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140 सीटों पर कांग्रेस का मंथन खत्म,पित्रपक्ष के बाद जारी होगी सूची
प्रत्याशी चयन में कांग्रेस पार्टी किसी भी प्रकार की चूक नहीं करना चाहती (congress candidates) । पहले भोपाल में बैठक होती हैं जहां पैनल तैयार किया जाता है। भोपाल में पैनल तैयार करके दिल्ली भेजा जाता है जहां केंद्रीय चुनाव समिति उसे पैनल में चुनिंदा नामों पर मुहर लगाती है। शनिवार को भी ऐसा ही देखने को मिला जब कांग्रेस की दिल्ली में चुनाव समिति की बैठक आयोजित की गई (congress meeting) । इस बात में भी कोई शक नहीं है कि कांग्रेस पार्टी उम्मीदवारों के चयन में कोई जल्दबाजी नहीं कर रही है यही वजह है कि 140 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों के नाम की पहली सूची पार्टी अब पितृपक्ष के बाद जारी करेगी। प्रत्याशी चयन को लेकर कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक शनिवार को दिल्ली में आयोजित की गई थी। बैठक की जानकारी देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamal Nath) ने कहा कि बहुत सारे नाम पर चर्चा हुई है अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। लेकिन यह निर्णय हम अगले छह -सात दिन में (पित्रपक्ष के बाद) करेंगे। लगभग 140 सीटों पर चर्चा हुई है,सबके सुझाव सुने हैं। एक बार फिर से बैठक बुलाई जाएगी और फिर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। बताया जा रहा है कि बैठक में लगातार हारने वाली 66 विधानसभा सीटों के अलावा उन सीटों के प्रत्याशियों के नाम पर भी चर्चा हुई है,जहां एक ही दावेदार का नाम है। जिन नामों पर सहमति बन गई है उन पर विचार करके अंतिम रुप दे दिया गया है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस दो से तीन बार में उम्मीदवारों की घोषणा करने की योजना बना रही है।

दिल्ली में प्रत्याशी चयन पर कांग्रेस लगाएगी अंतिम मुहर, पांच सर्वे के आधार पर 150 से ज्यादा सीटों पर होगा मंथन
एआईसीसी की ओर से प्रत्याशी चयन करने कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक आज दिल्ली में होगी (congress meeting)। इसमें लगातार हारने वाली 66 विधानसभा क्षेत्रों के अलावा उन सीटों के प्रत्याशियों के नाम पर अंतिम निर्णय हो सकता हैं, जहां एक ही दावेदार का नाम है। पहली सूची में 150 से अधिक सीटों के प्रत्याशियों के नाम हो सकते हैं। प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) की अध्यक्षता में होगी। इसमें राज्य से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ, नेता प्रतिपक्ष डा.गोविंद सिंह, प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला और ओमकार सिंह मरकाम शामिल होंगे। बैठक में स्क्रीनिंग कमेटी में (congress screening committee) जिन नामों पर सहमति बन चुकी है, उन पर विचार करके अंतिम रूप दिया जाएगा। पार्टी ने प्रत्याशी चयन के लिए पांच सर्वे कराए और विभिन्न माध्यमों से दावेदारों को लेकर जानकारी जुटाई। इसके आधार पर स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, सदस्य अजय कुमार लल्लू और सप्तगिरि उलका ने तीन दौर की बैठकें की। सूत्रों का कहना है कि शनिवार को होने वाली बैठक में पहली सूची में शामिल किए जाने वाले प्रत्याशियों के नाम पर अंतिम