फसल में गिरे ओले और सियासत में पड़े तमाचों के निशान कुछ समय बाद दिखाई पड़ते हैं कुछ ऐसे ही निशान एमपी में भी दिखेंगे

मध्य प्रदेश की सियासत में इस वक्त शांति दिखाई पड़ रही है। लेकिन कहते हैं कि जब भी शांति होती है तो उसके बाद तूफान भी आता है। जिस प्रकार से दतिया विधानसभा में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है उसके बाद एमपी बीजेपी के नेताओं की दिल्ली में बंद कमरे में परेड हुई जो एमपी की जनता को दिखाई नहीं पडी। लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि सबकुछ ठीक है। ये शांति तूफान से पहले वाली है। सीएम से पीएम मोदी नहीं मिले। अमित शाह से मिलने के लिए सीएम मोहन यादव रात 11 बजे तक इंतजार करते रहे उसके बाद उन्हें बैरंक ही लौटना पड़ा। दिल्ली में हुई परेड के नतीजे 15 अगस्त को उस वक्त देखने को मिले जब लाल परेड ग्राउंड में ध्वजारोहण के बाद सीएम हाउस में अचानक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक गुप्त थी और उस बैठक में सिर्फ तीन नेता शामिल थे जिसमें क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल,सीएम मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल शामिल थे। दरअसल यह बैठक दतिया चुनाव में हुई हार और भाजपा नेताओं की हुई किरकिरी को लेकर रखी गई। बैठक में अचानक पीएम मोदी की एमपी के नेताओं से हो रही मुलाकात को लेकर भी काफी चर्चा हुई। दरअसल जिस प्रकार से एमपी बीजेपी के सांसदों से पीएम मोदी और अमित शाह वन टू वन चर्चा कर रहे हैं इससे सीएम मोहन यादव और बीजेपी अध्यक्ष के दिल की धड़कनें बढ़ीं हुई हैं। बीजेपी के सामने भाजपा के खिलाफ सवर्णों में बढ़ता असंतोष भी एक बड़ी चुनौती बन चुका है। इंटेलीजेंस से मिली रिपोर्ट के अनुसार सीएम सवर्ण वर्ग की नाराजगी से काफी हैरान और परेशान हैं। क्योंकि जिस प्रकार से पूर्व गृह मंत्री का टिकट भाजपा ने काटा उसके बाद खासकर ब्राह्मण वर्ग पूरी तरह से भाजपा से अलग-थलग नजर आ रहा है। भाजपा ब्राह्मण सहित सवर्ण वर्ग में आने वाले सभी वर्गों पर बारीकी से ध्यान दे रही है। लेकिन इतना सबकुछ होने के बाद भी बीजेपी अब इस बात को लेकर टेंशन में है कि जिस प्रकार से पूर्व गृह मंत्री का टिकट काटा गया उसको लेकर जनता के बीच कैसे जाएं और सवर्णों को कैसे समझाइश दी जाए। केन्द्रीय नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि जो हालात बिगड़े हैं उसको आपको ही सुधारने हैं। अप्रत्यक्ष तरीके से केन्द्रीय नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि स्थिति सुधारो अथवा स्थान खाली करो। इसी लिए कहते हैं कि फसल में गिरे ओले और सियासत में पड़े तमाचे का असर कुछ समय बाद दिखाई पड़ता है।
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What is your reaction to this story?सीएम मोहन यादव ने पूर्व सीएम के बेटे पर निशाना साधते हुए 'परिवारवाद' पर किया हमला
सावन की फुरफुरी के बीच बीजेपी नेताओं की आपसी बैठक सियासत में तलाश रही नए समीकरण
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