शासकीय अधिकारी और कर्मचारियों पर सीएम की नजर हुई टेढ़ी,लेटलतीफी पर होगी सख्त कार्रवाई,मुख्यमंत्री निवास से जारी हुए आदेश

मध्य प्रदेश में अधिकारियों-कर्मचारियों की मनमानी पर सरकार लगाम लगाने की योजना पर काम कर रही है| सीएम के निर्देश को गंभीरता से नहीं लेने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी। इसको लेकर सीएम के कार्यालय से सभी विभागों के अधिकारियों को चेतावनी भी जारी की गई है। विभागों द्वारा सीएम की योजनाओं पर ही लापरवाही की जा रही है और पोर्टल पर टारगेट डेट एवं फॉलोअप डिटेल्स समय पर नहीं भरा जा रहा है, जिसके कारण अति महत्वपूर्ण प्रकरणों में विलंब हो रहा है। मुख्यमंत्री से जुड़ी घोषणाओं या महत्वपूर्ण प्रकरणों के निर्देशों के पालन में लेटलटीफी की तो दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा निर्देशित महत्वपूर्ण प्रकरणों पर देरी करने अथवा ऐसे प्रकरणों को गंभीरता से नहीं लेने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने सभी विभाग प्रमुखों को चेतावनी जारी की है। इसमें कहा गया है कि मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा प्रेषित ए प्लस एवं ए मानिट के महत्वपूर्ण प्रकरण नोटशीट के माध्यम से विभागों को भेजे गए हैं। विभागों द्वारा पोर्टल पर टारगेट डेट एवं फॉलोअप डिटेल्स समय पर नहीं भरा जा रहा है, जिसके कारण अति महत्वपूर्ण प्रकरणों में विलंब हो रहा है। जिन विभागों के अधिकारियों द्वारा यह जानकारी पोर्टल पर अपलोड नहीं की गई है, उनकी जिम्मेदारी तय कर उनके विरुद्ध कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी और की गई कार्रवाई से मुख्यमंत्री कार्यालय को सूचित किया जाएगा। सीएम मानिटों का प्राथमिकता से निराकरण कर संबंधित प्रकरणों की नस्तियां समन्वय में प्रस्तुत के भी निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा ने सभी विभागों को उनके यहां लंबित प्रकरणों की जानकारी भेजी है, जिसमें बताया गया है कि कितने मामले पेंडिंग हैं और इनमें कितने मामलों में समय सीमा खत्म होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इनमें गृह विभाग के ए प्लस प्रकरण 64 हैं और ए प्रकरण 49 हैं जिनमें समय सीमा खत्म होने पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है| पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 24 एवं 15, राजस्व विभाग के 13 एवं 15 मामले, लोनिवि के 12 एवं 19 मामले, स्कूल शिक्षा विभाग के 13 एवं 21 मामले, जीएडी के 29 एवं 16 मामल, वन विभाग के 15 एवं पांच मामले हैं। सभी विभागों के कुल प्रकरण देखे जाएं तो इनमें 1317 प्रकरण आए थे, जिनमें से 239 ही निराकृत किए गए और इनमें 212 मान्य किए गए है।
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मुख्यमंत्री निवास पर हुआ महिला पंच सरपंच सम्मेलन और रक्षाबंधन कार्यक्रम
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