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एक ऐसा नायक जो सबकुछ करके भी नहीं लेता क्रेडिट,कौन है वो नायक...
चुनाव जीतने के लिए सभी राजनीति करते हैं लेकिन जो दूसरों को जिताने के लिए राजनीति करे वो असल में नायक कहलाता है। और सबसे बड़ी बात तो यह है कि वो सबकुछ करके भी कोई क्रेडिट नहीं लेता। बात करते हैं साल 2019 की जब प्रदेश में भाजपा की सरकार नहीं बनी। महज कुछ सीटों के अंतर से भाजपा को विपक्ष में बैठना पड़ा। भाजपा के कई नेताओं की राजनीतिक विरासत खतरे में पड़ गई। ऐसे में भाजपा का एक ऐसा नेता सामने आया जिसे 'संकट मोचक' भी कहा जाता है। कट्टर हिंदुत्व की छवि तो उनमें दिखती ही है साथ ही प्रदेश के हर जिले का ब्राह्मण उन्हे अपना नेता मानता है। वो नाम है डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) जिसने राजनीति में कभी हारना नहीं सीखा है। कहते हैं कुछ लोग जीवन में इतने संघर्ष करके आगे आते हैं कि छोटे मोटे राजनीतिक झटके उसके लिए कोई मायने नहीं रखते उन्ही में हैं डॉ. नरोत्तम मिश्रा। बीजेपी की सरकार जा चुकी थी उस वक्त उन्होने केन्द्रीय नेत्रृत्व को भरोसा दिलाया कि वो कांग्रेस की सरकार गिरा सकते हैं एक-दो मीटिंग में तो केन्द्रीय नेत्रृत्व ने उनकी बात पर विश्वास नहीं किया लेकिन नरोत्तम मिश्रा तो उन नायकों में हैं जो एक बार कदम बढ़ा देते हैं तो फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखते। आखिर डॉ. नरोत्तम मिश्रा के आगे केन्द्रीय नेत्रृत्व भी झुका और आपरेशन लोटस की अनुमति दे दी। इस आपरेशन को सफल बनाने के लिए डॉ. नरोत्तम मिश्रा जुट गए और वो दिन आया कि जब कांग्रेस के डेढ़ दर्जन विदायक अचानक गायब हो गए। आखिर कांग्रेस की सरकार गिर गई। यहां भी सबकुछ करने के बाद भी डॉ. नरोत्तम मिश्रा के हाथ सीएम पद की कुर्सी नहीं बल्कि गृह मंत्रालय हाथ लगा। सबकुछ करके भी पूर्व गृह मंत्री ने किसी प्रकार का क्रेडिट नहीं लिया। साढ़े तीन साल सरकार चलने के बाद विधानसभा चुनाव हुआ और वो सियासत का नायक खुद चुनाव हार गया। हांलाकि राजनीतिक जानकारों का तो यहां तक कहना है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बढ़ते राजनीतिक कद को देखते हुए उन्हे हराया गया है। लेकिन कभी न हार मानने वाले डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने यह साबित किया कि उन्हे कितना भी दरकिनार किया जाए लेकिन वो कभी हार नहीं मानते। ज्वाइनिंग कमेटी का उन्हे संयोजक बना दिया गया और जिस दिन से उन्हे नई जिम्मेदारी मिली कांग्रेस में भगदड़ मच गई। कांग्रेस के पूर्व विधायक से लेकर पूर्व सांसद और अन्य पदाधिकारियों सहित कांग्रेस के हर छोटे बड़े नेताओं के बीजेपी में आने का सिलसिला शुरु हो गया। छह अप्रैल भाजपा का स्थापना दिवस होता है इस दिन को यादगार बनाने के लिए डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने एक लाख नए सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा और एक दिन में एक लाख 26 हजार से ज्यादा नए कार्यकर्ताओं को बीजेपी में शामिल कराने का कीर्तिमान रच दिया। ओवरआल तीन महीने की ज्वाइनिंग के आंकड़े की बात करें तो दो लाख 58 हजार से ज्यादा कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल हुए। इन सबके बीच जब डॉ. नरोत्तम मिश्रा से पूछा गया तो उन्होने पूरा श्रेय पीएम मोदी,राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा,सीएम मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को दिया और कहा कि उन्ही के नेत्रृत्व से प्रभावित होकर सभी लोग भाजपा में शामिल हो रहे हैं। मतलब साफ है कि सबकुछ करके सारा श्रेय भी किसी दूसरे को कैसे दिया जाता है। यह बात पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा में देखने को मिली इसी लिए लोग उन्हे राजनीति का नायक और चाणक्य कहते हैं।

