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भाभी बदनाम हुई 'चेतन' तेरे कारण सीएम का सपना चकनाचूर हुआ तेरे कारण
मध्य प्रदेश में सीएम के बदले जाने की खबरें इस कदर वायरल हो रही हैं जिसका असर अब भाजपा के ही पदाधिकारियों में देखने को मिलने लगा है। कुछ भाजपा नेता तो ...

किसानों को दिन में भी मिलेगी बिजली सीएम मोहन यादव की बड़ी घोषणा जोरदार 'अभिनंदन' करें
ओरछा में आयोजित मध्य प्रदेश भाजपा की कार्यसमिति के समापन के मौके पर सीएम मोहन यादव ने किसानों से जुड़ा बड़ा फैसला किया है। सीएम मोहन यादव ने कहा कि किसानों की शिकायत है कि उन्हें दिन में बिजली नहीं मिलती लिहाजा अब राज्य सरकार ने किसानों के हित को देखते हुए दिन में भी बिजली की आपूर्ति का फैसला किया है। सीएम मोहन यादव के इस ऐलान से यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य सरकार की तरफ से किसान सबसे बड़ी प्राथमिकता हैं। किसान खुश रहे तो भाजपा की सरकार बनने में भी कोई दिक्कत नहीं होगी। प्रदेश कार्यसमिति के दौरान सीएम मोहन यादव के पास बताने के लिए अन्य कोई और योजना नहीं थी। करीब घंटे भर चले सीएम के भाषण में तत्कालीन शिवराज सरकार की योजनाओं को गिनाया गया और कांग्रेस को कोसने का काम किया गया। सीएम ने अपने संबोधन में लगातार पुरानी योजनाओं को ही गिनाया। इससे यह समझ में आया कि ढाई साल के कार्यकाल में सीएम के पास जोरदार अभिनंदन के अलावा और कुछ नहीं था। संबोधन के दौरान सरकार और संगठन के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। जिस वक्त सीएम का संबोधन चल रहा था उस वक्त किसी भी नेता का ध्यान सीएम के भाषण में नहीं था। हाल में मौजूद प्रत्येक नेता अपने करीब बैठे नेताओं से बात करते हुए देखे गए।

बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति चलती रही सीएम और सिंधिया आपस में ही बात करते रहे
मध्य प्रदेश भाजपा की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति ओरछा में चल रही है। रविवार को जिस वक्त कार्यसमिति का आगाज हो रहा था उस वक्त मंच पर एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा था। सारे नेता एक दूसरे से बात करने में व्यस्त थे लेकिन सीएम और सिंधिया के बीच कुछ अलग ही खिचड़ी पक रही थी। मंच में स्वागत का दौर भी चल रहा था पार्टी को और संगठन को मजबूत करने की बात हो रही थी उन सब बातों के बीच सिंधिया और सीएम एक अलग अंदाज में नजर आए। ज्योतिरादित्य सिंधिया के हाव-भाव देख कर यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि किसी मुद्दे के लेकर वो सीएम पर लगातार दबाव बनाने का प्रयास कर रहे थे। तस्वीर के जुवां नहीं होती लेकिन वो भाव प्रकट करने के लिए पर्याप्त होती है कि आखिर चल क्या रहा है। जिस प्रकार से सीएम मोहन यादव खुद के आगे किसी की चलने नहीं दे रहे उससे भाजपा के सभी नेताओं में छटपटाहट है लिहाजा भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में भी वही छटपटाहट साफ नजर आ रही थी। जहां पार्टी और संगठन की बात होनी चाहिए वहां पर दो नेता आपस में बात करते नजर आ रहे हैं जिसका मतलब साफ है कि दाल में कुछ काला है।

बीजेपी कार्यसमिति की बैठक में शामिल हुए पूर्व गृह मंत्री डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा
दतिया उप चुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद पहली बार हो रही बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति में सभी वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस बैठक में जब पूर्व गृह मंत्री डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा पर कैमरे की नजर पहुंची तो थोड़ी देर के लिए कैमरा वहीं पर ठहरा गया। दरअसल नामांकन से ठीक पहले जिस प्रकार से अप्रत्याशित रुप से आशुतोष तिवारी का नाम आया उसके बाद दतिया भाजपा के कार्यकर्ताओं ने जम कर विरोध प्रदर्शन किया और आखिर में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा इस लिए प्रदेश की राजनीतिक सुई पूर्व गृह मंत्री की तरफ घूमी हुई है। इतना सबकुछ होने के बाद भी कोई नेता किस प्रकार से धैर्य रखता है और पार्टी के लिए खड़ा रहता है वो बात डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा में देखने को मिली। प्रदेश कार्यसमिति में भी पूर्व गृह मंत्री अपने चिर परिचित अंदाज में नजर आए। वही हंसता मुस्कुराता चेहरा और वही सादगी उनमें देखने को मिल रही थी। खास बात यह रही कि जिस प्रकार से दतिया उप चुनाव के बाद पूर्व गृह मंत्री के खिलाफ जिस प्रकार से ह्यूमर फैलाया गया था उससे विपरीत पूर्व गृह मंत्री को सबसे आगे सीट आरक्षित की गई थी जहां पर मोहन सरकार के सभी सीनियर मंत्री बैठे थे। इस बात से यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि पूर्व गृह मंत्री भाजपा के लिए अब भी कितना मायने रखते हैं। जिस प्रकार से पूर्व गृह मंत्री को सम्मान दिया गया उससे यह साफ है कि समय आने पर डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा को पार्टी की तरफ से फिर कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी। क्योंकि पूर्व गृह मंत्री भाजपा के लिए संकट मोचक की भूमिका निभाते रहे हैं। लिहाजा ऐसे नेता को भाजपा महज एक चुनाव से जज नहीं करेगी और अभी उनके अनुभव का लाभ उठाएगी।

