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सीएम शिवराज करेंगे हरिद्वार में चिंतन,जाते-जाते पूछा कांग्रेस की कहां है सूची,वहां तो चल रही लट्ठम-लट्ठ
भारतीय जनता पार्टी की एक और सूची (BJP Candidate list) जारी होते ही सीएम शिवराज (Shivraj Singh Chouhan) ने केंद्रीय नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि प्रदेश ने जो अनुशंसाएं भेजी थी उसी के अनुरूप सूची में घोषित नाम आए हैं। अब हमारे कुल 230 में से 136 उम्मीदवार घोषित हो चुके हैं बाकी सूची भी जल्द ही आएगी। सीएम शिवराज ने इस दौरान कहा कि कांग्रेस की सूची कहां है अब तो चुनाव की तारीख भी आ गई है लेकिन कांग्रेस की सूची का पता नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे उम्मीदवार मैदान में हैं भारतीय जनता पार्टी की तैयारियां चल रही है लेकिन कांग्रेस में तो लट्ठम - लट्ठा मची हुई है। हम अपने कार्यकर्ताओं के साथ केंद्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में चुनाव के मैदान में उतर चुके हैं। अपने कार्यकर्ताओं के साथ अपने अस्तित्व की संपूर्ण क्षमता झोंककर हम लोग काम करेंगे और निश्चित तौर पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाएंगे। क्योंकि यह प्रदेश के और प्रदेश की जनता के हित में है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हरिद्वार और ऋषिकेश जा रहा हूं कल दिन भर मुलाकात और चिंतन दोनों करूंगा। परसों सवेरे लौटूंगा और चुनाव अभियान में हम पूरी ताकत के साथ भिड़ जाएंगे। सूची जारी करने के लिए केन्द्रीय नेतृत्व का धन्यवाद। गौरतलब है कि भाजपा ने अब तक अपने 136 उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है जबकि पहले कांग्रेस कह रही थी कि वो चुनाव के छह महीने पहले अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर देगी लेकिन अभी तक एक भी सूची जारी नहीं होने के कारण अब भाजपा के नेता कांग्रेस (MP Congress) पर लगातार हमला करने लगे हैं।

भाजपा ने 57 प्रत्याशियों की चौथी सूची की जारी
भारतीय जनता पार्टी ने आदर्श आचार संहिता (Model code of conduct) लागू होते ही 57 नामों की चौथी सूची जार कर दिया है (BJP candidate list)। इस सूची में सीएम शिवराज सिंह चौहान बुंदनी, डॉ. नरोत्तम मिश्रा दतिया, भूपेन्द्र सिंह खुरई, मंत्री गोपाल भार्गव,मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर सहित कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल कर उन्हें क्लीनचिट दे दिया है। अब तक भाजपा 136 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है। जबकि प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी (MP Congress) में अब भी बैठकों का दौर जारी है लेकिन अभी तक कांग्रेस ने उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की है। भाजपा ने एक अभियान भी शुरु किया है अबकी दिवाली कमल वाली (abki diwali kamal wali)। मतलब साफ है कि भाजपा विकास के मुद्दों को लेकर जनता के बीच एक बार फिर जा रही है। और विकास के आधार पर ही भाजपा जनता से वोट की अपील कर रही है।

अतिथि विद्वानों को अब एक दिन के दो हजार रुपये मिलेंगे
प्रदेश के सरकारी महाविद्यालय में कार्यरत अतिथि विद्वानों को अब 1500 से बढ़कर प्रतिदिन दो हजार रुपये मानदेय मिलेगा (MP guest teachers) । वही इनका अधिकतम मानदेय प्रतिमाह 50 हजार रुपये होगा। इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। यह एक अक्टूबर से लागू होगा। इससे प्रदेश के 4500 अतिथि विद्वानों को लाभ मिलेगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने 11 सितंबर को अतिथि विद्वानों की महापंचायत में 50 हजार रुपये निश्चित मासिक वेतन देने की घोषणा की थी। हालांकि अतिथि