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चयनित शिक्षकों ने बीजेपी कार्यालय के बाहर किया प्रदर्शन,सुंदरकांड का किया पाठ
भोपाल

चयनित शिक्षकों ने बीजेपी कार्यालय के बाहर किया प्रदर्शन,सुंदरकांड का किया पाठ

मध्यप्रदेश प्राथमिक शिक्षक चयन पात्रता परीक्षा 2020 वर्ग 3 के हजारों चयनित शिक्षक-शिक्षिकाओं ने राज्य सरकार के खिलाफ फिर आंदोलन छेड़ दिया है (madhya pradesh teachers protest)।मंगलवार को पदों में वृद्धि की मांग को लेकर चयनित शिक्षकों ने अपनी अपनी मांगों को लेकर बीजेपी कार्यालय (bjp office) का घेराव किया। इस दौरान चयनित शिक्षकों ने बीजेपी और सरकार को उनके वादे याद दिलाए। इनका कहना है कि अगर मांग पूरी नहीं की गई तो आंदोलन और तीव्र किया जाएगा। सरकार को अपना वादा पूरा करना ही होगा। चयनित शिक्षकों ने सरकार को बुद्धि देने के लिए भगवान राम से प्रार्थना की। हाथों में रामायण लिए शिक्षक सड़क पर ही सुंदरकांड करने लगे। बीजेपी कार्यालय का घेराव करते हुए धरना देना शुरू कर दिया। इनका कहना है की पदवृद्धि की मांग को लेकर वो बीजेपी कार्यालय में गुहार लगाने आए हैं। प्रदर्शन में कई जिलों के बड़ी संख्या में अभ्यर्थी भाजपा कार्यालय में जमा हुए। इसे देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर बैरिकेडिंग कर दी गई। चयनित शक्षकों को बीजेपी कार्यालय के बाहर ही रोक दिया गया। चयनित शक्षकों की मांग है कि उच्च माध्यमिक शिक्षक वर्ग-1 चयन परीक्षा 2023 में पद वृद्धि की जाए. शिक्षा विभाग ने परीक्षा ली और नौकरी के नाम पर छलावा किया है। शिक्षकों ने जय श्री राम के जयकारे लगाकर सरकार को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की। गौरतलब है कि ये शिक्षक अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इन्होंने लोक शिक्षण संचालनालय के बाहर भी धरना-प्रदर्शन भी किया था। इनकी अहम है कि मांग है कि प्राथमिक शिक्षक भर्ती वर्ग तीन में 51 हजार पदों की वृद्धि सरकार करे। शिक्षक भर्ती 2018 में प्रथम द्वितीय काउंसलिंग के रिक्त पदों पर नियोजन प्रक्रिया जल्द की जाए।

12/3/2024113
डॉ. नरोत्तम मिश्रा से मिले कांग्रेस नेता गोविंद सिंह,भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज
भोपाल

डॉ. नरोत्तम मिश्रा से मिले कांग्रेस नेता गोविंद सिंह,भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज

पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह (govind singh) पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (narottam mishra) से मिलने उनके निवास पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने करीब बीस मिनट तक बंद कमरे में बात की जिसके बाद डॉ. गोविंद सिंह की भाजपा में शामिल होने की अटकलें लगाई जाने लगी हैं। हांलाकि पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने इस मुलाकात को सौजन्य मुलाकात बताते हुए भाजपा में शामिल होने की अटकलों को विराम लगाने का प्रयास किया है। लेकिन जिस वक्त कांग्रेस में भगदड़ मची हुई है उस वक्त डॉ. गोविंद सिंह का पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा से मिलना कई तरह के राजनीतिक कयासों को हवा दे रहा है। डॉ. गोविंद सिंह ने ये भी कहा कि जो नेता कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में जा रहे हैं उन्हे उनके कद के हिसाब से पार्टी में सम्मान नहीं मिल पाया जिसके कारण उन्होने भाजपा की सदस्यता ली है। लोकसभा चुनाव लड़ने के विषय पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुरैना लोकसभा सीट से वो चुनाव लड़ना चाहते थे और पार्टी भी तैयार थी लेकिन आखिरी वक्त पर उन्होने अपना मन बदल लिया और अब वो लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। साथ ही डॉ. गोविंद सिंह ने भाजपा की ज्वाइनिंग को लेकर कहा है कि अभी वो भाजपा ज्वाइन नहीं कर रहे हैं लेकिन जब भी भाजपा ज्वाइन करेंगे मीडिया को सबसे पहले बुला कर जरुर बताएंगे। गौरतलब है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा भाजपा ज्वाइनिंग कमेटी के संयोजक हैं और जिस प्रकार से डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने अपने काम को अंजाम दिया है उससे पूरी कांग्रेस में उथल पुथल सी स्थिति बन गई है। और ऐसी स्थिति में दोनों बड़े नेताओं की मुलाकात ने कांग्रेसी खेमे में हलचल बढ़ा दी है।