निर्णय हो जाएगा। Mukhbirmp.com के मुताबिक कांग्रेस दो से तीन बार में प्रत्याशियों की घोषणा करेगी। पहली सूची 150 से अधिक नामों की आ सकती है। जिन सीटों के लिए एक से अधिक नाम हैं, उनको लेकर पार्टी ने फिर से सर्वे कराया है। इसकी रिपोर्ट को सामने रखकर एक बार और स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक होगी और फिर केंद्रीय चुनाव समिति को नाम भेजे जाएंगे। समिति में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अंबिका सोनी, डा.अमी याज्ञनिक, केसी वेणुगोपाल, अधीर रंजन चौधरी, सलमान खुर्शीद, केजे जार्ज, मधुसूदन मिस्त्री, डा.मोहम्मद जावेद, पीएल पुनिया, प्रीतम सिंह, एन.उत्तम कुमार रेड्डी, टीएस सिंहदेव और ओमकार सिंह मरकाम सदस्य हैं।

चुनाव आचार संहिता लगने से पहले एक दिन में 53 हजार करोड़ से अधिक का लोकार्पण और भूमिपूजन
प्रदेश की शिवराज सरका हमेशा यही कहती रही है कि वो विकास के माडल पर ही जनता से वोट मांगेगी और प्रदेश में पांचवी बार भाजपा की सरकार बनाएगी (Shivraj Government)। इसकी बानगी उस वक्त देखने को मिली जब ठीक चुनाव आचार संहिता (Model of Conduct) से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने एक दिन में 53 हजार करोड़ से ज्यादा का शिरान्याश और भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के गुफा मंदिर को भी बड़ी सौगात दी और गुफा लोक बनाने का ऐलान किया साथ में सीएम शिवराज ने कहा कि 35 करोड़ की लागत से संत निवास का भी निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद माना जा रहा है कि गुफा मंदिर एक प्रसिद्ध स्थल के रुप में निर्मित होगा जहां देश भर के दर्शनार्थी और पर्यटक पहुंच सकेंगे। वहीं सीएम शिवराज की घोषणाओं और लोकार्पण पर कांग्रेस के प्रदेश मीडिया अध्यक्ष केके मिश्रा (KK Mishra) ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि एक दिन में मुख्यमंत्री ने 53 हजार करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया है तो 18 साल तक ये क्या कर रहे थे। केके मिश्रा ने यह भी आरोप लगाया कि लोकार्पण और भूमिपूजन तो ठीक है लेकिन पहले सरकार ये बताए कि क्या सरकार के पास 53 हजार करोड़ रुपये हैं जिससे इतने सारे विकास कार्य किए जा रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि आदर्श आचार संहिता लगने से पहले सरकार एक दिखावा करती है और जिस प्रकार दिया बुझने से पहले खूब फड़फड़ाता है ठीक वही हालत वर्तमान में भाजपा सरकार की है क्योंकि उन्हे भविष्य की जानकारी हो चुकी है कि आगे क्या होने वाला है।

प्रदेश के 19 लाख नव मतदाताओं को साधने में जुटा भाजपा युवा मोर्च और यूथ कांग्रेस
पहली बार मतदान करने वाले युवा मतदाताओं पर भाजपा और कांग्रेस की नजर है (MP Elections)। मतदाता सूची का प्रकाशन होते ही भाजपा और कांग्रेस युवाओं को आकर्षित करते के लिए रणनीति बनाने में जुट गई हैं (First time voters)। मतदाता सूची के अनुसार प्रदेश भर में 19 लाख मतदाता पहली बार वोट डालेंगे। युवा मतदाताओं की इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने युवा मोर्चा को जिम्मेदारी सौंप दी है (BJP Yuva Morcha)। पार्टी हाई कमान का आदेश मिलते ही भाजपा युवा मोर्चा ने तीन अक्टूबर से प्रदेश भर में नव मतदाता सप्ताह अभियान शुरु कर दिया है। इसके