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पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने एक साथ पांच हजार श्रद्धालुओं को महाकाल भेजा
प्रदेश में धार्मिक कम चुनावी यात्राएं इस वक्त जम कर हो रही हैं। इसी कड़ी में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा (PC Sharma) ने करीब 85 बसों को महाकाल (उज्जैन) के लिए रवाना किया है जिसमें करीब पांच हजार यात्री उज्जैन के लिए रवाना हुए हैं। दर्शनार्थियों को रवाना करने के दौरान पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा। कि जो लोग खुद के पैसों से बाबा महाकाल का दर्शन करने के लिए नहीं पहुंच पाचे हैं उनके लिए उन्होने ये निशुल्क ब्यवस्था की है जिससे वो बाबा महाकाल के दर्शन का लाभ प्राप्त करें और अपने घरों में सुख समृद्धि ला सकें। पूर्व मंत्री ने यात्रियों के लिए ना सिर्फ बसों की ब्यवस्था की है बल्कि उन्होने सभी यात्रियों के लिए बस में भोजन की भी ब्यवस्था कराई है जिससे किसी भी यात्री को किसी प्रकार की असुविधा ना होने पाए। इससे पहले दो जत्थे को पीसी शर्मा और यात्रा करवा चुके हैं। वहीं सावन का महीना शुरु होने से पहले पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने श्रीमद भागवत कथा का भी आयोजन किया था जिसमें कथा सुनने वालों के लिए पारिवारिक माहौल तैयार किया गया था। जिससे यह साफ दिखे कि कथा का कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं बल्कि धार्मिक है। पीसी शर्मा ने बसों को हरी झंडी दिखाने के बाद कहा भी है कि वो लोगों के सुख समृद्दि के लिए ये सब कर रहे हैं जब सभी लोग खुश होंगे तो उनका आशीर्वाद और महाकाल की कृपा जरुर मिलेगी।

गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की रणनीति के आगे क्लीन बोल्ड हुए कमलनाथ
गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को एमपी की राजनीति का चाणक्य कहा जाता है और इसकी बानगी उस वक्त को देखने को मिली जब पूर्व विधायक अभय मिश्रा और उनकी पत्नी नीलम मिश्रा को गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा की सदस्यता दिला दी। अभय मिश्रा रीवा के सेमरिया से विधायक रह चुके हैं और साल 2018 में भाजपा का दामन छोड़ कर कांग्रेस से राजेन्द्र शुक्ला के खिलाफ चुनाव लड़े थे। भारतीय जनता पार्टी की ओर से कराए गए सर्वे में सेमरिया विधानसभा सीट से भाजपा को हार का सामना करना पड़ रहा था वहां वर्तमान में केपी त्रिपाठी विधायक हैं और उनसे स्थानीय जनता काफी नाराज है उसी का लाभ उठाते हुए पीसीसी चीफ कमलनाथ ने अभय मिश्रा को सेमरिया से टिकट देने का ऐलान कर दिया था। लेकिन ऐन मौके पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने ऐसी गुगली फेंकी कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह एकसाथ क्लीन बोल्ड हो गए। गृह मत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को भाजपा की ओर से ब्राम्हण चेहरा माना जाता है और विंध्य वो काफी लोकप्रिय हैं। गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा रीवा के प्रभारी रहे हैं इस दौरान वहां की स्थानीय जनता से उनके करीबी संबंध रहे हैं यही कारण