12/3/2024214
कांग्रेस टिकट देने से पहले पूछ रही पार्टी तो नहीं छोड़ोगे,आज 14 उम्मीदवारों की घोषणा करेगी कांग्रेस
भोपाल

कांग्रेस टिकट देने से पहले पूछ रही पार्टी तो नहीं छोड़ोगे,आज 14 उम्मीदवारों की घोषणा करेगी कांग्रेस

कांग्रेस पार्टी ने केन्द्रीय चुनाव समिति (congress cec meeting) की बैठक में एमपी की 14 लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों का नाम तय कर लिया है (congress candidate list)। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस चुनाव समिति की बैठक में सोनिया गांधी की मौजूदगी में उम्मीदवारों के नामों पर मंथन किया गया। बैठक में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी,नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघर भी शामिल हुए। बैठक के बाद जानकारी देते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बताया कि 70% सीटों पर नाम तय कर लिए गए हैं। सर्वे के आधार पर जो नाम सर्वश्रेष्ठ थे उन्ही नामों पर सहमति बनी है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार छिंदवाड़ा से नकुलनाथ एक बार फिर चुनाव मैदान में होंगे। जिन सीटों पर सिंगल नाम थे उन सीटों को भी फायनल कर दिया गया है। कांग्रेस के पास उम्मीदवारों की कमी का मुद्दा भी इस बैठक में जमकर गर्माया है। कांग्रेस के कई ऐसे दावेदार थे जिन्हे पार्टी लोकसभा में उतारने जा रही थी लेकिन उन्होने नाम की घोषणा से पहले ही कांग्रेस का हाथ छोड़ कर फूर थाम लिया जिसके कारण कांग्रेस पार्टी को उम्मीदवारों की घोषणा करने पर दिक्कत हो रही है। कांग्रेस के नेता एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं। टिकट देने से पहले कांग्रेस अपने संभावित दावेदारों से पूछ रही है कि ऐन मौके पर पार्टी छोड़ कर तो नहीं जाओगे। जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी ने मिशन कांग्रेस मुक्त अभियान चला कर कांग्रेस नेताओं को भाजपा में शामिल करने का अभियान चलाया है उससे कांग्रेस का केन्द्रीय नेत्रृत्व काफी सहमा हुआ है। कांग्रेस के नेता पूरे दम-खम के साथ लोकसभा चुनाव लड़ने की बात तो कर रहे हैं लेकिन उन्हे यही विश्वास नहीं हो रहा कि जिन्हे वो टिकट दे रहे हैं क्या वास्तव में वो नामांकन के आखिरी दिन तक कांग्रेस पार्टी में रहेंगे अथवा मौके पर पार्टी का दामन छोड़ कर हाथ में फूल तो नहीं थाम लेंगे।

11/3/2024221
पूर्व मंत्री का आरोप डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला और उनका स्टाफ नहीं उठाता फोन
भोपाल

पूर्व मंत्री का आरोप डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला और उनका स्टाफ नहीं उठाता फोन