तहत युवा मोर्चा के कार्यकर्ता अपने सभी 1070 मंडलों में युवा मतदाताओं से घर-घर जाकर संपर्क करेंगे। दस अक्टूबर को सभी मंडलों में इसका समापन होगा। इसमें युवा मतदाताओं के अलावा जिले के भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में कुछ युवा मतदाताओं को सम्मानित भी किया जाएगा। प्रदेश में नवंबर में विधानसभा चुनाव है ऐसे में युवा मोर्चा और युवा कांग्रेस दोनों ही संगठन युवा मतदाताओं पर डोरे डाल रहे हैं। युवा मोर्चा ने 'खेलेगा मध्यप्रदेश' समेत कई अभियान शुरु किए हैं। इसी प्रकार युवा कांग्रेस ने 'बूथ जोड़ो, यूथ जोड़ो' अभियान शुरु किया है (Youth Congress)। प्रदेश में एक करोड़ 48 लाख युवा मतदाता हैं। दोनों दलों को लगता है कि इन्हे साधने से पूरे परिवार के वोट उनकी झोली में आ जाएंगे।

कम वाटों के अंतर से जीतने वाली विधानसभा सीटों पर कांग्रेस और भाजपा में फंसा पेंच
कांग्रेस पार्टी हर सीट में उम्मीदवार की घोषणा करने से पहले काफी सोच विचार कर रही है (MP Congress)। अब कांग्रेस में कम वोटों से जीत दर्ज करने वाली सीटों पर मंथन चल रहा है और उन्ही सीटों पर पेंच फंसा है। दरअसल कांग्रेस ने 2018 में नौ सीटें एक हजार से 300 से कम मतों के अंतर से जीती थी। इनमें से तीन सीटें भाजपा (MP BJP) ने उपचुनाव में जीत लीं। वहीं भाजपा सात सीटें एक हजार 234 से कम मतों से जीती थी। इन सीटों को दोनों ही दल अपने पाले में करने का जतन कर रहे हैं। कांग्रेस ने जहां कुछ सीटों पर प्रत्याशी बदलने का मन बनाया है तो कुछ को फिर मौका दिया जा रहा है। यही स्थिति भाजपा की है। साल 2018 के चुनाव में अधिक मत प्रतिशत प्राप्त करने के बाद भी भाजपा सरकार बनाने से चूक गई थी। भाजपा को 41.02 प्रतिशत मत मिले थे और 109 प्रत्याशी जीते थे। इसमें सात ऐसे थे,जो एक हजार 234 मत या उससे कम मतों के अंतर से चुनाव जीते थे। इनमें सागर जिले की बीना से महेश राय 460 मतों से जीते थे। 720 मतों के अंतर से जीतने वाले कोलारस के भाजपा विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी अब कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। जावरा से राजेन्द्र पांडे भी 511 मतों के अंतर से जीते थे। यही स्थिति चांदला,नागौद,देवतालाव और इंदौर पांच सीट से भी भाजपा प्रत्याशी कम मतों के अंतर से जीते थे। जबकि कांग्रेस को 40.89 प्रतिशत मिले थे और 114 विधायक चुनाव जीते थे। इनमें नौ एक हजार 284 या उससे कम मतों के अंतर से जीत मिली थी। इनमें दमोह से विधायक राहुल सिंह,मंधाता नारायण पटेल,नेपानगर सुमित्रा देवी कास्डेकर और सुवासरा से विधायक चुने गए हरदीप सिंह डंग ने कांग्रेस छोड़ी और विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर भाजपा की सदस्यता ले ली। राहुल सिंह को छोड़कर बांकी सभी उचुनाव में विजयी रहे। ब्यावरा से 826 मतों से जीते गोवर्धन दांगी के निधन पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के रामचंन्द्र दांगी विजयी रहे। इसके अलावा राजनगर से विक्रम सिंह 732, जबलपुर उत्तर से विनय सक्सेना और राजपुर से बाला बच्चन 932 मतों से जीते थे। प्रदेश में सबसे कम 121 मतों के अंतर से कांग्रेस के प्रवीण पाठक ने ग्वालियर दक्षिण से जीत प्राप्त की थी। भाजपा और कांग्रेस की तरफ से प्रत्याशी चयन को लेकर सर्वे कराया जा चुका है (MP Elections 2023)। कार्यकर्ताओं से फीडबैक भी लिया जा चुका है। भाजपा ने तीन सूचियों में 79 नामों की घोषणा कर दी है इनमें हारी हुई सीटों के प्रत्याशी शामिल हैं। और नए चेहरों पर भी दांव लगाया गया है।