राष्ट्रीय पदाधिकारियों के सम्मान से शुरु हुई भाजपा की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक
मध्य प्रदेश भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति इस बार भगवान श्रीराम राजा सरकार की नगरी ओरछा में हो रही है। पार्टी के प्रत्येक नेताओं ने पहले भगवान श्रीराम के दरवार में हाजिरी लगाई फिर कार्यक्रम स्थल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करवाया। इसके बाद नेता कार्यसमिति में शामिल हुए। कार्यसमिति का आगाज राष्ट्रगीत के साथ हुआ और उसके बाद मध्य प्रदेश भाजपा के उन नेताओं का सम्मान किया गया जो नेता राष्ट्रीय टीम में शामिल हुए हैं। इन नेताओं में बंसीलाल गुर्जर,लालसिंह आर्य,कविता पाटीदार,तरुण चुग,पूर्व अध्यक्ष वीडी शर्मा और आशीष अग्रवाल का शाल श्रीफल और राम दरवार का प्रतीक चिन्ह भेंट कर सभी का सम्मान किया गया। दो दिनों तक चलने वाली कार्यसमिति भाजपा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। क्योंकि महीने भर पहले ही भाजपा को दतिया उप चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस हार के बाद भाजपा को अहसास हुआ है कि अब जनाधार कमजोर हो रहा है। इससे पहले भाजपा को विजयपुर उप चुनाव में भी हार का सामना करना पड़ा था। यही कारण है कि यह कार्यसमिति भाजपा के लिए काफी महत्वपूर्ण है। ओरछा में भाजपा की यह दूसरी बार कार्यसमिति हो रही है इससे पहले 14 साल पहले कार्यसमिति का आयोजन हुआ था और उसके बाद अब प्रदेश कार्यसमिति ओरछा में हुई है। इस बैठक के माध्यम से भाजपा ओरछा में अपनी पैठ मजबूत करने पर काम कर रही है। यही कारण है कि भाजपा ने श्रीराम राजा सरकार की नगरी ओरछा को प्रदेश कार्यसमिति के लिए चुना है। इस बैठक में राज्य सरकार के प्रति जनता में फैलता असंतोष कैसे खत्म किया जाए उस विषय पर भी मंथन होना है। जिसके तहत पार्टी जनता के विश्वास को कैसे जीतना है उस विषय पर मंथन करेगी। इसके अलावा अगले तीन महीने की कार्ययोजना तैयार करनी है। पीएम मोदी के जन्मदिन पर महीने भर अभियान चलाना है उसको किस प्रकार से सफल बनाना है यह सारी चुनौतियां प्रदेश नेतृत्व के पास हैं। लिहाजा उत्साह विहीन कार्यकर्ताओं को एक बार फिर सक्रिय करने के लिए इस बैठक में रणनीति बनानी है जो साल 2027 के नगरीय निकाय चुनाव और फिर 2028 के विधानसभा चुनाव में काम आनी है।