अभी तक रीवा की जनता डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला (rajendra shukla) के निजी सचिव आनंद भट्ट से परेशान थी लेकिन अब तो भाजपा के नेता भी उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला और उनके स्टाफ से परेशान हो चुके हैं। ताजा मामला भाजपा की वरिष्ठ नेत्री कुसुम मंहदेले (kusum mahdele) का है जिन्होने सार्वजनिक रुप से ट्वीट कर इस बात का खुलासा किया है कि उन्होने राजेन्द्र शुक्ला सहित उनके स्टाफ के लोगों को एक नहीं बल्कि दस बार फोन लगाया लेकिन राजेन्द्र शुक्ला तो दूर उनके किसी स्टाफ ने उनका फोन उठाने की जहमत तक नहीं उठाई । राजेन्द्र शुक्ला और उनके स्टाफ ने पूर्व मंत्री कुसुम मंहदेले का जब फोन नहीं उठाया तो उन्होने इस बात से आहत होकर सार्वजनिक रुप से ट्वीट कर दिया। गौरतलब है कि इस वक्त भाजपा कार्यकर्ताओं ने 'मोदी मेरा परिवार' नामक एक अभियान चला रखा है जिसके तहत भाजपा के सभी नेता और कार्यकर्ता अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर खुद को मोदी का परिवार कहते नजर आ रहे हैं। अब स्थिति ये है कि मोदी का परिवार ही मोदी के परिवार का फोन उठाने से कतरा रहा है। बात जब उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला की आती है तो अलग ही हो जाती है। रीवा की जनता ने उनको कामयाबी के शिखर तक पहुंचाया और आज वो रीवा की जनता से मिलना पसंद नहीं करते हैं। इतना ही नहीं उनके निजी सचिव आनंद भट्ट सहित अन्य स्टाफ भी रीवा की जनता को महत्व नहीं देते हैं। यहां तक तो ठीक है। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला को तो यहां तक कहते सुना गया है कि वो रीवा की जनता से परेशान हो चुके हैं। जहां भी जाते हैं रीवा की जनता उनका पीछा करते हुए पहुंच जाती है।

11/3/2024379
सुरेश पचौरी की चार साल पहले भाजपा ज्वाइन करने की लिखी गई पटकथा,बहुत देर कर दी सनम आते-आते
भोपाल

सुरेश पचौरी की चार साल पहले भाजपा ज्वाइन करने की लिखी गई पटकथा,बहुत देर कर दी सनम आते-आते

राजधानी की नगर निगम में एल्डरमैन से राजनीति की शुरुआत करने वाले सुरेश पचौरी (suresh pachouri) केंद्र में दो बार राज्य मंत्री और 24 साल तक राज्यसभा के सदस्य रहे हैं। सुरेश पचौरी गांधी नेहरू परिवार से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष के सलाहकार रहे अहमद पटेल के मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा करीबी रहे हैं। उन्होंने शनिवार सुबह कांग्रेस को बाय-बाय कह दिया। हालांकि पचौरी और इंदौर के पूर्व विधायक संजय शुक्ला मार्च 2020 में ऑपरेशन लोटस के वक्त भी कुछ शर्तों के कारण भाजपा में जाते-जाते रह गए थे। उनके भाजपा में जाने की पटकथा 4 साल पहले लिखी गई थी। बात मार्च 2020 की है।तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ से अनबन होने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्य प्रदेश के 22 कांग्रेस विधायकों ने कांग्रेस छोड़ दी थी। उस वक्त कांग्रेस के 22 विधायकों को पहले हरियाणा के मानेसर और उसके बाद भाजपा शासित कर्नाटक के बेंगलुरु ले जाया गया था। कांग्रेस सरकार के दौरान कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जोड़ी से सिर्फ ज्योतिरादित्य सिंधिया ही नहीं पचोरी भी परेशान थे और वह कांग्रेस में असहज महसूस कर रहे थे। सिंधिया की बगावत के बाद प्रदेश की कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई थी और कमलनाथ ने इस्तीफा दे दिया था। भाजपा में मौजूद Mukhbir बताते हैं कि उस वक्त सिंधिया और पचौरी की आपस में बात नहीं हो पाई थी। कांग्रेस के महाकौशल के एक नेता के जरिए सुरेश पचौरी की भाजपा में बात हुई लेकिन महाकौशल के नेता वही पद चाहते थे जिस पद पर वह कांग्रेस सरकार में थे। उस वक्त सुरेश पचौरी खेमे की तरफ से उन्हें राज्यसभा में भेजने की भी शर्त रखी गई थी। तब बात नहीं बन पाई और सुरेश पचौरी कांग्रेस में ही रह गए।

