पीसीसी चीफ कमलनाथ का फिर जागा आदिवासी प्रेम बताया कांग्रेस का परिवार
आदिवासी दिवस के मौके पर पीसीसी चीफ कमलनाथ ने एक बीडियो जारी कर आदिवासियों को लेकर कई घोषणाएं करते हुए उन्हे कांग्रेस का परिवार बताया है। पीसीसी चीफ ने कांग्रेस सरकार द्वारा आदिवासियों के हित में किए गए कामों को भी गिनाया है। कमलनाथ ने कहा कि पेसा ऐक्ट,वन अधिकार सहित पूजा स्थलों पर आदिवासियों को कांग्रेस ने पूजा का अधिकार गिनाया है। इस दौरान पीसीसी चीफ ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मप्र आदिवासियों के अपराध की राजधानी बन गया है। कमलनाथ ने सीधी पेशाब कांड का जिक्र करते हुए सरकार को आदिवासी विरोधी बताया है। पीसीसी चीफ ने कहा है कि कांग्रेस की सरकार बनने पर असली पेसा ऐक्ट लागू किया जाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस पर फिर अवकाश घोषित कर उत्सव मनाया जाएगा और मध्यप्रदेश को आदिवासियों के लिए देश का सबसे सुरक्षित राज्य बनाया जाएगा। दरअसल, मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी वोट बैंक की खासी अहमियत मानी जाती है. यहां आदिवासी वोट बैंक को सत्ता की चाबी माना जाता है. यानी जिस पार्टी को आदिवासी समुदाय का समर्थन मिलता है, उसे सत्ता मिलना भी तय माना जाता है. इसकी वजह भी है चूंकि, राज्य की 47 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं. 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने जबलपुर संभाग के आठ जिलों में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 13 सीटों में से 11 पर जीत हासिल की थी. जबकि शेष दो सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी।

📷 Kamal nath
आदिवासी दिवस के मौके पर पीसीसी चीफ कमलनाथ ने एक बीडियो जारी कर आदिवासियों को लेकर कई घोषणाएं करते हुए उन्हे कांग्रेस का परिवार बताया है। पीसीसी चीफ ने कांग्रेस सरकार द्वारा आदिवासियों के हित में किए गए कामों को भी गिनाया है। कमलनाथ ने कहा कि पेसा ऐक्ट,वन अधिकार सहित पूजा स्थलों पर आदिवासियों को कांग्रेस ने पूजा का अधिकार गिनाया है। इस दौरान पीसीसी चीफ ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मप्र आदिवासियों के अपराध की राजधानी बन गया है। कमलनाथ ने सीधी पेशाब कांड का जिक्र करते हुए सरकार को आदिवासी विरोधी बताया है। पीसीसी चीफ ने कहा है कि कांग्रेस की सरकार बनने पर असली पेसा ऐक्ट लागू किया जाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस पर फिर अवकाश घोषित कर उत्सव मनाया जाएगा और मध्यप्रदेश को आदिवासियों के लिए देश का सबसे सुरक्षित राज्य बनाया जाएगा। दरअसल, मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी वोट बैंक की खासी अहमियत मानी जाती है. यहां आदिवासी वोट बैंक को सत्ता की चाबी माना जाता है. यानी जिस पार्टी को आदिवासी समुदाय का समर्थन मिलता है, उसे सत्ता मिलना भी तय माना जाता है. इसकी वजह भी है चूंकि, राज्य की 47 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं. 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने जबलपुर संभाग के आठ जिलों में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 13 सीटों में से 11 पर जीत हासिल की थी. जबकि शेष दो सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी।
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