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भोपाल

मुख्यमंत्री का पद आता जाता रहता है,मामा भांजे का पद हमेशा रहता हैःशिवराज

सीएम का पद आता-जाता रहता है लेकिन भाई बहन और मामा भांजे पा पद हमेशा बना रहता है। ये कहना है प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) का। गौरतलब है कि शिवराज सिंह चौहान अपने निर्वाचन क्षेत्र बुंदनी के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होने एक जनसभा को संबोधित करते हुए इस प्रकार की बातें कह कर स्थानीय जनता का दिल जीत लिया। शिवराज को इस बार प्रचंड बहुमत मिलने के बाद भी भाजपा के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने मुख्यमंत्री नहीं बनाया और कई जगहों पर लाड़ली बहनें भी उनको घेर कर उनके समर्थन में नारे लगाती नजर आती हैं। शिवराज सिंह चौहान को लेकर केन्द्रीय नेत्रृत्व के पास बहुत शिकायतें थी। जिस प्रकार से उन्होने साढ़े तीन साल के कार्यकाल में अपने पास पावर रखा किसी मंत्री को कुछ भी नहीं करने दिया उससे केन्द्रीय नेत्रृत्व काफी नाराज था। और उसकी बानगी के तौर पर इस विधानसभा चुनाव में भाजपा बिना सीएम के चेहरे मोदी की गारंटी के बल पर चुनाव लड़ी और 163 सीटें लाकर प्रदेश में पांचवी बार भाजपा की सरकर स्थापित की। हांलाकि शिवराज सिंह चौहान अंत तक हार नहीं मान रहे थे। मतगणना समाप्त होते ही जिस प्रकार शिवराज सिंह चौहान ने अपने दौरे शुरु किए थे उससे यही लग रहा था कि शायद केन्द्रीय नेत्रृत्व उन पर फिर महरवान हो जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ और मोहन यादव की लाटरी लग गई।

Jan 3, 2024 2 min read
मुख्यमंत्री का पद आता जाता रहता है,मामा भांजे का पद हमेशा रहता हैःशिवराज

📷 Shivraj Singh Chouhan

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सीएम का पद आता-जाता रहता है लेकिन भाई बहन और मामा भांजे पा पद हमेशा बना रहता है। ये कहना है प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) का। गौरतलब है कि शिवराज सिंह चौहान अपने निर्वाचन क्षेत्र बुंदनी के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होने एक जनसभा को संबोधित करते हुए इस प्रकार की बातें कह कर स्थानीय जनता का दिल जीत लिया। शिवराज को इस बार प्रचंड बहुमत मिलने के बाद भी भाजपा के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने मुख्यमंत्री नहीं बनाया और कई जगहों पर लाड़ली बहनें भी उनको घेर कर उनके समर्थन में नारे लगाती नजर आती हैं। शिवराज सिंह चौहान को लेकर केन्द्रीय नेत्रृत्व के पास बहुत शिकायतें थी। जिस प्रकार से उन्होने साढ़े तीन साल के कार्यकाल में अपने पास पावर रखा किसी मंत्री को कुछ भी नहीं करने दिया उससे केन्द्रीय नेत्रृत्व काफी नाराज था। और उसकी बानगी के तौर पर इस विधानसभा चुनाव में भाजपा बिना सीएम के चेहरे मोदी की गारंटी के बल पर चुनाव लड़ी और 163 सीटें लाकर प्रदेश में पांचवी बार भाजपा की सरकर स्थापित की। हांलाकि शिवराज सिंह चौहान अंत तक हार नहीं मान रहे थे। मतगणना समाप्त होते ही जिस प्रकार शिवराज सिंह चौहान ने अपने दौरे शुरु किए थे उससे यही लग रहा था कि शायद केन्द्रीय नेत्रृत्व उन पर फिर महरवान हो जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ और मोहन यादव की लाटरी लग गई।

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