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मध्य प्रदेश

सांसदों के गांव गोद लेने की योजना फेल होने के बाद अब मोहन सरकार के विधायकों को एक गांव गोद लेने का मिला निर्देश

Mar 28, 2026 2 min read
सांसदों के गांव गोद लेने की योजना फेल होने के बाद अब मोहन सरकार के विधायकों को एक गांव गोद लेने का मिला निर्देश
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मध्य प्रदेश की मोहन सरकार साल 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रुप में मना रही है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने भाजपा के सभी विधायकों को निर्देश दिया है कि वो अपनी विधानसभा में एक गांव को चिन्हित कर उसे गोद लें। इन गांवों को 'विधानसभा ग्राम' के रुप में विकसित किया जाएगा। लेकिन सवाल इस बात का उठता है कि पीएम और सीएम के निर्देश पर गांवों को गोद तो ले लिया जाता है लेकिन उन गांवों की ओर जनप्रतिनिधि कभी झांकने तक नहीं जाते हैं। कृषि कल्याण वर्ष के मौके पर सीएम यादव ने पार्टी के प्रत्येक विधायक को गांव गोद लेने के लिए निर्देश तो दे दिया लेकिन उन्हें यह याद नहीं आया कि कुछ ऐसी ही सोच लेकर पीएम मोदी ने 11 अक्टूबर 2014 को 'सांसद आदर्श ग्राम योजना' योजना शुरु की थी जिसके तहत सांसदों ने गांव गोद लिए थे।जिसका उद्देश्य 2019 तक आदर्श गांव बनाना था। योजना का फोकस ग्रामीण बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, और सामाजिक विकास पर था। लेकिन पीएम मोदी की वो सोच सिर्फ फाइलों तक ही सिमट कर रह गई। जिन गांवों को सांसदों ने गोद लिया था उन गांव की ओर सांसदों ने कभी दोबारा मुड़ कर नहीं देखा। कुल मिला कर पीएम मोदी की घोषणा को उन्हीं की पार्टी के सांसदों ने फाइल की धूल में दबा कर रख दिया। अब पीएम मोदी के नक्शे कदम पर चलते हुए सीएम मोहन यादव ने विधायकों को एक गांव गोद लेने का निर्देश दिया है। ऐलान के प्रति सीएम की निष्ठा ठीक है लेकिन विधायक इस घोषणा को गंभीरता से लें तब तो ठीक है अन्यथा यह घोषणा भी एक घोषणा बन कर ही रह जाएगी।

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