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शिव ही सत्य हैं शिव ही सुंदर हैं आखिर क्या हैं शिव पढ़िये मुखबिर
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शिव ही सत्य हैं शिव ही सुंदर हैं आखिर क्या हैं शिव पढ़िये मुखबिर

शिव ही सत्य हैं,शिव ही सुंदर हैं और शिव ही ओमकार हैं। शिव का न कोई ओर है न कोई छोर है। न में जहां भी सत्य है, वहीं शिव का वास है। शिव के साथ सारी विषमता है। वो औघड़ हैं, आशुतोष हैं, देवों में महादेव हैं, रुद्र हैं, गृहस्थ हैं, महायोगी हैं, त्यागी और तपस्वी हैं, पिता है, गुरु हैं, मृत्यु हैं, जीवन हैं। भारतीय होने का अर्थ है शिव को जानना। उनके जाने बिना इस लोक को जानना असंभव है। उनकी आराधना से मोक्ष मिलता है। वे ज्ञान का वेद हैं, वे रामायण के प्रणेता हैं, संगीत के स्वर हैं, ध्यान के उत्स हैं। उनमें नृत्य वास करता है, जीवन को गति मिलती है। वे प्रेमी हैं, ऋषियों के गुरु हैं, देवताओं के रक्षक हैं, असुरों के सहायक हैं और मानवों के आदर्श हैं। सभ्यता के उषा काल में शिव और पार्वती विज्ञान के धरातल पर काल चिंतन करते है। ज्ञान के शिखर पर बैठकर संतुलन एवं सत्य के विविध रूपों को खोजना कोई महायोगी और योगिनी ही कर सकते हैं। शिव जो भी बोलते हैं, वह जीवन के सूत्र हैं। शिव के हृदय में संसार नहीं हैं, वासना नहीं है और अंधेरा भी नहीं है। उनका जीवन ही प्रकाश है। अब प्रकाश होगा, तो सदैव ही प्रेम, करुणा, साधना एवं भक्ति रहेगी। अंतस के जागरण के लिए शिवतत्त्व की जरूरत है। अंतस एक बार चैतन्य हो गया, तो सब कुछ बदल जाता है। आचरण ही साधना बन जाती है। हरेक शब्द प्र्रेमपूर्ण एवं कर्म के प्रत्येक चरण करुणापूर्ण हो जाते हैं। साधुता ही स्वभाव बन जाता है। भीतर जब आलोकित हो, तो बाहर सदैव ही प्रकाश रहेगा। शिव का आकार शून्य व ज्योति स्वरूप है। हमारे अंदर शिव बैठे हैं। बस खुद को मोड़कर अंतर्यात्रा पर जाना होगा। शिव वर्तमान हैं, उनको पाने के लिए बस स्वयं को पलटना है। शरीर के बदले मन एवं बुद्धि को उघाड़ना है। जो शरीर पर सिमट कर रह गया, वह शिव को प्राप्त नहीं कर सकेगा। शिव साधना हैं, ध्यान हैं और योग भी हैं। साथ ही, इससे परे भी है। शिव को समझने का अर्थ है खुद का रूपांतरण। योगी शिव भौतिक से आत्मिक यात्रा का संदेश देते हैं। शरीर, मन और बुद्धि से आत्मा की यात्रा हैं शिव। खुद को धवल और शुद्ध करना ही शिवत्व है। विज्ञान भैरव तंत्र में ऐसे ही 112 सवालों का विशद वर्णन है। इन सवालों के जवाब में योगी शिव ने माता पार्वती को विधियां बताईं, जिनसे व्यक्ति सत्य का साक्षात्कार करता है। शिव अनेक सूत्र, उपाय और विधि के माध्यम से इस अस्तित्व के समस्त अंतद्र्वंद्व, हरेक सवाल का जवाब देते हैं। इसके बाद भी माता को शांति नहीं मिलती है, तो फिर माता पार्वती पूछती हैं- हे प्रभु! कोई ऐसी कथा सुनाएं, जो हरेक प्रकार के कष्ट में सांत्वना दे सके। शिव ने राम-सीता की कथा रामायण सुनाई। इस कथा को एक जिज्ञासु कौआ काकभुसुण्डी सुन लेते हैं और जगत में विचरण करने वाले नारद मुनि को वह कथा सुनाते हैं। नारद मुनि इसे वाल्मीकि को सुनाते हैं, जो खुद इसे लिपिबद्ध कर लव-कुश को कंठस्थ कराते हैं। फिर लव-कुश के माध्यम से यह कथा आमजन तक पहुंचती है। शिव वर्तमान हैं, उनको पाने के लिए बस स्वयं को पलटना है। शरीर के बदले मन एवं बुद्धि को उघाड़ना है।