विद्वानों का कहना है कि विभाग द्वारा जारी आदेश में प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय मिलने से 50 हजार रुपये से कम मानदेय होगा। इसी बीच कॉलेज में नियमित शिक्षकों के रिक्त पदों पर अतिथि विद्वानों को आमंत्रित करने के आदेश जारी किए गए हैं। आवेदन ऑनलाइन होंगे। इस बार अतिथि विद्वानों को साल में 13 दिन का आकस्मिक और तीन दिन का ऐच्छिक अवकाश दिया जाएगा। प्राचार्य को निर्देशित किया गया है कि अतिथि विद्वान के कार्य पर उपस्थित होने पर उसकी उपस्थिति इस दिन में शाम 5:30 बजे तक अनिवार्य रूप से ऑनलाइन मॉड्यूल में दर्ज किया जाए। साथी मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की सहायक प्राध्यापक, क्रीड़ा अधिकारी, और ग्रंथपाल भर्ती परीक्षा में चयनितों के लिए 25 प्रतिशत पद आरक्षित होंगे। फालेन आउट (विस्थापित) अतिथि विद्वान च्वाइस फिलिंग से भर्ती में शामिल होंगे।

पूरे देश में ट्विटर पर ट्रेंड किया युवाओं का कैंपेन,युवा मांगे रोजगार
प्रदेश के चयनित पटवारियों (mp patwari) द्वारा ट्विटर पर युवा मांगे रोजगार अभियान चलाया गया जो की पूरे देश में ट्रेंड किया और कुछ ही घंटो में 80 हजार से ज्यादा युवाओं ने ट्वीट किया। इस कैंपेन की कुछ प्रमुख मांगे थी चयनित पटवारियों को नियुक्ति, चयनित सब इंजीनियर्स को नियुक्ति, 51000 पद वृद्धि (वर्ग 3), MBBS PMS OBC को स्कॉलरशिप, बेरोजगारी से मुक्ति, समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया (MPSI, वनरक्षक, महिला पर्यवेक्षक, जेल प्रहरी एवं समस्त सरकारी भर्तियां) इस कैंपेन में मध्यप्रदेश के हजारों युवाओं ने हिस्सा लिया (Patwari News)। युवा हल्ला बोल के प्रदेश अध्यक्ष अरुणोदय सिंह परमार (Arunoday Singh Parmar) ने इस मौके पर कहा की आज का कैंपेन पूरे देश में ट्रेंड किया यह मध्यप्रदेश के युवाओं के आक्रोश को बताता है। युवा अब अपने रोजगार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। आज मध्यप्रदेश युवा हल्ला बोल द्वारा "युवा मांगता गारंटी" अभियान शुरू किया गया है जिसका पोस्टर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। इस अभियान के तहत हम मध्यप्रदेश के युवाओं से उसे वोट देने का आह्वान करेंगे जो पहली कैबिनेट बैठक में युवाओं के इन मुद्दों चयनित पटवारियों को नियुक्ति, चयनित सब इंजीनियर्स को नियुक्ति, 51000 पद वृद्धि (वर्ग 3), MBBS PMS OBC को स्कॉलरशिप, बेरोजगारी से मुक्ति, समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया (MPSI, वनरक्षक, महिला पर्यवेक्षक, जेल प्रहरी एवं समस्त सरकारी भर्तियां) का समाधान करने की गारंटी देगा। परमार ने यह भी कहा की नियुक्ति नहीं तो वोट नहीं, स्कॉलरशिप नहीं तो वोट नहीं, 51 हजार पद वृद्धि नहीं तो वोट नहीं, बेरोजगारी से मुक्ति नहीं तो वोट नहीं, कुल मिला कर अगर युवा हितों की बात नहीं तो वोट नहीं।

'चुनाव लडूं या नहीं लडूं' मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जनता से कर रहे सवाल
प्रदेश की सियासत में इस वक्त एक ही सवाल है कि सीएम शिवराज चुनाव लड़ेंगे या नहीं। यही सवाल कई मंचों से सीएम शिवराज (Shivraj Singh Chouhan) प्रदेश की जनता से भी पूछते नजर आए हैं कि 'चुनाव लडूं या नहीं लडूं' गौरतलब है भारतीय जनता पार्टी ने अब तक जारी अपनी तीन सूचियों में 79 नामों की घोषणा की है जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम शामिल नहीं है। इसी लिए हर जुवान पर यही सवाल है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चुनाव लड़ेंगे या नहीं और लड़ेंगे तो कहां से लड़ेंगे। दरअसल भाजपा ने 103 विधानसभा सीटों को आकांक्षी सीट का नाम दिया था जिसमें भाजपा के विधायक नहीं थे। उन 103 में भाजपा ने 79 