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मोहन की 'अग्नि परीक्षा' चार दिग्गज परीक्षा लेने के लिए सदन में हमेशा रहेंगे मौजूद
डॉ. मोहन यादव (mohan yadav) प्रदेश के नए मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। काफी समय बाद एमपी को नया मुख्यमंत्री मिला है लेकिन सवाल इस बात का उठता है कि भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने जिस प्रकार से चार वरिष्ठ नेताओं को मोहन यादव का जूनियर बनने के लिए उन्हे मजबूर कर दिया है तो क्या वो चारों दिग्गज अपनी सिकस्त को ऐसे ही स्वीकार कर लेंगे या फिर डॉ. मोहन यादव के लिए समस्या भी खड़ी करेंगे। इस बात में कोई शक नहीं है कि डॉ. मोहन यादव एक सुलझे हुए खिलाड़ी हैं लेकिन जिन सीनियरों को उनका जूनियर बनने के लिए मजबूर कर दिया गया है तो क्या वो अपमान के आंसू पी कर ऐसे ही अपनी सियासी जमीन खिसकते हुए देखते रहेंगे। कहते हैं दुस्मन का दुस्मन दोस्त होता है ठीक वैसा ही जैसा मोहब्बत और जंग में सबकुछ जायज होता है। लिहाजा राजनीति में न कोई स्थाई दोस्त होता है और न ही कोई दुस्मन। मुख्यमंत्री की दौड़ में सबसे आगे चल रहे नरेन्द्र सिंह तोमर (narendra singh tomar) को पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष बना कर उन्हे उनके राजनीतिक कद का अहसास करवा दिया है तो वहीं पश्चिम बंगाल में भाजपा की जमीन तैयार करने वाले कैलाश विजयवर्गीय (kailash Vijayvargiya) को भी भाजपा ने उनका कद और पार्टी में क्या हैसियत है वो बता दिया है। प्रलाद पटेल भी भाजपा के कद्दावर नेता हैं उम्र के अंतिम पड़ाव में वो भी अपना डेजिग्नेशन बदलना चाहते थे लेकिन केन्द्रीय नेत्रृत्व ने यह बता दिया कि आप विश्वास के लायक नहीं हो पहले पल्टी मार चुके हो। अब बात करते हैं एक ऐसे नेता कि जो पिछले 18 साल से एमपी बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा था। लाड़ली बहनों का भाई और लाड़ली लक्ष्मियों का मामा। प्रदेश में जब सब कह रहे थे कि सीएम विरोधी लहर है तब उन्होने सभी के समीकरण को धता बताते हुए 163 सीटें लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आखिर में नतीजा यह निकला कि केन्द्रीय नेत्रृत्व ने उन्हे भी दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल कर बाहर कर दिया। और तीसरी बार चुनाव जीत कर आए डॉ. मोहन यादव को मप्र का अगला मुख्यमंत्री बना दिया। फिलहाल भाजपा के सभी नेताओं के होंठों पर मुस्कान तो दिख रही है लेकिन मुस्कान कुटिलता की भी निशानी होती है किसी को यह नहीं भूलना चाहिए। आने वाले समय में प्रदेश के नए मुखिया को अपने घर के अंदर ही जूझने के लाए तैयार रहना पड़ेगा।

भाजपा विधायक दल का बड़ा फैसला मोहन यादव होंगे एमपी के अगले सीएम
भारतीय जनता पार्टी विधायक दल की बैठक में बड़ा फैसला किया गया है। भाजपा की बैठक में इस बार सीएम पद पर मोहन यादव (mohan yadav) को चुना गया है। मोहन यादव के साथ दो उपमुख्यमंत्री भी होंगे जिसमें राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा का नाम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह तोमर अब विधानसभा अध्यक्ष में स्पीकर की कमान संभालते हुए नजर आएंगे। यह बात पहले से ही तय थी कि अगला सीएम भी ओबीसी से ही होगा। मोहन यादव अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पृष्ठभूमि से आते हैं। इससे पहले मोहन यादव उच्च शिक्षा मंत्री की बागडोर संभाल रहे थे ।

'राम लला हम आएंगे' बीजेपी की तरफ से बांटा जा रहा निमंत्रण
