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विंध्य में सामंजस्य बैठाने में चूकी भाजपा,गणेश सिंह और रीति पाठक दोनों सबसे कमजोर उम्मीदवार
भोपाल

विंध्य में सामंजस्य बैठाने में चूकी भाजपा,गणेश सिंह और रीति पाठक दोनों सबसे कमजोर उम्मीदवार

भारतीय जनता पार्टी ने अपनी दूसरी सूची (BJP Second List) में तीन केन्द्रीय मंत्रियों सहित सात सांसदों को टिकट देकर सभी को चौका तो दिया है लेकिन भाजपा का विंध्य में गणेश सिंह (Ganesh Singh) और रीति पाठक (Riti Pathak) पर लगाया दांव खाली जा सकता है। दरअसल भाजपा नेताओं के मुताबिक गणेश सिंह विंध्य से बड़े कुर्मी नेता हैं लेकिन हकीकत तो यही है कि वो सिर्फ कुर्मी नेता ही हैं उसके अलावा वो और कुछ नहीं हैं। लोकसभा चुनाव में सतना की जनता पीएम मोदी का चेहरा देख कर गणेश सिंह को वोट देती है जिसके कारण गणेश सिंह चुनाव जीत जाते हैं और उनकी उस जीत को भाजपा ने गणेश सिंह की जीत मान लिया है। लेकिन गणेश सिंह पर कट्टर कुर्मी नेता होने का ठप्पा लगा है वो अपने घर में ब्राम्हणों का आना तक पसंद नहीं करते हैं जिसके कारण ब्राम्हण वर्ग के लोग गणेश सिंह से दूर ही रहती है। ऊपर से भाजपा ने गणेश सिंह को जिस सीट से टिकट दिया है वो ब्राम्हण बाहुल सीट है। गणेश सिंह को टिकट मिलते ही सतना में एक ही बात चल रही है अबकी बार गणेश विसर्जन पर वार। दूसरी तरफ सीधी से दो बार की सांसद रीति पाठक को चुनाव मैदान में उतारा गया है जिस सीट से रीति पाठक को मौका मिला है वो सीट भाजपा के कद्दावर नेता केदारनाथ शुक्ला की है जिसमें वो कई बार चुनाव जीत चुके हैं लेकिन पेशाब कांड (Sidhi Peshab Kand) के छीटे इतना ज्यादा फैले कि केदारनाथ को टिकट से हाथ धोना पड़ा। अब टिकट नही मिलने के बाद केदारनाथ शुक्ला (Kedarnath Shukla) बगावती मूड में आ गए हैं और अगर वो बागी होते हैं तो रीति पाठक का चुनाव जीतना संभव नहीं हो पाएगा। इसके अलावा भाजपा रीवा से राजेन्द्र शुक्ला (Rajendra Shukla) को बड़ा और ब्राम्हण नेता मानती है लेकिन उन्हे रीवा जिले की जनता अपना नेता नहीं मानती। राजेन्द्र शुक्ला की खुद की सीट खतरे में है और भाजपा उनके भरोसे रीवा की सभी आठ सीटों को टारगेट कर रही है। कुल मिला कर भाजपा के पास विंध्य में नेता नहीं है और वहां की जनता इस बार भाजपा से काफी नाराज है जिसको खत्म करने के लिए भाजपा के पास कोई खास प्लान भी नहीं है।

27/9/2023432
रुठे विंध्य को पहले मनाएगी भाजपा,बीजेपी से आज रवाना हुए रथ,कल नड्डा दिखाएंगे हरी झंडी
भोपाल

रुठे विंध्य को पहले मनाएगी भाजपा,बीजेपी से आज रवाना हुए रथ,कल नड्डा दिखाएंगे हरी झंडी