स्थापना दिवस पर सवा लाख से ज्यादा कांग्रेसियों ने थामा बीजेपी का दामन
छह अप्रैल भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस (bjp foundation day) । इस दिन को यादगार बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने सदस्यता अभियान चलाया और जिम्मेदारी ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) को दी गई। डॉ. नरोत्तम मिश्रा बीजेपी के उन नेताओं में गिने जाते हैं जो अपनी जिम्मेदारी को पूरी शिद्दत से निभाते हैं। हुआ भी वही पूर्व गृह मंत्री ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि इस स्थापना दिवस को ऐतिहासिक बनाते हुए वो एक लाख से अधिक कांग्रेसियों को बीजेपी की सदस्यता दिलाएंगे। और अब जो आंकड़े जारी हुए हैं उसके मुताबिक एक दिन में एक लाख 26 हजार कांग्रेसियों ने बीजेपी की सदस्यता ली है। जो अब तक का सबसे बड़ा रिकार्ड माना जा रहा है। बांकी बीजेपी की तरफ से सदस्यता अभियान विधानसभा चुनाव के बाद से ही जारी है। उस आंकड़े को भी शामिल किया जाए तो यह आंकड़ा बढ़ कर दो लाख 58 हजार 523 कार्यकर्ताओं ने बीजेपी का दामन थामा है। यह अभियान अभी और तेज होने की बात भी कही जा रही है मतलब यह आंकड़ा तीन लाख से ऊपर जाने की उम्मीद जताई जा रही है। इतनी बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं का बीजेपी में शामिल होने पर डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कोई श्रेय नही लिया उन्होने कहा कि पीएम मोदी का आभामंडल और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के संगठनात्मक ढांचे से खुश होकर लोग बीजेपी में आ रहे हैं। साथ ही पूर्व गृह मंत्री ने सीएम मोहन यादव की नेत्रृत्व क्षमता और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भी सदस्यता का श्रेय दिया है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि भाजपा की सरकार और संगठन दोनों बढिया काम कर रहे हैं और उसी का फल है इतनी बड़ी सफलता।

मेरे हारने से कोई पार्टी खत्म होती है तो वही सही,खुद को नहीं दूसरों को दिया श्रेयःडॉ.नरोत्तम मिश्रा
बीजेपी ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा (dr narottam mishra) कांग्रेस के लिए एक ऐसी सुनामी बन कर उभरे हैं मानो उन्होने रौद्र रुप धारण कर लिया हो। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पार्टी का जनाधार बढ़ाने का संकल्प लिया और ऐसा संकल्प लिया कि प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों से उन्होने कांग्रेसी खेमें में सेंधमारी शुरु कर दी। नतीजा यह निकला कि भाजपा के 45 वें स्थापना दिवस तक करीब ढाई लाख कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को वो भाजपा की सदस्यता दिला चुके हैं। पूर्व गृह मंत्री की यह भूख लगातार बढ़ती चली जा रही है। कुछ विधानसभा क्षेत्र तो ऐसे हैं जहां पर कांग्रेस