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देशभक्ति की अलख जगा कर भाजपा जनता के दिल में करेगी राज
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ना सिर्फ पार्टी के लिए काम करना चाहती है बल्कि देश के बलिदानियों को याद करने का भी कोई मौका नहीं छोड़ती। यही कारण है कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में 13 से 15 अगस्त के बीच भाजपा प्रदेश भर में तिरंगा यात्रा निकालने जा रही है। और 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस भी भाजपा मना रही है। इस दौरान भाजपा की ओर से मेरी माटी-मेरा देश अभियान के लिए भाजपा की ओर से टोलिया गठित की गई हैं। दरअसल पीएम मोदी ने मन की बात के दौरान मेरी माटी-मेरा देश अभियान मनाने के लिए देश की जनता से आह्वान किया था। इसके अंतर्गत तिरंगा यात्राएं और हर घर तिरंगा अभियान चला कर भारतीय जनता पार्टी देश के युवाओं में देशभक्ति की अलख जगाना चाहती है। इस दौरान भाजपा के कार्यकर्ता महापुरुषों की मूर्तियों और स्मारकों पर माल्यार्पण करेंगे। 14 अगस्त को प्रदेश भर में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस पूरे अभियान में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा खुद रुचि ले रहे हैं और इसी लिए उन्होने मेरी मेटी-मेरा देश अभियान के लिए टोलियों का गठन किया है। इस अभियान के माध्यम से भाजपा एक बार फिर प्रदेश (BJP MP) की जनता के बीच पहुंचना चाहती है। भाजपा एक तीर से दो शिकार कर रही है। भाजपा इस अभियान के माध्यम से प्रदेश के युवाओं के दिलों में देश भक्ति की अलख तो जगाएगी ही साथ ही जनता के बीच पहुंच कर भाजपा और कांग्रेस के बीच का फर्क भी बताएगी। भाजपा के कार्यकर्ता लोगों से संपर्क और संवाद करेंगे और उन्हे बताएंगे कि प्रदेश की शिवराज सरकार और देश की मोदी सरकार ने पिछले कुछ सालों में देश की तस्वीर और तकदीर बदलने का काम किया है। भाजपा के नेताओं का मानना है कि राजनीति अपनी जगह होती है लेकिन देश के प्रति भक्ति अपनी जगह होती है और आने वाली पीढियों को देश भक्ति के प्रति जागरुक करना जरुरी है इसी लिए भाजपा की ओर से इस प्रकार से नवाचार किए जा रहे हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का मानना है कि सिर्फ तिरंगा लहरा देना ही देश भक्ति नहीं अथवा आजादी का सम्मान नहीं है बल्कि देश के लिए जिन असंख्य लोगों ने अपने जीवन का बलिदान दे दिया उनको याद करना और फिर उसे युवा पीढ़ी तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण है तभी आज की नई पीढ़ी चन्द्रशेखर आजाद,मेता जी सुभाष चन्द्रबोष सहित अन्य बलिदानियों के बलिदान को समझेगी और आजादी की कीमत को पहचानेगी। क्योंकि इस आजादी के लिए देश के महापुरुषों ने बहुत कुछ किया है लिहाजा उके बलिदान को बताना देश के हर नागरिक का फर्ज है।

पीएम मोदी का वंशवाद पर करारा प्रहार,गांधी प्रतिमा के सामने NDA के सांसदों ने किया प्रदर्शन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वंशवाद पर करारा प्रहार करते हुए कुछ नारे बुलंद किया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने तीन सन्देश दिए हैं जिसमें उन्होने कहा है कि वंशवाद छोड़ो इंडिया, तुष्टिकरण छोड़ो इंडिया, भ्रष्टाचार छोड़ो इंडिया। पीएम मोदी की तरफ से वंशवाद पर संदेश मिलते ही NDA के सांसदों ने संसद भवन स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने वंशवाद के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने हाथ में तख्ती थाम कर अन्य सांसदों के साथ जमकर विरोध प्रदर्शन किया है। गौरतलब है कि पीएम मोदी राजनीति में लगातार वंशवाद को खत्म करने की वकालत करते रहे हैं। जब भी पीएम मोदी की जनसभाएं होती हैं तो वंशवाद के निशाने पर सबसे आगे गांधी खानदान ही होता है। भोपाल दौरे पर भी पीएम मोदी ने कहा था कि अगर गांधी खानदान को समृद्ध करना है तो कांग्रेस को वोट दीजिए और देश को समृद्ध करना करना है तो भाजपा को वोट दीजिए। पीएम मोदी ने जिस इंडिया की बात कही है वो कांग्रेस सहित अन्य दलों ने महागठबंधन बनाया है जिसको 'इंडिया' नाम दिया गया है। इसी लिए पीएम मोदी ने वंशवाद छोड़ो इंडिया का नारा दिया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ हमेशा पीएम मोदी ने अपनी आवाज बुलंद की है और वो जीरो टालरेंस की हमेशा बात करते रहे हैं। वंशवाद को लेकर जिस प्रकार से पीएम मोदी ने रणनीति अपनाई है उसी का नतीजा है कि भाजपा के कई नेता पुत्रों का राजनीतिक भविष्य दांव पर लग गया है। गोपाल भार्गव बेटे को टिकट दिलाने के लिए अपनी सारी ताकत झोंक चुके हैं लेकिन उन्हे संगठन की ओर से कोई आश्वासन नहीं मिला है। इसके अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया भी अपने बेटे के लिए राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं तो वहीं सीएम शिवराज सिंह चौहान खुद अपने बेटे के राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित हैं। भाजपा में भी लिष्ट बहुत बड़ी है नेता पुत्रों की जिन नेताओं के बेटे राजनीति में सफल हो गए उन्हे दिक्कत नहीं है लेकिन अब जो मंत्री और विधायक हैं उनके पुत्रों को लेकर राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। और यही कारण है कि कई वरिष्ठ नेता इस वक्त केन्द्रीय नेतृत्व से नाराज भी चल रहे हैं।