है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा को विंध्य की जनता ब्राम्हण चेहरे के रुप में देखती है। भारतीय जनता पार्टी ने भी गृह मंत्री की लोकप्रियता को देखते हुए ब्राम्हण के रुप में उनके चेहरे को इस्तेमाल करने की योजना तैयार कर ली है। पार्टी की ओर से दी गई जिम्मेदारी का गृह मंत्री हमेशा पालन करते हैं और यही कारण है कि सरकार बनाने से लेकर हर फैसले में डॉ. नरोत्तम मिश्रा की अहम भूमिका रहती है। इस चुनाव मे माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से डॉ. नरोत्तम मिश्रा भाजपा के ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं। जहां भी ब्राम्हण चेहरे को उतारने की अथवा डैमेज कंट्रोल करने की जरुरत होती है वहां पर संगठन और सरकार की ओर से डॉ. नरोत्तम मिश्रा को आगे कर दिया जाता है। इसी कड़ी में प्रदेश अध्यक्ष का भी नाम आता है और वो भी विंध्य की तासीर से काफी परिचित हैं क्योंकि उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि विंध्य से ही शुरु हुई थी यही कारण है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की भी विंध्य में स्वीकार्यता है। Mukhbirmp.com को मिली जानकारी के मुताबिक कांग्रेस के कई ऐसे नेता गृह मंत्री के संपर्क में हैं जो आने वाले समय में बीजेपी का दामन थामने वाले हैं। कांग्रेस पार्टी अपने कुनवे को संभालने में लगी रहेगी और भारतीय जनता पार्टी अपनी चुनावी तैयारियों को परवान चढ़ाने में लगी रहेगी। भाजपा के प्लान के मुताबिक कांग्रेस को चुनावी तैयारियों के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलना चाहिए इसी लिए इस प्रकार की रणनीति भारतीय जनता पार्टी ने अपनाई है।

Mukhbir की खबर का असर,भगवा को बलात्कारी कहने वाले कांग्रेस प्रवक्ता पद मुक्त
एक स्थानीय न्यूज चैनल में शब्दों की मर्यादा लांघने वाले कांग्रेस प्रवक्ता को पार्टी ने प्रदेश प्रवक्ता पद से मुक्त कर दिया है। दरअसल टीटी नगर में एक निजी चैनल द्वारा ओपन डिवेट का आयोजन किया गया था। जिसमें भाजपा और कांग्रेस के प्रवक्ताओं सहित स्थानीय नागरिकों को भी आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम शुरु हुआ और 'बहस इतनी गरम' हुई की कांग्रेस प्रवक्ता सिद्धार्त रजावत खुद से आपा खो बैठे और भगवा को बलात्कारी कह डाला। कांग्रेस प्रवक्ता के इतना कहते ही डिवेट में पहुंचे स्थानीय लोगों ने हंगामा कर दिया। स्थिति मारपीट तक पहुंच गई इस बीच बीजेपी के प्रवक्ता बीच बचाव के लिए आए और कांग्रेस के प्रवक्ता को उन्होने बचाया। कुछ देर डिबेट को रोका भी गया और फिर बाद में डिबेट को फिर शुरु किया गया। शब्दों की मर्यादा लांघने वाले प्रवक्ता की खबर को 'Mukhbirmp.com' ने प्रमुखता से प्रसारित की थी जिसके बाद कांग्रेस प्रवक्ता सिद्धार्त रजावत को कांग्रेस संगठन की ओर से पद मुक्त कर दिया गया। सिद्धार्त रजावत ग्वालियर अंचल से आते हैं और राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी शामिल हुए थे। कांग्रेस के आक्रामक प्रवक्ताओं में शुमार सिद्धार्त रजावत आम तौर पर विपक्षी पार्टी के प्रवक्ताओं पर हावी होने के लिए अलग-अलग तरह से रणनीति तैयार करते रहते हैं। वो कई न्यूज चैनलों में डिवेट के