का कोई नाम लेने वाला ही नहीं बचा है। कुछ सीटों पर कांग्रेस को एजेंट नहीं मिल रहे हैं। सबसे बड़ी और दिलचश्प बात तो यह है कि इतना बड़ा अभियान और इतनी बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बीजेपी में शामिल कराने का श्रेय भी डॉ. नरोत्तम मिश्रा खुद नहीं ले रहे। जिस प्रकार से उनके नेत्रृत्व में कांग्रेस के खिलाफ सुनामी आई है उसका श्रेय वो पीएम मोदी,राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा,सीएम मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के नेत्रृत्व को देते हैं। पूर्व गृह मंत्री द्वारा चलाए गए अभियान पर राजनीतिक विश्लेषक से बात की गई तो उनका कहना है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा जब खाली बैठते हैं तो उनका खालीपन हमेशा कांग्रेस के लिए हमेशा घातक साबित हुआ है। साल 2019 की हो जब पार्टी सरकार बनाने में नाकाम हुई थी या फिर ताजा उदाहण अभी का है जब डॉ. नरोत्तम मिश्रा चुनाव हारे और कांग्रेस के लिए काल बन गए। उनका अभियान अभी भी थमा नहीं है अनबरत जारी है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा कहते भी हैं कि कांग्रेस गुलामी का आखिरी प्रतीक है जो खत्म होना चाहिए और उसी अभियान में वो एक गिलहरी की भूमिका निभा रहे हैं।

आज बीजेपी का मेगा ज्वाइनिंग अभियान,एक लाख से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ता लेंगे बीजेपी की सदस्यता
भारतीय जनता पार्टी स्थापना दिवस के मौके पर आज रिकार्ड दर्ज करने वाली है। (bjp foundation day) और इस स्थापना दिवस को एमपी बीजेपी के नेता ऐतिहासिक बनाने के लिए न सिर्फ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को शामिल करने वाले हैं बल्कि कांग्रेस के कुछ विधायक भी बीजेपी में शामिल होने वाले हैं। दरअसल बीजेपी ने स्थापना दिवस को यादगार बनाने के लिए एक लाख कार्यकर्ताओं की सदस्यता का लक्ष्य रखा है और जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी ने रणनीति तैयार की है उस रणनीति के तहत भाजपा एक लाख से ज्यादा कार्यकर्ताओं को सदस्यता दिला सकती है। वहीं कांग्रेस पार्टी यह सोच कर हैरान हो रही है कि भाजपा के नेता एक लाख सदस्यता की फर्जी बातें कर रहे हैं। जबकि सभी को यह मालूम है कि भाजपा का संगठन बहुत मजबूत है और बाजपा मंडल से लेकर बूथ स्तर तक काफी मजबूत है। प्रदेश भर में 65 हजार से ज्यादा बूथ हैं और भाजपा ने हर बूथ पर दो कार्यकर्ताओं की सदस्यता का लक्ष्य रखा है। इस प्रकार भारतीय जनता पार्टी अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर लेगी और कांग्रेस यही गणित सुलझाने में लगी है कि भाजपा किस हिसाब से एक लाख कार्यकर्ताओं को सदस्यता करवाएगी। दिलचश्प बात यह है कि इस सदस्यता अभियान में भाजपा कांग्रेस के कुछ वर्तमान और पूर्व विधायकों को सदस्यता दिला कर बड़ा झटका भी देने वाली है। कुछ ऐसे नेता भाजपा में शामिल होने वाले हैं जिनका अंदाजा न कांग्रेस नेताओं को है न ही भाजपा के नेताओं को है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए बीजेपी ज्वाइनिंग टोली के संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं।

मतदान से पहले जीते बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा,अब सबसे बड़ी जीत पर नजर
लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया लगातार जारी है। इस बीच खबर खजुराहो लेकसभा सीट (khajuraho constituency) से है जहां पर सपा उम्मीदवार मीरा यादव (meera yadav) का नामांकन रद्द हो गया है। यहां से कांग्रेस पार्टी ने अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं किया है क्योंकि इंडी गठबंधन के तहत कांग्रेस ने खजुराहो की सीट समाजवादी पार्टी को दे रखी थी। मीरा यादव का नामांकन रद्द होते ही खजुराहो लोकसभा सीट में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) की जीत तय मानी जा रही है। अब सपा उम्मीदवार नहीं होने के कारण बीजेपी उम्मीदवार वीडी शर्मा और बीएसपी उम्मीदवार के बीच चुनावी मुकाबला होगा। लेकिन सपा उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि एमपी की सभी 29 लोकसभा सीटों में खजुराहो की सीट सबसे बड़ी मार्जिन वाली सीट बन जाएगी। सपा उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी अब चुनाव प्रचार के लिए खुद को स्वतंत्र महसूस कर रहे होंगे। हालाकि जिस प्रकार से प्रदेश अध्यक्ष ने खजुराहो में विकास किया है उससे यह अंदाजा लगाया जा रहा था कि वीडी शर्मा को चुनाव जीतने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी।

जीतू पटवारी के खिलाफ दर्ज होगा सबसे नाकाम अध्यक्ष का वर्ल्ड रिकार्ड,6 अप्रैल को लगेगा एक लाख झटका
जीतू पटवारी (jitu patwari) की विधानसभा चुनाव (mp assembly elections) में करारी शिकस्त के तुरंत बाद कांग्रेस पार्टी ने उन्हे यह सोच कर पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था कि युवा चेहरा है कुछ नया करेगा। लेकिन इतना नया करेगा कांग्रेस के हाई कमान को इस बात का अंदाजा नहीं था। दरअसल जीतू पटवारी के पीसीसी चीफ बनने के बाद पार्टी में ऐसे पलायन का दौर चला कि अब तक 18 हजार से ज्याना नेता और कार्यकर्ता पार्टी छोड़ कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं। और जीतू पटवारी हैं कि अब भी अपने ही कार्यकर्ताओं पर सारा दोष मढ़ रहे हैं। और अब तो जीतू पटवारी अपने अध्यक्ष के नाकामी का वर्ल्ड रिकार्ड भी कायम करने वाले हैं। छह अप्रैल को भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस है। और इस दिन को यादगार बनाने के लिए बीजेपी ज्वाइनिंग कमेटी के प्रदेश संयोजक डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बड़ी मुहिम चला दी है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. मिश्रा ने ऐलान किया है कि वो भाजपा के स्थापना दिवस पर प्रदेश भर में करीब एक लाख कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ज्वाइनिंग भाजपा में कराने जा रहे हैं। पूर्व गृह मंत्री की इस घोषणा के बाद से पूरी कांग्रेस में हलचल सी पैदा हो गई है। मजे की बात यह है कि पार्टी में बचे-खुचे कार्यकर्ता एक दूसरे को सक की निगाहों से देख रहे हैं। कुछ कार्यकर्ता एक दूसरे से यह भी सवाल कर रहे हैं कि क्या तुम भी बीजेपी में शामिल हो रहे हो। Mukhbirmp.com की टीम ने कुछ कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से संपर्क किया तो नाम न छापने की शर्त पर उन्होने कहा कि कांग्रेस में उन्हे किसी प्रकार का सम्मान नहीं मिल रहा है। पहले कमलनाथ अध्यक्ष थे तो उनका कद इतना बड़ा था कि उनसे मिलना बहुत मुस्किल था और कमलनाथ के बाद जीतू पटवारी को पीसीसी चीफ बनाया गया तो उनसे मिलना कमलनाथ से भी ज्यादा कठिन हो गया है। उनके निवास पर घंटों इंतजार करना पड़ता है किसी तरह जीतू पटवारी बंगले से बाहर निकलते हैं तो देखते हैं कि भीड़ में उनका करीबी कौन है और फिर वो उस कार्यकर्ता के कंधे पर अपना हाथ रख कर कुछ देर तक इधर- उधर घूमते हैं फिर सभी से यह कहते हैं कि जमकर चुनाव की तैयारियां कीजिए हम कुछ सीटों पर अच्छी स्थिति में हैं और जीत भी दर्ज करेंगे। पीसीसी चीफ की इस प्रकार की बांते सुन कर कार्यकर्ता और नेता उदास हो जाते हैं यही कारण है कि कार्यकर्ता अब कांग्रेस में अपने आपको ठगा सा महसूस करते हैं। जिसके चलते अब वो अपना भविष्य भाजपा में देख रहे हैं। इधर बीजेपी ने इतनी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को शामिल कराने के लिए अपने बूथ स्तर की इकाइयों को भी लगा दिया है और सभी से कहा गया है कि ज्यादा से ज्यादा कांग्रेस कार्यकर्ताओं से संपर्क कर उन्हे बीजेपी में शामिल कराया जाए। तभी प्रदेश भर में एक लाख कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल हो पाएंगे।

डॉ. नरोत्तम मिश्रा के लिए उमड़ा ब्राह्मणों का जन सैलाव,जम कर लगे नारे
देश में ब्राम्हण भी खूब हैं और नेता भी खूब हैं लेकिन ऐसा एक भी ब्राम्हण नेता नहीं जो ब्राम्हणों के हित की बात खुलेआम करता हो। आज प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला (rajendra shukla) हैं जो किसी ब्राम्हण के कार्यक्रम में जाने से परहेज करते हैं वहीं किसी मुस्लिम के टेंट हाउस का शुभारंभ करना हो तो वो उसका रिबन काटने के लिए समय से पहले पहुंच जाते हैं। एक और ब्राम्हण नेता बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) हैं जिनके निवास पर ब्राम्हण जाते हैं तो वो पहले ही कह देते हैं कि मै कोई ब्राम्हण नेता नहीं हूं। कुछ हद तक गोपाल भार्गव (gopal bhargava) अपने क्षेत्र में कोशिश करते हैं लेकिन वो भी बेमन होकर। और एक हैं पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा जिसको प्रदेश के हर कोने का ब्राम्हण राजनीति से हट कर अपना नेता मानता है। क्योंकि डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) का ही एक ऐसा दरवाजा है जो ब्राम्हणों के हित के लिए 24 घंटे खुला रहता है। ऐसा भी नहीं है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा सिर्फ ब्राम्हणों के हित की ही बात करते हैं वो हर समाज के विकास की बात करते हैं और हर समाज के ब्यक्ति के सुख समृद्धि की हमेशा कामना करते हैं। असल में ब्राम्हण भी वही है जो समाज के हर वर्ग की बात करे। आज देश का हर वर्ग ब्राम्हणों को गाली देने में ब्यस्त रहता है लेकिन कभी कोई यह नहीं सोचता कि ब्राम्हतों ने शिक्षा देने में कभी कोई भेदभाव नहीं किया। ब्राम्हणों के दरवाजे जिस समाज का भी ब्यक्ति गया उसके कल्याण की बात ब्राम्हण करता है। मंगलवार को गुना में ब्राम्हणों के होली मिलन में जब डॉ. नरोत्तम मिश्रा पहुंचे तो वहां पर मौजूद ब्राम्हण समाज के लोगों ने दोनों बाहें फैला कर उनका स्वागत किया। डॉ. नरोत्तम मिश्रा का जब तक संबोधन चला उसका एक-एक शब्द लोग ऐसे सुन रहे थे जैसे श्रीमद भगवत गीता का पाठ चल रहा हो। डॉ. नरोत्तम मिश्रा को आज ब्राम्हण वर्ग के समर्थन की जरुरत है क्योंकि एक ब्राम्हण हजार पर भारी होता है।

पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल की हार तय,बीजेपी ने बूथ स्तर पर कसा सिकंजा
