दतिया के उपचुनाव से सरकार में होगी 'संकटमोचक' की वापसी दंगल सज चुका है प्रतिद्वंदी का इंतजार बांकी

मध्य प्रदेश की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा और बीजेपी के फायरब्रांड नेता डाक्टर नरोत्तम मिश्रा के लिए एक बार फिर चुनावी दंगल में दो हाथ करते नजर आ सकते हैं। हांलाकि अभी तक भाजपा ने उम्मीदवार का औपचारिक ऐलान नहीं किया है लेकिन यह तय है कि पूर्व गृह मंत्री एक बार फिर चुनावी मैदान में होंगे।
'दतिया के दादा' की वापसी
दतिया से 5 बार विधायक रह चुके नरोत्तम मिश्रा को क्षेत्र में 'दादा' के नाम से जाना जाता है। शिवराज सरकार में वे गृह मंत्री रहते हुए पार्टी के संकटमोचक की भूमिका में थे। साल 2020 में कमलनाथ सरकार गिराने में भी उनकी भूमिका सबसे अहम मानी जाती है।
हिंदुत्व और एक्शन का चेहरा
नरोत्तम मिश्रा अपनी बेबाक बयानबाजी और विपक्ष को सटीक जवाब देने के लिए जाने जाते हैं। शिवराज सरकार में उन्होंने लव जिहाद के खिलाफ कानून लाकर प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाई। मीडिया के करीबी और कट्टर हिंदुत्व के एजेंडे के लिए वे बीजेपी के बड़े ब्रांड फेस हैं।
जब-जब मिली जिम्मेदारी, छोड़ी छाप
पार्टी ने जब-जब दूसरे राज्यों में चुनावी कमान सौंपी, नरोत्तम मिश्रा ने वहां भी अपनी रणनीति से अमिट छाप छोड़ी। संगठन के लिए वे संकट के समय में सबसे भरोसेमंद नाम माने जाते हैं।
ग्वालियर-चंबल को दी बड़ी सौगात
मां पीतांबरा के भक्त डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने ग्वालियर-चंबल अंचल को नवग्रह शक्तिपीठ की स्थापना करके बड़ी धार्मिक सौगात दी थी। दतिया में उनका जनाधार आज भी सबसे मजबूत माना जाता है।
खाली थी जगह
पिछले कुछ समय से राज्य की राजनीति में नरोत्तम मिश्रा की सक्रियता कम थी। उनके उपचुनाव लड़ने के ऐलान के साथ ही बीजेपी ने ग्वालियर-चंबल में अपना सबसे बड़ा हथियार फिर से मैदान में उतार दिया है।
अब देखना होगा कि 'दादा' की वापसी दतिया में बीजेपी को कितनी बड़ी जीत दिलाती है।