दौरान खुद से आपा खो चुके हैं जिसकी शिकायत कई लोगों के माध्यम से पीसीसी चीफ कमलनाथ से की जा चुकी थी लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष उनकी गलतियों को लगातार अनदेखा करते रहे लेकिन इस बार पानी सिर से ऊपर चला गया था। क्योंकि पीसीसी चीफ कमलनाथ छिंदवाड़ा में राम कथा का आयोजन कर रहे हैं और इसी दौरान कांग्रेस प्रवक्ता द्वारा भगवा को बलात्कारी कहना कांग्रेस की सारी तैयारियों पर पानी फेर सकता है यही कारण है कि इस बार कांग्रेस नेतृत्व ने बगैर देरी किए कड़ा ऐक्शन लेकर पार्टी के अन्य प्रवक्ताओं को कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने का काम किया है कि कोई भी शब्दों की मर्यादा ना लांघें नहीं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होना तय है।

पीसीसी चीफ कमलनाथ का फिर जागा आदिवासी प्रेम बताया कांग्रेस का परिवार
आदिवासी दिवस के मौके पर पीसीसी चीफ कमलनाथ ने एक बीडियो जारी कर आदिवासियों को लेकर कई घोषणाएं करते हुए उन्हे कांग्रेस का परिवार बताया है। पीसीसी चीफ ने कांग्रेस सरकार द्वारा आदिवासियों के हित में किए गए कामों को भी गिनाया है। कमलनाथ ने कहा कि पेसा ऐक्ट,वन अधिकार सहित पूजा स्थलों पर आदिवासियों को कांग्रेस ने पूजा का अधिकार गिनाया है। इस दौरान पीसीसी चीफ ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मप्र आदिवासियों के अपराध की राजधानी बन गया है। कमलनाथ ने सीधी पेशाब कांड का जिक्र करते हुए सरकार को आदिवासी विरोधी बताया है। पीसीसी चीफ ने कहा है कि कांग्रेस की सरकार बनने पर असली पेसा ऐक्ट लागू किया जाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस पर फिर अवकाश घोषित कर उत्सव मनाया जाएगा और मध्यप्रदेश को आदिवासियों के लिए देश का सबसे सुरक्षित राज्य बनाया जाएगा। दरअसल, मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी वोट बैंक की खासी अहमियत मानी जाती है. यहां आदिवासी वोट बैंक को सत्ता की चाबी माना जाता है. यानी जिस पार्टी को आदिवासी समुदाय का समर्थन मिलता है, उसे सत्ता मिलना भी तय माना जाता है. इसकी वजह भी है चूंकि, राज्य की 47 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं. 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने जबलपुर संभाग के आठ जिलों में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 13 सीटों में से 11 पर जीत हासिल की थी. जबकि शेष दो सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी।

कांग्रेस प्रवक्ता ने ओपन डिवेट पर भगवा को कहा बलात्कारी,जमकर हुआ हंगामा
एक प्रतिष्ठित स्थानीय न्यूज चैनल ने भोपाल के टीटी नगर में ओपन चुनावी डिवेट का आयोजन मंगलवार शाम को किया था। डिबेट के दौरान कांग्रेस और भाजपा के प्रवक्ताओं सहित स्थानीय जनता को भी आमंत्रित किया गया था। लेकिन इस ओपन डिवेट में कांग्रेस के एक प्रवक्ता खुद से आपा खो बैठे और उन्होने शब्दों की मर्यादा को लांघते हुए भगवा को बलात्कारी कह डाला। फिर क्या था ओपन डिवेट देखने पहुंची स्थानीय जनता ने भी खुद से आपा खो दिया और हंगामा शुरु हो गया। स्थिति मारपीट तक पहुंच गई। लेकिन समय रहते भाजपा के प्रवक्ताओं ने कांग्रेस