10/3/2024201
भोज परीक्षाओं में खुलेआम फर्जीवाड़ा, प्रायोगिक परीक्षा में डमी कैंडिडेट को किया जा रहा शामिल
भोपाल

भोज परीक्षाओं में खुलेआम फर्जीवाड़ा, प्रायोगिक परीक्षा में डमी कैंडिडेट को किया जा रहा शामिल

अनूपपुर (anuppur) के जैतहरी शासकीय महाविद्यालय में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। Mukhbrimp.com को मिली जानकारी के अनुसार जैतहरी शासकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर रमेश कुमार वाटे हों या फिर कंपयूटर आपरेटर अशोक राठौर हों अभी तक यह पता था कि इन दोनों कि जुगल बंदी बड़ी जोरों शोरों से चलती थी ,लेकिन खबरों के प्रकाशन के बाद जैतहरी शासकीय महाविद्यालय में भोज मुक्त परीक्षाओं में एक और महाशय का भी नाम सामने आ गया है ,जिनका नाम है जितेंद्र सिंह धुर्वे यह भी जैतहरी शासकीय महाविद्यालय में वसूली करने में बड़ी जोर लगे हैं। सूत्रों ने जानकारी दी है कि जितेंद्र सिंह धुर्वे भी बड़े किरदार में रहते हैं इनका साफ कहना रहता है कि रूपया है तो सब कुछ है ,आइये परीक्षा दीजिए दिल खोलकर नकल कीजिए हम है न ,सब संभाल लेंगे और अगर मन नहीं कर रहा है कि पढ़ाई करें ,परीक्षा कापी में लिखने की भी दिक्कत होती है तो भी आप लोगों को सुविधा दी जाएगी। जुगाड़ कीजिए और घर बैठे आपकी जगह किसी दूसरे को बैठा देगें ,किसी को पता भी नहीं चलेगा ,प्राचार्य हमारे और हमारे साथी अशोक राठौर सब संभाल लेते हैं चिंता मत करें आज तक कोई भी नहीं पकड़ाया तो टेंशन मत लें यह कारोबार हमारा काफी दिनों से चल रहा है हमारी पहचान बड़े बड़े लोगों से है ,आपके ऊपर और आपकी डिग्रियों पर कोई आंच नहीं आयेगी। गौरतलब है कि जैतहरी शासकीय महाविद्यालय पहले भी सुर्खियां बटोरता रहा है लेकिन कुछ और मामलों पर मोटी रकम और डमी कैंडिडेट को बैठाने का राज किसी को भी पता नहीं था। लेकिन इनकी अवैध वसूली और जुगल बंदियों का सफर ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया और इनके बीच मोटी रकम को लेकर बहस बाजी और रूपयों को लेकर सामंजस्य न बैठ पाने से विवाद सामने आने लगा और जैतहरी महाविद्यालय की पोल खुलने लगी।

9/3/2024222
सीएम मोहन यादव ने शासकीय सेवकों के डीए की मंगाई फाइल,मिल सकती है खुशखबरी
भोपाल

