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युवाओं और महिलाओं को आगे कर चुनाव लड़ेगी कांग्रेस
भोपाल

युवाओं और महिलाओं को आगे कर चुनाव लड़ेगी कांग्रेस

विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रुप देने में जुटी कांग्रेस पार्टी युवाओं पर ज्यादा दांव लगाने की कोशिश में जुटी है (Congress Meeting)। कांग्रेस की ओर से ना सिर्फ युवाओं को ही आगे रखा जाएगा बल्कि महिलाओं को भी काफी मौके दिए जाएंगे। लगातार दो चुनाव हार चुके उन्ही नेताओं को टिकट मिलेगा जिनके नाम सर्वे के साथ पर्यवेक्षक की रिपोर्ट में जीतने की संभावना वाले दावेदार के रुप में आएंगे। प्रत्याशी चयन को लेकर दिल्ली में मध्य प्रदेश कांग्रेस (MP Congress)की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक हुई थी (Congress Screening Committee)। इसमें समिति अध्यक्ष पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह(Jitendra Singh),प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) पिछले दिनों भोपाल में जिला,ब्लाक, प्रदेश पदादिकारी, सांसद, पूर्व सांसद, विधायक और पूर्व विधायकों से दावेदारों को लेकर जो रायशुमारी की थी,उसके बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) ने प्रत्याशी चयन को लेकर अपनी भी बात रखी। दिल्ली में कांग्रेस के वार रुम में आयोजित बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह,पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव,सुरेश पचौरी,नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह,अजय सिंह,अजय कुमार लल्लू,सप्तगिरी उल्का,कमलेश्वर पटेल,प्रदेश प्रभारी सहित अन्य नेता शामिल हुए। देर रात तक चली बैठक में वर्तमान विधायकों और लगातार हारने वाली 66 सीटों की स्थिति को लेकर प्रारंभिक चर्चा की गई। Mukhbirmp.com के अनुसार बैठक में एक बात साफ कर दी गई कि प्रत्याशी कोई भी हो उसे जिताने की जिम्मेदारी सामूहिक होगी। यह चुनाव पार्टी के लिए अहम है। इसका असर 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की सभाओं पर पड़ेगा (Loksabha Elections 2024)। इसलिए प्रत्याशी चयन में जातिगत और स्थानीय समीकरण को ध्यान में रखा जाएगा। प्रत्याशी चयन के लिए तीन सूचियां तैयार होंगी। इसमें कमलनाथ और कांग्रेस द्वारा कराए गए सर्वे, पर्यवेक्षक के साथ प्रभारी और पदाधिकारियों की रिपोर्ट में जिन सीटों के लिए एक ही नाम होगा उसकी सूची अलग बनेगी। वर्तमान विधायकों की एक सूची रहेगी और एक सूची उन सीटों की होगी,जहां दो या उससे अधिक दावेदार होंगे। आज एक बार फिर बैठक होगी जिसमें वर्तमान विधायक और लगातार हारने वाली सीटों के प्रत्याशियों को लेकर चर्चा होगी।

12/9/2023249
भाजपा की सियासी रोटी में बटर लगाने वाली कांग्रेस के जल रहे हाथ,गृह युद्ध की बनी स्थिति
भोपाल

भाजपा की सियासी रोटी में बटर लगाने वाली कांग्रेस के जल रहे हाथ,गृह युद्ध की बनी स्थिति

चुनाव करीब आते-आते भाजपा और कांग्रेस में पलायन का दौर तेज होता जा रहा है (MP Election 2023)। कांग्रेस (mp congress) के बड़े नेता अपने नंबर बढ़वाने के लिए भाजपा के कार्यकर्ताओं से संपर्क कर उन्हे कांग्रेस में ज्वाइन तो करवा रहे हैं लेकिन इन कार्यकर्ताओं के कांग्रेस में शामिल होने के कारण पार्टी में गृह युद्ध की स्थिति निर्मित हो गई है। ताजा मामला नर्मदापुरम कांग्रेस का है जहां पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा (Sitasharan Sharma) के भाई गिरिजा शंकर (Girija Shankar Sharma) को सुरेश पचौरी (Suresh Pachouri) की मिली भगत से कांग्रेस की सदस्यता दिला दी गई है और अब वो एक मजबूत दावेदार के रुप में अपना दावा भी ठोंक रहे हैं। लेकिन इनके दावे के कारण कांग्रेस के मूल कार्यकर्ताओं के बीच कलह की स्थिति बन गई है। उसकी बानगी शनिवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (Madhya Pradesh Congress Committee) में देखने को मिली जहां नर्मदापुरम के कांग्रेस प्रवक्ता राजेन्द्र सिंह राठौर कांग्रेस प्रदेश मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा (KK Mishra) के सामने अपनी भड़ास निकालते नजर आए। राजेन्द्र सिंह राठौर का गुस्सा इतना भारी था कि बार-बार समझाने के बाद भी वो शांत होने के लिए तैयार नहीं थे। दरअसल Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा को इस बार भाजपा टिकट नहीं दे रही है,मामले की जानकारी होने के बाद पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पर जमकर डोरे डाले लेकिन उन्होने भाजपा नहीं छोड़ने का फैसला किया। ऐसी स्थिति में राजनीति में बने रहने के लिए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने अपने भाई गिरिजा शंकर शर्मा को कांग्रेस में जाने के लिए मना लिया। पूर्व विस अध्यक्ष को आशंका है कि इस बार कांग्रेस प्रचंड बहुमत के साथ प्रदेश में सरकार बनाएगी लिहाजा भाई को कांग्रेस में शामिल कर सत्ता का सुख पीछे के दरबाजे से भोगा जा सकता है। अभी तक उनकी रणनीति काफी हद तक कामयाब भी हुई लेकिन गिरिजा शंकर के कांग्रेस में आने से कांग्रेस के गुटों की एकबार फिर कलई खुल गई है। जो कांग्रेस एकजुटता का खोंखला दावा करती दिख रही थी उसी कांग्रेस के अलग-अलग धड़े सतह में आने लगे हैं। पचौरी कांग्रेस,अरुण यादव कांग्रेस,अजय सिंह (राहुल) कांग्रेस, दिग्विजय कांग्रेस, कमलनाथ कांग्रेस और अंत में कांतीलाल भूरिया कांग्रेस। इतने धड़ों में बंटी कांग्रेस अब इस पशोपेश की स्थिति में आ गई है कि भाजपा से आए कार्यकर्ताओं और मूल कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के बीच सामंजस्य कैसे स्थापित किया जाए। अभी तक सिंधिया के भाजपा में जाने और सिंधिया गुट और मूल भाजपाई कार्यकर्ताओं के बीच चल रही वर्चस्व की लड़ाई पर कांग्रेस के नेता चुटकी लेते नजर आ रहे थे लेकिन अब उसी मुहाने पर कांग्रेस भी खड़ी है जिस मुहाने पर भाजपा सिंधिया खेमे को लेकर खड़ी है। मजे की बात यह है कि भाजपा में नेताओं के बीच विवाद रोकने के लिए अलग से टीम है लेकिन कांग्रेस में सबकुछ कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के भरोसे ही रहता है लिहाजा पार्टी के अंदर चल रहे गृह युद्ध को रोकने का काम दिग्विजय सिंह और कमलनाथ को करना है साथ में चुनावी तैयारियों को अंतिम रुप देने का काम भी दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) और कमलनाथ (Kamal Nath) को ही करना है।

9/9/2023198