2/25/2025
वृंदावन के केशव धाम में श्री कृष्ण जन्मभूमि मथुरा मुक्ती आंदोलन की दिशा तय करने के लिए अंतरराष्ट्रीय धर्म संसद का आयोजन
धर्म

वृंदावन के केशव धाम में श्री कृष्ण जन्मभूमि मथुरा मुक्ती आंदोलन की दिशा तय करने के लिए अंतरराष्ट्रीय धर्म संसद का आयोजन

वृंदावन के केशव धाम में बुधवार को श्री कृष्ण जन्मभूमि मथुरा मुक्ती आंदोलन की कार्यदिशा तय करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय धर्म संसद का आयोजन किया गया। इस आयोजन में प्रमुख रूप से कलकी पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्ण, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज, गोविंद आनंद तीर्थ महाराज, स्वामी उमेश योगी (स्पेन), और जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजेश्वरमाऊली सरकार सहित कई संत और विभूतियां उपस्थित रहीं। सभा में उपस्थित संतों ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मभूमि की मस्जिद का सर्वेक्षण कराने की मांग की। इस संदर्भ में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका भी दाखिल की गई है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि इस प्रयास का उद्देश्य मस्जिद की सच्चाई को दुनिया के सामने लाना है। "जाति तोड़ो, समाज जोड़ो" अभियान की घोषणा सभा में संतों ने हिंदू समाज को एकजुट करने और जात-पांत के भेदभाव को समाप्त करने के लिए "जाति तोड़ो, समाज जोड़ो" अभियान चलाने की घोषणा की। साथ ही, श्री कृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति और वहां भव्य मंदिर के निर्माण की मांग भी रखी गई।गाय, मठ, और मंदिर की रक्षा के लिए आंदोलन साधु-संतों ने गायों की रक्षा, मठों और मंदिरों के संरक्षण के लिए भी अभियान चलाने का निर्णय लिया। संघर्ष से ही अधिकार प्राप्त होंगे: जगद्गुरु राजेश्वरमाऊली सरकार श्री रुक्मिणी पीठाधीश्वर पूजनीय जगद्गुरु राजेश्वरमाऊली सरकार ने कहा, "हमने बड़े संघर्षों के बाद प्रभु श्रीराम जन्मभूमि को प्राप्त किया। जैसे चीन को चीनी राष्ट्र, अमेरिका को अमेरिकी राष्ट्र कहते हैं, वैसे हिंदुस्तान को हिंदू राष्ट्र कहने में क्या समस्या है? यहां वेद, उपनिषद और भगवद्गीता जैसे सनातन प्रमाण मौजूद हैं। श्री कृष्ण जन्मस्थान का हर हिस्सा मंदिर का प्रमाण देता है। आज सनातनी जाग गए हैं। बिना संघर्ष के अपने अधिकारों को पाना असंभव है। हमारा मार्ग अहिंसा और सद्भावना का है। हम भारतीय संविधान के अंतर्गत अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहेंगे और अंततः अपने आराध्य श्री कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य दिव्य मंदिर का निर्माण करेंगे।

11/29/2024
राम मंदिर की तरह बनेगा माता सीता का भब्य मंदिर,251 फीट ऊंची प्रतिमा का होगा निर्माण
धर्म

राम मंदिर की तरह बनेगा माता सीता का भब्य मंदिर,251 फीट ऊंची प्रतिमा का होगा निर्माण