सीएम मोहन यादव ने शासकीय सेवकों के डीए की मंगाई फाइल,मिल सकती है खुशखबरी

केन्द्र सरकार ने अपने कर्मचारियों (central government employees) का चार फीसदी डीए एक बार फिर बढ़ा दिया है। अब केन्द्रीय कर्मचारियों को कुल 50% डीए मिल रहा है लेकिन मप्र के शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) को अब भी 42% प्रतिशत मंहगाई भत्ता मिल रहा है। केन्द्र सरकार की तरफ से चार फीसदी फिर डीए बढ़ाए जाने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कर्मचारियों के डीए की फाइल को फिर मंगवा लिया है। कैबिनेट में इस बात पर फैसला लेना है कि, महंगाई भत्ता का भुगतान किस तारीख से किया जाना है और एरियर की राशि किस प्रकार देना है। इसके अलावा लगभग 5.47 लाख पेंशनर्स को महंगाई राहत भी दी जानी है। हालांकि लोकसभा चुनाव से पहले पेमेंट नहीं करना पड़ेगा क्योंकि एक सरकारी कागज के माध्यम से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सरकार, पेंशनर्स को परेशान करती रहती है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार लोकसभा चुनाव की आचार संहिता इसी महीने के दूसरे सप्ताह में लग सकती है। इसके पहले सरकार कर्मचारियों का डीए और पेंशनर्स का डीआर देने की तैयारी में है। मप्र में कर्मचारियों का 1 जुलाई 2023 से 4% डीए बकाया है। उनका हिसाब बराबर करने डीए का 9 महीने का एरियर देना होगा। इस मामले में 4% डीए देने का प्रस्ताव तो वित्त विभाग ने तैयार कर भेजा हुआ है, जिस पर मुख्यमंत्री से चर्चा कर अंतिम फैसला लिया जाना है। प्रस्ताव के अनुसार कर्मचारियों का 4% डीए का भुगतान करने पर हर महीने 180 से 190 करोड़ रुपए हर महीने का अतिरिक्त खर्च आना है। एरियर का भुगतान करने पर यह खर्च 1700 करोड़ रुपए होगा। वहीं आगामी 1 अप्रैल से 31 मार्च 2025 तक बढ़े हुए डीए का अतिरिक्त खर्चा 2280 करोड़ रुपए होगा। पेंशनर्स को 4 प्रतिशत महंगाई राहत दिए जाने पर हर महीने 80 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्चा आना है। हालाकि इसके लिए सरकार को कैबिनेट में प्रस्ताव पारित कर प्रति छत्तीसगढ़ को भेजना होगा, वहां से सहमति मिलने के बाद पेंशनर्स को डीआर दिए जाने के आदेश जारी किए जा सकेंगे।

9/3/202421488
डीए में केन्द्रीय कर्मचारियों से 8% पीछे हुए राज्य के शासकीय कर्मचारी
भोपाल

डीए में केन्द्रीय कर्मचारियों से 8% पीछे हुए राज्य के शासकीय कर्मचारी

केन्द्रीय कर्मचारियों (central government employees) को एक जनवरी 2024 से 50 प्रतिशत की दर से मंहगाई भत्ता मिलेगा। गुरुवार को केन्द्र सरकार ने चार प्रतिशत मंहगाई भत्ता बढ़ाने का निर्णय लिया है। वहीं प्रदेश के सात लाख नियमित कर्मचारियों को अभी 42 प्रतिशत की दर से मंहगाई भत्ता मिल रहा है। इस प्रकार अब केन्द्रीय कर्मचारियों की तुलना में प्रदेश के शासकीय (mp government employees) मंहगाई भत्ते के मामले में आठ प्रतिशत पीछे हो गए हैं। मंहगाई भत्ते में चार प्रतिशत की वृद्धि विस चुनाव के समय से लंबित है। केन्द्र ने जुलाई 2023 से अपने कर्मचारियों का मंहगाई भत्ता और पेंशनरों की मंहगाई राहत में चार प्रतिशत की वृद्धि कर 46 प्रतिशत कर दी थी। तत्कालीन शिवराज सरकार ने विधानसभा चुनाव के समय चुनाव आयोग को मंहगाई भत्ते में वृद्धि का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन मतदान के प्रभावित होने की संभावना से अनुमति नहीं मिली थी। चुनाव के बाद से इसकी फाइल चल रही है पर सरकार अंतिम निर्णय अब तक नहीं ले पाई है। इस बीच मोहन सरकार ने परिपाटी तोड़ते हुए अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों का मंहगाई भत्ता जनवरी 2024 से केन्द्रीय कर्मचारियों के समान चार प्रतिशत बढ़ा कर 46 प्रतिशत कर दिया था। इस मामले में वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हमारी तैयारी हो चुकी है। सरकार के स्तर पर जैसे ही अंतिम निर्णय होगा,कर्मचारियों के मंहगाई भत्ते में वृद्धि कर दी जाएगी।

