'घंटे' की गूंज अब भी सुनाई दे रही और जनता भी यही सोच रही कि सरकार के विश्वास पर क्या उसके हाथ 'घंटा' ही लगेगा

पिछले महीने प्रदेश की मोहन सरकार ने दो साल की कामयाबी का जश्न मनाया लेकिन उस जश्न की खुशी ज्यादा दिन तक नहीं रह पाई क्योंकि इंदौर में हुई दूषित पानी से मौतों ने पूरी कामयाबी के जश्न को पल भर में फीका कर दिया और सरकार की ऐसी कमजोरी जनता के बीच लेकर आया जिसकी किसी को उम्मीद तक नहीं थी। दरअसल सरकार के अंदर चल रही वर्चस्व की लड़ाई दूषित पानी मामले से एक झटके में बाहर आ गई। जिस बात की चर्चा अब तक बंद कमरों अथवा दवी जुवां से हुआ करती थी वहीं चर्चा अब खुले मैदान में होने लगी है कि सरकार के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। मजे की बात यह है कि इतनी बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद भी राज्य सरकार सिर्फ अपनी कमियों को ढकने का प्रयास करती रही। निगम आयुक्त का तबादला कर सरकार ने इतने बड़े मामले से पल्ला झाड़ने की कोशिश की है। अब सरकार और संगठन दोनों इस बात पर लगे हैं कि किस प्रकार से इंदौर मामले में धूल डाली जाए और उससे आगे निकला जाए। क्योंकि जिस प्रकार से इंदौर में घंटा बजा उसकी गूंज अब भी लगातार सुनाई दे रही है। सरकार को भले लग रहा है कि मामला ठंडा हो चुका है लेकिन हकीकत तो यही है कि घंटे की गूंज कानों तक अब भी आ रही है। इस पूरे मामले में सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की लेकिन सीएम यादव ने मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई न कर सरकार की कमजोरी को जनता के सामने लाने का काम किया है। सरकार को चाहिए था कि इस पूरे मामले में गंभीर कार्रवाई कर देश के सामने एक नजीर पेश करे लेकिन सरकार अब तक इस मामले को ठंडे बस्ते में ही डालने के प्रयासों में जुटी है जिसके कारण मामला शांत होने के बजाय और गंभीर होता जा रहा है। मामला इस लिए भी आसान नहीं है क्योंकि इंदौर के प्रभारी मंत्री खुद सीएम मोहन यादव हैं लिहाजा जिस प्रकार से वहां का शासकीय तंत्र है वो सिर्फ सीएम की सुनता है। और यही वजह है कि विभागीय मंत्री की भी इंदौर में नहीं चल पा रही है जिसके चलते उनके अंदर की जो भड़ास थी वो घंटे के रुप में बाहर आई और उसकी गूंज लगातार सुनाई दे रही है। स्वच्छता का मुद्दा पीएम मोदी का है और उसी स्वच्छता पर भाजपा सरकार के मंत्री ने घंटा बजा दिया जिसके चलते अब जनता यह सोचने पर मजबूर हो गई है कि भाजपा पर लगातार विश्वास करने पर क्या उसे 'घंटा' ही मिलेगा।
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'हर हाथ को काम' और काम नहीं मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देगी मोहन सरकार
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