22 जनवरी को भगवान राम अयोध्या के राम मंदिर में विराजमान होने जा रहे हैं जिसको लेकर पूरे देश में हर्ष और उल्लास का माहौल देखने को मिल रहा है (ram mandir ayodhya)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यजमान की भूमिका में रहेंगे (pm narendra modi)। इस पूरे आयोजन में देश भर से करीब सात हजार वीवीआईपी को आमंत्रित किया गया है। उसके अलावा देश भर की जनता को पीले चावल देकर आम नागरिकों को भी अयोध्या आने के निए आमंत्रित किया जा रहा है। इस पूरे आयोजन में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अयोध्या आने के लिए भारतीय जनता की ओर से भी लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है। मामले में कांग्रेस के कुछ नेताओं का तर्क है कि क्या इस राम मंदिर का निर्माण भारतीय जनता पार्टी करवा रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राजनीतिक लाभ लेने के लिए भाजपा के नेता जनता के बीच कार्ड भेज रहे हैं और अयोध्या आने का निमंत्रण दे रहे हैं। वहीं बीजेपी के नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा है कि कांग्रेस वालों को किसी ने रोका तो नहीं है। यह राम काज है जिसमें सभी अपनी आस्था के हिसाब से लगे हैं लिहाजा भाजपा के कार्यकर्ताओं की भगवान राम पर आस्था है तो वो 22 जनवरी के लिए खुल सभी को निमंत्रण बांट रहे हैं बांकी कांग्रेस वालों को किसी ने रामकाज के लिए मना किया है क्या? वो भी आएं और भगवान राम का नाम लेकर रामकाज में जुट जाएं।

आज तय होगा प्रदेश का मुखिया,प्रदेश अध्यक्ष और मीडिया प्रभारी ने बैठक स्थल का किया निरीक्षण
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में अगले पांच साल के लिए प्रदेश का मुखिया तय किया जाएगा (madhya pradesh cm)। इस बैठक पर प्रदेश के हर नागरिक की नजर है। दिल्ली से आ रहे केन्द्रीय पर्यवेक्षकों के नेत्रृत्व में भाजपा विधायक दल की बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में शामिल होने के लिए भाजपा के.सभी 163 विधायक एक दिन पहले ही भोपाल पहुंच चुके हैं वो भी जानना चाहते हैं कि उनका अगला नेता कौन होगा (bjp mla meeting)। बैठक से पहले प्रदेश कार्यालय को दुल्हन की तरह सजाया गया है। कार्यालय मंत्री राघवेन्द्र शर्मा की देखरेख में पूरा काम किया जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) खुद फीडबैक ले रहे हैं और कहीं कोई कमी न रह जाए इसलिए उन्होने बैठक स्थल का खुद निरीक्षण किया। और जहां कोई भी कमी मिली उसको दुरुस्त करने के लिए निर्देशित किया। प्रदेश अध्यक्ष के साथ बीजेपी प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल (ashish agrawal) सहित पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का बढ़ेगा कद,अध्यक्ष बनने के बाद मप्र भाजपा की बढ़ी लोकप्रियता
मप्र बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) को शुभंकर अध्यक्ष कहा जाता है। दरअसल शुभंकर का तमगा भी उन्हे उनकी मेहनत के बल पर ही मिला है। वीडी शर्मा जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए थे तब पार्टी सत्ता से बाहर हो चुकी थी। लेकिन सिंधिया भाजपा में आए और साल 2020 में भाजपा की सरकार मप्र में एकबार फिर स्थापित हो गई। इस बीच 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए जिसमें भाजपा ने 19 सीटों पर जीत हासिल कर प्रदेश में स्थाई सरकार बना ली। वीडी शर्मा पर कांग्रेस के नेताओं ने लगातार आरोप