कमलनाथ पर अजय सिंह का 'अजेय' वार,सिद्धार्थ कुशवाहा की नहीं करेंगे मदद
कांग्रेस (MP Congress) विंध्य में काफी कमजोर है और उसकी विंध्य में अगर कोई उम्मीद हैं तो पूर्व मंत्री अजय सिंह (राहुल) भैया (Ajay Singh Rahul)। लेकिन पिछले कुछ महीनों में जिस प्रकार से अजय सिंह की उपेक्षा हुई है उससे वो खुद परिचित हैं यही कारण है कि राहुल सिंह इस वक्त पार्टी के बड़े कार्यक्रमों में शामिल होने के बजाय खुद की विधानसभा में मेहनत करना ज्यादा जरुरी समझते हैं। मामला अजय सिंह (राहुल) भैया और कमलनाथ (Kamal Nath) के बीच का है। दरअसल कमलनाथ ने अजय सिंह को बुलाकर कहा कि आपको सतना से विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा (Siddharth Kushwaha) की मदद करनी है जिसके बाद अजय सिंह ने कमलनाथ से सिद्धार्थ कुशवाहा की मदद करने से साफ इंकार कर दिया। अजय सिंह ने कहा कि जब रैगांव में विधानसभा का उपचुनाव चल रहा था तब उन्होने सिद्धार्थ कुशवाहा से मदद करने के लिए कहा था जबकि उसके रैगांव में करीब दस हजार वोट हैं लेकिन सिद्धार्थ कुशवाहा ने कांग्रेस उम्मीदवार कल्पना वर्मा की किसी भी सूरत में मदद नहीं की। अजय सिंह (राहुल) भैया ने कमलनाथ से यहां तक कहा कि आप चाहो तो मेरा टिकट काट दो अथवा प्रदेश में किसी के भी पक्ष में चुनाव प्रचार करने के लिए कहो मैं करुंगा लेकिन सिद्धार्थ कुशवाहा की मदद नहीं करुंगा। अजय सिंह के इस प्रकार बात करने से पीसीसी चीफ कमलनाथ भी टेंशन में आ गए हैं। सही मायने में कहा जाए तो कांग्रेस के पास विंध्य में कोई मजबूत नेता नहीं है। साल 2013 के बाद विंध्य में कांग्रेस लगातार कमजोर पड़ती चली गई है। अजय सिंह खुद चुनाव नहीं जीत पाए माना यह भी जा रहा है कि विंध्य में अजय सिंह ने सही तरीके से मेहनत नहीं की तो फिर कांग्रेस पार्टी विंध्य (Vindhya)में ठीक तरीके से परफार्मेंश नहीं कर पाएगी।

'कैसे बनेगी भाजपा की सरकार',कितनी सीटें घटेंगी और कितनी बढ़ेंगी,कमलनाथ अपने ही करीबियों के शब्दजाल में फंसे
हर जगह एक ही सवाल किसकी सरकार होगी। सरकार बनेगी तो कैसे बनेगी। हर जगह गुड़ा भाग,राजनीतिक हिसाब लगाए जा रहे हैं सारे सियासी पंडित चार दीवारी में बैठ कर सरकार तय कर रहे हैं कुछ राजनीतिक पंडित टीवी डिवेट में बैठ कर सरकार बना रहे हैं (MP Elections)। कांग्रेस के प्रवक्ता और नेता कहते हैं कि इस बार कांग्रेस 150 से 180 सीटों के आस पास लेकर आएगी। पूर्व सीएम कमलनाथ (Kamal Nath) को भी उनके करीबी सलाहकार 180 सीटों का ही सपना दिखा रहे हैं। जब उनके करीबी उनके पास से निकल जाते हैं तो फिर कमलनाथ मन में सोचते हैं कि इसमें अगर कम करो तो 140 सीट तो आ ही जाएगी। लेकिन उसके उलट भाजपा के गणित की बात करें तो वहां कुछ और ही खिचड़ी पक रही है जिस पर कांग्रेस की शायद नजर नहीं पड़ी अथवा पड़ी भी है तो कोई ध्यान नहीं देना चाहता क्योंकि कांग्रेस में विश्वास कम अति विश्वास ज्यादा दिखाई पड़ रहा है। अब बात भाजपा के गणित की करते हैं। वर्तमान में भाजपा के पास 127 विधायक हैं। भाजपा यह मान कर चल रही है कि 127 में 57 सीट वो हार सकती है मतलब 70 सीट भाजपा 127 वर्तमान की सीटों में बचा पाएगी। इसकी पुष्टि तो कांग्रेस की वो 66 सीटें भी कर रही हैं जहां कांग्रेस लगातार तीन बार से हार रही है और भाजपा की वो सीटें गढ़ बनी हुई हैं। 