गुटों में बंटी कांग्रेस में राहुल गांधी को हराने एकजुट हुए सभी नेता सबको मिली जीत सिर्फ राहुल 'हारे' चुनाव

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी अपने संबोधनों में अक्सर गुटबाजी का जिक्र करते रहे हैं। लेकिन राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के सारे छत्रप ऐसे एकजुट हुए कि उन्होंने राहुल गांधी को ही हरा दिया। दरअसल मीनाक्षी नटराजन तो महज एक मोहरा थीं। मीनाक्षी का नाम राहुल गांधी ने प्रस्तावित किया था। अब राहुल के सुझाए नाम पर कोई उंगली तो उठा नहीं सकता लिहाजा सभी ने ऊपरी तौर पर सहमति दे दी। असली खेल यहां से शुरु होता है। दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा जाने के लिए भले मना किया था लेकिन मंशा यही थी कि पार्टी उन्हें तीसरी बार राज्यसभा भेजे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वहीं कमलनाथ भी राज्यसभा के बहाने एक बार फिर देश के सर्वोच्च सदन में जाने की इच्छा रखते थे लिहाजा उनके मंसूबों पर भी पानी फिर गया। जीतू पटवारी,अरुण यादव,सज्जन सिंह वर्मा सहित अनेक नेता राज्यसभा की महज एक सीट पर नजर लगाए बैठे थे लेकिन मीनाक्षी नटराजन के सामने वो सिर्फ 'नट' बन कर रह गए। यहीं से शुरु हुआ 'आपरेशन मीनाक्षी' पहले फार्म भरने के लिए जेपी धनोपिया जैसे वकील को संगठन की तरफ से जिम्मेदारी दी गई,उसके बाद किसी डमी कैंडीडेट को नहीं उतारा गया,फिर केरला से मीनाक्षी नटराजन के आपराधिक प्रकरणों की जानकारी मंगाई गई और उसे विधानसभा सचिवालय तक पहुंचाया गया। इतना सबकुछ होने के बाद कांग्रेस की तरफ से भाजपा को जानकारी दी गई। कुल मिला कर यह चुनाव मीनाक्षी नटराजन का नहीं बल्कि मध्य प्रदेश कांग्रेस V/S राहुल गांधी था जिसमें सभी नेताओं ने पूरी ईमानदारी के साथ एक जुटता का परिचय दिया और राहुल गांधी को हराने के लिए सारे नेता एकजुट हुए। बांकी विपक्ष ने तो अपना काम किया। परोसी हुई थाल हर इंसान को अच्छी लगती है लिहाजा कांग्रेस ने राज्यसभा की तीसरी सीट थाल में सजा कर दी तो भाजपा कैसे अस्वीकार कर देती। इस पूरे प्रकरण का लब्बो- लुआब सिर्फ एक था राहुल गांधी को हराना जिसमें बहुमत होते हुए भी कांग्रेस नेताओं ने हरा दिया। अब इसी टीम के भरोसे राहुल गांधी नगरीय निकाय,विधानसभा और फिर लोकसभा का भी चुनाव लड़ेंगे।
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हेमंत के एक बाउंसर से 'हिट विकेट' हुए सारे कांग्रेसी, MUKHBIR ने नौ जून को लिखा था खंडेलवाल को समझ नहीं पाए कांग्रेसी
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