कहा जाता है कि पर्वतराज सुमेरू के शिखर कहे जाने वाले चित्रकूट गिरि को कामदगिरि होने का वरदान भगवान राम ने दिया था। तभी से विश्व के इस अलौकिक पर्वत के दर्शन मात्र से आस्थावानों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। और अब भाजपा का भगवान राम ही बेड़ा पार कर सकते हैं। दरअसल Mukhbir को मिली जानकारी के अनुसार विंध्य (Vindhya) की जनता का मोह अब भाजपा से भंग हो चुका है और इसका खुलासा भाजपा की आंतरिक सर्वे रिपोर्ट (Bjp internal report) में हो चुका है यही कारण है कि चुनाव के महज डेढ़ महीने पहले भाजपा ने राजेन्द्र शुक्ला (Rajendra Shukla) को मंत्री बना कर विंध्य की जनता के जख्म पर मरहम लगाने का काम किया है। लेकिन विंध्य की जनता जितनी भावुक मानी जाती है ठीक उसी प्रकार से विंध्य की जनता राजनीतिक मामलों की भी जानकार मानी जाती है। विंध्य की जनता जब वोट देती है तो सभी प्रकार के सोच विचार करती है। जिस वक्त 2018 में माई के लाल का नारा चल रहा था और ग्वारियर-चंबल के सवर्णों ने भाजपा का साथ छोड़ कर कांग्रेस को जिताने में अपना योगदान दिया था तब विंध्य की जनता ने जाति की परवाह किए बगैर सीएम शिवराज के (Shivraj Singh Chouhan) द्वारा किए विकास को तरजीह दी जिसका नतीजा ये निकला कि विंध्य की 30 सीटों में 24 सीटें भाजपा की छोली में आई। साल 2020 में जब सिंधिया के भाजपा में शामिल होने से फिर भाजपा की सरकार बनी तो विंध्य की जमकर उपेक्षा की गई और ग्वालियर-चंबल के हर तीसरे विधायक में एक को मंत्री बनाया गया। विंध्य देश का सबसे बड़ा सवर्ण बाहुल क्षेत्र माना जाता है इसके बाद भी विंध्य के एक भी सवर्ण नेता को मंत्री नहीं बनाया गया। यहां से भाजपा का ओबीसी प्रेम विंध्य की जनता के सामने आया। बात चस वक्त और गंभीर हो गई जब सीधी में आदिवासी पेशाबकांड (Sidhi Peshab Kand) का मामला सामने आया। विंध्य के सवर्णों ने घटना का जमकर विरोध किया और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई का भी समर्थन किया लेकिन जब आरोपी के घर पर बुल्डोजर चला और उसके परिवार को सड़क पर आना पड़ा तो विंध्य की जनता में शिवराज सरकार और भाजपा के खिलाफ आक्रोश की लहर दौड़ गई। लगातार उपेक्षा का दंश झेलने वाली विंध्य की जनता का इस बार भाजपा से मोह भंग हो गया है। जिस प्रकार से सीएम शिवराज और भाजपा के हर नेता का ओबीसी प्रेम जनता के सामने आया उसके बाद विंध्य की जनता ने भाजपा अलग होने पर खुद की भलाई देख रहे हैं। इन सब बातों की जानकारी भाजपा हाई कमान को है। इसी लिए केन्द्रीय नेतृत्व ने विंध्य में लगातार फोकस किया और मोदी की दो सभाएं रीवा और शहडोल में आयोजित की गई। अमित शाह ने सतना में सभा की। सीएम शिवराज ने महीने भर में विंध्य की ज्यादा तर सीटों का दौरा किया है लेकिन इस बार विंध्य की जनता का मूड बदल पाने में अब तक भाजपा नाकाम साबित हुई है इसी लिए अब भाजपा एक बार फिर भगवान राम का सहारा लेकर उनकी तपोभूमि चित्रकूट से जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Ashirwad Yatra) का आगाज करने जा रही है जिसको राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) हरी झंडी दिखा कर रवाना करेंगे।

2/9/2023190
पहले विंध्य की उपेक्षा और फिर विंध्य को मिला सम्मान,राजेन्द्र शुक्ला बने जनसंपर्क मंत्री
भोपाल

पहले विंध्य की उपेक्षा और फिर विंध्य को मिला सम्मान,राजेन्द्र शुक्ला बने जनसंपर्क मंत्री