8/3/2024176
भक्ति,मुदित और हर्षवर्धन के नेत्रृत्व में भाजपा ने बनाई पांच सदस्यीय डिजिटल टीम
भोपाल

भक्ति,मुदित और हर्षवर्धन के नेत्रृत्व में भाजपा ने बनाई पांच सदस्यीय डिजिटल टीम

मिशन 2024 फतह करने में जुटी भारतीय जनता पार्टी (mp bjp) ने पांच सदस्यीय डिजिटल टीम का गठन कर दिया है। भाजपा की इस डिजिटल टीम का नेत्रृत्व युवा नेत्री भक्ति शर्मा (bhakti sharm), मुदित शेजवार (mudit shejwar) और हर्षवर्धन जोशी (harshavardhan joshi) करेंगे। इनके सहयोग के लिए दो अन्य सदस्य भी दिए गए हैं। यह डिजिटल टीम डिजिटल ऐड के बारे में डिकसन कर पार्टी नेत्रृत्व को देगी और जब वो फायनल होगा तो फिर उसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म में प्रसारित किया जाएगा। गौरतलब है कि भक्ति और मुदित शेजवार को लेकर लंबे समय से भाजपा में कोई जिम्मेदारी देने की योजना चल रही थी लेकिन पार्टी नेत्रृत्व तय नहीं कर पा रहा था कि इन युवा नेताओं को उनकी क्षमता के हिसाब से कौन सी जिम्मेदारी दी जाए। आखिरकार चुनाव करीब आया तो पार्टी नेत्रृत्व ने इन युवा नेताओं को गंभीर जिम्मेदारी देकर यह बता दिया है कि पार्टी में चेहरों के हिसाब से उन्हे कार्य वितरित किए जाते हैं। भाजपा की यह युवा डिजिटल टीम सोशल मीडिया में प्रसारित होने वाली सभी प्रकार की सामग्री पर नजर रखने के अलावा कांग्रेस के कार्यकर्ता अथवा आईटी सेल के लोग किस प्रकार मोदी विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं उस पर भी नजर रखेंगे। साथ में यह प्लान भी तैयार करेंगे कि कांग्रेस के आरोपों का काउंटर कैसे करना है। भक्ति और मुदित के नेत्रृत्व में बनाई गई टीम को बारीकी से कांग्रेस के भ्रामक प्रचार पर नजर रखने के लिए भी कहा गया है।

7/3/2024213
शासकीय कर्मचारियों के वोट की भाजपा को नहीं जरुरत,इसी लिए डीए पर नहीं किया विचार
भोपाल