के प्रवक्ताओं को बचाया और स्थानीय नागरिकों के गुस्से को शांत किया। इस बीच मामले ने इतना तूल पकड़ा कि आनन फानन में मौके पर पुलिस भी पहुंची उसके बाद ही पूरा मामला शांत हो पाया। कांग्रेस के जिन प्रवक्ता ने शब्दों की मर्यादा लांघी वो ग्वालियर अंचल से आते हैं और खुद को सही साबित करने के लिए वो जब भी किसी न्यूज चैनल में डिबेट पर बैठते हैं तो हमेशा खुद से आपा खो देते हैं और आए दिन न्यूज चैनल में वो विवादों के केन्द्रबिंदु बनते रहते हैं।

खुद की उपेक्षाओं से आहत कांग्रेस मीडिया विभाग की पूर्व अध्यक्ष थाम सकती हैं भाजपा का दामन
कांग्रेस मीडिया विभाग की बात निराली है। किसी जमाने में कांग्रेस का पूरा मीडिया विभाग और जनसंपर्क चलाने वाली कांग्रेस नेत्री इन दिनों खुद की उपेक्षाओं से काफी आहत नजर आ रही हैं। खुद की क्षमता साबित करने के लिए उन्होने भोपाल से दिल्ली तक सफर किया लेकिन नतीजा शिफर ही रहा। एक दौर हुआ करता था जब वो कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता हुआ करती थीं उनकी इसी काबिलियत को देखते हुए पीसीसी चीफ कमलनाथ ने उन्हे साल 2018 में कांग्रेस मीडिया विभाग का अध्यक्ष नियुक्त किया था उसके बाद तो उन्होने जो किया वो सारी मीडिया को पता है साथ में कांग्रेस मीडिया विभाग का हर प्रवक्ता उनसे खार खाए बैठा है। कुछ प्रवक्ता बस मुंह नहीं खोल पा रहे हैं कि कहीं वक्त फिर ना बदल जाए। इस वक्त कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा हैं उन पर सीधे कमलनाथ के एक सिपेसालार का हाथ है यही कारण है कि वो मीडिया विभाग में अपनी चला रहे हैं लेकिन पीसीसी चीफ कमलनाथ की ओर से तैनात सिपेसालार से वो हमेशा सजग रहते हैं जब तक वो कांग्रेस कार्यालय में रहते हैं तब तक मिश्रा जी उनके इर्द-गिर्द मौजूद रहने का कोई ना कोई बहाना बनाए रहते हैं। एक और बात देखने को मिली कि कांग्रेस मीडिया विभाग में अब तक सारी नियुक्तियां प्रदेश अध्यक्ष करते थे लेकिन हाल में एक पत्र एआईसीसी मीडिया विभाग से जारी हुआ इसमें यशोमति ठाकुर,अनंत पटेल,अभय दुबे और अनुमा आचार्य को मीडिया समन्वयक की जिम्मेदारी दी गई है। अब फिर से बात करते हैं कांग्रेस के उन नेत्री की जो खुद को उपेक्षित महसूस कर अब दूसरे विकल्प की तलाश में चल रही हैं। पता चला है कि वो केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संपर्क में हैं। करीब महीने भर पहले उन्होने ज्योतिरादित्य सिंधिया से दिल्ली में मुलाकात भी की थी। उस वक्त बात नहीं बन पाई थी क्योंकि वो चाहती हैं कि जब भाजपा में आएं तो उकी एंट्री जोरदार तरीके से होनी चाहिए और उनको पद भी मिलना चाहिए लेकिन भाजपा तो एक कैडर वेस पार्टी है भाजपा में किसी की ज्वाइनिंग होती है तो उसके पहले सभी प्रकार के समीकरण देखे जाते हैं कि किसको ज्वाइन कराने से पार्टी को क्या लाभ होगा। लेकिन पता चला है कि अब बात बनने वाली है और भाजपा के कुछ नेताओं ने मामले में सहमति दे दी है उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के हाथों ज्योतिरादित्य सिंधिया की मौजूदगी में ज्वाइनिंग कराई जाएगी।

कांग्रेस के चलो-चलो के बाद बीजेपी का देखते हैं देखते हैं