लगाए लेकिन उन्होने कांग्रेस के हर आरोप का मुहुतोड़ जवाब दिया। विधानसभा चुनाव की बारी आई तो लगातार प्रचारित किया गया कि उनके ब्योहार से पार्टी के कार्यकर्ता खुश नहीं हैं और प्रदेश अध्यक्ष ने उसी आरोप को अपनी ताकत बना लिया। लगातार पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की (mp bjp)। ताबड़तोड़ प्रवास किया,बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ उन्होने कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग की उनकी शिकायतें सुनी और यथा संभव उनकी शिकायतों को दूर भी किया। नतीते के तौर पर भाजपा के कार्यकर्ता एकजुट हो गए। प्रदेश के अलग-अलग मीडिया संस्थानों से सरकार विरोधी लहर की खबर आ रही थी तब बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा एक ही बात कहते नजर आते थे कि इस बार भाजपा ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी। आखिर तीन दिसंबर को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की बात सही साबित हुई और भाजपा ने 163 सीटों पर जीत हासिल कर प्रचंड बहुमत हासिल कर लिया (madhya pradesh elections)। अब पार्टी में मुख्यमंत्री पद को लेकर मंथन चल रहा है। सार्वजनिक तौर पर प्रदेश अध्यक्ष यह कह चुके हैं कि वो सीएम पद की दौड़ में शामिल नहीं हैं लेकिन यह बात तो तय है कि उनके अध्यक्षीय कार्यकाल में भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश में दो बार जीत का पर्चम लहराया है मतलब साफ है कि केन्द्रीय नेत्रृत्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को कोई बड़ी जिम्मेदारी देने की योजना तैयार कर रहा है।

'नरेन्द्र सिंह तोमर होंगे प्रदेश के अगले सीएम',दो डिप्टी सीएम और और 29 मंत्री लेंगे शपथ
मप्र में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा इस बात को लेकर संशय और कयासों का दौर लगातार जारी है (mp chief minister)। सोमवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में विधायक दल की बैठक होने जा रही है। केन्द्रीय पर्यवेक्षक बैठक में शामिल होंगे। केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) स्पेशल विमान से अन्य नेताओं के साथ भोपाल बैठक बैठक में शामिल होने के लिए आएंगे। Mukhabirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार अगली सरकार में 29 मंत्रियों को शपथ दलाई जाएगी। सबसे अहम बात यह है कि लोकसभा चुना को देखते हुए छिंदवाड़ा के अलावा हल लोकसभा सीट से एक मंत्री बनाया जाएगा। माना यह भी जा रहा है कि सागर जिले से दो मंत्री बनाए जा सकते हैं। दिल्ली के सूत्रों के मुताबिक नरेन्द्र सिंह तोमर पर सहमति बना ली गई है,मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी नरेन्द्र सिंह तोमर पर सहमति जता दी है। हांलाकि अभी यह खबर सूत्रों पर आधारित है क्योंकि भाजपा लोकसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए कई प्रकार के विकल्पों पर भी विचार कर रही है। नरेन्द्र सिंह तोमर का नाम आने के कारण कोई भी नेता विरोध करने की स्थिति में दिखाई नहीं पड़ रहा है लेकिन सभी नेताओं के बीच कानाफूसी का दौर जरुर जरी है। प्रदेश कार्यालय में होने वाली बैठक को देखते हुए भारी संख्या में सुरक्षा ब्यवस्था तैनात की गई है। प्रदेश कार्यालय को दुल्हन की तरह सजाया गया है।

कुशल रणनीतिकार वीडी शर्मा का दिल्ली दौरा,केन्द्रीय नेत्रृत्व से की मुलाकात
भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल किया है। इस जीत के बड़े सूत्रधारों में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) भी हैं। लोग लाड़ली बहना (ladli behna) और मोदी मैजिक की बात कर रहे हैं लेकिन संगठन में ठीक तरीके से कसावट ही नहीं होगी तो कितना भी बड़ा नेता हो सिर्फ भाषणा से जनता का दिल नहीं जीत सकता है। साल 2018 में राकेश सिंह (rakesh singh)प्रदेश अध्यक्ष थे और भाजपा जीत के मुहानज तक पहुंचते-पहुंचते रह गई थी। उसके बाद युवा नेता वीडी शर्मा को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई। सिंधिया भाजपा में आए 28 सीटों पर उप चुना हुआ जिसमें भाजपा ने 19 सीट जीत कर प्रदेश में स्थाई सरकार बना ली। इसी लिए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भाजपा में शुभंकर नेता कहा जाता है। प्रदेश अध्यक्ष यहीं नहीं रुके उन्होने लगातार संगठन को मजबूत करने के लिए दिन रात एक कर दिया। एक अभियान समाप्त होता उसके पहले दूसरे अभियान का रुट प्लान तैयार रहता था। वीडी शर्मा के इन्ही कामों को देखते हुए पीएम मोदी ने प्रदेश अध्यक्ष की तारीफ की थी। अब एक बार फिर प्रदेश में भाजपा ने 163 सीटों पर जीत दर्ज कर प्रचंड बहुमत हासिल किया है। चुनाव के दौरान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से कोई पूछता था कि आपको किसती सीटों की उम्मीद है जिसका वो एक ही जवाब देते थे कि इस बार ऐसा बहुमत मिलेगा जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की होगी। आखिर तीन दिसंबर का वो दिन भी आया जब प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की कही हर बात सभु साबित हुई। अब प्रदेश में प्रचंड बहुमत मिलने के बाद प्रदेश अध्यक्ष दिल्ली दौरे पर हैं जहां वो लगातार केन्द्रीय नेत्रृत्व से मुलाकात कर रहे हैं।

प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने की राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और अमित शाह से मुलाकात
मप्र में भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड जीत दर्ज करने के साथ सियासी हलचलें भी तेज हो गई हैं (madhya pradesh elections)। दिल्ली दौरे पर पहुंचे बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (jp nadda) और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (amit shah) से मुलाकार कर प्रचंड जीत पर उन्हे बधाई दी। गौरतलब है कि चुनाव से पहले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने मप्र में 51% वोट शेयर का लक्ष्य रखा था। और उसके लिए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने काफी मेहनत की। नतीजा यह निकला कि 41 फीसदी से विधानसभा चुनाव में भाजपा 48.45% का वोट शेयर हासिल करने में कामयाब रही। राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात के दौरान केंद्रीय मंत्री एवं राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल भी मौजूद रहे जिनका प्रदेश अध्यक्ष ने आभार ब्यक्त किया। गौरतलब है कि साल 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 109 सीट और कांग्रेस ने 114 विधानसभा सीटें जीती थी। आंकड़ों के हिसाब से भाजपा ने सीट कम जीती थी लेकिन कांग्रेस की तुलना में भाजपा का वोट प्रतिशत ज्यादा था। उसके बाद वीडी शर्मा को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया और उन्होने लगातार वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए अलग-अलग अभियान चलाए। नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा की मेहनत रंग लाई और वहां भी भाजपा को बंपर जीत मिली थी। अब विधानसभा में भाजपा ने 48% से ज्यादा वोट हासिल कर लक्ष्य के आसपास पहुंचने का काम किया है। इस लक्ष्य तक पहुंचने में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की रणनीति और मेहनत का असर देखने को मिला है।