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की हैं इनमें तीन ऐसी सीटें भी हैं जहां भाजपा के विधायक थे,इनमें सीधी, मैहर और नरसिंहपुर शामिल है जहां भाजपा ने अपने उम्मीदवारों को बदला है। इस बीच प्रदेश में यही बात जोर पकड़ रही है कि सीएम शिवराज (Shivraj Government) का क्या होगा। बात को बल उस वक्त और ज्यादा बल मिला जब भाजपा ने जन आशीर्वाद यात्रा (Jan Aashirwad Yatra) निकाली और सभी पांचों यात्राओं का अलग-अलग नेताओं को नेतृत्व सौंपा गया। पहले जब भी जन आशीर्वाद यात्रा निकला करती थी तो उसका नेतृत्व अकेले सीएम शिवराज करते थे लेकिन इस बार भाजपा ने पांच अलग-अलग जन आशीर्वाद यात्रा निकाली और सभी यात्राओं का नेतृत्व भी अलग-अलग नेताओं ने किया इसी लिए प्रदेश की जनता में संशय है कि सीएम शिवराज चुनाव लड़ेंगे या नहीं वहीं सीएम शिवराज खुद जनता से पूंछ रहे हैं कि 'चुनाव लडूं या नहीं'

चुनाव आचार संहिता लगने से पहले एक दिन में 53 हजार करोड़ से अधिक का लोकार्पण और भूमिपूजन
प्रदेश की शिवराज सरका हमेशा यही कहती रही है कि वो विकास के माडल पर ही जनता से वोट मांगेगी और प्रदेश में पांचवी बार भाजपा की सरकार बनाएगी (Shivraj Government)। इसकी बानगी उस वक्त देखने को मिली जब ठीक चुनाव आचार संहिता (Model of Conduct) से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने एक दिन में 53 हजार करोड़ से ज्यादा का शिरान्याश और भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के गुफा मंदिर को भी बड़ी सौगात दी और गुफा लोक बनाने का ऐलान किया साथ में सीएम शिवराज ने कहा कि 35 करोड़ की लागत से संत निवास का भी निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद माना जा रहा है कि गुफा मंदिर एक प्रसिद्ध स्थल के रुप में निर्मित होगा जहां देश भर के दर्शनार्थी और पर्यटक पहुंच सकेंगे। वहीं सीएम शिवराज की घोषणाओं और लोकार्पण पर कांग्रेस के प्रदेश मीडिया अध्यक्ष केके मिश्रा (KK Mishra) ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि एक दिन में मुख्यमंत्री ने 53 हजार करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया है तो 18 साल तक ये क्या कर रहे थे। केके मिश्रा ने यह भी आरोप लगाया कि लोकार्पण और भूमिपूजन तो ठीक है लेकिन पहले सरकार ये बताए कि क्या सरकार के पास 53 हजार करोड़ रुपये हैं जिससे इतने सारे विकास कार्य किए जा रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि आदर्श आचार संहिता लगने से पहले सरकार एक दिखावा करती है और जिस प्रकार दिया बुझने से पहले खूब फड़फड़ाता है ठीक वही हालत वर्तमान में भाजपा सरकार की है क्योंकि उन्हे भविष्य की जानकारी हो चुकी है कि आगे क्या होने वाला है।

स्थायी रोजगार के लिए भटक रहे प्रदेश के 26 हजार स्वच्छाग्राही कर्मी,नोटा पर वोट देने को मजबूर
प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने अलग-अलग वर्गों को खुश करने के तमाम प्रयास किए लेकिन उनमें कुछ वर्ग मुख्यमंत्री की नजर में नहीं आए और वो भटकने को मजबूर हैं। ऐसे ही प्रदेश भर में काम कर रहे करीब 26 हजार स्वच्छाग्राही कर्मी (swacchagrahi workers) आज भी न्याय के लिए भटक रहे हैं। एक मामूली से पगार पर काम करने वाले इन स्वच्छाग्राही कर्मियों को जब पता चला कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंचायतों में काम करने वाले रोजगार सहायकों की नौ हजार से सीधे 18 हजार रुपये पगार कर दी और संविदा कर्मियों (samvida workers) को नियमित के समान वेतन और सुविधा कर दी तो स्वच्छाग्राहियों ने भी खुद के लिए न्याय की गुहार लगाना शुरु कर दिया। स्वच्छाग्राही संगठन सी.