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संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, नियमितीकरण पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया अहम फैसला
देश की सर्वोच्च आदलत ने संविदा (samvida employees) और अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। दरसअल संविदा कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बारहमासी/स्थायी प्रकृति के काम करने के लिए नियोजित श्रमिकों को अनुबंध श्रम (विनियमन और उन्मूलन) अधिनियम, 1970 के तहत उन्हें सिर्फ स्थायी नौकरी के लाभ से वंचित करने के लिए अनुबंध श्रमिक नहीं माना जा सकता है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के मुताबिक जस्टिस नरसिम्हा ने अपने आदेश में हाई कोर्ट और इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें रेलवे लाइन के किनारे सफाई करने वाले मजदूरों को संविदा कर्मी से हटाकर स्थायी कर्मी का दर्जा और वेतन-भत्ते का लाभ देने का आदेश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि रेलवे लाइन के किनारे गंदगी हटाने का काम ना सिर्फ नियमित है बल्कि बारहमासी और स्थायी प्रकृति का है। कोर्ट ने कहा कि इन कारणों से अनुबंध पर बहाल कर्मचारियों को स्थायी किया जाना चाहिए। दरअसल, महानदी कोलफील्ड्स ने इस तरह के 32 कॉन्ट्रक्ट कर्मचारियों में से 19 की नौकरी परमानेंट कर दी थी, जबकि 13 को अनुबंध कर्मी के रूप में ही छोड़ दिया था, जबकि सभी कर्मियों की ड्यूटी एक समान और एक ही प्रकृति की थी। इसके खिलाफ यूनियन ने केंद्र सरकार और महानदी कोलफील्ड्स को ज्ञापन सौंपा लेकिन जब कार्रवाई नहीं हुई तो इंडस्ट्रियल ट्रबियूनल में मामला पहुंचा, जहां ट्रिब्यूनल ने सभी 13 अनुबंध कर्मियों को नियमित करने का आदेश दिया। बाद में उसी फैसले को हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा, जिसके खिलाफ महानदी कोलफील्ड्स ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन वहां से भी उसे निराशा हाथ लगी है।

संविदा कर्मियों को भाजपा सरकार ने दिया धोखा,नियमित के समान वेतन और सुविधा का किया वादा,आज तक नहीं किया पूरा
विधानसभा चुनाव (madhya pradesh elections) से पहले प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) ने जमकर पंचायतों का आयोजन किया। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने अलग-अलग विभागों में कार्यरत संविदा कर्मियों (samvida workers) की महापंचायत बुलाई। सभी संविदा कर्मियों को बड़े-बड़े प्रलोभन दिए गए और उसका फायदा भाजपा को वोट के रुप में हुआ। सभी संविदा कर्मियों ने एकमुस्त भाजपा को वोट दिया और उसका परिणाम ये निकला की भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ प्रदेश में सरकार बनाई। जबकि सर्वे और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने का दावा नहीं किया जा रहा था। लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा के बाद प्रदेश के अलग-अलग विभागों में पदस्थ संविदा कर्मियों ने शिवराज सिंह चौहान के वादे पर विश्वास किया और वोट दिया। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के वादे के मुताबिक संविदा कर्मियों को नियमित कर्मचारियों के समान वेतन और अन्य जितनी भी शासकीय सुविधाएं हैं वो सभी देने का वादा किया गया था। इसके लिए फर्जी आदेश भी जारी किए गए जिससे संविदा कर्मियों को लगे कि सरकार अपने किए वादे पर कायम है और प्रक्रिया जारी है। घोषणा के कुछ समय बाद चुनाव आचार संहिता लग गई तब तक संविदा कर्मी यह ढाढ़स बांध कर बैठे रहे कि चुनाव आचार संहिता लगने के कारण सरकार उनको वेतन और सुविधाएं नहीं दे पार रही। लेकिन इस बीच सरकार ने भले अपना वादा पूरा न किया हो लेकिन संविदा कर्मियों ने अपना वादा भाजपा के पक्ष में वोट देकर निभाया और प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाई। सरकार तो बनी लेकिन मुख्यमंत्री बदल गए जिसके बाद प्रशासनिक अमले ने संविदा कर्मियों की सुध नहीं ली। आज तक संविदा कर्मियों से किया वादा पूरा नहीं हुआ। खुले तौर पर कहा जाए तो वोट के नाम पर भाजपा की सरकार ने संविदा कर्मियों को ठगने का काम किया है। अब सभी संविदा कर्मी लोकसभा चुनाव में अपना बदला लेने की योजना बना रहे हैं।

एमपी के संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, कर्मचारियों के वेतनमान में 8% की वृद्धि
मप्र के संविदा कर्मचारियों (samvida workers) के लिए बड़ी खबर है, Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार कर्मचारियों के वेतनमान में 8% की वेतन वृद्धि होने जा रही है। प्रदेश सरकार अब शासकीय कर्मचारियों और संविदा कर्मचारियों (samvida) के वेतन वृद्धि और महंगाई भत्ते में वृद्धि कर रही है। ताकि प्रदेश में शासकीय और संविदा कर्मचारियों को इंक्रीमेंट का लाभ मिल सके। मध्य प्रदेश में शासकीय और संविदा कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि के लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं। इसके लिए कर्मचारियों को महंगाई भत्ता और एरियर भी दिया जाएगा। प्रदेश सरकार ने अब शासकीय और संविदा कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि करने के लिए निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही बताया गया है कि महंगाई भत्ते में भी वृद्धि की जाएगी और कर्मचारियों को एरियर भी दिया जाएगा।प्रदेश में 750000 शासकीय कर्मचारी हैं और 250000 संविदा कर्मचारी हैं। अब उनके वेतन वृद्धि और महंगाई भत्ते की कैलकुलेशन की जा रही है। वित्त विभाग ने बताया कि इन कर्मचारियों को पिछला महंगाई भत्ता और एरियर भी देना होगा। बता दे की कर्मचारियों की महंगाई भत्ते में 8% की वृद्धि की जाने के लिए कहा गया है। मध्य प्रदेश सरकार में अभी कर्मचारियों को 42% महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। और केंद्रीय कर्मचारियों को 1 जनवरी 2024 से 50% महंगाई भत्ता दिया जाएगा। आपको जानकारी लिए बता दें कि मध्य प्रदेश के कर्मचारियों और केंद्र के कर्मचारियों के बीच 8% महंगाई भत्ते का अंतर देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश में प्रदेश सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले कर्मचारियों को 4% महंगाई भत्ता देने की बात कही थी। लेकिन कर्मचारियों को इसका भुगतान नहीं किया गया।