नगरीय निकाय चुनाव से पहले ओबीसी की जातियों का आंतरिक सर्वे कराएगी भाजपा बूथ स्तर तक डेटा जुटाने की तैयारी
पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग की जातियों का आंतरिक सर्वेक्षण कराने की तैयारी में है।पार्टी संगठन से लेकर सरकार तक ओबीसी को मिलने वाले प्रतिनिधित्व को तय करने के लिए ये डेटा जुटाया जाएगा। भाजपा प्रदेश नेतृत्व का मानना है कि सरकार और संगठन में ओबीसी की विभिन्न जातियों को उचित भागीदारी मिले, इसके लिए उनके संख्याबल और स्थिति को समझना जरूरी है। इसी के चलते बूथ स्तर तक सर्वे कराने का फैसला लिया गया है। सर्वे के ये होंगे मुख्य बिंदुभाजपा द्वारा कराए जाने वाले आंतरिक सर्वे में इन बातों पर फोकस रहेगा:- जातिगत आंकड़े: ओबीसी की किस जाति की संख्या कितनी है और किस क्षेत्र में उनका प्रभाव है- प्रतिनिधित्व: सरकार और संगठन में किस जाति को कितना प्रतिनिधित्व मिला है और कहां कमी है - बूथ प्रबंधन: बूथ स्तर पर ओबीसी वोटर्स की स्थिति और प्रभावी नेताओं की पहचान- समस्याएं: अलग-अलग ओबीसी जातियों की सामाजिक, आर्थिक समस्याओं का ब्योरा क्यों जरूरी है ये सर्वे?मुखबिर को मिली सूचना के अनुसार 2023 के विधानसभा चुनाव और आगामी पंचायत-निकाय चुनावों को देखते हुए ये कदम उठाया गया है। 1. टिकट वितरण: किस क्षेत्र से किस ओबीसी जाति के नेता को मौका देना है, इसका आकलन होगा2. संगठन में पद: जिला, मंडल और बूथ अध्यक्षों के चयन में जातिगत संतुलन बनाने में मदद मिलेगी3. सरकारी योजनाएं: ओबीसी की पिछड़ी जातियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए डेटा तैयार होगा प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27% है। इसके बावजूद कई छोटी ओबीसी जातियां खुद को उपेक्षित महसूस करती हैं। सर्वे के बाद पार्टी उन जातियों को भी मुख्यधारा में लाने की कोशिश करेगी। कैसे होगा सर्वे?भाजपा के प्रदेश पदाधिकारी, जिला अध्यक्ष और बूथ कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी होगी। एक फॉर्मेट तैयार किया जाएगा जिसमें जाति, संख्या, प्रमुख चेहरे, वोट प्रतिशत जैसी जानकारी भरी जाएगी। इसके बाद रिपोर्ट प्रदेश कार्यालय को सौंपी जाएगी।

बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति में प्रदेश प्रवक्ता और पैनलिस्ट नहीं हैं 'अपेक्षित' डिबेट में कैसे रखेंगे पार्टी का पक्ष
किसी भी राजनीतिक दल के प्रवक्ता उसके चेहरे के रुप में माने जाते हैं क्योंकि न्यूज पेपर और न्यूज़ चैनलों में पार्टी के प्रवक्ता ही पार्टी की बात को मजबूती के साथ रखते हैं। लेकिन भगवान राम की नगरी में होने जा रही भाजपा की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति में प्रवक्ताओं को शामिल नहीं किया जा रहा है। करीब 90 प्रवक्ताओं और पैनलिस्टों की जंबो टीम भाजपा ने घोषित की थी। जिसमें चुनिंदा सह मीडिया प्रभारियों को प्रदेश कार्यसमिति में शामिल होने का मौका दिया गया है वो भी व्यवस्थाएं देखने के लिए। अब सवाल इस बात का उठता है कि जब प्रदेश कार्यसमिति में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और पैनलिस्ट शामिल नहीं होंगे तो बैठक में क्या फैसले लिए गए हैं उन प्रवक्ताओं को कैसे पता चलेगा। चैनलों की डिबेट में पार्टी के प्रवक्ता किस प्रकार से पार्टी का पक्ष रख पाएंगे। इस बात में कोई सक नहीं कि प्रवक्ताओं और पैनलिस्टों को प्रदेश पदाधिकारी का दर्जा नहीं दिया जाता है। और प्रदेश कार्यसमिति में प्रदेश पदाधिकारी ही अपेक्षित होते हैं। लेकिन प्रवक्ता पार्टी का अभिन्न अंग माना जाता है। वहीं प्रवक्ता पार्टी की बात को जनता के सामने रखता है। भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में कई सत्र होंगे और इस दौरान कई राजनीतिक प्रस्ताव भी लाए जाएंगे। पार्टी आगे क्या करने वाली है और भविष्य में कौन-कौन से कार्यक्रम संचालित होने वाले हैं इन सब की जानकारी प्रवक्ताओं को ठीक से नहीं हो पाएगी। एक और अहम बात है कि इस बार कई प्रवक्ता ऐसे भी हैं जो कांग्रेस से आए हैं और उन्हें मीडिया टीम में शामिल किया गया है। ऐसे प्रवक्ताओं को भाजपा को बारीकी से देखने और समझने की जरुरत है। प्रदेश कार्यसमिति एक ऐसा मंच है जिसमें प्रवक्ता पार्टी के बारे में बारीकी से समझता है। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने प्रवक्ताओं को ही शामिल न करने का फैसला लेकर कहीं न कहीं अपना बड़ा नुकसान किया है।

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