भारतीय जनता पार्टी के सत्ता और संगठन दोनों में विंध्य की लगातार उपेक्षा की गई। लेकिन विंध्य की जनता का मूंड भांपते हुए भाजपा ने आखिरकार विंध्य को प्रतिनिधित्व देने का फैसला करते हुए राजेन्द्र शुक्ला (Rajendra Shukla) को मंत्री बना दिया है और अब उन्हे जनसंपर्क विभाग (Public Relation) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। हांलाकि राजेन्द्र शुक्ला को यह जिम्मेदारी पहली बार नहीं मिली है इससे पहले राजेन्द्र शुक्ला को पहले भी जनसंपर्क विभाग का जिम्मा सौंपा गया था (Shivraj Cabinet)। चुनाव आचार संहिता लगने के लिए अब करीब 45 से 50 दिन बचे हैं ऐसी स्थिति में राजेन्द्र शुक्ला सहित दो और मंत्रियों को शपथ दिलाई गई है। अब राजेन्द्र शुक्ला के पास समय कम है लेकिन उम्मीदों का बांध उनके पास बहुत है। दरअसल भोपाल में विंध्य के पत्रकारों की एक बड़ी संख्या है लेकिन इस समय मीडिया में ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड का बोलबाला चल रहा है। किसी भी न्यूज चैनल में रीवा अथवा विंध्य के पत्रकारों को नहीं लिया जाता है। भाजपा के संगठन की ओर से भी विंध्य के पत्रकारों को लगातार उपेक्षित किया जाया है। और सरकार में भी विंध्य के पत्रकारों को हमेशा उपेक्षित किया जाता रहा है। बुधवार को मंत्री बनने के बाद राजेन्द्र शुक्ला बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) से मिलने उनके निवास पहुंचे लेकिन वो ये पूछना भूल गए कि आपकी राजनीतिक पृष्ठभूमि विंध्य रहा है लेकिन विंध्य को आप इतना उपेक्षित क्यों करते हैं। दरअसल जब से वीडी शर्मा को बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया तभी से विंध्य के पत्रकारों और विंध्य में काम करने वाले कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का सिलसिला शुरु हुआ जो आजतक अनवरत जारी है। जबकि राजनीतिक लिहाज से बात की जाए तो विंध्य की 30 सीटों में भाजपा को 24 सीटें और कांग्रेस को मात्र 06 सीटें मिली थी उसके बाद भी विंध्य की उपेक्षा लगातार की गई। पहले विंध्य को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया और जब प्रतिनिधित्व मिला तो समय नहीं है कुल मिला कर यह कहा जा सकता है कि राजेन्द्र शुक्ला को मंत्री बना कर विंध्य के जख्म पर मरहम लगाने का प्रयास किया गया है। लेकिन विंध्य की जनता पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा जागरुक मानी जाती है यही कारण है कि अब उसका अहसास भाजपा को हुआ जिसका नतीजा ये रहा कि भाजपा ने राजेन्द्र शुक्ला को मंत्री बनाया है।

30/8/2023196
सवर्ण बाहुल्य विंध्य में कांग्रेस ने ओबीसी चेहरा कमलेश्वर पटेल को आगे कर सवर्णों के जख्म पर छिड़का नमक
भोपाल

सवर्ण बाहुल्य विंध्य में कांग्रेस ने ओबीसी चेहरा कमलेश्वर पटेल को आगे कर सवर्णों के जख्म पर छिड़का नमक