सीधी लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार कमलेश्वर पटेल (kamleshwar patel) की हार लगभग तय हो चुकी है। अभी तक कमलेश्वर पटेल के सघन जनसंपर्क कभियान को देख कर लोग कयास लगा रहे थे कि कांग्रेस उम्मीदवार सीधी से जीत दर्ज कर सकते हैं लेकिन भाजपा की रणनीति जिस प्रकार की है उसके आगे कमलेश्वर पटेल बौने साबित होने लगे हैं। ऐसा भी माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने कमलेश्वर पटेल को अभी तक मौका दिया था जिससे उनकी क्षमता का बीजेपी के नेता पता लगा सकें। और अब मतदान को महज 18 दिन बचे हैं ऐसी स्थिति में भारतीय जनता पार्टी ने अपने पासे फेंकने शुरु कर दिए हैं। भाजपा का संगठन शक्ति केन्द्र,मंडल और बूथ स्तर से लेकर पन्ना और अर्ध पन्ना प्रभारियों तक फैला है। जिसमें भाजपा ने कसावट लाना शुरु कर दिया है। भाजपा की तरफ से स्टार प्रचारकों को भी प्रचार के लिए जल्द भेजा जाने वाला है। जिसकी शुरुआत राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शहडोल से कर दी है। अब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की नजर सीधी,सतना और रीवा में है। क्योंकि भाजपा के लिए सतना और रीवा की सीट भी इस बार बेहद कठिन मानी जा रही है यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी का केन्द्रीय नेत्रृत्व खुद विंध्य में फोकस कर रहा है। ठीक इसी प्रकार से भाजपा के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने विधानसभा चुनाव में भी कसावट करने का काम किया था जिसका परिणाम भाजपा के पक्ष में रहा और अब एक बार फिर विंध्य में भाजपा के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने मोर्चा थाम लिया है। मतलब साफ है कि अब भारतीय जनता पार्टी का पूरा फोकस विंध्य में होने वाला है। विंध्य की दो सीट सीधी और शहडोल में प्रथम चरण 19 अप्रैल को वोटिंग होने वाली है तो वहीं 26 अप्रैल यानि दूसरे चरण में सतना और रीवा में वोटिंग होनी है।

छिंदवाड़ा में भाजपा की बड़ी सेंधमारी,महापौर विक्रम अहाते भाजपा में हुए शामिल
कहते हैं सेना को अपनी तरफ कर लो तो सेनापति क्या कर सकता है। और भाजपा इस वक्त यही रणनीति अपना रही है। कमलनाथ (kamal nath) के अभेद्य किले में फतह हासिल करना है तो वहां सेंधमारी करना जरुरी है। और भाजपा की यह सेंधमारी अभियान लगातार जारी है। कमलनाथ के जितने भी करीबी हैं भाजपा उन्हे एक-एक करके अपने पाले में करती चली जा रही है। इसी कड़ी में अब भाजपा ने छिंदवाड़ा के महापौर विक्रम अहाते को भी अपने पाले में कर लिया है। भाजपा की सदस्यता लेने के बाद विक्रम अहाते ने बताया कि नकुलनाथ के द्वारा आदिवासियों को लेकर दिए गए बयान से वो काफी आहत थे यही कारण उनकी पार्टी छोड़ने का बना। विक्रम अहाते (vikram ahate) को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने पार्टी का अंग वस्त्र पहना कर भाजपा में शामिल करवाया। महापौर के साथ छिंदवाड़ा नगर निगम जल विभाग सभापति प्रमोद शर्मा, अनुसूचित जाति विभाग जिला अध्यक्ष सिद्धांत थनेसर,पूर्व एनएसयूआई जिला अध्यक्ष आशीष साहू, पूर्व एनएसयूआई जिला उपाध्यक्ष धीरज राऊत पूर्व एनएसयूआई जिला कार्यकारी अध्यक्ष आदित्य उपाध्याय सहित अन्य लोगों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। इस मौके पर बीजेपी प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल सहित कई बीजेपी के नेता मौजूद रहे। इससे पहले छिंदवाड़ा से कमलनाथ के करीबी माने जा रहे सैयद जफर सहित अन्य लोग पहले ही बीजेपी की सदस्यता ले चुके थे। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार दिंदवाड़ा के दो और विधायक बीजेपी में जल्द शामिल हो सकते हैं।

