कई कर्मचारी संगठन व युवा सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का विरोध करने लगे। वहीं, अब वित्त विभाग ने सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने का आईडिया ड्रॉप कर देने के लिए कहा है। विद्युत विभाग का कहना है कि अब इन कर्मचारियों को देने के लिए वेतन भी नहीं है।

शासकीय कर्मचारियों को एक से पांच तारीख तक वेतन नहीं मिला तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
मध्य प्रदेश के शासकीय कर्मचारायों (government employees) को एक से पांच तारीख के अंदर वेतन नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं। समस्त आहरण संवितरण कार्यालयों के प्रत्येक शासकीय सेवक का मासिक वेतन आगामी माह की 05 तारीख तक न होने की स्थिति में, विलंब के लिये संबंधित आहरण संवितरण अधिकारी की जबावदेही होगी। शासन स्तर पर स्पष्ट निर्देश के बावजूद यह देखने में आ रहा है कि कुछ कार्यालयों द्वारा संदर्भित पत्र में दिये गये निर्देशों की अवहेलना की जाकर जा रही है। मासिक वेतन का नियत समत पर भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिसके फलस्वरूप शासकीय सेवकों के वेतन में अनावश्यक विलंब की स्थिति निर्मित हो रही है। इसके अतिरिक्त अधिकाशं कार्यालय उनके अधीनस्थ अधिकारियों / कर्मचारियों का मासिक वेतन स्टॉप सैलरी पेमेंट के माध्यम अथवा विलंब से आहरित करते हैं, किन्तु स्टॉप सैलरी पेमेंट एवं विलंब से भुगतान के संबंध में, उसका कारण एवं सक्षम स्वीकृति संलग्न नही की जाती है, जिससे त्रुटिपूर्ण भुगतान एवं वित्तीय अनियमितता / गबन की स्थिति बन रही है। स्पष्ट किया गया है कि, प्रत्येक माह के अंतिम कार्य दिवस के 02 दिवस पूर्व समस्त प्रकार के वेतन देयक पारित किये जाने हेतु कोषालय में ऑनलाईन प्रेषित किया जाना है।