230 विधानसभा सीटों में 127 विधायक भाजपा के पास हैं। 95 वे विधायक कांग्रेस के पास हैं बांकी अन्य,सपा बसपा के पास हैं। भाजपा ने हारी हुई 103 सीट जिन्हे आकांक्षी विधानसभा सीटों का नाम भी दिया गया था। उन सीटों पर भाजपा ने करीब एक साल से ही मंथन करना शुरु कर दिया था। आकांक्षी सीटों पर भाजपा ने जमकर काम किया,हर दावेदार के हिसाब से पार्टी ने सर्वे भी कराया यही कारण है कि आकांक्षी सीटों पर जहां भाजपा के पास जिताऊ उम्मीदवार नहीं थे वहां पर भाजपा ने नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ,कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) और प्रहलाद पटेल (Prahlad Patel) जैसे नेताओं नेताओं को चुनाव मैदान पर उतार दिया। मतलब साफ है सरकार कैसे बनाना है भाजपा को मालूम है। भाजपा का हिसाब है कि 103 आकांक्षी सीटों में भाजपा 50 सीटों पर जीत दर्ज करेगी। ऐसी स्थिति में 70 और 50 को प्लस करें तो भाजपा को 120 सीट मिल रही है और वो सरकार बना रही है। इससे कुछ ऊपर नीचे होता है तो भाजपा उस पर अलग से विचार कर रही है पार्टी के नेता अलग-अलग आप्शनों पर भी काम कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की बात करें तो कमलनाथ के करीबी उन्हे 180 सीटों का सपना दिखा रहे हैं जिस पर कमलनाथ 140 सीट का आंकड़ा लेकर चल रहे हैं।

एमपी कांग्रेस के 95 वे विधायकों में 76 के पक्ष में सर्वे रिपोर्ट,हारी हुई 66 सीटों पर मंथन जारी
मप्र की 230 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 95 वे विधायक हैं (MP Congress)। इनमें से 76 विधायकों के पक्ष में सर्वे रिपोर्ट आई है। इसके अलावा संगठन पदाधिकारियों का लगातार फीडबैक ले रहा है। इसके साथ ही उन 66 सीटों पर भी विचार मंथन किया जा रहा है जहां पार्टी लगातार तीन चुनाव हार चुकी है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार पहली सूची में विधायकों के साथ लगातार हारने वाली सीटों के प्रत्याशी घोषित किए जा सकते हैं (congress candidate list)। पांच अक्टूबर को धार के मोहनखेड़ा में पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी की जनसभा के बाद प्रत्याशियों की घोषणा हो सकती हैं। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा द्वारा प्रत्याशियों की तीन सूची जारी करने के बाद अब कांग्रेस ने भी पहली सूची घोषित करने की तैयारी कर ली है। शुक्रवार को दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित वरिष्ठ नेताओं ने विधायक और लगातार हारने वाली 66 सीटों के प्रत्याशियों के नाम पर विचार किया। अब 3 अक्टूबर को स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में केंद्रीय चुनाव समिति को भेजने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। 5 अक्टूबर के बाद पार्टी 100 से अधिक प्रत्याशियों की पहली सूची घोषित कर सकती है। कांग्रेस प्रत्याशियों के नाम पर विचार करने के लिए 11,12 और 13 सितंबर को दिल्ली में स्क्रीनिंग कमेटी (congress screening committee)की पहली बैठक हुई थी। सर्वे रिपोर्ट और संगठन के फीडबैक के आधार पर पहले उन सीटों के प्रत्याशियों के नाम पर विचार किया गया,जहां अभी पार्टी के विधायक हैं।