नाम आशीष अग्रवाल,काम पार्टी की आवाज को बुलंद करना और टीम का मनोबल बढ़ाना
सियासत की चौसर में पार्टियों का सबसे बड़ा चेहरा उसका मीडिया विभाग होता है (bjp media department)। पार्टी की सूचनाओं का प्रजेंटेशन किस प्रकार होना चाहिए इसका निर्धारण भी मीडिया विभाग के हाथ में ही होता है। बीजेपी ने जिस प्रकार से प्रदेश में प्रचंड जीत दर्ज की है उसमें मीडिया विभाग की भूमिका और उस मीडिया विभाग के कप्तान का बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है। भारतीय जनता पार्टी ने ऐन चुनाव के मौके पर अपने मीडिया प्रभारी का जिम्मा युवा चेहरा आशीष अग्रवाल (ashish agarwal) के कंधों पर डाल दिया था। आशीष अग्रवाल का युवा चेहरा होने के नाते पत्रकारों के बीच यही कानाफूसी हुआ करती थी कि क्या आशीष अग्रवाल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी ठीक तरीके से निभा पाएंगे। इन कश्मकश के बीच आशीष अग्रवाल ने बगैर किसी कंट्रोवर्शी में फंसे किस प्रकार पार्टी की आवाज को बुलंद करना है उसको लेकर लगातार मेहनत की। उनमें उम्र के हिसाब से अनुभव जरुर कम था लेकिन जिस प्रकार से टीम को सजाया और संवारा जाता है और उसका विश्वास किस प्रकार जीता जाता है इस बात को भी आशीष अग्रवाल ने बखूबी बेहतरीन तरीके से दिखाया। युवा और अनुभवी चेहरों के मिश्रण से लैस बीजेपी मीडिया विभाग की टीम का आशीष अग्रवाल ने कभी मनोबल ढीला नहीं पड़ने दिया। जब लोग भाजपा के मीडिया सेंटर (bjp media centre) में भाजपा विरोधी लहर की बात करते थे तो आशीष अग्रवाल बड़े ही विनम्र भाव से कहते थे कि आप देखते रहिए भाजपा की सरकार और संगठन ने जिस प्रकार से काम किया है उसका नतीजा वोट के रुप में सामने आएगा। और तीन दिसंबर का वो दिन भी आया जब प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल की कही हर बात सच साबित हुई और भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश में प्रचंड जीत दर्ज की (madhya pradesh election result)। अब सवाल इस बात का उठता है कि भाजपा की जीत में बीजेपी मीडिया विभाग की क्या भूमिका थी। दरअसल किसी भी पार्टी का मीडिया विभाग चेहरा होता है और पार्टी की सूचनाओं को जनता तक पहुंचाने का काम मीडिया विभाग की टीम का ही होता है। जिस प्रकार एक अखबर में पत्रकारों के साथ संपादक मीटिंग कर रोजाना प्रमुख खबरों पर बात करता है और किस खबर को अखबार में कहां स्थान देना है ठीक उसी प्रकार एक मीडिया प्रभारी की भी जिम्मेदारी होती है कि पार्टी की हर बात को किस बेहतर तरीके से मीडिया के माध्यम से जनता के पास पहुंचाना है। इस मामले में बीजेपी के युवा मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने बेहतर तरीके से साबित किया कि उम्र और अनुभव कभी आड़े नहीं आते बस मन में विश्वास और निष्ठा होना जरुरी है। एक प्रदेश प्रवक्ता से प्रदेश मीडिया प्रभारी का सफर तय करने वाले आशीष अग्रवाल ने कामयाबी की एक ऐसी मिशाल कायम की है जो भविष्य में भाजपा के अन्य मीडिया प्रभारियों के लिए एक नजीर के रुप में देखी जाएगी।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने चुनावी 'रण' में अपनी नीति को किया लागू,मिली प्रचंड जीत