बिजली बितरण कंपनियां कम करेंगी कर्मचारी,प्रदेश की हर कॉलोनी में इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूटर होंगे नियुक्त
मध्य प्रदेश की बिजली वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। (MPEB) बिजली कंपनियां अपने कर्मचारियों की संख्या कम करने जा रही है। रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसाइटियों को एक डिस्ट्रीब्यूटर की तरह नियुक्त करने की तैयारी है। कॉलोनी में समिति के नाम से कनेक्शन दिया जाएगा और समिति वहां रहने वाले सभी लोगों बिजली सप्लाई करेगी एवं वसूली का काम करेगी। इसके बदले में समिति को उपभोक्ताओं की तरफ से सेवा शुल्क मिलेगा। बिजली कंपनी अपनी तरफ से कुछ नहीं देगी। नगर पालिका निगम की तरह बिजली कंपनी भी अब अपना डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क तैयार करने जा रही है। जिस प्रकार नगर पालिक निगम मध्य प्रदेश में प्राइवेट रेजिडेंशियल सोसायटी को एक कनेक्शन देती है और फिर वह कॉलोनी में रहने वाले सभी लोगों को कनेक्शन देकर जलकर वसूली का काम करती है ठीक उसी प्रकार बिजली सप्लाई का काम भी किया जाएगा। इसके बदले में रेजिडेंशियल सोसायटी को बिजली कंपनी की ओर से कुछ नहीं दिया जाएगा बल्कि एक अधिकार दिया जाएगा कि वह अपनी कॉलोनी में रहने वाले नागरिकों से सेवा शुल्क की वसूली कर सकती है। इस व्यवस्था के लागू होने से पहले तक मध्य प्रदेश में सभी बिजली उपभोक्ता सीधे बिजली कंपनी से कनेक्ट होते हैं। बिजली कंपनी उन्हें सभी प्रकार की सेवाएं देती है और उपभोक्ता सीधे बिजली बिल जमा करते हैं। बीच में कोई डिस्ट्रीब्यूटर नहीं होता। बिजली कंपनी ने ऐलान कर दिया है कि यदि किसी को इस व्यवस्था से कोई आपत्ति है तो वह 12 अप्रैल तक लंबी सरकारी प्रक्रिया का पालन करते हुए अपने आपत्ति दर्ज करवा सकता है। लोकसभा चुनाव के बीच में पब्लिक इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया दे पाएगी, इसकी उम्मीद कम है। इस व्यवस्था के लागू हो जाने से बिजली कंपनी को फायदा होगा लेकिन उपभोक्ताओं को नुकसान होगा। अभी उपभोक्ताओं को बिजली की कीमत के साथ कई प्रकार के टैक्स भी देने पड़ते हैं, अब इसमें सेवा शुल्क भी जुड़ जाएगा।

नामांकन से पहले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने अपनी मां से लिया आशीर्वाद
रविवार को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ग्वालियर दौरे पर पहुंचे जहां उन्होने अपनी मां से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। गौरतलब है कि हिंदू धर्म में मां को ईश्वर का दर्जा दिया गया है। और बेटे के लिए मां के दिल से निकली हर दुआ अपना काम भी करती है। तीन अप्रैल को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा खजुराहो लोकसभा सीट (khajuraho constituency) से अपना नामांकन भर रहे हैं इस लिए वो अपनी मां का आशीर्वाद लेने के लिए घर पहुंचे। लेकिन इस दौरान जिस प्रकार से एक मां और बेटे का मिलाप देखने को मिला वो भाव विभोर करने लायक था। इंसान कितना भी बड़ा हो जाए मां की नजर में वो हमेशा ही छोटा रहता है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की मां काफी देर तक उनको दुलारती रहीं फिर माथे पर तिरक लगा कर उन्हे चुनाव में जीत का आशीर्वाद दिया।