चुनाव से पहले लाड़ली बहना होंगी और सशक्त,मिलेंगे 1500 रुपये
आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लगने से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) आखिरी दांव खेलने की तैयारी में हैं। पता चला है कि सीएम शिवराज आदर्श आचार संहिता लगने से पहले 1500 रुपये देने की घोषणा कर सकते हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पहले लाडली बहनों (Ladli Behna Yojana) को एक हजार रुपये देने की घोषणा की थी उसके बाद उन्होने इस योजना को तीन हजार रुपये तक करने का वादा किया था। उसी के तहत अक्टूबर में अब लाड़ली बहनों को बढ़ी हुई राशि 1250 रुपये मिलेगी। लेकिन अब पता चल रहा है कि सीएम शिवराज इस योजना में वृध्दि कर 1500 रुपये करने की प्लानिंग कर रहे हैं। इस राशि में ढाई सौ रुपए की वृद्धि की घोषणा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में कर सकते हैं। महिला एवं बाल विकास (women and child development) विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश में एक करोड़ 31 लाख लाडली बहनों को अभी तक एक हजार रुपये प्रतिमा मिल रहे थे। अक्टूबर से यह राशि ढाई सौ रुपए बढ़ाकर दी जाएगी यानी 1250 रुपए प्रतिमा मिलेंगे। इसमें ढाई सौ रुपए की वृद्धि की घोषणा अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में की जा सकती है। गौरतलब है कि कांग्रेस ने भी सरकार में आने पर महिलाओं को डेढ़ हजार रुपए प्रतिमा देने के लिए नारी सम्मान योजना (Nari Samman Yojana) लागू करने की गारंटी दी है। वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ने धीरे-धीरे प्रतिमा दी जाने वाली राशि बढ़ाकर तीन हजार रुपये तक ले जाने की घोषणा की है। 4 अक्टूबर को मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद कभी भी विधानसभा चुनाव की घोषणा हो सकती है। इसके साथ ही आचार संहिता प्रभावी हो जाएगी और फिर तब कोई घोषणा नहीं हो सकती है। इसलिए संभावना जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री 1,250 रुपये लाड़ली बहनों के खाते में अंतरित करने के साथ ही राशि में वृद्धि की घोषणा कर सकते हैं।

भाजपा की रणनीति को 'डी-कोड' करने में जुटी कांग्रेस,वरिष्ठ नेताओं के सामने चुनाव लड़ने में घबरा रहे कांग्रेस नेता
भारतीय जनता पार्टी की दूसरी सूची (BJP Second List) ने ना सिर्फ राजनीतिक पंडितों के गणित को फेल कर दिया है बल्कि कांग्रेस के बड़े रणनीतिकारों को भी टेंशन में लाकर खड़ा कर दिया है। भाजपा की दूसरी सूची में तीन केन्द्रीय मंत्रियों सहित कुल सात सांसदों कों चुनाव मैदान में उतारा गया है। जिसमें चार नेता सीएम उम्मीदवार के रुप में भी देखे जाते हैं। सबसे पहले नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) की बात करें तो वो ग्वालियर-चंबल से पार्टी के बड़े चेहरे हैं और चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक भी हैं। महाकौशल से दो बड़े नेता प्रहलाद पटेल (Prahlad Patel) और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह (Rakesh Singh) हैं दोनों नेता पार्टी के कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं। मालवा की बात की जाए तो यहां से भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) को पार्टी ने चुनाव मैदान में उतार कर सभी को चौंका दिया है। विंध्य से बात करें तो सतना से गणेश सिंह (Ganesh Singh) को चुनावी मैदान में उतारा गया है जिन पर कट्टर जातिवादी होने का ठप्पा भी लगा है और भाजपा का यह दांव उल्टा भी पड़ सकता है। सीधी से दो बार की सांसद रीति पाठक (Riti Pathak) को वरिष्ठ नेता केदारनाथ शुक्ला की जगह मौका दिया गया है। केदारनाथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं लेकिन इस बार पार्टी ने उनकी छुट्टी कर दी है माना यह भी जा रहा है कि केदारनाथ ने अगर बगावती तेवर अपना लिया तो रीति पाठक को चुनाव निकालना मुश्किल हो जाएगा। अब बात करते हैं भाजपा के रणनीति की। साल 2018 में भाजपा को ग्वालियर-चंबल से हार मिली थी इसी लिए 15 साल बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई। अब केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को दिमनी से चुनाव मैदान में उतार कर वहां की अलग-अलग सीटों को कवर करने की योजना है। माना जा रहा है कि सभी जगह नरेन्द्र सिंह तोमर को सीएम उम्मीदवार के रुप में प्रजेंट किया जाएगा तो आसपास की सभी सीटों का लाभ भाजपा को मिलेगा। इसी प्रकार महाकौशल से राकेश सिंह और प्रहलाद पटेल को भी सीएम कैंडीडेट के रुप में प्रजेंट किया जाएगा तो आसपास की सभी सीटों में भाजपा को फायदा होगा। ठीक इसी प्रकार मालवा से कैलाश विजयवर्गीय को चुनाव मैदान में उतार कर महाकौशल को साधने की रणनीति तैयार की गई है। केन्द्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते (Faggan Singh Kulaste) को भी चुनाव मैदान में उतार दिया गया है और वो भाजपा की तरफ से बड़ा आदिवासी चेहरा माने जाते हैं। भाजपा की इस रणनीति को अब कांग्रेस 'डी-कोड' करने में जुट गई है। दरअसल ये वो सीटें हैं जहां पर भाजपा को हार मिली थी और इन सीटों पर कांग्रेस के विधायक हैं। इन हारी हुई सीटों को भाजपा ने आकांक्षी सीटों का नाम दिया था इसी लिए भाजपा ने इन हारी हुई सीटों पर पहले उम्मीदवारों का ऐलान किया है। अभी तक भाजपा 79 उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के अनुसार भाजपा के कद्दावर नेताओं के चुनाव मैदान में उतरने से कांग्रेस खेमें में हलचल मच गई है। केन्द्रीय मंत्रियों के खिलाफ लड़ने की कांग्रेस नेता हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। फिलहाल कांग्रेस की दिल्ली में लगातार बैठक जारी है और माना जा रहा है कि भाजपा की गुत्थी को सुलझाने के लिए कांग्रेस के रणनीतिकार लगातार लगे हुए हैं।

भाजपा की दूसरी लिष्ट जारी होने पर कांग्रेस ने खोया आपा,ट्विटर में बीजेपी नेताओं को लिखा रावण और कुंभकरण
भारतीय जनता पार्टी ने 39 नामों की दूसरी सूची जारी कर दी है (BJP Second List)। भाजपा की दूसरी सूची में तीन केन्द्रीय मंत्रियों सहित सात सांसदों को मौका दिया गया है। लेकिन भाजपा की सूची जारी होने पर कांग्रेस ने खुद से आपा खो दिया है। दरअसल भाजपा की दूसरी सूची में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar),फग्गन सिंह कुलस्ते (Faggan Singh Kulaste),प्रहलाद पटेल (Prahlad Patel) और राकेश सिंह (Rakesh Singh)जैसे नेताओं को विधानसभा चुनाव में उतार दिया है (MP