'ब्रह्मणों' को खूब गाली दीजिए क्योंकि 'ब्राह्मण' नेता सिर्फ चुनाव में जागते हैं और वोट की भीख मांगते हैं तब पूंछिएगा

मप्र में ब्राह्मण वर्ग के लिए लगातार एक नैरेटिव सेट किया जा रहा है। आने वाली पीढ़ी के मन में ये बीज रोपित किया जा रहा है कि ब्राह्मण सबसे बड़ा पापी है उसने सबका सोषण किया है। देश के संविधान में हर वर्ग की सुरक्षा के लिए ठोस कानून बनाए गए हैं किसी अन्य वर्ग के जाति सूचक शब्द पर भी कानूनी कार्रवाई का प्राविधान है। लेकिन ब्राह्मणों के लिए ऐसा कुछ भी नहीं है। आए दिन कोई नेता,अधिकारी,कर्मचारी ब्राह्मण वर्ग को अपशब्द कहता है कुछ सामाजिक संगठन विरोध करते हैं लेकिन उनके विरोध को दबा दिया जाता है। क्योंकि ब्राह्मण वर्ग के नेता जो सरकार,संगठन में हैं वो गूंगे और बहरे हैं। उनकी व्यक्तिगत कोई जाति नहीं होती सिवाय वोट के और इसी का फायदा उठा कर अन्य वर्ग के लोग ब्राह्मणों की बहन-बेटियों को अपशब्द कहते हैं और कहानी वहीं पर खत्म हो जाती है। आइएएस संतोष वर्मा ने खुले मंच में ब्राह्मणों की बहन बेटियों पर टिप्पणी की उसके बाद भी कोई नेता नहीं जागा। रामेश्वर शर्मा मुस्लिमों को गाली देते बैठे रहते हैं खुद को ब्राह्मण कहते हैं। उनका बयान निराशाजनक है। आलोक शर्मा गूंगे बहरे बने हैं,राजेन्द्र शुक्ल,राकेश शुक्ला,गोपाल भार्गव,वीडी शर्मा,गिरीश गौतम जैसे नेता सभी चुप हैं। इनकी नींद सिर्फ चुनाव के दौरान खुलती हैं और जब इन्हें वोट की जरुरत होती है तो ये सभी नेता ब्राह्मण हो जाते हैं।
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निर्वाचन आयोग ने प्रदेश भर में 80 फीसदी से अधिक किया एसआइआर
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