शासकीय कर्मचारियों के वोट की भाजपा को नहीं जरुरत,इसी लिए डीए पर नहीं किया विचार

प्रदेश की मोहन सरकार (mp government) ने लोकसभा चुनाव में वोट लेने के लिए अलग-अलग वर्गों को साधने का प्लान तैयार कर लिया है। यही कारण है कि मोहन सरकार ने शासकीय कर्मचारियों (mp government employees) को चार फीसदी लंबित डीए देने के मामले में चुप्पी साध ली है। प्रदेश की भाजपा सरकार का सोचना है कि जिस प्रकार से लाड़ली बहनों ने विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को वोट देकर माला माल किया है ठीक उसी प्रकार से लोकसभा चुनाव में भी लाड़ली बहनें भाजपा के उम्मीदवारों को मोदी के नाम पर वोट देंगी। हाल ही में इसकी झलक पीएम मोदी के भाषण में भी सुनने को मिली जब उन्होने एक बड़ी सभा में कहा कि देश की सभी महिलाएं उनकी बहन और परिवार हैं। मतलब साफ है कि भाजपा को शासकीय कर्मचारियों से ज्यादा देश और प्रदेश की महिलाओं पर विश्वास है। महिलाओं के अलावा भाजपा ने किसानों को भी अपने वोट बैंक का हिस्सा माना है। फरवरी की अंतिम तारीख को पीएम मोदी ने किसानों के खाते में किसान सम्मान निधि की राशि डाली थी और उसके बाद Mukhbirmp.com ने शिवराज सरकार द्वारा संचालित किसान कल्याण योजना को मोहन सरकार को याद दिलाया तब मोहन सरकार ने भी छह मार्च को किसानों के खाते में डाल दिया है। गौरतलब है कि राज्य सरकार की तरफ से संचालित किसान कल्याण योजना को प्रदेश की मोहन सरकार भूल गई थी जब इस मामले में Mukhbirmp.com ने खबर प्रकाशित की तो उसके अगले दिन मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राशि डालने की घोषणा की और फिर छह मार्च को यह राशि किसानों के खाते में डाल दी गई है। अब भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि प्रदेश की महिलाओं,किसानों और युवाओं को साध लिया जाएगा तो शासकीय कर्मचारियों की नाराजगी का ज्यादा असर लोकसभा चुनाव में नहीं पड़ेगा। यही कारण है कि प्रदेश की मोहन सरकार शासकीय कर्मचारियों के चार फीसदी डीए पर किसी भी प्रकार का फैसला नहीं कर रही है जबकि विधानसभा के बजट सत्र में कर्मचारियों के डीए को लेकर प्राविधान किया गया था लेकिन मोहन सरकार यह मान कर चल रही है कि कर्मचारियों को डीए देने का मतलब सीधे तौर पर फिजूल खर्ची है उससे ज्यादा कुछ नहीं।

7/3/20243188
विधायकी और प्रदेश महामंत्री पद के बीच संतुलन नहीं बना पा रहे भगवानदास सबनानी
भोपाल

विधायकी और प्रदेश महामंत्री पद के बीच संतुलन नहीं बना पा रहे भगवानदास सबनानी

भारतीय जनता पार्टी के निष्ठावान पदाधिकारी कहे जाने वाले भाजपा नेता भगवानदास सबनानी (bhagwandas sabnani) अब भोपाल की दक्षिण-पश्चिम विधानसभा से विधायक बन गए हैं। यहां तो ठीक है लेकिन उनके पास पार्टी का प्रदेश महामंत्री का पद पहले से है जिसको वो पूरी निष्ठा से निभा रहे थे। लेकिन पार्टी ने उन्हे विधायक बनने का भी मौका दिया जिसमें वो फतह हासिल करने में कामयाब रहे। लेकिन अब भगवानदास सबनानी प्रदेश महामंत्री और विधायक पद के बीच संतुलन बनाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। दक्षिण-पश्चिम का विधायक होने के नाते भगवानदास सबनानी के पास रोजाना सैकड़ों कार्यकर्ता अपना काम लेकर आते हैं लेकिन भगवानदास सबनानी पहले ही पार्टी के कामों में इतना ब्यस्त रहते हैं कि वो कार्यकर्ताओं को समय नहीं दे पाते हैं जिसके कारण दक्षिण-पश्चिम विधानसभा के पार्टी कार्यकर्ता और आम नागरिक खुद को ठगा सा महसूस करने लगे हैं। हमेशा शांत और मुस्कुराते रहने वाले भगवानदास सबनानी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के काफी करीबी माने जाते हैं जिसके कारण कार्यकर्ता उनसे कुछ कहने का साहस भी नहीं जुटा पाते हैं। भगवानदास सबनानी इन दिनों चिड़चिड़े भी होने लगे हैं। पार्टी का काम और फिर विधायकी का काम दोनों एक ब्यक्ति पर आने के कारण ब्यस्तताएं बढ़ गई हैं। और यही उनके चिड़चिड़े होने का कारण भी बताया जा रहा है। इस बात में कोई सक नहीं कि भगवानदास सबनानी एक मेहनती वर्कर हैं लेकिन दूसरा पहलू ये भी है कि अब वो सिर्फ प्रदेश महामंत्री नहीं बल्कि दक्षिण-पश्चिम विधानसभा के जनप्रतिनिधि भी हैं और उस क्षेत्र की जनता के साथ कार्यकर्ताओं की कुछ जरुरतें होती हैं जिनको पूरा करना जनप्रतिनिधि का ही काम होता है। कई कार्यकर्ता तो बीजेपी कार्यालय में सबनानी से मिलने के दिन भर खड़े रहते हैं लेकिन उनकी मुलाकात सबनानी से नहीं हो पाती। और यही करण है कि भगवानदास सबनानी के दोनों पदों से संतुलन नहीं बना पाने के कारण स्थानीय जनता और कार्यकर्ताओं में निराशा और नाराजगी का माहौल बनने लगा है।