एफ. टी ने केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) के बंगले से लेकर कई मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों के पास गुहार लगाई लेकिन नतीजा शिफर ही रहा। थक हार कर स्वच्छाग्राही संगठन के पदाधिकारी पवन परमार बीजेपी प्रदेश कार्यालय भी पहुंचे लेकिन वहां भी उन्हे सुनने वाला कोई नहीं मिला। अब इस संगठन का कहना है कि सरकार इनके लिए उचित फैसला नहीं लेती है तो प्रदेश भर में इनकी 26 हजार संख्या है तो वो और उनके परिवार के सभी सदस्य नोटा की बटन दबाएंगे (NOTA)। गौरतलब है कि इनकी नियुक्ति राज्य सरकार के निर्देश पर ग्राम पंचायत में शिक्षित ब्यक्तियों का चयन कर जनपद भेजा गया था। इन स्वच्छाग्राहियों ने कोरोनाकाल में वालेंटियर का कार्य किया,ई.ओ.एल कार्य, एस. एल.डब्ल्यु का योजना का कार्य विशेषकर मप्र में स्वच्छता मिशन अंतर्गत मध्यप्रदेश के समस्त पंचायतों को ओडीएफ कराने में स्वच्छाग्राहियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह स्वच्छाग्राही महज 150 रुपये प्रति दिन के हिसाब से काम करते हैं महीने में इन्हे महज तीन हजार रुपये मनदेय दिया जाता है क्योंकि इनसे काम भी सिर्फ 20 दिन लिया जाता है। लिहाजा इतने कम मानदेय में इनका गुजारा नहीं हो पा रहा है लिहाजा इनकी सरकार से गुजारिश है कि इनका मानदेय बढ़ाया जाए और नियमित कर्मचारियों की भांति इनसे काम लिया जाए जिससे ये अपने परिवार का ठीक तरीके से भरण पोषण कर सकें। सरकार इनकी बात नहीं मानती है तो ये नोटा की बटन दबाने के लिए मजबूर होंगे।

कम वाटों के अंतर से जीतने वाली विधानसभा सीटों पर कांग्रेस और भाजपा में फंसा पेंच
कांग्रेस पार्टी हर सीट में उम्मीदवार की घोषणा करने से पहले काफी सोच विचार कर रही है (MP Congress)। अब कांग्रेस में कम वोटों से जीत दर्ज करने वाली सीटों पर मंथन चल रहा है और उन्ही सीटों पर पेंच फंसा है। दरअसल कांग्रेस ने 2018 में नौ सीटें एक हजार से 300 से कम मतों के अंतर से जीती थी। इनमें से तीन सीटें भाजपा (MP BJP) ने उपचुनाव में जीत लीं। वहीं भाजपा सात सीटें एक हजार 234 से कम मतों से जीती थी। इन सीटों को दोनों ही दल अपने पाले में करने का जतन कर रहे हैं। कांग्रेस ने जहां कुछ सीटों पर प्रत्याशी बदलने का मन बनाया है तो कुछ को फिर मौका दिया जा रहा है। यही स्थिति भाजपा की है। साल 2018 के चुनाव में अधिक मत प्रतिशत प्राप्त करने के बाद भी भाजपा सरकार बनाने से चूक गई थी। भाजपा को 41.02 प्रतिशत मत मिले थे और 109 प्रत्याशी जीते थे। इसमें सात ऐसे थे,जो एक हजार 234 मत या उससे कम मतों के अंतर से चुनाव जीते थे। इनमें सागर जिले की बीना से महेश राय 460 मतों से जीते थे। 720 मतों के अंतर से जीतने वाले कोलारस के भाजपा विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी अब कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। जावरा से राजेन्द्र पांडे भी 511 मतों के अंतर से जीते थे। यही स्थिति चांदला,नागौद,देवतालाव और इंदौर पांच सीट से भी भाजपा प्रत्याशी कम मतों के अंतर से जीते थे। जबकि कांग्रेस को 40.89 प्रतिशत मिले थे और 114 विधायक चुनाव जीते थे। इनमें नौ एक हजार 284 या उससे कम मतों के अंतर से जीत मिली थी। इनमें दमोह से विधायक राहुल सिंह,मंधाता नारायण पटेल,नेपानगर सुमित्रा देवी कास्डेकर और सुवासरा से विधायक चुने गए हरदीप सिंह डंग ने कांग्रेस छोड़ी और विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर भाजपा की सदस्यता ले ली। राहुल सिंह को छोड़कर बांकी सभी उचुनाव में विजयी रहे। ब्यावरा से 826 मतों से जीते गोवर्धन दांगी के निधन पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के रामचंन्द्र दांगी विजयी रहे। इसके अलावा राजनगर से विक्रम सिंह 732, जबलपुर उत्तर से विनय सक्सेना और राजपुर से बाला बच्चन 932 मतों से जीते थे। प्रदेश में सबसे कम 121 मतों के अंतर से कांग्रेस के प्रवीण पाठक ने ग्वालियर दक्षिण से जीत प्राप्त की थी। भाजपा और कांग्रेस की तरफ से प्रत्याशी चयन को लेकर सर्वे कराया जा चुका है (MP Elections 2023)। कार्यकर्ताओं से फीडबैक भी लिया जा चुका है। भाजपा ने तीन सूचियों में 79 नामों की घोषणा कर दी है इनमें हारी हुई सीटों के प्रत्याशी शामिल हैं। और नए चेहरों पर भी दांव लगाया गया है।