मंत्री के बेटे की खुलेआम गुंडागर्दी,पत्रकार और होटल संचालक को पीटा
भोपाल-रंगपंचमी यानी शनिवार की शाम। मप्र के राज्यमंत्री के बेटे अपने मित्रों और कुछ युवतियों के साथ इनोवा कार में क्या कर रहे थे..ये तो वही जानते होंगे। पर नए नवेले मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल (narendra shivaji patel) के पुत्र का बीच सड़क पर गुंडागर्दी और दादागिरी करने वाला मामला फिलहाल सुर्खियों में है। मजे की बात तो ये है कि अपने बेटे की करतूत पर पर्दा डालने खुद राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल थाने पहुंचे,उनके भाई जिनका नाम राजेश पटेल बताया गया और उनके समर्थकों ने भी थाने में जाकर पुलिस पर दबाव बनाया। अब चूंकि मामला पोलिटिकल प्रेशर से जुड़ा हुआ था सो पुलिस अधिकारी भी थाने पहुंचे। आखिर पुलिस ने घायलों का मेडिकल करा मामला दर्ज किया और मंत्रीजी को संतुष्ट करने कुछ पुलिसकर्मियों पर कार्यवाई की। रात करीब 8 और 9 बजे के बीच जब पत्रकार विवेक सिंह अपनी बाइक से घर जा रहे थे तभी त्रिलंगा के पास चौराहे पर रेड सिग्नल होने से विवेक ने अपनी बाइक रोकी। तभी इनोवा कार में सवार मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के बेटे अभिज्ञान अपने मित्रों के साथ वहां से निकले। कार में कुछ युवतियां भी थीं। कार का हॉर्न बहुत तेज़ बजाया जा रहा था। बस हॉर्न तेज़ बजता देख विवेक ने कार के तरफ नजर डाली। तो मानो मंत्री पुत्र को गुस्सा आ गया। बस फिर क्या अभिज्ञान ने अपने दोस्तों के साथ विवेक से मारपीट करना शुरू कर दिया। वहीं सामने मौजूद अम्मा बाबू की रसोई के संचालक सोनू मार्टिन और उनकी पत्नी आलीशा बचाव करने पहुंचे तो मंत्री पुत्र और उसके साथियों ने उन्हें भी जमकर पीटा..सोनू के सर में टांके आए हैं। महिला को भी चोटें आईं..होटल में काम करने वाले को भी रसूख में डूबे अभिज्ञान ने नहीं छोड़ा..उसे भी खूब पीटा। मामला थाने पहुंचा तो बेटे की करतूत पर पर्दा डालने नए नवेले माननीय मंत्री भी पहुंच गए। बताया जा रहा है कि मंत्री पुत्र अपने दोस्तों के साथ रंगीनियों में डूबे थे..और थाने में भी रंगदारी करने से नहीं बाज आए। अभिज्ञान के चाचा का अंदाज तो थाने में देखने लायक था। वो भतीजे की वकालत करने में इतने व्यस्त थे कि घायल होटल संचालक दंपति को सांत्वना देने की बजाय उसके ढाबे के कागजों की जांच कराने की बात करने लगे..बड़ी कश्मकश के बाद पुलिस की एक महिला अधिकारी ने मामला दर्ज करवाया। ये घटनाक्रम रात 3.30 बजे तक चला। अब देखना होगा कि क्या इस तरह सरेराह गुंडागर्दी करने वाले मंत्री पुत्र और उसके साथियों पर पुलिस कोई कड़ा एक्शन लेगी। या ये मामला भी राजनीतिक दबाव की भेंट चढ़ेगा।क्या सरकार के जिम्मेदार इस पर भी कोई संज्ञान लेंगे? क्योंकि थाने में जब मंत्री जी पहुंचे तो वहां किसी को वीडियो बनाने। घायलों से बात करने की भी इजाजत पुलिस नहीं दे रही थी..सवाल तो ये भी है कि इन रसूखदार लोगों के बेटों को डांटने वाले पुलिसवालों पर जो कार्यवाई की गई..क्या वो सही है...?