6/3/2024181
शासकीय कर्मचारियों के डीए पर भारी पड़ रही 'मोदी की गारंटी' डीए के प्रस्ताव पर अब तक मंजूरी नहीं
भोपाल

शासकीय कर्मचारियों के डीए पर भारी पड़ रही 'मोदी की गारंटी' डीए के प्रस्ताव पर अब तक मंजूरी नहीं

मध्यप्रदेश की करीब साढ़े सात लाख कर्मचारियों का डीए पिछले छह महीने से लंबित है जिसके चलते प्रति माह शासकीय सेवकों को चार से पांच हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। विधानसभा चुनाव में आचार संहिता के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डीए को लेकर पैरवी की थी लेकिन निर्वाचन आयोग की तरफ से उसकी अनुमति नहीं मिली थी। कर्मचारियों को लगा था कि चुनाव समाप्त होने के बाद उनका अधिकार उन्हे मिल जाएगा लेकिन आज तक ऐसा नहीं हुआ। ऐसा नहीं है कि शासकीय सेवकों के डीए का प्रस्ताव सरकार के पास नहीं पहुंचा है। अब तक नई सरकार बनने के बाद तीन से अधिक बार शासकीय सेवकों (mp government employees) के डीए का प्रस्ताव मुख्यसचिव के टेबल पर गया और उसी तरह सीएम मोहन यादव के टेबल पर भी प्रस्ताव गया लेकिन हर बार मुख्यमंत्री ने यह कह कर प्रस्ताव को खारिज कर दिया कि अभी बजट नहीं है आगे देखेंगे। अब लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लगने वाली है। अभी तक राज्य सरकार ने शासकीय कर्मचारियों का चार फीसदी डीए देने पर किसी प्रकार का विचार नहीं किया है। मंत्रालय में मौजूद Mukhbir का कहना है कि चुनाव आचार संहिता के एक या दो दिन पहले मुख्यमंत्री डीए देने की घोषणा कर सकते हैं जिससे लोकसभा चुनाव में शासकीय सेवकों का वोट लिया जा सके। जबकि सोमवार को मोहन कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई थी जिसमें धार्मिक कार्यक्रमों के अलावा अन्य प्रस्तावों पर चर्चा हुई और उनमें सहमति भी बनी लेकिन इस कैबिनेट में भी शासकीय कर्मचारियों के डीए पर सरकार ने मुहर नहीं लगाई है। सरकार का मानना है कि 'मोदी की गारंटी' पर जनता को विश्वास है लिहाजा जनता भाजपा के प्रत्याशियों को ही चुनाव जिताएगी शासकीय सेवकों की नाराजगी का ज्यादा असर लोकसभा चुनाव में नहीं पड़ेगा। वहीं कर्मचारी संगठनों की नाराजगी अब धीरे-धीरे सतह पर आने लगी है। कर्मचारी नेताओं का साफ कहना है सरकार ने उनको सिर्फ ठगने का काम किया है सिर्फ आश्वासन देने का काम किया जा रहा है जिसे अब कर्मचारी भी समझ चुके हैं।

5/3/2024362
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