'कैसे बनेगी भाजपा की सरकार',कितनी सीटें घटेंगी और कितनी बढ़ेंगी,कमलनाथ अपने ही करीबियों के शब्दजाल में फंसे
हर जगह एक ही सवाल किसकी सरकार होगी। सरकार बनेगी तो कैसे बनेगी। हर जगह गुड़ा भाग,राजनीतिक हिसाब लगाए जा रहे हैं सारे सियासी पंडित चार दीवारी में बैठ कर सरकार तय कर रहे हैं कुछ राजनीतिक पंडित टीवी डिवेट में बैठ कर सरकार बना रहे हैं (MP Elections)। कांग्रेस के प्रवक्ता और नेता कहते हैं कि इस बार कांग्रेस 150 से 180 सीटों के आस पास लेकर आएगी। पूर्व सीएम कमलनाथ (Kamal Nath) को भी उनके करीबी सलाहकार 180 सीटों का ही सपना दिखा रहे हैं। जब उनके करीबी उनके पास से निकल जाते हैं तो फिर कमलनाथ मन में सोचते हैं कि इसमें अगर कम करो तो 140 सीट तो आ ही जाएगी। लेकिन उसके उलट भाजपा के गणित की बात करें तो वहां कुछ और ही खिचड़ी पक रही है जिस पर कांग्रेस की शायद नजर नहीं पड़ी अथवा पड़ी भी है तो कोई ध्यान नहीं देना चाहता क्योंकि कांग्रेस में विश्वास कम अति विश्वास ज्यादा दिखाई पड़ रहा है। अब बात भाजपा के गणित की करते हैं। वर्तमान में भाजपा के पास 127 विधायक हैं। भाजपा यह मान कर चल रही है कि 127 में 57 सीट वो हार सकती है मतलब 70 सीट भाजपा 127 वर्तमान की सीटों में बचा पाएगी। इसकी पुष्टि तो कांग्रेस की वो 66 सीटें भी कर रही हैं जहां कांग्रेस लगातार तीन बार से हार रही है और भाजपा की वो सीटें गढ़ बनी हुई हैं। 230 विधानसभा सीटों में 127 विधायक भाजपा के पास हैं। 95 वे विधायक कांग्रेस के पास हैं बांकी अन्य,सपा बसपा के पास हैं। भाजपा ने हारी हुई 103 सीट जिन्हे आकांक्षी विधानसभा सीटों का नाम भी दिया गया था। उन सीटों पर भाजपा ने करीब एक साल से ही मंथन करना शुरु कर दिया था। आकांक्षी सीटों पर भाजपा ने जमकर काम किया,हर दावेदार के हिसाब से पार्टी ने सर्वे भी कराया यही कारण है कि आकांक्षी सीटों पर जहां भाजपा के पास जिताऊ उम्मीदवार नहीं थे वहां पर भाजपा ने नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ,कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) और प्रहलाद पटेल (Prahlad Patel) जैसे नेताओं नेताओं को चुनाव मैदान पर उतार दिया। मतलब साफ है सरकार कैसे बनाना है भाजपा को मालूम है। भाजपा का हिसाब है कि 103 आकांक्षी सीटों में भाजपा 50 सीटों पर जीत दर्ज करेगी। ऐसी स्थिति में 70 और 50 को प्लस करें तो भाजपा को 120 सीट मिल रही है और वो सरकार बना रही है। इससे कुछ ऊपर नीचे होता है तो भाजपा उस पर अलग से विचार कर रही है पार्टी के नेता अलग-अलग आप्शनों पर भी काम कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की बात करें तो कमलनाथ के करीबी उन्हे 180 सीटों का सपना दिखा रहे हैं जिस पर कमलनाथ 140 सीट का आंकड़ा लेकर चल रहे हैं।

मासूम बच्ची को देख सीएम शिवराज ने गोदी पर उठाया,कहा हम 'सरकार नहीं परिवार चलाते हैं'