रामायण रिसर्च काउंसिल के तत्त्वावधान में मां सीताजी के प्राकट्य क्षेत्र सीतामढ़ी में मां सीताजी की 251 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण किया जाएगा तथा 51 शक्तिपीठों से मिट्टी एवं ज्योत लाकर पूरे क्षेत्र को शक्ति-क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। ये बातें श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी वैराज्ञानंद गिरी महाराज पंचायती निरंजनी अखाड़ा ने मालवीय स्मृति भवन स्थित एक कार्यक्रम में कही। रामायण रिसर्च काउंसिल के तत्त्वावधान में मां सीताजी के प्राकट्य दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि वह अखाड़ा परिषद से भी वार्ता कर चुके हैं, पूरे देश के संत समाज को रामायण रिसर्च काउंसिल के अंतर्गत मां सीताजी के इस कार्य से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि वह पूरी तरह से अब अपने आप को इस कार्य में लगा चुके हैं और भगवान श्रीराम का मंदिर जैसे अयोध्या में बना है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैसे जाकर वहां पूजन कार्य किया है, वह चाहेंगे कि यहां भी प्रधानमंत्री ही भूमि पूजन का कार्य शीघ्र करें। इस अवसर पर श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर राजयोगी आचार्य आनंद गिरी  महाराज भी उपस्थित रहे। आवाहन अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अरुण गिरी महाराज कई राज्यों में लोगों से संपर्क कर रहे हैं। इसका वृहद प्रचार-प्रसार हो, इसके लिए मातृ-शक्तियों के बीच जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। वहीं संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने लोगों से मां सीताजी के इस कार्य में अधिक से अधिक सहयोग प्रदान करने की अपील की। कार्यक्रम में मौजूद विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि वह स्वयं सीतामढ़ी जाकर काउंसिल के अंतर्गत हो रहे इन कार्यों को देख चुके हैं और अब तो भगवान श्रीराम के जन्म-स्थान के बाद मां सीताजी के प्राकट्य क्षेत्र पर भव्य मंदिर की ही बारी है, इसलिए उनका मानना है कि जन-जन को इस अभियान से जुड़ना चाहिए। भारत सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि अब मां सीताजी का मंदिर बनाना उनके जीवन का उद्देश्य है, इसलिए वह काउंसिल के अंतर्गत मां सीताजी के इस प्रकल्प को विश्व-स्तर पर ले जाने के प्रति संकल्पित हैं। निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी चित्प्रकाशानंद गिरी ने कहा कि वह भी अभी हाल ही में सीतामढ़ी जाकर काउंसिल के अंतर्गत चल रहे कार्यों का अवलोकन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि काउंसिल जिस रफ्तार से सीतामढ़ी में कार्य कर रही है, जल्द से जल्द वहां मां की 251 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापना के निर्माण का कार्य प्रारंभ होगा, ऐसा उन्हें पूर्ण विश्वास है।

5/17/2024
अयोध्या में किस रुप में बिराजेंगे रामलला,कौन बना रहा भगवान की छवि
धर्म

अयोध्या में किस रुप में बिराजेंगे रामलला,कौन बना रहा भगवान की छवि

अयोध्या में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां अपने आखिरी दौर में चल रही हैं (ayodhya ram mandir). 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (pm narendra modi) के हाथों रामलला मंदिर के गर्भगृह में विराजेंगे. मंदिर में रामलला के पांच वर्ष की बालस्वरूप की खड़ी प्रतिमा स्थापित की जाएगी. इस मूर्ति का निर्माण अयोध्या में चल रहा है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्ट के महासचिव ने कहा कि रामलला की प्रतिमा तीन लोग बना रहे हैं, ये जो भी बना रहे हैं उनके बारे में सभी को जानकारी दी जाएगी। चंपत राय ने कहा कि, 'रामलला की नई प्रतिमा अयोध्या में बन रही है, इतना पर्याप्त है. तीन लोग उसे बना रहे हैं, कौन लोग बना रहे हैं ये बात मैं पहले भी कई बार बोल चुका हूं. बार-बार कहने की कोई जरुरत नहीं है. मूर्ति वहीं बनाएगा जो उसका जानकार होगा, जिसमें 100-50 मूर्तियां पहले बनाई होंगी, तकनीकी काम वहीं करता है जो उसका जानकार होता है। तकनीक को मनुष्य-मनुष्य का भेद करके नहीं देखा जाता है.' राम मंदिर में विद्वानों के चयन और पूजा पद्धति को लेकर भी चंपत राय ने जानकारी दी और कहा कि राम मंदिर के लिए विद्वानों का चयन किस प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है ये बताया नहीं जा सकता है. जो लोग इस तरह के सवाल पूछ रहे हैं वो इन विद्वानों को जानते भी नहीं होंगे और जब विद्वान आएँगे तो उनके नाम भी प्रकाशित किए जाएंगे. मंदिर में आज भी विद्वान लोग ही पूजा अर्चना कर रहे हैं. वैसे ही आगे भी रामलला की पूजा होगी. आज भी लोग मंदिर में पूजा कर रहे हैं, आगे भी ऐसे ही करेंगे, इसमें ज्यादा विचार करने की बात नहीं हैं।

12/16/2023
गणेशजी इन 3 राशि पर रहते हैं बेहद प्रसन्न, गणपति देवा देते हैं सुख-समृद्धि व वैभव
धर्म

गणेशजी इन 3 राशि पर रहते हैं बेहद प्रसन्न, गणपति देवा देते हैं सुख-समृद्धि व वैभव

हिंदु धर्म में मान्यता है कि गणेश जी पूजा के बिना कोई भी पूजा सफल नहीं होती है. किसी भी मंगल कार्य में सबसे पहले भगवान गणेश की निमंत्रण दिया जाता है. गणेश जी विघ्नहर्ता हैं और आने वाले सभी विघ्नों को दूर कर देते हैं. भगवान शिव के द्वारा मिले वरदान के कारण भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना गया है.

1/28/2023