भाजपा खुद के नहीं पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को सिखा गई अनुशासन का पाठ,भाजपा में कांग्रेसी कल्चर हावी

मप्र भाजपा को कैडरबेस पार्टी कहा जाता है जहां अनुशासन को सर्वोपरि रखा गया है लेकिन पिछले कुछ महीनों से उसके ठीक उलट भाजपा और कांग्रेस में परिस्थितियां देखने को मिल रही हैं। कांग्रेस से लाखों की संख्या में भाजपा में आए कार्यकर्ताओं ने भाजपाइयों को कांग्रेसी कल्चर सिखा दिया है जिसकी बानगी भाजपा में आए दिन देखने को मिलती रहती है। जिस प्रकार से भाजपा नेताओं की जुवान बेलगाम हुई है उससे अब भाजपा संगठन काफी परेशान है। एक विधायक को समझाइश दी जाती है तो दूसरे विधायक का विवादित बयान आता है। हाल ही में भाजपा के विधायक नरेन्द्र सिंह कुशवाह को प्रदेश नेतृत्व की तरफ से समझाइश दी गई थी। वो मामला अभी तक शांत नहीं हुआ था कि सीहोर से भाजपा विधायक स्वदेश राय का एक वीडियो वायरल हो गया जिसमें वो ऐसी गाली देते नजर आ रहे हैं जिसे शब्दों से बयां नहीं किया जा सकता है। उसके पहले विजय शाह,डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा और प्रहलाद पटेल विवादित बयान देकर पार्टी की समस्या बढ़ा चुके हैं। भाजपा लगातार पार्टी के नेताओं को अनुशासन का पाठ भी पढ़ा रही है लेकिन नतीजा शिफर ही निकल रहा है। दूसरी तरफ भाजपा से सीख लेकर कांग्रेस पार्टी ने संगठन में अनुशासन का डंडा चलाया है जो काफी कारगर साबित हो रहा है। कहते हैं लोहे को लोहा ही काटता है। भाजपा के संगठन और उसके अनुशासन का पाठ भाजपा के कार्यकर्ता तो नहीं सीख पाए लेकिन कांग्रेस ने उन्ही का अनुसरण करके अपने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को अनुशासन का पाठ पढ़ा दिया है। महीने भर पहले कांग्रेस ने मांडू में तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर रखा था जिसमें कांग्रेस के पदाधिकारियों को अनुशासन का पाठ पढ़ाया गया था। अब कांग्रेस उसी श्रृंखला को आगे बढ़ा रही है जिसके तहत प्रदेश के सभी 71 जिलों में नियुक्त किए गए जिला अध्यक्षों को अनुशासन का पाठ पढ़ाने की योजना तैयार की गई है। Mukhabir को मिली सूचना के अनुसार कांग्रेस जल्द ही पचमढ़ी में दस दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन करने जा रही है जिसमें सभी जिला अध्यक्षों को पार्टी के वरिष्ठ नेता न सिर्फ अनुशासन का पाठ पढ़ाएंगे बल्कि भाजपा को किस प्रकार से करारा जवाब देना है और मिशन 2028 की तैयारियोन को कैसे अंजाम देना है उस विषय की भी जानकारी जिला अध्यक्षों को दी जाएगी। कुल मिला कर भाजपा के दांव को भाजपा के खिलाफ ही कांग्रेस आजमा रही है जो कारगर भी होते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस धीरे-धीरे अपने मिशन को पूरा करने की कवायद में जुटी है और भाजपा अपने बेलगाम होते नेताओं को ही सुधारने में समय व्यतीत कर रही है। भाजपा के लिए अभी जिला,प्रदेश कार्यकारिणी की गुत्थी सुलझानी है उसके बाद निगम-मंडलों की नियुक्ति में भी माथापच्ची करना है लिहाजा भाजपा संगठन को एक साथ कई तरफ दिमांग और ऊर्जा को खर्च करना है लेकिन विपक्ष में बैठे कांग्रेसियों का लक्ष्य सिर्फ मिशन 2028 को अंजाम देना है।
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