फूफा के सीएम बनते ही भतीजी के दिन फिरे,दिया जा रहा स्पेशल ट्रीटमेंट
शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय शहडोल में तैनात सहायक प्रोफेसर डा. प्रज्ञा यादव (pragya yadav) इन दिनों सुर्खियों में हैं। रिश्ते में उनके फूफा डा. मोहन यादव (mohan yadav) अब मुख्यमंत्री हैं। फूफा के मुख्यमंत्री बनते ही विश्वविद्यालय प्रशासन को भतीजी डा. प्रज्ञा यादव की सुख सुविधा की चिंता सताने लगी। निर्णय लिया गया है कि डा. प्रज्ञा को जो आवास आवंटित किया गया है, उसकी साज-सज्जा व मरम्मत कराई जाए। इसमें करीब 20 लाख रुपये खर्च करने की योजना है। शहडोल में में विश्वविद्यालय परिसर स्थित शहीद पार्क के ठीक सामने उन्हें आवास आवंटित किया गया है, जिसे अब जर्जर घोषित करके हाउसिंग बोर्ड से मरम्मत कराई जा रही है। आवश्यक तोड़-फोड़ और रंगरोगन का काम शुरू हो चुका है। प्रयास यह है कि जितनी जल्दी हो सके, इस मकान को चकाचक कर दिया जाए। यह भी बता दें कि विश्वविद्यालय में डा. प्रज्ञा यादव की नियुक्ति डा. मोहन यादव के उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुई थी। भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है, इसलिए इसकी मरम्मत कराई जा रही है। इसमें समय तो लगेगा ही। तब तक डा. प्रज्ञा को दूसरी जगह शिफ्ट होने को कहा गया है। अभी इसका अंदाजा नहीं है कि कितना खर्च आएगा, लेकिन 20 लाख रुपये से ऊपर खर्च होने की संभावना है।

📷 Mohan Yadav
शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय शहडोल में तैनात सहायक प्रोफेसर डा. प्रज्ञा यादव (pragya yadav) इन दिनों सुर्खियों में हैं। रिश्ते में उनके फूफा डा. मोहन यादव (mohan yadav) अब मुख्यमंत्री हैं। फूफा के मुख्यमंत्री बनते ही विश्वविद्यालय प्रशासन को भतीजी डा. प्रज्ञा यादव की सुख सुविधा की चिंता सताने लगी। निर्णय लिया गया है कि डा. प्रज्ञा को जो आवास आवंटित किया गया है, उसकी साज-सज्जा व मरम्मत कराई जाए। इसमें करीब 20 लाख रुपये खर्च करने की योजना है। शहडोल में में विश्वविद्यालय परिसर स्थित शहीद पार्क के ठीक सामने उन्हें आवास आवंटित किया गया है, जिसे अब जर्जर घोषित करके हाउसिंग बोर्ड से मरम्मत कराई जा रही है। आवश्यक तोड़-फोड़ और रंगरोगन का काम शुरू हो चुका है। प्रयास यह है कि जितनी जल्दी हो सके, इस मकान को चकाचक कर दिया जाए। यह भी बता दें कि विश्वविद्यालय में डा. प्रज्ञा यादव की नियुक्ति डा. मोहन यादव के उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुई थी। भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है, इसलिए इसकी मरम्मत कराई जा रही है। इसमें समय तो लगेगा ही। तब तक डा. प्रज्ञा को दूसरी जगह शिफ्ट होने को कहा गया है। अभी इसका अंदाजा नहीं है कि कितना खर्च आएगा, लेकिन 20 लाख रुपये से ऊपर खर्च होने की संभावना है।
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केन्द्र सरकार से मिली वित्तीय सहायता,प्रदेश में और तेज होगी विकास की गति
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