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मध्य प्रदेश

कांग्रेस से भाजपा में आए कार्यकर्ता 'खूंटा' गाड़ कर बीजेपी कार्यालय में बैठे रहते हैं इसलिए बीजेपी कार्यकर्ताओं में असुरक्षा बना रही घर

Jan 8, 2026 3 min read
कांग्रेस से भाजपा में आए कार्यकर्ता 'खूंटा' गाड़ कर बीजेपी कार्यालय में बैठे रहते हैं इसलिए बीजेपी कार्यकर्ताओं में असुरक्षा बना रही घर
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कार्यकर्ताओं की पार्टी कहलाने वाली भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के दिल और दिमाग में असुरक्षा की भावना तेजी से आती जा रही है और उसके परिणाम स्वरुप SIR के दौरान कार्यकर्ताओं की निष्कृयता से पता भी चला है। लंबे समय से पार्टी में कार्यकर्ताओं से संबंधित कोई कार्यक्रम नहीं होना भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। हाल ही में हुई प्रदेश पदाधिकारियों की अप्रत्याशित नियुक्तियों से भी पार्टी के कार्यकर्ता हैरान और परेशान नजर आए हैं। ऐसा भी नहीं कि इन सब बातों की जानकारी प्रदेश नेतृत्व को नहीं है इसी लिए प्रदेश अध्यक्ष ने सहयोग सेल शुरु किया है उसके अलावा वो खुद प्रयास कर रहे हैं कि कार्यकर्ताओं से वो ज्यादा से ज्यादा मेल मिलाप कर सकें जिससे कार्यकर्ताओं के मन में चल रही असुरक्षा की भावना को खत्म किया जा सके। लेकिन प्रदेश नेतृत्व की तरफ से अब तक किए गए तमाम प्रयास नाकाम साबित हो रहे हैं। दरअसल विधानसभा से लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने जिस प्रकार से भर्ती अभियान चला कर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पार्टी में शामिल किया उसका असर अब पार्टी में देखने को मिल रहा है। कांग्रेस से आए कार्यकर्ता आज तक भाजपा के बन नहीं पाए उल्टे जो भाजपा के जो मूल कार्यकर्ता थे वो कांग्रेस कार्यकर्ताओं के भाजपा में आने से खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। इसी लिए पार्टी जब कोई अभियान संचालित करती है तो कार्यकर्ता उसमें रुचि नहीं लेते हैं क्योंकि कांग्रेस से भाजपा में आए कार्यकर्ता उनका सहयोग नहीं करते हैं। कांग्रेस से भाजपा में आए कुछ कार्यकर्ता तो ऐसे हैं जो दिन भर प्रदेश कार्यालय में ही खूंटा गाड़ कर बैठे रहते हैं जिसके कारण भाजपा के मूल कार्यकर्ता और नाराज हो जाते हैं। भाजपा के जो मूल कार्यकर्ता हैं उन्हें कहा जाता है कि क्षेत्र में जाओ और काम करो तो पार्टी आपको खुद काम देखी वहीं कांग्रेस से आने वालों को काम करने के लिए नहीं कहा जाता है यह भी एक बड़ा कारण बनता जा रहा है। आने वाले साल 2027 में प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय के चुनाव होने वाले हैं उसके पहले भाजपा को अपने कार्यकर्ताओं को रिचार्ज करना होगा अथवा कार्यकर्ता आधारित दल कहलाने वाली भाजपा कब कांग्रेस के नक्शे कदम पर चली जाएगी इसका पता भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को भी नहीं लगने पाएगा। हाल ही में रीवा के सेमरिया में हुए उपचुनाव के दौरान जिस प्रकार से भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है वो एक बानगी के रुप में सबके सामने है।

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