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सियासत में 'श्री राम' हर मोबाइल में दिखेगा राम मंदिर,प्रदेश भाजपा भव्य राम मंदिर की दिखाएगी झलक
चुनाव के समय भारतीय जनता पार्टी हमेशा भगवान राम की शरण में जाती रही है। मप्र विधानसभा चुनाव में भगवान राम को लगातार राजनीति में खींचा जाता रहा है लेकिन अब भाजपा एक कदम और आगे बढ़ते हुए भगवान राम के मंदिर की भव्य तस्वीर हर मोवाइल पर भेजने की रणनीति पर काम कर रही है। भारतीय जनता पार्टी ने इसके लिए ब्यापक रुप से तैयारी कर ली है। सबसे अहम बात यह है कि भाजपा के पास हर बूथ के मतदाताओं का डिजिटल डाटा मौजूद है और अब उस डाटा को भाजपा इस्तेमाल करने जा रही है। इसके साथ ही स्वामी रामभद्राचार्य की वह अपील भी मतदाताओं तक पहुंचाई जा रही है जिसमें वो कह रहे हैं कि 17 नवंबर को लोकतंत्र के महापर्व में उसको वोट न दें जिसके प्रिय राम नहीं हैं। चुनाव प्रचार के अंतिम दो दिन में भाजपा के कार्यकर्ता मतदाताओं से मुलाकात कर व्यक्तिगत पर्ची भी बांटेंगे (madhya pradesh elections)। कार्यकर्ता मतदाताओं को मतदान केन्द्र तक लाने- ले जाने के लिए पूरा रोडमैप भी खींचेंगे। वो मतदाताओं को पीएम मोदी की पाती और अयोध्या में राम मंदिर में मनाई गई भव्य दीपावली की फोटो भी मोबाइल पर उपलब्ध कराएंगे। भाजपा यह बताएगी कि 500 वर्ष बाद ऐसा सुअवसर आया है। जब राम लला अपने भव्य मंदिर में विराजने वाले हैं (ram mandir)। मंडल,जिला और संभाग स्तर पर भी भाजपा के कार्यकर्ता मोबाइल पर मतदाताओं से संवाद करेंगे ।

कांग्रेस को 'राम' से आपत्ति है या 'मंदिर' से स्पष्ट करें: सुधांशु त्रिवेदी
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी (sudhanshu trivedi) ने कांग्रेस पर करारा प्रहार कर राम के नाम और मंदिर पर सवाल किया है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि उसे राम से आपत्ति है अथवा मंदिर से। गौरतलब है कि कांग्रेस की तरफ से एक प्रेसवार्ता के दौरान बाबरी मस्जिद के विवादित ढांचे को गिराने पर शहीदी का नाम दिया गया था (babri masjid demolition)। कांग्रेस का इस प्रकार बयान आते ही भारतीय जनता पार्टी को मौका मिला और राम के नाम के साथ मंदिर के नाम पर कांग्रेस के ऊपर हमला बोल दिया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि जब न्यायालय ने मान लिया कि वहां पर राम मंदिर था और उसी को आधार मानते हुए मंदिर बनाने का आदेश दिया गया फिर भी कांग्रेस की ओर से विवादित ढांचे को शहीदी का नाम देने का तात्पर्य क्या है। कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि वो श्री राम का विरोध कर रही है या मंदिर का। सुधांशु त्रिवेदी ने साफ आरोप लगाया कि जब चुनाव आते हैं तब कांग्रेस के नेता मंदिर जाने लगते हैं खुद को हिंदू बताने लगते हैं लेकिन चुनाव खत्म होते ही कांग्रेस वालों के बयान बदल जाते हैं।

'सियासत में राम' भाजपा और कांग्रेस के बीच छिड़ा संग्राम,'सबके हैं राम'
चुनावी माहौल हो और राजनीतिक पार्टियों की जुवान पर भगवान श्रीराम का नाम ना हो ऐसा भारत देश में तो संभव नहीं है। समय-समय पर नेता यह बता देते हैं कि जब तक भगवान राम की क्रिपा उन पर है तब तक तो वो अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक ही सकते हैं। इसकी बानगी उस वक्त देखने को मिली जब खुद को हनुमान भक्त कहने वाले कमलनाथ (Kamal Nath) ने छिंदवाड़ा में नामांकन भरने के दौरान सियासी हुंकार भरते हुए कहा, भाजपा नेता तो ऐसे बता रहे हैं कि जैसे राम मंदिर (Ram Mandir Ayodhya) उनका हो। कमलनाथ के इस बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि कमलनाथ चुनावी हिंदू हैं और चुनाव देख कर छद्म हिंदुत्व राग अलापने लगते हैं। लेकिन देश की जनता जानती है कि उनकी ही पार्टी ने भगवान राम और राम सेतु के अस्तित्व को नकारा था। इस मामले में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) ने भी कांग्रेस पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण को लटकाने,भटकाने,अटकाने वाले और प्रभु श्रीराम को काल्पनिक बताने वाले कांग्रेस नेता किस मुंह से राम मंदिर पर बात कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं को राम मंदिर पर बात करने का अधिकार नहीं है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि बाबरी विध्वंस के बाद भाजपा की चार राज्य सरकारों को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने बर्खास्त कर दिया था। जिसमें मप्र की भाजपा सरकार भी शामिल थी। सरकार को बर्खास्त करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी असंबैधानिक बताया था। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अयोध्या में राम जन्मभूमि पर बाबरी मस्जिद बनाने का फिर से संकल्प लिया था। यह निर्णय लेने वाली सरकार में सनातन विरोधी कमलनाथ प्रमुखता से शामिल थे। गुरुवार को केन्द्रीय मंत्री मिनाक्षी लेखी (Meenakshi Lekhi) ने भी कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि कन्या पूजन को नौटंकी बताने वाले कभी भारतीय संस्कृति और सनातन के पक्ष में नहघं हो सकते। कांग्रेस में कभी महिलाओं का सम्मान नहीं हुआ। जबकि भाजपा सरकार ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए कानून बनाया। तीन तलाक की कुप्रथा समाप्त की। प्रदेश में पुलिस भर्ती में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया है।