ओबीसी नेताओं की खोज में जुटी कांग्रेस पार्टी ने विंध्य से कमलेश्वर पटेल (Kamleshwar patel) को आगे कर सवर्णों को नाराज कर दिया है। इस बात में कोई शक नहीं कि देश की सबसे बड़ी सवर्णों की आबादी विंध्य क्षेत्र में रहती है यही कारण रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और श्रीनिवास तिवारी का विंध्य में सालों तक वर्चश्व रहा है। लेकिन इन दोनों नेताओं के स्वर्गवासी होने के बाद कांग्रेस पार्टी किसी भी सवर्ण नेता की खोज इतने सालों में नहीं कर पाई या फिर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने विंध्य से सवर्ण नेताओं को पनपने नहीं दिया। लेकिन अब कांग्रेस पार्टी ने विंध्य में सवर्णों के जख्म पर मरहम लगाने के बजाय नमक छिड़ने का काम किया है। क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने विंध्य से पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (Congress Working Committee) का सदस्य बना दिया है। ये वही कमलेश्वर पटेल हैं जिनके निवास पर ब्राम्हण वर्ग का कोई ब्यक्ति जाता है तो उसे किसी प्रकार का महत्व नहीं दिया जाता है। 15 महीनों तक कमलेश्वर पटेल मंत्री रहे उस दौरान उनके बंगले में जितने स्टाफ थे सभी कुर्मी समाज के ही थे। यहीं नहीं कोई भी सवर्ण वर्ग का ब्यक्ति कमलेश्वर पटेल के पास अपना काम अथवा फरियाद लेकर जाता था तो कमलेश्वर पटेल उस ब्यक्ति को दरवाजे के बाहर कर देते थे अथवा घंटों तक इंतजार करवा कर वो उससे अंत में मिलते थे और काम भी नहीं करते थे। ऐसे व्यक्ति को कांग्रेस ने विंध्य की ओर से चेहरा बना कर खुद के पैर में कुल्हाड़ी मारने का काम कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी की रणनीति पर नजर डालें तो सवर्ण वर्ग भाजपा से भी नाराज था लेकिन भाजपा ने सवर्ण वर्ग को खुश करने के लिए अलग-अलग उपाय तैयार किए जिसमें भाजपा की ओर से गिरीश गौतम (Girish Gautam) को विधानसभा का अध्यक्ष बनाया गया ये बात और है कि गिरीश गौतम का कोई जनाधार नहीं है वो अपने बेटे तक को जिला पंचायत के चुनाव में नहीं जिता पाए और इस चुनाव में उनकी हालत और खराब है। भाजपा के दूसरे बड़े चेहरे हैं राजेन्द्र शुक्ला (Rajendra Shukla) जो लोगों के व्यक्तिगत काम तो नहीं करते लेकिन शहर का विकास राजेन्द्र शुक्ला ने बढिया किया है और सहज-सरल व्यक्ति होने के नाते राजेन्द्र शुक्ला चुनाव जीतने में कामयाब हो जाते हैं ये बात और है कि नगर निगम के चुनाव में वो इस बार भाजपा को नहीं जिता पाए और रीवा में कांग्रेस का महापौर बन गया। रीवा सहित पूरे विंध्य का इतिहास उठा कर देखें तो विंध्य में ब्राम्हण और ठाकुरों का वर्चश्व रहा है इन्ही के इर्द- गिर्द राजनीति चलती रही है लेकिन कांग्रेस ने कमलेश्वर पटेल जैसे जातिवादी नेता को कांग्रेस वर्किंग कमेटी का सदस्य बना कर अपने लिए विंध्य में ज्यादा मुसीबतें खड़ी कर ली है। कांग्रेस के इस फैसले से सवर्णों में काफी आक्रोश देखने को मिल रहा है। साल 2018 के चुनाव में कांग्रेस को विंध्य की 30 सीटों में मात्र छह सीटें मिली थी बांकी 24 सीटें भाजपा के कब्जे में आई थी और उस परिणाम को बदलने के लिए कांग्रेस ने इस बार काफी मेहनत की है लेकिन कमलेश्वर को आगे कर कांग्रेस पार्टी ने खुद की मेहनत पर ही पानी फेर दिया है और इसके अलावा कमलेश्वर पटेल और अजय सिंह (राहुल) की दुश्मनी भी किसी से छुपी नहीं है लिहाजा अब तो विंध्य में कांग्रेस के लिए भगवान ही मालिक है।

26/8/2023441
मंत्रियों की शपथ पर रोया कुत्ता,'कांग्रेस को हुआ दुख'
भोपाल

मंत्रियों की शपथ पर रोया कुत्ता,'कांग्रेस को हुआ दुख'

