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'शिव' की सरकार में आए संकट का मोचन करते थे डॉ. नरोत्तम मिश्रा, मोहन के संकट का कौन करेगा 'मोचन'

पदोन्नति मामले में लामबंद हो रहे शासकीय कर्मचारी,सभी विभागों में एक जैसी व्यवस्था लागू करने की मांग

संविदा कर्मियों की समस्या को कर्मचारी आयोग करेगा दूर,ग्रेड-पे पर होगा जल्द फैसला,तत्कालीन शिवराज सरकार के आदेश का होगा पालन

तत्कालीन शिवराज सरकार के फैसले बदलने की कवायद तेज,घाटे में चल रहे निगम-मंडल हो सकते हैं बंद,मांगी जानकारी

मोहन यादव ने चुपके से बंद की 'मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना'
तत्कालीन शिवराज सरकार (shivraj government) में प्रदेश के किसानों को राहत देने के लिए 'मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना' (mukhyamantri kisan kalyan yojana) शुरु की गई थी जिसके तहत पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) साल में तीन बार दो-दो हजार की तीन किस्त किसानों के खाते में डालते थे जो साल में कुल छह हजार रुपये किसानों को मिलती थी। केन्द्र सरकार की तरफ से भी किसान सम्मान निधि संचालित की जा रही है उस योजना में भी दो-दो हजार रुपये की साल में कुल तीन किस्ते ट्रांसफर की जाती हैं। इस प्रकार केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से किसानों को साल में 12 हजार रुपये खेती के लिए दिए जाते थे। लेकिन प्रदेश में सीएम बदलने के बाद एमपी सरकार की ओर से संचालित की जा रही 'किसान कल्याण' योजना को चुपके से बंद कर दिया गया। किसानों को इस बात की भनक तक नहीं लगी और प्रदेश की राज्य सरकार ने इतनी बड़ी योजना को बंद कर दिया है। इस बात से साफ दिखता है कि लाड़ली बहना योजना (ladli behna yojana) को संचालित करने के लिए अलग-अलग योजनाओं को बंद किया जा रहा है। और को इसकी भनक तक नहीं लग पा रही है। इतना ही नहीं कर्मचारियों का चार फीसदी डीए छह महीने से लंबित है लेकिन राज्य सरकार लाड़ली बहना योजना के कारण उसका भुगतान भी नहीं कर पा रही है।

प्रसूताओं का 'मोहन' सरकार ने छोड़ा साथ,56 करोड़ रुपये देना बांकी,भटकने को मजबूर प्रसूताएं
मप्र की तत्कालीन शिवराज सरकार (shivraj government) ने मुख्यमंत्री प्रसूति सहायता योजना (mukhyamantri prasuti yojana) शुरु की थी। लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद इस महत्वाकांक्षी योजना को शायद मोहन सरकार भूल गई है। Mukhabirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश की 35 हजार प्रसूताओं के 55 जिलों में 56 करोड़ रुपये अटके पड़े हैं। पिछले तीन माह से इन्हे राशि नहीं मिली है। बताया जा रहा है कि योजना के तहत प्रसूताओं को दी जाने वाली राशि का बजट राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) को अक्टूबर से नहीं मिला है। जिसके कारण प्रदेश भर के जिला अस्पताल कार्यालय में प्रसूताओं की सहायता राशि के लिए प्रकरण बड़ी संख्या में लंबित हो गए हैं। भोपाल में करीब 385,नर्मदापुरम में 1050 और बैतूल में 1346 प्रकरण लंबित हैं इसी प्रकार प्रदेश के सभी जिलों की हालत है। प्रसूताओं के परिजन राशि के लिए लगातार चक्कर काट रहे हैं। और अधिकारी उन्हे बजट आने पर राशि खाते में डालने का आश्वासन दे रहे हैं। गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रसूति सहायता योजना शुरु की थी। इसमें सरकारी अस्पताल में प्रसव पर महिला को 16 हजार रुपये दिये जाते हैं। योजना के तहत प्रसव से पहले पोषण के लिए चार हजार और प्रसव के बाद 12 हजार रुपये जच्चा-बच्चा के लिए मिलते हैं। प्रदेश में कुपोषण को दूर करने और हाई रिस्क महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए शिवराज सरकार ने प्रसूता सहायता योजना शुरु की थी। इसमें जच्चा-बच्चा के लिए लड्डू सहित अन्य पोषण आहार दिया जाता है।