कांग्रेस के चलो-चलो के बाद बीजेपी का देखते हैं देखते हैं कुछ शब्द ऐसे होते हैं जो सियासत की शह और मात तय करते हैं। कांग्रेस का हाथ छोड़ बीजेपी का दामन थामने वाले नेता आज भी यही कहते हैं कि कमलनाथ जी से मिलने जाओ तो चलो-चलो कहते थे इसी के फेर में सरकार चली गई। और अब नया शब्द बीजेपी संगठन की ओर से आया है देखते हैं देखते हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा ने इस बात का खुलासा करते हुए कहा कि जब भी कोई सत्ता और संगठन के पास अपनी समस्या लेकर जाता है तो उसे यही जवाब दिया जाता है कि देखते हैं देखते हैं। दरअसल पूर्व मंत्री दीपक जोशी की नाराजगी की वजह भी यही है पिछले एक साल में दीपक जोशी छह बार सत्ता और संगठन से अपनी समस्या को लेकर मुलाकात कर चुके हैं और उन्हे हर बार यही जवाब दिया गया कि देखते हैं देखते हैं। दीपक जोशी को पूर्व राज्यसभा सांसद रघुनंदन शर्मा ने मनाने के काफी प्रयास भी किए लेकिन उन्होने साफ इंकार कर दिया और कहा कि जिस पार्टी में उनके पिता का सम्मान नहीं किया गया उस पार्टी में रहने का कोई मतलब ही नहीं है। यहां से एक और बात स्पष्ट हो गई है कि जब जहाज डूबने वाला होता है तो सबसे पहले चूहे जहाज छोड़ कर भाग जाते हैं। कुछ ऐसी ही कहावत भारतीय जनता पार्टी में देखने को मिल रही है। बीजेपी ने कुछ नेताओं को अपने पाले में लाकर यह समझ लिया कि उसने बड़ा तीर मार लिया है। लेकिन हकीकत उसके ठीक उलट है। इस समय कांग्रेस का पलड़ा ज्यादा भारी दिख रहा है। कांग्रेसी खेमे में बात करें तो इस समय बीजेपी के बड़े-बड़े नेता संपर्क साध रहे हैं जानकारी में यह भी सामने आया है कि कुछ दिन पहले शताब्दी एक्सप्रेस में नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर गोविंद सिंह से कुछ बीजेपी नेताओं ने संपर्क किया है ये वही नेता हैं जो सिंधिया खेमे के साथ बीजेपी में शामिल हुए थे और कमलनाथ सरकार गिराने में अहम भूमिका निभाई थी। अब उन नेताओं को बीजेपी में टिकट मिलता मुश्किल दिख रहा है लिहाजा वो अभी से अपना नया ठिकाना तलाशने की जद्दोजहद में जुट गए हैं। जिस नेता की जैसी पहुंच वो ठीक उसी तरह से कांग्रेस नेताओं से संपर्क कर रहा है। कुछ नेताओं ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ से सीधा संपर्क भी किया है। लेकिन पुराने बागियों को लेकर कांग्रेस के अंदर भी युद्ध चल रहा है। दरअसल साल 2023 में कांग्रेस का दामन छोड़ जिन नेताओं ने बीजेपी का दामन थामा था उन नेताओं में कई ऐसे हैं जो कांग्रेस में घर वापसी करना चाहते हैं कुछ नेताओं को कमलनाथ भी चाहते हैं लेकिन कांग्रेस के कुछ ऐसे पदाधिकारी भी हैं जो उन किसी भी नेताओं के आने पर आपत्ति जाहिर कर रहे हैं। लिहाजा यह साफ है कि आने वाले दिनों में दीपक जोशी की तर्ज पर बीजेपी के कई नेता कांग्रेस का दामन थामने वाले हैं।

कमलनाथ के इस पेड वर्कर की मर्जी के बिना टीवी चैनल की स्क्रीन पर नहीं आ सकते हैं प्रवक्ता !
बीजेपी जैसे मजबूत संगठन के मीडिया विभाग को टक्कर देने के लिए कांग्रेस पार्टी ने पेड वर्कर को रखा है और इस वर्कर के इर्द-गिर्द कांग्रेस का मीडिया विभाग चलता है। पीसीसी चीफ कमलनाथ को लगता है कि उनका ये पेड वर्कर ही पार्टी की नैया पार लगाएगा।