खतरे में लाखों संविदा कर्मियों का भविष्य,मोहन सरकार ने संविदा कर्मियों के सामने रखी बड़ी शर्त,अब क्या करेंगे संविदा कर्मी
प्रदेश भर में करीब 38 विभागों में काम कर रहे लाखों की संख्या में संविदा कर्मियों (samvida workers) के सामने मोहन सरकार (mohan government) ने उनके भविष्य को चिंता खड़ी कर दी है। अभी तक यह संविदा कर्मी (Samvida) सिर्फ इस बात को लेकर परेशान थे कि रिटायर होने के बाद उन्हे पेंशन नहीं मिलेगी तो उनका गुजारा कैसे होगा। उससे पहले ही मोहन सरकार ने संविदा कर्मियों को खुद के भविष्य के लिए सोचने पर मजबूर कर दिया है। दरअसल संविदा कर्मियों को नियमित होना है तो उन्हे परीक्षा में उत्तीर्ण होना होगा। और सबसे बड़ी बात यह है कि परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए उन्हे कम से कम 50 फीसदी अंक लाना अनिवार्य होगा। अगर कोई अभ्यर्थी 50 फीसदी से कम अंक लेकर आता है तो उसे नौकरी से भी निकाला जा सकता है। मतलब साफ है अलग-अलग विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों को अगर नौकरी में बने रहना है तो उन्हे किसी भी हालत में 50 फीसदी से ज्यादा का अंक लाना अनिवार्य होगा। करीब तीन घंटे के पेपर में डेढ़ सौ अंक लाने होंगे। अगर कोई अभ्यर्थी 50 पीसदी से कम अंक लेकर आया तो उसे अनुत्तीर्ण माना जाएगा।

कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना का सख्त निर्देश,संविदा कर्मचारियों की वेतन वृद्धि के आदेश तत्काल जारी करें
किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंसाना (aidal singh kansana) ने आत्मा प्रोजेक्ट में कार्य कर रहे संविदा कर्मियों (samvida) को मकर संक्रांति पर सौगात दी है। उन्होंने संविदा कर्मियों (samvida recruitment) के मानदेय में वृद्धि किए जाने निर्देश दिए है। मंत्री कंसाना ने तत्काल आदेश जारी करने को कहा है। कृषि मंत्री कंसाना ने बताया है कि वर्ष 2023-24 के लिए आत्मा प्रोजेक्ट में कार्य कर रहे सहायक अमले के मानदेय में वृद्धि को सहमति प्रदान कर दी गई है। इससे सहायक अमले के वेतन में 1270 रुपए से लेकर लगभग 2333 रुपए तक की वृद्धि होगी। आत्मा प्रोजेक्ट के सहायक अमले में कार्य कर रहे हैं कंप्यूटर प्रोग्रामर के वेतन में 1270 रुपए, लेखापाल सह लिपिक को 1731 रुपए, असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर को 1910 रुपए और ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर को 2333 रुपए का लाभ होगा।

संविदा कर्मियों से वोट लेने के बाद भूली भाजपा की सरकार,खुद को ठगा महसूस कर रहे संविदा कर्मी
विधानसभा चुनाव के पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chluhan) ने जमकर पंचायतें लगाईं और खूब घोषणाएं की। ऐसा लगा कि अब प्रदेश में संविदा कल्चर (samvida teachers) समाप्त हो जाएगा और पहले की तरह सबकुछ ठीक हो जाएगा। और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की बातों में आ कर संविदा कर्मियों (samvida) ने भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में जमकर वोटिंग की। वोटिंग का प्रतिशत इतना बढ़ा की जिस भाजपा को लोग कह रहे थे कि इस बार किसी भी सूरत में सरकार नहीं बनेगी उसी भाजपा ने प्रदेश में प्रचंड बहुमत प्राप्त कर फिर से सरकार बना ली। सरकार बनते ही भाजपा ने पहले मुख्यमंत्री बदला और जब मुख्यमंत्री बदला तो संविदा कर्मियों की किस्मत भी बदल गई। जिस प्रकार से तत्कालीन सीएम शिवराज ने संविदा महा पंचायत में बड़ी-बड़ी घोषणाएं की वो कुछ नहीं हुआ। अब संविदा कर्मी फिर दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हैं। ग्रेड-पे के नाम पर सभी संविदा कर्मियों को ठग लिया गया और उनसे वोट भी ले लिया गया है। मांगे पूरी नहीं होने के बाद संविदा कर्मियों स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ला को इंदौर में ज्ञापन सौंपा है। जहां उन्होने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ज्ञापन के दौरान संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने स्वास्थ्य मंत्री से कहा है कि उन्हे अगस्त के महीने से बढ़ा हुआ वेतन देने की बात कही गई थी जो आज तक पूरी नहीं हुई है।