शनिवार को जिस वक्त राजभवन में तीन मंत्रियों को शपथ दिलाई जा रही थी (Shivraj Cabinet Expansion) ठीक उसी वक्त राजभवन के बाहर एक कुत्ता (स्वान) जमकर रो रहा था। कुत्ते के रोने की दर्दनाक आवाज कांग्रेस नेताओं के कानों तक पहुंच गई (MP Congress)। कुत्ते को रोता देख कांग्रेस नेताओं का दिल भी फफक-फफक कर रोने लगा फिर क्या था कांग्रेस प्रवक्ताओं से कुत्ते का रोते हुए चेहरा देखा नहीं गया। कांग्रेस नेताओं ने कुत्ते का वीडियो बनाया और फिर उसे वायरल करने के साथ ट्वीट करने में लग गए । कुत्ते को रोता देख कांग्रेस को एक मौका भी मिल गया आनन फानन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गूगल से शकुन शास्त्र निकाला और कुत्ते के रोने के मायने निकालने लगे। अलग-अलग तरीके से गूगल से कुत्ते के रोने के मायने निकाल कर कांग्रेस प्रवक्ताओं ने उसे वायरल करने लगे। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने चुनाव के महज कुछ समय पहले मंत्रिमंडल का विस्तार किया है जिसमें विंध्य से राजेन्द्र शुक्ला (Rajendra Shukla),बालाघाट से गौरीशंकर बिसेन (Gaurishankar Bisen) और राहुल सिंह लोधी (Rahul Singh Lodhi) को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है। इस बात में कोई शक नहीं कि बीजेपी में इस वक्त काफी विवाद की स्थिति है पार्टी के अंदर कलह हावी हो रही है। संगठन की लाख कोशिशों के वाबजूद भी पार्टी में कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर नहीं हो रही है। यही कारण है कि मंत्रिमंडल का विस्तार कर अंतर्कलह को खत्म करने का प्रयास किया गया है। लेकिन लगता है कि तीन को खुश करने के चक्कर में 13 नाराज हो गए हैं। और जिस प्रकार से राजभवन के बाहर कुत्ता रोया है उससे फिलहाल कांग्रेसी खेमें को चुटकी लेने का बेहतर मौका मिल गया है।

26/8/2023217
सरकार में चल रही कलह के लिए तीन विधायकों को दिलाई गई शपथ
भोपाल

सरकार में चल रही कलह के लिए तीन विधायकों को दिलाई गई शपथ

विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी ने मंत्रिमंडल विस्तार कर पार्टी की अंदरुनी कलह को खत्म करने का प्रयास किया है (MP Assembly elections)। चुनाव के लिए महज डेढ महीने का वक्त बचा है ऐसे समय में मंत्रिमंडल (shivraj cabinet expansion) का विस्तार कर भाजपा ने पार्टी की कलह को खत्म करने का प्रयास किया है लेकिन साथ में विपक्षी दलों के लिए मुद्दा भी दे दिया है। दरअसल जिस प्रकार से मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ है वो सियासी पंडितों के गले से नहीं उतर रहा है। खास कर जिस प्रकार से तीन विधायकों को मंत्री की शपथ दिलाई गई है और जिस वर्ग से मंत्री बनाए गए हैं वो लोगों की समझ में नहीं आ रहा है। विंध्य की जनता भाजपा से काफी नाराज थी खासकर सीधी पेशाब कांड (Sidhi Urination case) के बाद जिस प्रकार से आरोपी प्रवेश शुक्ला के मकान पर बुलडोजर चला था उसके बाद विंध्य की जनता भाजपा से काफी नाराज चल रही थी। संघ और संगठन के सर्वे में भी विंध्य की जनता भाजपा से नाराज चल रही थी यही कारण है कि राजेन्द्र शुक्ला (Rajendra Shukla) को एक बार फिर मंत्री बनाया गया है। लेकिन ओबीसी वर्ग से गौरीशंकर बिसेन (Gaurishankar Bisen) और राहुल सिंह लोधी (Rahul Singh Lodhi) को मंत्री बनाया जाना लोगों के समझ में नहीं आ रहा है । लोगों को उम्मीद थी कि एक एससी वर्ग के विधायक को भी मंत्री बनाया जाएगा लेकिन ऐसा नही हुआ। भाजपा में कुछ नेताओं से बात हुई तो उनका कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार के माध्यम से नेताओं की व्यक्तिगत नाराजगी को दूर करने का प्रयास किया गया है। लेकिन कुछ विधायकों से बात हुई तो वो इस मंत्रिमंडल विस्तार से और ज्यादा नाराज नजर आए। मतलब साफ है भाजपा की सरकार ने कुछ नेताओं को खुश करने के चक्कर में बहुत से नेताओं को नाराज कर दिया है। जिस प्रकार से तीन मंत्रियों के शपथ में दो ओबीसी वर्ग के विधायकों को मंत्री बनाया गया है उससे भाजपा की सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ओबीसी वर्ग को भाजपा लगातार साधने का प्रयास कर रही है। एससी वर्ग को खुश करने के लिए भाजपा ने एससी वर्ग के संत सिरोमणि रविदास जी के मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ करवा दिया है। भाजपा मान कर चल रही है कि संत रविदास जी का मंदिर बनने के बाद एससी वर्ग भाजपा की ओर ही आएगा। भाजपा की योजना के मुताबिक राजेन्द्र शुक्ला को मंत्री बनाए जाने के बाद विंध्य का ब्राम्हण खुश हो जाएगा तो गौरीशंकर बिसेन और राहुल लोधी को मंत्री बनाए जाने के बाद बुंदेलखंड का ओबीसी वर्ग खुश हो जाएगा। भारतीय जनता पार्टी ने अपनी ओर से जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण साधने का प्रयास किया है अब देखना यही दिलचश्प होगा कि दो महीने बाद होने वाले विधानसभा में भाजप का यह दांव कितना सही साबित होता है।