किसी भी जीत में पार्टी का कार्यकर्ता बहुत अहम होता है। और उस कार्यकर्ता के कर्तब्य बोद को याद दिलाना टीम के कप्तान का काम होता है। इस मामले में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (vd sharma) का कोई सानी नहीं है। आम तौर पर प्रदेश अध्यक्ष को लेकर यह भ्रांतियां हैं कि वो कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए हमेशा उपलब्ध रहते हैं लेकिन मिलते ही कहते हैं कि काम करो पार्टी आपके काम के आधार पर खुद आपको उठा लेगी। करीब चार साल से प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभाल रहे वीडी शर्मा को उस वक्त पार्टी की कमान सौंपी गई थी जब भाजपा सत्ता से बाहर हो चुकी थी लेकिन सिंधिया भाजपा में आए और प्रदेश में भाजपा की सरकार फिर स्थापित हो गई इसी लिए वीडी शर्मा जी को पार्टी में शुभंकर अध्यक्ष भी कहा जाता है। साल 2020 में जब 28 सीटों पर उप चुनाव हुए तो पार्टी ने 19 सीटों पर जीत दर्ज कर स्थाई सरकार बना ली। लेकिन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का काम वहीं पर समाप्त नहीं हुआ। उन्होने पार्टी को मजबूत करने के लिए अलग-अलग उपाय अपनाने शुरु किए। बूथ स्तर पर त्रिदेव बनाया,हर बूथ को डिजिटल बनाने का रिकार्ड बनाया,मंडलों को मजबूत किया,लगातार प्रदेश के जिलों और विधानसभाओं में प्रवास किया। कार्यकर्ताओं को लगातार ब्यस्त रखने और उनको पार्टी में अपनी उपयोगिता साबित करने के लिए कई तरह के अभियान चलाए। जिससे हर कार्यकर्ता को यह महसूस हो कि पार्टी को उनकी चिंता है और उनके काम को वाच किया जा रहा है। एक सामान्य परिवार से आए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपने राजनीतिक जीवन की कहानी शुरु की थी। तब किसी ने यह नहीं सोचा था कि यह युवा नेता एक दिन भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनेगा और कुशल संगठक कहलाएगा। लोगों के मुगालते उस वक्त दूर होने शुरु हुए जब वीडी शर्मा ने एक के बाद एक कड़े फेसले लिए,पार्टी में युवाओं को भी लगातार मौका दिया,सभी युवाओं ने जी तोड़ मेहनत की। नतीजे के तौर पर पहले उप चुनाव में जीत दर्ज कर भाजपा की स्थाई सरकार बनाई और अब प्रचंड बहुमत के के प्रदेश में पांचवीं बार भाजपा की सरकार बनाने की पूरी पटकथा लिख डाली। जब प्रदेश के सभी जिलों से सरकार के खिलाफ एंटीइंबेंसी की खबरें आती थी तो बीजेपी अध्यक्ष हमेशा यही कहते थे कि भाजपा ऐसी जीत जर्ज करेगी जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। आखिर रविवार को वो दिन भी आया जब प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की कही हर बात सत्य हुई और इससे यह भी साबित हुआ संघर्ष की भट्ठी में तपे बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा सियासत की हर चाल का जवाब देना बखूबी जानते हैं और बाजी को अपने पक्ष में कैसे करना है वो उन्हे खूब आता है। (madhya pradesh election result)

'सुन लो रे कांग्रेसियो प्रदेश के हर घर में लाड़ली बहनों का ही राज चलता है'