इंदौर के राऊ क्षेत्र में एक वाकये ने सबको भावविभोर कर दिया। मामला उस वक्त का है जब रात के 11.30 बज चुके थे, मुख्यमंत्री शिवराज चौहान (Shivraj Singh Chouhan) मंच से जनता से संवाद कर रहे थे। सामने हज़ारों की संख्या में जनता मौजूद थी, बड़ी संख्या में लाड़ली बहनें (Ladli Behna Yojana) मौजूद थीं। तभी मंच के सामने भीड़ में से एक 3-4 वर्ष की मासूम बालिका मुख्यमंत्री जी की तरफ़ देख 'मामा,मामा,मामा' ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी और उनसे मिलने के लिये मंच की तरफ़ आगे बढ़ी। मामा शिवराज ने भी मासूम बिटिया को देख उसी समय अपना संबोधन रोका , बेटी को मंच पर बुलवाया , उसे गोदी में उठाया , दुलार और स्नेह दिया,मासूम भांजी , मामा से मिलकर बेहद खुश हुई जैसे उसकी कोई कामना पूरी हो गयी हो। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनता से कहा " मैं इसीलिये तो कहता हूं कि हम सरकार नहीं परिवार चलाते हैं। निश्चित तौर पर यह दृश्य वहां उपस्थित हज़ारों लोगों को भावविभोर कर देने वाला था। यह पहला मौका नहीं है जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसी मासूम को अपनी गोद में लिया है इससे पहले सीएम शिवराज का यह रुप पहले भी देखने को मिलता रहा है जिसको लेकर उनके विरोधी उन पर तंज कसते रहे हैं लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के स्वभाव में अभी बदलाव नहीं आया उनको प्रदेश के बच्चों का 'मामा' ऐसे ही नहीं कहा जाता अब तो स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि छोटे-छोटे बच्चों से उनके मामा का नाम पूछो तो वो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का ही नाम लेने लगे हैं और मामा से मिलने की जिद भी करने लगे हैं।

भाजपा की दूसरी सूची जारी होने के बाद नेता खुद पत्र लिख कर चुनाव नहीं लड़ने की जता रहे इच्छा
जब तक भारतीय जनता पार्टी की दूसरी सूची (BJP Second List) जारी नहीं हुई थी तब तक तो सब ठीक था लेकिन सूची जारी होते ही जिस प्रकार वरिष्ठ नेताओं को चुनाव मैदान में उतार दिया गया है उसके बीजेपी में कानाफूसी का दौर तेज हो गया है। दरअसल प्रदेश सरकार (Shivraj Government) के खिलाफ एंटीइंकबेंसी का आलम मे है कि अब सभी नेताओं को खुद का भविष्य अंधकार में दिखने लगा है। दूसरी सूची में सात सांसदों सहित तीन केन्द्रीय मंत्रियों को टिकट मिलने के बाद अब अन्य सांसदों के दिमांग में यही चल रहा है कि अगली सूची में उनका नाम तो नहीं। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि कुछ नेता खुद पत्र लिख कर संगठन से कह रहे हैं कि वो चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं हैं। उन्ही में एक बड़ा नाम है मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया (yashodhara raje scindia) का जिन्होने पत्र लिख कर स्वास्थ कारणों से चुनाव नहीं लड़ने की इच्छा जताई है। यशोधरा के चुनाव नहीं लड़ने की स्थिति में कयास लगाए जा रहे हैं कि अब उसी सीट से ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) को चुनाव लड़ाया जा सकता है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार अभी दस और सांसद ऐसे हैं जिन्हे जिन्हे संगठन चुनाव मैदान में उतारने की योजना बना रहा है। सांसदों और मंत्रियों को चुनाव मैदान में उतारे जाने के बाद भाजपा में ही कानाफूसी का दौर चल रहा है। भाजपा के कार्यकर्ता दबी जुवान कह रहे हैं कि भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व एक तीर से कई शिकार कर रहा है। कुछ का कहना है कि जिन नेताओं को केन्द्रीय राजनीति से बाहर करना है उन्ही नेताओं को विधानसभा का चुनाव दिया जा रहा है। कुछ कार्यकर्ताओं का यह भी मानना है कि विधानसभा में अगर इन दिग्गज नेताओं को हार मिलती है तो चनका यह आखिरी चुनाव होगा। मतलब साफ है जिस प्रकार से भाजपा की दूसरी सूची जारी हुई है उसको देखते हुए कई नेताओं की धड़कनें तेज हो गई हैं। भाजपा की सूची पर इस वक्त कांग्रेस के नेता जमकर चुटकी ले रहे हैं। कांग्रेस में साफ कहा जा रहा है कि इन सभी नेताओं को निपटाया गया है।

सीएम की तरकश में अभी और कई तीर बांकी...