26/8/2023196
तीसरे नाम ने अटकाया मंत्रिमंडल विस्तार
भोपाल

तीसरे नाम ने अटकाया मंत्रिमंडल विस्तार

शिवराज कैबिनेट (Shivraj Cabinet) का विस्तार फिलहाल अटक गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) दो दिन के लिए राजधानी से बाहर हैं। हांलाकि मंत्री बनने की आस में दो विधायक राजधानी में रुके हैं। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार दो विधायकों के नामों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण फिलहाल विस्तार नहीं हो पाया। गौरतलब है कि कैबिनेट के विस्तार की चर्चाएं पिछले कई दिन से चल रही है। इसके लिए पार्टी संगठन के कहने पर रीवा विधायक राजेन्द्र शुक्ला (Rajendra Shukla) और पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन (Gaurishankar Bisen) समर्थकों के साथ भोपाल पहुंचे हैं। इसी तरह टीकमगढ़ के खरगापुर विधायक राहुल लोधी (Rahul Lodhi) भी बुधवार को देर रात भोपाल पहुंचे थे। उन्हे उम्मीद थी कि गुरुवार को कभी भी मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। लेकिन ऐसा नहीं हो सका गुरुवार सुबह सीएम हाउस में तकरीबन डेढ़ घंटे संभावित नाम को लेकर चर्चा भी चली किंतु तीसरे और चौथा नाम पर सहमत नहीं बन सकी जिससे आम सहमति बनाए जाने तक बिस्तर डाल दिया गया। सूत्रों की मानें तो तो वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गी (Kailash Vijayvargiya) की ओर से विधायक रमेश मेंदोला (Ramesh Mendola) को मंत्री बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। इधर विधायक संजय पाठक (Sanjay Pathak) को भी मंत्री बनाए जाने के लिए भी कुछ नेताओं द्वारा पैरवी भी की गई है। लेकिन इन दोनों नाम पर सहमत नहीं बन पाई है। जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज दोपहर भोपाल लौटेंगे जबकि राज्यपाल 26 अगस्त की दोपहर को 2 दिन के लिए राजधानी से बाहर रहेंगे। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार अब राज्यपाल के वापस लौटने के बाद हो सकता है। हालांकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के वापस लौटने से लेकर शनिवार को राज्यपाल के भोपाल से बाहर जाने तक का समय है जिसमें विस्तार किया जा सकता है।

24/8/2023267