मप्र सरकार पर वित्तीय संकट,कई योजनाओं पर लगा ब्रेक
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 जीतने के लिए शिवराज सरकार (shivraj government) ने सरकारी खजाना खोल दिया था। अब खजाना खाली हो गया है। मध्य प्रदेश पर 3.31 लाख करोड़ का लोन है और अब केवल 15000 करोड़ की लिमिट बची है। नतीजा सरकार ने मध्य प्रदेश के 38 विभागों द्वारा संचालित योजनाओं पर रोक लगा दिए। मध्य प्रदेश शासन (mp government) के वित्त विभाग ने 38 विभागों की योजनाओं पर रोक लगाते हुए, निर्देशित किया है कि सभी विभाग राजस्व संग्रहण के काम को प्राथमिकता पर रखें। जिन योजनाओं पर रोक लगाई गई है, उनमें नगरीय प्रशासन विभाग की महाकाल परिसर विकास योजना, मेट्रो ट्रेन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा संचालित तीर्थ दर्शन योजना भी शामिल है। इसके अलावा अपंजीकृत निर्माण मजदूरों को अंत्येष्टि एवं अनुग्रह राशि देने की योजना भी समाप्त कर दी गई है। गृह विभाग के अंतर्गत थानों के सुदृढ़ीकरण, परिवहन विभाग की ग्रामीण परिवहन नीति के क्रियान्वयन, खेल विभाग के खेलो इंडिया एमपी, सहकारिता विभाग की मुख्यमंत्री ऋण समाधान योजना, लोक निर्माण विभाग की विभागीय संपत्तियों के संधारण, स्कूल शिक्षा विभाग की निशुल्क पाठ्य सामग्री के प्रदाय, प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लेपटाप प्रदाय, एनसीसी के विकास एवं सुदृढीकरण, जनजातीय कार्य विभाग टंट्या भील मंदिर के जीणोद्धार, उच्च शिक्षा विभाग की योजना, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के नए आईटी पार्क की स्थापना, विमानन विभाग की भू-अर्जन के लिए मुआवजा, ग्रामीण विकास विभाग की पीएम सड़क योजना में निर्मित सड़कों का नवीनीकरण और महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए भवन निर्माण सहित अन्य योजनाओं में व्यय बिना वित्त विभाग की अनुमति के नहीं किया जा सकेगा। अपंजीकृत निर्माण मजदूरों को अंतिम संस्कार हेतु मदद वाली योजना भी बंद मध्य प्रदेश के अपंजीकृत निर्माण मजदूरों को अंत्येष्टि एवं अनुग्रह राशि नहीं दी जाएगी। नई राज्य सरकार ने नौ साल पहले शिवराज सरकार के समय बनाई योजना, जिसमें अपंजीकृत निर्माण श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए उनकी दुर्घटना में मृत्यु पर तीन हजार रुपये अंत्येष्टि सहायता एवं एक लाख रुपये अनुग्रह राशि देने का प्रविधान था, इसे भी बंद कर दिया है। मध्य प्रदेश श्रम विभाग के अंतर्गत कार्यरत भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मंडल ने चार दिसंबर 2014 को मंडल में अपंजीकृत निर्माण श्रमिकों को भी सामाजिक सुरक्षा देने की योजना जारी की थी जिसमें निर्माण श्रमिकों को उनकी मृत्यु पर तीन हजार रुपये अंत्येष्टि सहायता, निर्माण कार्य के दौरान घटित दुर्घटना में मृत्यु होने पर एक लाख रुपये एवं दुर्घटना में स्थाई अपंगता आने पर 75 हजार रुपये अनुग्रह राशि देने का प्रविधान था। 13 जनवरी 2017 में इस योजना में बदलाव कर प्रविधान किया गया था कि दुर्घटना में मृत्यु होने पर चार लाख रुपये एवं दुर्घटना में स्थाई अपंगता आने पर दो लाख रुपये अनुग्रह राशि दी जाएगी। अब यह योजना पूरी तरह बंद कर दी गई है।

चुनाव आचार संहिता लगने से पहले एक दिन में 53 हजार करोड़ से अधिक का लोकार्पण और भूमिपूजन
प्रदेश की शिवराज सरका हमेशा यही कहती रही है कि वो विकास के माडल पर ही जनता से वोट मांगेगी और प्रदेश में पांचवी बार भाजपा की सरकार बनाएगी (Shivraj Government)। इसकी बानगी उस वक्त देखने को मिली जब ठीक चुनाव आचार संहिता (Model of Conduct) से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने एक दिन में 53 हजार करोड़ से ज्यादा का शिरान्याश और भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के गुफा मंदिर को भी बड़ी सौगात दी और गुफा लोक बनाने का ऐलान किया साथ में सीएम शिवराज ने कहा कि 35 करोड़ की लागत से संत निवास का भी निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद माना जा रहा है कि गुफा मंदिर एक प्रसिद्ध स्थल के रुप में निर्मित होगा जहां देश भर के दर्शनार्थी और पर्यटक पहुंच सकेंगे। वहीं सीएम शिवराज की घोषणाओं और लोकार्पण पर कांग्रेस के प्रदेश मीडिया अध्यक्ष केके मिश्रा (KK Mishra) ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि एक दिन में मुख्यमंत्री ने 53 हजार करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया है तो 18 साल तक ये क्या कर रहे थे। केके मिश्रा ने यह भी आरोप लगाया कि लोकार्पण और भूमिपूजन तो ठीक है लेकिन पहले सरकार ये बताए कि क्या सरकार के पास 53 हजार करोड़ रुपये हैं जिससे इतने सारे विकास कार्य किए जा रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि आदर्श आचार संहिता लगने से पहले सरकार एक दिखावा करती है और जिस प्रकार दिया बुझने से पहले खूब फड़फड़ाता है ठीक वही हालत वर्तमान में भाजपा सरकार की है क्योंकि उन्हे भविष्य की जानकारी हो चुकी है कि आगे क्या होने वाला है।

हड़ताल कर रहे पटवारियों के लिए सरकार हुई सख्त,कार्रवाई के लिए जारी हुआ आदेश
प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हड़ताल कर रहे पटवारियों पर प्रदेश सरकार (MP Government) सख्त हो गई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने एक आदेश जारी कर कहा है कि 28 अगस्त से हड़ताल कर रहे पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए (Patwari Strike)। आदेश में कहा गया है कि प्रतिदिन 12 बजे तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले पटवारियों (Patwari MP) की सूची तैयार कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। पत्र में कहा गया है कि कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। गौरतलब है कि प्रदेश में हड़ताल कर रहे यह पटवारी, 25 साल से प्रमोशन न मिलने, ग्रेड-पे न बढ़ने, समयमान वेतनमान न दिए जाने, खाली पदों पर भर्ती न कर अतिरिक्त काम कराने और उसका वेतन न देने, यात्रा-मकान भत्ता जैसे सुविधाएं नहीं बढ़ाने की वजह से खासा नाराज हैं। उनकी इन मांगों को पूरा नहीं किया जा रहा है।