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बनते चले जा रहे हैं। उनकी सभाओं में बढ़ रही महिलाओं की भीड़ ने कमलनाथ की नींद उड़ा दी है। कांग्रेस का कोई कार्ड मुख्यमंत्री के सामने नहीं चल पा रहा है। इसी फस्ट्रेशन में कांग्रेस ने फर्जी लेटर कांड गढ़ डाला। मुख्यमंत्री ना केवल महिलाओं के लिए बल्कि सभी समुदायों के लिए कोई ना कोई घोषणा कर रहे हैं। और सिर्फ घोषणाएं ही नहीं कर रहे उनका तत्काल क्रियान्वयन भी सीएम करवाते जा रहे हैं। इसी कारण कमलनाथ का कोई पत्ता नहीं चल पा रहा है। रीवा में लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत तीसरी किस्त देने के बाद मुख्यमंत्री राखी के पहले 27 तारीख को कोई बड़ी घोषणा करने जा रहे हैं जिसका केन्द्रबिंदु भी लाड़ली बहने ही रहेंगी। मुख्यमंत्री ने पहले ही घोषणा कर रखा है कि लाड़ली बहना योजना की राशि धीरे-धीरे बढ़ाकर 3000 रुपये तक की जाएगी। प्रदेश में सवा करोड़ लाभार्थी महिलाओं का वोट बैंक बनाने का मतलब है कि मुख्यमंत्री ने इतने ही परिवारों को अपने साथ जोड़ लिया है। क्योंकि महिलाएं परिवार की धुरी होती हैं उनको अपने तरफ करने का मतलब है कि मुख्यमंत्री ने एक बड़ा वोटबैंक भाजपा की तरफ मोड़ लिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री मोदी के लाभार्थी वोटबैंक की तर्ज पर मध्यप्रदेश में महिलाओं का वोटबैंक तैयार कर लिया है। जाहिर है कांग्रेस के पास मुख्यमंत्री जैसा महिलाओं में लोकप्रिय नेता नहीं है। इस मामले में कमलनाथ उनके समक्ष खड़े भी नहीं हो सकते। मुख्यमंत्री ने 12वीं में प्रथम श्रेणी में आने वाली बच्चियों को स्कूटी देने की घोषणा भी की है। इस घोषणा से भी भाजपा का वोटबैंक मजबूत होगा क्योंकि स्कूटी पूरे परिवार के काम आएगी। खास बात यह है कि यह स्कूटी इलेक्ट्रिकल होगी यानि पेट्रोल का टेंशन नहीं होगा। इस योजना को भी सीएम शिवराज का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। बीस अक्टूबर तक सीएम शिवराज लाड़ली बहनों के खाते में करीब छह किस्त डाल चुके होंगे और फिर नवंबर में चुनाव होना है इसलिए माना जा रहा है कि लाड़ली बहना योजना सीएम शिवराज के लिए और सरकार के लिए महत्वपूर्ण कड़ी साबित होने वाली है। अब कांग्रेस पार्टी यह योजना तैयार कर रही है कि सीएम की घोषणाओं का तोड़ कैसे निकाला जाए।