मप्र में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड जीत दर्ज की है (madhya pradesh elections)। प्रदेश का हर राजनीतिक पंडित यही कह रहा था कि इस बार टफ फाइट है,कुछ ने यह माना कि इस बार के चुनाव में कांग्रेस पार्टी 140 से 160 सीटें जीतेगी,लेकिन उन राजनीतिक पंडितों को यह नहीं मालूम था कि हारी बाजी कैसे जीती जाती है उसका सबसे बड़ा उदाहरण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) हैं। जहां से राजनीतिक पंडितों की सोच खत्म होती है वहीं से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सोच शुरु होती है। प्रदेश का हर ब्यक्ति यही कह रहा था कि सीएम के खिलाफ एंटीइंबेंसी है लेकिन उसे प्रो इंकंबेंसी में कैसे तब्दील करना है यह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बखूबी आता है। जिस वक्त लोग पाला बदलने में लगे थे उस वक्त मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी योजनाओं को अमली जामा पहनाने में लगे थे। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले प्रदेश की आधी आवादी यानि महिलाओं को भाजपा की सरकार और खुद से जोड़ने की मुहिम शुरु की (ladli behna)। जिसके तहत उन्होने लाड़ली बहना योजना का आगाज किया। जिसके तहत सीएम शिवराज ने महिलाओं को आर्थिक रुप से सक्षम बनाने पर जोर दिया और उन्हे एक हजार रुपये देने की घोषणा कर दी। योजना की पहली किस्त डालते समय मुख्यमंत्री ने एक और बड़ा दांव खेला और कहा कि इस योजना को वो आगे बढ़ा कर तीन हजार रुपये तक कर देंगे। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने लाड़ली बहना योजना के तहत घरेलू गैस सिलेंडर को 450 रुपये में देने की घोषणा भी कर दी। इस योजना को लांच करने के बाद मुख्यमंत्री ने ताबड़ तोड़ सभाएं लेनी शुरु की और महिलाओं से लगातार संपर्क और संवाद किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस बात का अहसास था कि बहनें अपने भाई को कभी धोखा नहीं दे सकतीं। और भाई बहन के इस अटूट संबंध को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लगातार मजबूत किया। सीएम शिवराज की जितनी तस्वीरें भी जारी होती थी वो लाड़ली बहनों के साथ ही होती थी। आखिरकार मुख्यमंत्री द्वारा बनाई गई रणनीति काम आई और लाड़ली बहनों ने अपने लाड़ले भाई का विश्वास नहीं तोड़ा। यह भी बता दिया कि घर के बाहर किसी का राज चले लेकिन घर के अंदर लाड़ली बहनों का ही राज चलता है।

'कमलनाथ को अपने नेताओं पर नहीं भरोसा' निर्वाचन प्रमाण पत्र मिलते ही कमल नाथ के पास होगा जमा
आपरेशन लोटस (operation lotus) एमपी में फिर ना हो इसलिए कांग्रेस पार्टी ने बड़ी रणनीति तैयार की है। कांग्रेस की इस रणनीति का यह मतलब भी निकाला जा रहा है कि पीसीसी चीफ कमल नाथ (kamal nath) को अपने नेताओं पर भरोसा नहीं है। यह कयास इसलिए लगाए जा रहे हैं क्योंकि कांग्रेस पार्टी की ओर से सभी 230 प्रत्याशियों को फरमान जारी कर निर्देश जारी किया गया है कि मतगणना समाप्त होते ही प्रमाण पत्र को पीसीसी कमलनाथ के पास जमा कराना होगा। मतलब साफ है कि कांग्रेस के जितने संभावित विजेता हैं उनकी जीत होते ही उनको भोपाल आकर अपने प्रमाण पत्र पीसीसी चीफ कमलनाथ के हाथों में सौंपना पड़ेगा। जिससे भाजपा की तरफ से संपर्क करने के अथवा किसी भी लालच अथवा प्रलोभन देने के बाद भी कांग्रेस के विधायक भाजपा की तरफ न जाने पाएं। फिलहाल कांग्रेस के कंट्रोल रुम की तरफ से हर प्रत्याशियों से मिनट टू मिनट संवाद स्थापित किया जा रहा है जिससे उनके मन को समझने में दिक्कत न हो। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार हर जिलों में प्रदेश कांग्रेस की ओर से ऐसे पदाधिकारियों को निगरानी में तैनात किया गया है जिन्हे वहां के स्थानीय नेता अथवा प्रत्याशी ना पहचानते हैं। खैर मतगणना कल है लेकिन कांग्रेस इस बार किसी प्रकार का मौका भाजपा को नहीं देना चाहती है यही कारण है कि कांग्रेस अलग-अलग तरीकों से अपने प्रत्याशियों की निगरानी कर रही है।