एमपी कांग्रेस के सबसे नाकाम अध्यक्ष निकले जीतू पटवारी,18 हजार कार्यकर्ता छोड़ चुके पार्टी
कार्यकर्ताओं का एक से दूसरी पार्टी में आना जाना अब कोई बड़ी बात नहीं रही लेकिन एक के बाद,झटके पर झटके एमपी कांग्रेस (mp congress) को लगते जा रहे हैं जिस दिन से जीतू पटवारी (jitu patwari) को पीसीसी चीफ बनाया गया है ठीक उसी दिन से कांग्रेस पार्टी में पलायन का दौर शुरु हो गया है। एक दो नहीं,एक दो हजार भी नहीं अब तक करीब 18 हजार कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस का हाथ छोड़ कर कमल का फूथ हाथ में थाम चुके हैं। पिछले तीन महीने में ऐसा एक भी दिन नहीं गुजरा जब कांग्रेस के सौ-दो सौ कार्यकर्ता पार्टी न छोड़ते हों लेकिन अपनी मस्ती में सराबोर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी को तो जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता है। जो लोग कांग्रेस के लिए सालों से काम करते रहे हैं उनके पार्टी छोड़कर जाने का प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कारण भी नहीं पूछते हैं। इतना ही नहीं उनसे कोई मिलने जाता है तो घंटों तक इंतजार करना पड़ता है किसी तरह से वो सूजी हुई आंखों के साथ बाहर निकलते हैं तो सफाई में कहते हैं कि वर्चुअली मीटिंग चल रही थी। जबकि नेताओं कार्यकर्ताओं को यह मालूम रहता है कि कोई मीटिंग नहीं चल रही थी बल्कि उनके अध्यक्ष सोने में ब्यस्त थे। जीतू पटवारी जब तक अध्यक्ष नहीं थे तब तक अक्शर प्रदेश कार्यालय भी आया करते थे लेकिन अध्यक्ष बनने के बाद वो कार्यालय का रास्ता ही भूल गए। शुक्रवार को Mukhbirmp.com की टीम पीसीसी कार्यालय का मुआयना करने पहुंची तो गिनती के एक दो लोग मिले। जो मिले तो कुछ ज्यादा बोलने की स्थिति में नहीं थे लेकिन दवी जुवां से इतना बोल गए कि ऐसा लगता है जैसे पार्टी में कोई अध्यक्ष ही नहीं है और पूरी पार्टी के कार्यकर्ता खुद को अनाथ सा महसूस करते हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव सिर पर है नामांकन की प्रक्रियाएं चल रही हैं लेकिन पार्टी की तरफ से उन्हे कोई काम ही नहीं बताया जा रहा है जिससे वो खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। जब पार्टी कोई काम ही नहीं दे रही है तो कार्यालय आने का भी कोई मतलब नहीं है। जो कार्यकर्ता और नेता कार्यालय आते भी हैं तो उनका समय वर्मान और पूर्व अध्यक्षों की तुलना में ही बीतता है। कुछ कार्यकर्ता दवी जुवां यह भी कहते हैं कि यही हाल रहा तो आने वाले समय में कार्यालय में जो कर्मचारी काम कर रहे हैं वो भी बीजेपी कार्यालय में नौकरी ढूढने के लिए निकल जाएंगे।

कार्यकर्ताओं का एक से दूसरी पार्टी में आना जाना अब कोई बड़ी बात नहीं रही लेकिन एक के बाद,झटके पर झटके एमपी कांग्रेस (mp congress) को लगते जा रहे हैं जिस दिन से जीतू पटवारी (jitu patwari) को पीसीसी चीफ बनाया गया है ठीक उसी दिन से कांग्रेस पार्टी में पलायन का दौर शुरु हो गया है। एक दो नहीं,एक दो हजार भी नहीं अब तक करीब 18 हजार कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस का हाथ छोड़ कर कमल का फूथ हाथ में थाम चुके हैं। पिछले तीन महीने में ऐसा एक भी दिन नहीं गुजरा जब कांग्रेस के सौ-दो सौ कार्यकर्ता पार्टी न छोड़ते हों लेकिन अपनी मस्ती में सराबोर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी को तो जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता है। जो लोग कांग्रेस के लिए सालों से काम करते रहे हैं उनके पार्टी छोड़कर जाने का प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कारण भी नहीं पूछते हैं। इतना ही नहीं उनसे कोई मिलने जाता है तो घंटों तक इंतजार करना पड़ता है किसी तरह से वो सूजी हुई आंखों के साथ बाहर निकलते हैं तो सफाई में कहते हैं कि वर्चुअली मीटिंग चल रही थी। जबकि नेताओं कार्यकर्ताओं को यह मालूम रहता है कि कोई मीटिंग नहीं चल रही थी बल्कि उनके अध्यक्ष सोने में ब्यस्त थे। जीतू पटवारी जब तक अध्यक्ष नहीं थे तब तक अक्शर प्रदेश कार्यालय भी आया करते थे लेकिन अध्यक्ष बनने के बाद वो कार्यालय का रास्ता ही भूल गए। शुक्रवार को Mukhbirmp.com की टीम पीसीसी कार्यालय का मुआयना करने पहुंची तो गिनती के एक दो लोग मिले। जो मिले तो कुछ ज्यादा बोलने की स्थिति में नहीं थे लेकिन दवी जुवां से इतना बोल गए कि ऐसा लगता है जैसे पार्टी में कोई अध्यक्ष ही नहीं है और पूरी पार्टी के कार्यकर्ता खुद को अनाथ सा महसूस करते हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव सिर पर है नामांकन की प्रक्रियाएं चल रही हैं लेकिन पार्टी की तरफ से उन्हे कोई काम ही नहीं बताया जा रहा है जिससे वो खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। जब पार्टी कोई काम ही नहीं दे रही है तो कार्यालय आने का भी कोई मतलब नहीं है। जो कार्यकर्ता और नेता कार्यालय आते भी हैं तो उनका समय वर्मान और पूर्व अध्यक्षों की तुलना में ही बीतता है। कुछ कार्यकर्ता दवी जुवां यह भी कहते हैं कि यही हाल रहा तो आने वाले समय में कार्यालय में जो कर्मचारी काम कर रहे हैं वो भी बीजेपी कार्यालय में नौकरी ढूढने के लिए निकल जाएंगे।
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