Elections)। इन नामों के आते ही कांग्रेस पार्टी ने आपा खो दिया है। एमपी कांग्रेस (MP Congress) ने अपने ऑफिसियल ट्विटर के पोस्ट में लिखा है कि 'हार को सामने देख कर रावण,कुंभकरण,अहिरावण और मेघनाथ को चुनाव मैदान में उतार दिया है' कांग्रेस के ट्वीट से स्पष्ट होता है कि बड़े नेताओं के चुनाव मैदान में उतरने से कांग्रेसी खेमे में बौखलाहट की स्थिति निर्मित हो गई। भाजपा ने जिन उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतार दिया है उनसे पार पाना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा। यही कारण है कि अब कांग्रेस पार्टी की ओर से भाजपा नेताओं की रावण और कुंभकरण से तुलना की जा रही है। कांग्रेस पार्टी को जिस प्रकार से उम्मीद थी उसके ठीक उलट भाजपा की सूची जारी हुई है। जिन नेताओं को भाजपा ने दूसरी सूची में उम्मीदवार बनाया है उन पर खुद की सीट जीतने का दबाव तो है ही बांकी आसपास की अन्य सीटें जितवाने का दबाव भी उन नेताओं पर है। कांग्रेस के कुछ नेता इन सभी नेताओं पर कटाक्ष कर रहे हैं कुछ का कहना है कि इन सभी नेताओं का अंतिम चुनाव है तो वहीं कुछ नेता कह रहे हैं कि अबकी बार लंका दहन होगा।

भाजपा की दूसरी सूची जारी होने पर कांग्रेस में हड़कंप,दिल्ली में हो रही बैठकें
भारतीय जनता पार्टी ने 39 नामों की दूसरी सूची जारी कर दी है (BJP Second list)। दूसरी सूची में जिस प्रकार से भाजपा ने अपने सबसे कद्दावर नेताओं को मौका दिया है उसे कांग्रेसी खेमे में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई है। सूची को देखकर कांग्रेस के अलग-अलग नेता अलग-अलग तरह से बयान भी दे रहे हैं। जिन नेताओं को भाजपा ने विधानसभा में मौका दिया है वह सभी केंद्र में बड़े पदों पर हैं और पीएम मोदी (PM Modi) के करीबी भी माने जाते हैं। तीन मंत्रियों सहित कुल 7 सांसदों को दूसरी सूची में भाजपा ने विधानसभा उम्मीदवार घोषित किया है। यह सूची घोषित होने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा ने अपने सबसे मजबूत और विश्वसनीय सिपेसालारों को चुनावी मैदान में उतार दिया है। भाजपा की सूची जारी होने के बाद कांग्रेस में भी दिल्ली में बैठकों का दौर शुरू हो गया है (congress meeting) । सोमवार से दिल्ली में कांग्रेस की शुरू हुई बैठक अगले एक-दो दिनों तक चलनी है। बताया जा रहा है कि जहां दावेदारों की संख्या अधिक है वहां पैनल बनाकर कांग्रेस पार्टी केंद्रीय नेतृत्व को सौंपेगी। सर्वे और संगठन की ओर से दिए गए नाम के आधार पर सूची तैयार कर जातिगत और स्थानीय समीकरणों को देखते हुए प्रत्याशी का नाम केंद्रीय चुनाव समिति को भेजा जाएगा। प्रत्याशी चयन को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ (Kamal Nath), प्रदेश प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला (Randeep Singh Surjewala) सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने विचार -विमर्श किया है। Mukhbirmp को मिली जानकारी के अनुसार कुछ सीटों पर सर्वे और संगठन की रिपोर्ट में अलग-अलग नाम सामने आए हैं। ऐसी सीटों के लिए पैनल तैयार किया जा रहा है। इस पर स्क्रीनिंग कमेटी में विचार होगा (congress screening committee)। पार्टी का प्रयास है कि प्रत्याशी सहमत के आधार पर चुने जाएं ताकि विरोध जैसी स्थिति ही निर्मित ना हो।